एक नई सोच, एक नई धारा

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कानूनी शिकंजे में राजपाल यादव: दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर जेल में सरेंडर, 9 करोड़ का है बकाया मामला

नई दिल्ली: अपनी शानदार कॉमेडी से करोड़ों दिलों को जीतने वाले अभिनेता राजपाल यादव के लिए ‘अता पता लापता’ फिल्म का कर्ज अब जी का जंजाल बन गया है। दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेश के पालन में राजपाल यादव ने गुरुवार को जेल अधीक्षक के सामने सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उनके द्वारा दी गई किस्तों और आश्वासनों को नाकाफी बताते हुए राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।

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कोर्ट रूम ड्रामा: 25 लाख का चेक भी नहीं आया काम

​सरेंडर करने के बाद राजपाल यादव व्यक्तिगत रूप से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे 25 लाख रुपये का चेक साथ लाए हैं और बाकी की रकम भी जल्द चुका देंगे। हालांकि, कोर्ट का रुख सख्त रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि:

  • ​किसी भी राहत पर विचार करने से पहले सरेंडर अनिवार्य है।
  • ​बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान नहीं किया गया।
  • ​मौजूदा समय में उन पर लगभग 9 करोड़ रुपये का बकाया है।

“अदालत के साथ लुका-छिपी नहीं”: कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

​जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि राजपाल यादव की सजा को जून 2024 में सिर्फ इसलिए रोका गया था ताकि वे मामला सुलझा सकें। कोर्ट ने अभिनेता की उन दलीलों को भी खारिज कर दिया जिसमें डिमांड ड्राफ्ट में ‘तकनीकी गलती’ का बहाना बनाया गया था। कोर्ट के अनुसार, बार-बार नियम तोड़ने और वरिष्ठ वकीलों के जरिए झूठे वादे करने के बाद अब रियायत की कोई जगह नहीं बची है।

क्या है 16 साल पुराना यह विवाद?

​इस पूरे मामले की जड़ें साल 2010 से जुड़ी हैं:

  1. कर्ज की शुरुआत: राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
  2. चेक बाउंस: फिल्म के फ्लॉप होने के बाद जब कर्ज चुकाने के लिए चेक दिए गए, तो वे बैंक में बाउंस हो गए।
  3. सजा का ऐलान: साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी।
  4. ब्याज का बोझ: समय बीतने और भुगतान न होने के कारण 5 करोड़ की यह राशि अब करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है।

अब आगे क्या?

​कोर्ट ने आदेश दिया है कि राजपाल यादव को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा काटनी होगी। साथ ही, रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा की गई राशि शिकायतकर्ता कंपनी को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

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सीतारामडेरा थाने से सटे मंदिर में चोरी, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात

जमशेदपुर: लौहनगरी में चोरों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे पुलिस थाने के पास भी वारदात करने से नहीं हिचक रहे हैं। ताजा मामला सीतारामडेरा थाना से सटे शिव हनुमान मंदिर का है, जहाँ बीती रात एक चोर ने मंदिर की दीवार फांदकर चोरी की घटना को अंजाम दिया।

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वारदात का तरीका: दान पेटियों को बनाया निशाना

​जानकारी के अनुसार, चोर ने पहले मंदिर की चहारदीवारी फांदी और परिसर के अंदर दाखिल हुआ। इसके बाद उसने बड़ी चालाकी से मंदिर की तीन दान पेटियों के ताले तोड़ दिए और उनमें रखे नकदी (चढ़ावा) लेकर रफूचक्कर हो गया।

सुबह खुला राज

​घटना का पता शुक्रवार की सुबह तब चला जब मंदिर के सेवक मुन्ना पात्रों मंदिर खोलने पहुंचे। उन्होंने देखा कि दान पेटियों के ताले टूटे हुए हैं और सारा कैश गायब है। मुन्ना पात्रों ने बताया:

​”सुबह जब मैं आया तो देखा कि मंदिर में तोड़फोड़ हुई है और तीनों दान पेटियों से पैसे चोरी हो गए हैं। हमने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी।”

