एक नई सोच, एक नई धारा

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करणडीह ट्रैफिक सिग्नल: उद्घाटन के ‘साइड इफेक्ट्स’, 24 घंटे में ही ‘लाल’ हुआ सिस्टम, टाइमर हुआ गुल

जमशेदपुर: जमशेदपुर के व्यस्त करणडीह चौक को जाम से मुक्ति दिलाने का सपना पहले ही दिन तकनीकी खराबी की भेंट चढ़ गया। गुरुवार को बड़े तामझाम के साथ जिस ट्रैफिक सिग्नल का उद्घाटन हुआ था, शुक्रवार को वह महज एक ‘शो-पीस’ बनकर रह गया। हालत यह है कि सिग्नल की हरी बत्ती ने जलने से इनकार कर दिया है, जिससे वाहन चालक संशय में हैं कि आगे बढ़ें या रुके रहें।

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उद्घाटन के अगले ही दिन जवाब दे गया सिस्टम

​पोटका विधायक संजीव सरदार ने गुरुवार को विधिवत पूजा-अर्चना कर इस सिग्नल का शुभारंभ किया था। उम्मीद थी कि अब चौक पर ट्रैफिक सुगम होगा, लेकिन शुक्रवार सुबह होते-होते सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई।

सिग्नल की अजीबोगरीब स्थिति

​मौके पर मौजूद लोगों और वाहन चालकों ने बताया कि:

  • हरा सिग्नल गायब: लाल और पीली बत्तियां तो जैसे-तैसे जल रही हैं, लेकिन “ग्रीन सिग्नल” पूरी तरह बंद पड़ा है।
  • टाइमर खराब: समय बताने वाली सूचक प्लेट (Timer Plate) भी ठप हो गई है, जिससे यह पता नहीं चल पा रहा है कि रुकना कितनी देर है।
  • भ्रम का माहौल: हरी बत्ती न जलने के कारण चौक पर अफरा-तफरी का माहौल है। कुछ लोग रुक रहे हैं तो कुछ पुलिस की अनुपस्थिति में नियमों को ताक पर रखकर निकल रहे हैं।

लापरवाही पर उठ रहे सवाल

​करोड़ों के राजस्व वाले इस क्षेत्र में उद्घाटन के अगले ही दिन सिस्टम का खराब होना गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सिस्टम पूरी तरह टेस्ट (Testing) नहीं किया गया था, तो आनन-फानन में उद्घाटन की क्या जरूरत थी? अब यह सिग्नल लोगों की सुविधा के बजाय परेशानी और दुर्घटना का सबब बन रहा है।

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पूर्वी सिंहभूम: 20,000 राशन कार्ड होंगे रद्द! 6 महीने से अनाज नहीं लेने वालों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के खाद्य आपूर्ति विभाग ने खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में सुधार लाने के लिए ‘सफाई अभियान’ शुरू कर दिया है। विभाग ने जिले के ऐसे 20,000 कार्डधारियों को चिह्नित किया है, जिन्होंने पिछले 6 महीने से एक साल तक अपने हिस्से का मुफ्त राशन नहीं लिया है। अब सत्यापन (Verification) के बाद इन कार्डों को रद्द कर दिया जाएगा।

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शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा ‘लापरवाह’ कार्डधारी

​विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, राशन का उठाव न करने वाले अधिकांश कार्डधारी जमशेदपुर शहर (Jamshedpur Urban) के हैं।

  • शहरी स्थिति: जनवरी 2026 में शहरी क्षेत्रों (JNAC, मानगो, जुगसलाई) में लगभग 15% कार्डधारियों ने राशन नहीं लिया।
  • ग्रामीण स्थिति: ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा करीब 8% रहा।
  • कुल आंकड़ा: जनवरी में जिले के कुल 4.20 लाख कार्डधारियों में से केवल 90.89% ने ही अनाज प्राप्त किया। लगभग 41,000 परिवार राशन लेने नहीं पहुंचे।

क्यों काटे जा रहे हैं नाम?

​जिला आपूर्ति पदाधिकारी जुल्फिकार अंसारी ने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग सूची में दर्ज हैं जो राशन लेने नहीं आते। इससे वितरण प्रणाली के आंकड़े प्रभावित होते हैं और जरूरतमंदों तक समय पर लाभ पहुँचाने में बाधा आती है। इन 20,000 नामों के हटने से सूची अपडेट होगी और वास्तविक लाभार्थियों को बेहतर सेवा मिल सकेगी।

रैंकिंग में सुधार: 24वें से 22वें स्थान पर पहुँचा जिला

​प्रशासनिक कड़ाई और वितरण में तेजी का असर अब दिखने लगा है।

  • ​दिसंबर 2025 तक पूर्वी सिंहभूम जिला राशन वितरण के मामले में झारखंड में सबसे निचले पायदान यानी 24वें स्थान पर था।
  • ​जनवरी 2026 के सुधारों के बाद जिला दो पायदान ऊपर चढ़कर 22वें स्थान पर पहुंच गया है।

आगे क्या होगा?