सीसीटीवी में कैद हुआ चोर

​हालांकि चोर ने शातिर तरीके से चोरी की, लेकिन वह मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की नजर से नहीं बच सका। फुटेज में चोर की हरकतें और उसका हुलिया कैद हो गया है। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है और चोर की शिनाख्त की कोशिश की जा रही है।

स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी

​थाने से चंद कदमों की दूरी पर स्थित मंदिर में चोरी होना इलाके में चर्चा और गुस्से का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर थाने के बगल में भी मंदिर सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा। उन्होंने पुलिस गश्त और रात के समय सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।

पुलिस का बयान: सीतारामडेरा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दावा किया है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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झारखंड में ‘ग्रीन स्टील’ क्रांति: ₹1.27 लाख करोड़ के निवेश से खुलेगा नए औद्योगिक युग का द्वार

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड अब केवल खनिजों का स्रोत नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक और हरित ऊर्जा (Green Energy) का वैश्विक हब बनने की ओर अग्रसर है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और यूके दौरे से लौटे मुख्यमंत्री के प्रयासों का असर दिखने लगा है। राज्य सरकार को विभिन्न प्रमुख औद्योगिक समूहों से 1 लाख 27 हजार करोड़ रुपये के निवेश के आशय पत्र (LoI) प्राप्त हुए हैं।

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प्रमुख निवेश और औद्योगिक दिग्गज

​इस भारी-भरकम निवेश में देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने शामिल हैं, जो झारखंड की तस्वीर बदलने के लिए तैयार हैं:

  • नवीन जिंदल समूह: सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव, ₹70,000 करोड़
  • टाटा स्टील: ₹11,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित।
  • उड़ीसा एलॉय स्टील: लातेहार में पावर और स्टील सेक्टर के लिए ₹25,000 करोड़ का प्रस्ताव।
  • रुंगटा समूह: सरायकेला-खरसावां में ₹10,000 करोड़ से अधिक का निवेश।

क्षेत्रवार निवेश का विवरण

​राज्य के अलग-अलग जिलों में संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं को वितरित किया गया है:

सेक्टरप्रमुख कंपनीस्थाननिवेश (₹ करोड़)
पावर एवं स्टीलउड़ीसा स्टील अलॉयलातेहार25,000
इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंगरुंगटा माइन्ससरायकेला10,000
फिनिश्ड स्टील एवं पावरअमलगम स्टीलकांड्रा (ई. सिंहभूम)4,980
AI डेटा सेंटरसनशाइन ग्लोबल (सिंगापुर)3,000
उन्नत कोटिंग स्टीलबीएमडब्लू (BMW) इंडस्ट्रीजबोकारो1,070
ऑटोमोटिव सेक्टरजय सस्पेंशनआदित्यपुर

ग्रीन स्टील और अत्याधुनिक तकनीक: जीरो कार्बन का लक्ष्य

​झारखंड अब “क्लीन स्टील” उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके लिए विश्व स्तर की तकनीकों का उपयोग किया जाएगा:

  • EASyMelt तकनीक: कार्बन उत्सर्जन में 50% तक की कमी लाएगी।
  • Hisarna तकनीक: निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क का उपयोग कर उत्सर्जन को 80% तक कम करेगी।
  • सस्टेनेबल टिनप्लेट: 85% वाटर रीसाइक्लिंग और पर्यावरण अनुकूल एसिड का उपयोग होगा।

रोजगार के नए अवसर: 46,000+ परिवारों को लाभ

​इस निवेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का सृजन है। अनुमान के मुताबिक, इन परियोजनाओं से 46,555 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे:

  • ​अकेले उड़ीसा स्टील अलॉय से 20,000 लोगों को काम मिलेगा।
  • ​रुंगटा समूह से 6,200 और अमलगम स्टील से 3,000 युवाओं को प्रत्यक्ष लाभ होगा।
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हसरतों की ‘एक्सप्रेस’: दुमका के इस शख्स ने ईंट-पत्थर के घर को बना दिया रेलगाड़ी

दुमका, झारखंड: कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है, लेकिन झारखंड के दुमका जिले में एक कलाकार ने साबित कर दिया कि ‘अधूरी हसरतें’ भी कला को जन्म दे सकती हैं। जहाँ आज भी रेल की सीटी एक सपना है, वहां लताबनी गांव के सोमराज मरांडी ने अपने पूरे घर को ही एक ‘नीले कोच’ वाली एक्सप्रेस ट्रेन की शक्ल दे दी है।

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खेतों के बीच खड़ी ‘नीली कोच वाली ट्रेन’

​दूर से देखने पर ऐसा भ्रम होता है कि धान के खेतों के बीच कोई एक्सप्रेस ट्रेन सरपट दौड़ने को तैयार खड़ी है। खिड़कियों की बनावट, नीला रंग और बारीकियों से की गई पेंटिंग इसे हूबहू रेल का डिब्बा बनाती है। सोमराज मरांडी, जो पेशे से एक पेंटर हैं, उन्होंने अपनी इस कलाकारी से पूरे इलाके में हलचल मचा दी है।

भावुक कर देने वाली वजह

​सोमराज की इस रचनात्मकता के पीछे एक मार्मिक दर्द छिपा है। उन्होंने बताया:

“हमारे गांव के बुजुर्गों और बच्चों ने कभी असली रेलगाड़ी नहीं देखी। वे रेल देखने और मजदूरी के लिए बंगाल पलायन करते हैं। मैंने सोचा कि अगर रेल यहाँ नहीं आ सकती, तो क्यों न मैं घर को ही रेल बना दूँ ताकि मेरे अपनों को इसका अहसास हो सके।”

पर्यटन स्थल बना सोमराज का आशियाना

​आज सोमराज का घर सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि एक सेल्फी पॉइंट बन चुका है।

  • पड़ोसी राज्यों से आवक: झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और बिहार से भी लोग इस अनोखे ‘रेल-घर’ को देखने और फोटो खिंचवाने आ रहे हैं।
  • परिवार की खुशी: सोमराज की पत्नी अनादि मुर्मू और उनके चाचा इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हैं। उनका कहना है कि इस घर ने उनके गुमनाम गांव को एक नई पहचान दी है।

सियासत और विकास की विसंगति

​जहाँ लोग सोमराज की कला की तारीफ कर रहे हैं, वहीं इस घर ने इलाके में रेल कनेक्टिविटी की कमी को भी उजागर कर दिया है। स्थानीय विधायक आलोक सोरेन ने कलाकार की सराहना तो की, लेकिन साथ ही केंद्र सरकार पर रेल पटरियां न बिछा पाने का तंज भी कसा। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया है कि सांसद नलिन सोरेन के प्रयासों से जल्द ही यह क्षेत्र रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा।

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रांची के नामचीन व्यवसायी अनुराग सरावगी ने छठी मंजिल से कूदकर की आत्महत्या

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के अपर बाजार और कारोबारी जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी और JD हाई स्ट्रीट मॉल के मालिक अनुराग सरावगी ने शुक्रवार को अपने अपार्टमेंट की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके और व्यापारिक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।

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घटना का विवरण:

  • स्थान: रेडियम रोड स्थित ब्लेयर अपार्टमेंट
  • समय: शुक्रवार, दोपहर (लगभग)।
  • विवरण: अनुराग सरावगी अपने फ्लैट की बालकनी से अचानक नीचे कूद गए। ऊंचाई से गिरने के कारण गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

मौके पर अफरा-तफरी का माहौल

​अपार्टमेंट के सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि एक ज़ोरदार आवाज़ सुनकर जब वे मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने अनुराग सरावगी को लहूलुहान स्थिति में पाया। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

जांच में जुटी पुलिस

​अभी तक आत्महत्या के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस व्यवसायी के परिजनों और करीबियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि किन परिस्थितियों में उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।

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जमशेदपुर: करणडीह–परसुडीह मुख्य सड़क पर ट्रैफिक सिग्नल शुरू, लाखों लोगों को जाम से मिलेगी राहत