  1. सत्यापन: पीडीएस (PDS) डीलरों से मंगवाई गई रिपोर्ट के आधार पर डोर-टू-डोर या डिजिटल सत्यापन होगा।
  2. नाम विलोपन: जो कार्डधारी वास्तव में अपात्र पाए जाएंगे या निष्क्रिय रहेंगे, उनका नाम डेटाबेस से हटा दिया जाएगा।
  3. वेटिंग लिस्ट: पुराने नाम हटने से नए पात्र आवेदकों के लिए जगह बनेगी।
Tata Steel UISL
जमशेदपुर में ‘नल से जल’ का बड़ा अभियान: टाटा स्टील UISL देगी 12,000 नए कनेक्शन, एक लाख का लक्ष्य

जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर के बस्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। टाटा स्टील और टाटा स्टील यूआइएसएल (पूर्व में जुस्को) शहर में नागरिक सुविधाओं के विस्तार के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने की योजना को गति दे रही है। कंपनी ने वर्तमान में 12,000 नए कनेक्शन देने के लिए पाइपलाइन का नेटवर्क तैयार कर लिया है।

Tata Steel UISL

इन बस्तियों के निवासियों को मिलेगा लाभ

​शहर के पूर्वी और पश्चिमी दोनों विधानसभा क्षेत्रों की प्रमुख बस्तियों में इस सेवा का विस्तार किया जाएगा। मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:

  • पूर्वी जमशेदपुर: सिदगोड़ा (10 नंबर बस्ती), लाल भट्ठा, बाबूडीह, जोजोबेड़ा कॉलोनी, महानंद बस्ती, गोलमुरी नामदा बस्ती और रिफ्यूजी कॉलोनी।
  • पश्चिमी जमशेदपुर: सोनारी (रुप नगर, निर्मल नगर, कपाली बस्ती) और कदमा (ग्रीन पार्क एरिया)।

81 हजार से 1 लाख तक का सफर

​टाटा स्टील यूआइएसएल का लक्ष्य वित्तीय वर्ष के अंत तक कंपनी क्वार्टरों के अलावा निजी कनेक्शनों की संख्या एक लाख तक पहुँचाने का है। वर्तमान में यह संख्या 81 हजार है।

ऑटोमेशन और मोहरदा फेज-2 से मिलेगी मजबूती

​पानी की सप्लाई को समयबद्ध और स्मार्ट बनाने के लिए कंपनी तकनीकी बदलाव कर रही है:

  1. वाटर टावर ऑटोमेशन: सेंट्रल और सोनारी वाटर टावर का ऑटोमेशन पूरा हो चुका है, जिससे सप्लाई की निरंतरता बनी रहेगी।
  2. मोहरदा जलापूर्ति: यहाँ पहले ही 12,500 कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अब ‘मोहरदा फेज-2’ के तहत 1500 अतिरिक्त कनेक्शन देने की तैयारी है।
  3. 91% कवरेज: भुइयांडीह वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की मदद से शहर के 91 फीसदी हिस्से को पेयजल कवरेज के दायरे में लाने का लक्ष्य है।

सीवरेज सिस्टम में भी सुधार

​पीने के पानी के साथ-साथ शहर के सीवरेज सिस्टम को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। जमशेदपुर में अब सीवरेज कवरेज 91% तक पहुँच गया है। इसके लिए:

  • ​6 नए सीवेज पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं।
  • ​एक पैकेज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और सेप्टिक टैंक सफाई सेवाओं का विस्तार किया गया है।

कंपनी की अपील: आवेदन करें और उठाएं लाभ

​अधिकारियों के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बावजूद लोग कनेक्शन लेने में कम रुचि दिखा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जिन बस्तियों में नेटवर्क बिछ चुका है, वहां के लोग सिर्फ आवेदन देकर तुरंत कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्य बिंदु: > * वर्तमान नेटवर्क: 12,000 कनेक्शन के लिए तैयार।

  • आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक निवासी टाटा स्टील यूआइएसएल के कार्यालय या पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
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सावधान जमशेदपुर! साइबर शिकारियों ने बिछाया डिजिटल जाल, ‘डिजिटल अरेस्ट’ और निवेश के नाम पर ₹1.18 करोड़ की ठगी

जमशेदपुर: 90 के दशक का वह मशहूर विज्ञापन— “शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, लोभ से उसमें फंसना नहीं”—आज के डिजिटल युग में जमशेदपुर के लिए सबसे बड़ी चेतावनी बन गया है। शहर में पिछले दो महीनों के भीतर साइबर ठगों ने अलग-अलग इलाकों में जाल बिछाकर मासूम नागरिकों से करीब 1.18 करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई लूट ली है।

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केस 1: मानगो में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ, गंवाए ₹56 लाख

​मानगो की हिल बिहार कॉलोनी के प्रमोद शर्मा को ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए अपना शिकार बनाया।