जमशेदपुर: शहर की व्यस्ततम सड़कों में शुमार करणडीह–परसुडीह मुख्य मार्ग पर चलने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। पिछले लंबे समय से सुबह-शाम लगने वाले भीषण जाम की समस्या को देखते हुए, आज यहाँ नए ट्रैफिक सिग्नल को विधिवत चालू कर दिया गया।

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प्रमुख बिंदु:

  • लाभार्थी: इस सड़क से रोजाना गुजरने वाले 2 लाख से अधिक लोग।
  • पहल: पोटका विधायक संजीव सरदार के विशेष प्रयासों से सिग्नल की स्थापना।
  • उद्देश्य: यातायात को सुचारु बनाना और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना।

विधायक की पहल और स्थानीय लोगों की उम्मीद

​इलाके में बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव के कारण यहाँ ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या बन गया था। विशेषकर पीक आवर्स में लोगों को घंटों तक फंसे रहना पड़ता था। विधायक संजीव सरदार ने बताया कि स्थानीय लोगों की निरंतर मांग और सुगम आवागमन को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया है।

​”इलाके में लगातार बढ़ रही जाम की समस्या को देखते हुए यह पहल की गई है, ताकि आम जनता को रोज-रोज की परेशानी से राहत मिल सके और सड़क पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सके।”

संजीव सरदार, विधायक (पोटका)

जनता की प्रतिक्रिया

​सिग्नल चालू होने से स्थानीय निवासियों और राहगीरों में खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि अब न केवल समय की बचत होगी, बल्कि व्यवस्थित ट्रैफिक के कारण क्षेत्र में दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होगा।

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स्वर्गीय शास्त्री जी को डीसीए के पूर्व छात्रों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि: यादों में जीवित रहेंगे गुरुमाता के जीवनसाथी

जमशेदपुर : शहर की प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और डीबीएमएस कैरियर एकेडमी की फाउंडर मेंबर के. उमा जी के दिवंगत पति स्वर्गीय शास्त्री जी को आज डीसीए के पूर्व छात्रों ने उनके कदमा स्थित निवास पर जाकर अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

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विदित हो कि के. उमा जी का शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान रहा है। वे डीबीएमएस कैरियर एकेडमी की पूर्व प्रिंसिपल के रूप में वर्षों तक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर चुकी हैं और वर्तमान में वह संस्थान की फाउंडर मेंबर के रूप में सक्रिय हैं। उनके पति शास्त्री जी के निधन से शिक्षा जगत और उनके चाहने वालों में शोक की लहर है।

पूर्व छात्रों ने साझा कीं स्मृतियां

श्रद्धांजलि देने पहुंचे पूर्व छात्रों ने स्वर्गीय शास्त्री जी के सरल स्वभाव और उनके द्वारा दिए गए नैतिक मूल्यों को याद किया। उनके अनुसार, शास्त्री जी न केवल के. उमा जी के संबल थे, बल्कि पूर्व छात्रों के लिए भी एक अभिभावक के समान थे।

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इस शोकपूर्ण घड़ी में के. उमा जी और उनके परिवार को ढांढस बंधाने वालों में मुख्य रूप से निम्नलिखित गणमान्य और पूर्व छात्र शामिल थे : जगतार नागी, सतवीर सोमू, परविंदर भाटिया, रॉकी, पिनाकी ठक्कर, संजय एवं अन्य।

सभी ने मौन धारण कर पुण्यात्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।

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शिक्षकों का दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन: जंतर-मंतर पर उमड़ा देश भर के गुरुजनों का हुजूम, सरकार से आर-पार की लड़ाई का एलान

नई दिल्ली | 05 फरवरी 2026

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देश के भविष्य निर्माता कहे जाने वाले शिक्षकों ने आज अपनी मांगों को लेकर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन किया। ‘ऑल इंडिया जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स ऑर्गनाइजेशन’ के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में ऑल इंडिया आइडियल टीचर्स एसोसिएशन (AITA) ने अग्रणी भूमिका निभाते हुए पूरे जोश के साथ अपनी आवाज बुलंद की।

कन्याकुमारी से कश्मीर तक, एक सुर में गूंजी मांगें

​कड़ाके की ठंड और लंबी यात्राओं की परवाह किए बिना देश के कोने-कोने से शिक्षक इस आंदोलन में शामिल होने पहुंचे। तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और ओडिशा समेत दर्जनों राज्यों के हजारों शिक्षकों ने एक मंच पर आकर सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाई।

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नेताओं और सांसदों का मिला भारी समर्थन

​इस विरोध प्रदर्शन की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्यसभा और लोकसभा के कई माननीय सांसदों, विधायकों (MLA) और विधान परिषद सदस्यों (MLC) ने जंतर-मंतर पहुंचकर शिक्षकों की मांगों का समर्थन किया। राजनीतिक दिग्गजों ने शिक्षकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का आश्वासन दिया।

“हम राष्ट्र के निर्माता हैं, उपेक्षा बंद करे सरकार”

​AITA के केंद्रीय सचिव एवं इश्यू एड्रेसिंग सेल के कार्यकारी अध्यक्ष, जनाब खालिद इक़बाल साहब ने पूरी टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा:

​”शिक्षक केवल टीम बिल्डिंग का कार्य नहीं करते, बल्कि राष्ट्र का निर्माण करते हैं। आने वाली पीढ़ी का भविष्य हमारे हाथों में है। हमारी मांगें जायज हैं और सरकार को हमारी उपेक्षा बंद कर जल्द से जल्द समाधान निकालना होगा।”

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सफल आयोजन के पीछे की कड़ी मेहनत

​AITA के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब अब्दुल रहीम साहब, मुख्तार कोतवाल साहब और सैयद अहमद साहब के नेतृत्व में पूरी टीम पिछले एक महीने से इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जुटी हुई थी। उत्तर प्रदेश से सजादुल्लाह, रिज़वान अहमद, मोहम्मद सलीम, नोबल हसन, नज़ीर जैसे साथियों ने आंदोलन को धार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

AITA का आभार और संकल्प

​कार्यक्रम के अंत में खालिद इक़बाल साहब ने दूर-दराज से आए सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि AITA का ‘इश्यू एड्रेसिंग सेल’ तब तक चैन से नहीं बैठेगा, जब तक शिक्षकों को उनके अधिकार नहीं मिल जाते। इतनी ठंड में शिक्षकों की यह उपस्थिति सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अब और इंतजार संभव नहीं है।

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विशेष श्रद्धांजलि: छायावाद के ‘अंतिम आलोक’ आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री, जिन्होंने साहित्य को दी शास्त्रीय गरिमा

साहित्य डेस्क | 05 फरवरी 2026

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हिंदी साहित्य के स्वर्ण युग ‘छायावाद’ की जब भी चर्चा होती है, प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी के नाम स्वतः ही जेहन में आ जाते हैं। लेकिन इस महान परंपरा को उसके अवसान काल में संबल देने वाले और उसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाले ‘पांचवें स्तंभ’ आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री ही थे। आज उनकी जयंती के अवसर पर साहित्य जगत उन्हें एक ऐसे मनीषी के रूप में याद कर रहा है, जिन्होंने अपनी लेखनी से छायावाद को शाश्वत बना दिया।

निराला के मानस पुत्र और ‘निराला निकेतन’ के अधिष्ठाता

​5 फरवरी 1916 को बिहार के गया में जन्मे आचार्य शास्त्री संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे। उनकी मेधा ऐसी थी कि किशोरावस्था में ही उन्होंने ‘काकली’ जैसे महान संस्कृत काव्य की रचना कर दी थी। महाप्राण निराला ने उनकी प्रतिभा को तराशा और उन्हें हिंदी साहित्य की ओर प्रेरित किया। मुजफ्फरपुर स्थित उनका आवास ‘निराला निकेतन’ दशकों तक साहित्यकारों के लिए तीर्थ के समान रहा, जहाँ शब्दों की साधना और वैचारिक विमर्श का अनवरत प्रवाह चला।

छायावाद का परिष्कार और ‘राधा’ का नया स्वरूप

​शास्त्री जी ने छायावाद को केवल अपनाया नहीं, बल्कि उसका परिष्कार किया। उनकी रचनाओं—’रूप-अरूप’, ‘शिप्रा’ और ‘अवंतिका’ में प्रकृति का संगीत गूंजता है।

  • दार्शनिक राधा: उनके महाकाव्य ‘राधा’ ने सदियों पुरानी पारंपरिक धारणा को बदलकर राधा को एक आधुनिक, दार्शनिक और वैश्विक चेतना के रूप में स्थापित किया।
  • गीत तत्व: जहाँ छायावाद कहीं-कहीं दुरूह होने लगा था, शास्त्री जी ने उसे ‘गीत तत्व’ और ‘नवगीत’ से जोड़कर जन-सुलभ बनाया।

पदक से बड़ा स्वाभिमान

​आचार्य शास्त्री न केवल अपनी लेखनी, बल्कि अपने स्वाभिमानी व्यक्तित्व के लिए भी जाने जाते थे। निराला की निर्भीकता उनके स्वभाव में थी। यही कारण था कि उन्होंने दो बार (1994 और 2010) पद्मश्री सम्मान को विनम्रतापूर्वक ठुकरा दिया। उनका मानना था कि एक साधक के लिए उसकी रचनाओं का प्रेम ही सबसे बड़ा पुरस्कार है।

एक युग का अंत, एक प्रेरणा का उदय

​आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री का अवसान केवल एक कवि का जाना नहीं था, बल्कि छायावाद की अंतिम जीवंत कड़ी का टूटना था। आज के दौर में, जब कविता अपनी गहराई खो रही है, शास्त्री जी का साहित्य हमें पुनः भाषा की शुद्धता, भावों की तरलता और स्वाभिमान के साथ जीने की प्रेरणा देता है।

“साहित्य बाज़ारवाद का मोहताज नहीं होता, वह तो आत्मा की पुकार है।” – यह दर्शन शास्त्री जी ने न केवल लिखा, बल्कि जीकर भी दिखाया।

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बाल विवाह एक सामाजिक अपराध, जागरूकता से ही मिटेगी यह कुरीति: सरयू राय

जमशेदपुर | 05 फरवरी 2026

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जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक श्री सरयू राय ने बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। गुरुवार को उन्होंने बिष्टुपुर स्थित अपने आवास सह कार्यालय से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को कम उम्र में विवाह के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेगा।

आदर्श सेवा संस्थान के प्रयासों की सराहना

​इस अवसर पर विधायक सरयू राय ने आदर्श सेवा संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा घाटशिला और आसपास के क्षेत्रों में चलाया जा रहा यह अभियान सराहनीय है। विधायक ने जोर देकर कहा कि कानून अपनी जगह है, लेकिन जब तक समाज के हर व्यक्ति को बाल विवाह की बुराइयों के बारे में पता नहीं होगा, तब तक इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है।

जागरूकता रथ की मुख्य विशेषताएं

  • गंतव्य: यह मुक्ति रथ मुख्य रूप से घाटशिला और ग्रामीण इलाकों में भ्रमण करेगा।
  • साहित्य वितरण: रथ के साथ बाल विवाह विरोधी जागरूकता साहित्य (पम्फलेट्स और बुकलेट्स) भी उपलब्ध हैं, जिन्हें आम जनता के बीच बांटा जाएगा।
  • शिक्षण: रथ के माध्यम से लोगों को बाल विवाह से संबंधित कानूनी प्रावधानों और स्वास्थ्य संबंधी खतरों की जानकारी दी जाएगी।

“बाल विवाह एक गंभीर अपराध”

​सरयू राय ने जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह न केवल बच्चों के बचपन को छीनता है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और भविष्य के साथ भी खिलवाड़ करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस अभियान से जन जागरूकता फैलेगी और लोग अपनी बेटियों को पढ़ाने तथा उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।

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