  • साजिश: ठगों ने खुद को IPS विजय खन्ना बताया और पुलिस की वर्दी में वीडियो कॉल किया।
  • धमकी: उन्हें डराया गया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग मुंबई में आपराधिक गतिविधियों के लिए हुआ है।
  • नुकसान: डर के मारे पीड़ित ने तीन किस्तों में कुल 56 लाख रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।

केस 2: बुजुर्ग की पेंशन पर डकैती, ₹54.95 लाख साफ

​मानगो की ही माधवबाग कॉलोनी में एक बुजुर्ग के जीवन भर की जमापूंजी पर ठगों ने हाथ साफ कर दिया।

  • तरीका: बैंक अधिकारी बनकर ‘पेंशन क्रेडिट कार्ड’ बनाने का झांसा दिया गया।
  • चूक: बुजुर्ग ने झांसे में आकर अपना OTP साझा कर दिया।
  • अंजाम: 25 से 28 जनवरी के बीच ठगों ने बुजुर्ग के खाते से 54.95 लाख रुपये निकाल लिए।

केस 3: निवेश और शेयर ब्रोकिंग का फर्जी लालच

​गोविंदपुर और कदमा के इलाकों में ‘मुनाफे’ का लालच देकर लाखों की ठगी की गई:

  • गोविंदपुर (₹4.49 लाख): आकाश कुमार को ‘आरबीके शेयर ब्रोकिंग’ के नाम पर कम समय में ज्यादा मुनाफे का सपना दिखाया गया और उनके खाते से पैसे उड़ा लिए गए।
  • कदमा (₹2.87 लाख): यहाँ टेलीग्राम ऐप के जरिए ‘इन्वेस्टमेंट टास्क’ का झांसा दिया गया। ठगों द्वारा भेजे गए एक संदिग्ध लिंक पर क्लिक करते ही युवक का खाता खाली हो गया।

साइबर ठगों के ‘हथियार’—जिनसे आपको बचना है:

ठगी का प्रकारपहचानबचाव
डिजिटल अरेस्टपुलिस/CBI बनकर वीडियो कॉल करना।पुलिस कभी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती।
पेंशन/बैंक फ्रॉडबैंक अधिकारी बनकर OTP मांगना।अपना OTP, PIN या पासवर्ड किसी को न बताएं।
इन्वेस्टमेंट लिंकटेलीग्राम/व्हाट्सएप पर भारी मुनाफे का लिंक।अनजान

क्या करें अगर ठगी हो जाए?

​यदि आप या आपका कोई परिचित साइबर ठगी का शिकार होता है, तो बिना देर किए:

  1. 1930 (नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर) पर तुरंत कॉल करें।
  2. www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
  3. ​नजदीकी साइबर थाना (बिष्टुपुर, जमशेदपुर) को सूचित करें।
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झारखंड: खुद ‘बीमार’ हुई 108 एम्बुलेंस, बीच रास्ते में डीजल खत्म होने से अटकी डायरिया मरीज की जान

जमशेदपुर/पटमदा: झारखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा ‘108 एम्बुलेंस’ की बदहाली थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला गुरुवार को पटमदा क्षेत्र में सामने आया, जहाँ एक गंभीर मरीज को अस्पताल ले जा रही एम्बुलेंस का बीच सड़क पर डीजल खत्म हो गया। इस लापरवाही के कारण डायरिया पीड़ित महिला करीब एक घंटे तक सड़क पर तड़पती रही।

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धूसरा गांव के पास थमे एम्बुलेंस के पहिए

​आगुईडांगरा गांव की 45 वर्षीय सावित्री सिंह को बुधवार से लगातार उल्टी और दस्त (डायरिया) की शिकायत थी। हालत गंभीर होने पर परिजनों ने 108 पर कॉल किया। बोड़ाम के लावजोड़ा पीएचसी से एम्बुलेंस (JH01CJ-8238) मरीज को लेकर एमजीएम अस्पताल के लिए निकली, लेकिन महज 8 किमी दूर धूसरा गांव के पास गाड़ी का इंजन अचानक बंद हो गया।

खराब रखरखाव और तकनीकी खामियां

​एम्बुलेंस चालक कामदेव महतो और टेक्नीशियन गणेश कौशल महतो ने जो खुलासे किए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

  • डीजल की कमी: टंकी खाली होने के कारण गाड़ी बंद हुई और इंजन ने ‘एयर’ ले लिया, जिससे वाहन पूरी तरह ठप हो गया।
  • कबाड़ में तब्दील वाहन: यह एम्बुलेंस पहले जुगसलाई में थी और वहां भी अक्सर खराब रहती थी। 10-15 दिन पहले ही इसे लावजोड़ा भेजा गया है।
  • बैटरी और मरम्मत का अभाव: चालक के अनुसार, वाहन की बैटरी खराब है और नियमित मरम्मत न होने से यह कभी भी बंद हो जाती है।

दूसरी एम्बुलेंस के भरोसे तय हुआ सफर

​मरीज की जान जोखिम में देख आनन-फानन में एमजीएम अस्पताल से दूसरी एम्बुलेंस मंगवाई गई। लगभग एक घंटे की देरी के बाद सावित्री सिंह को एमजीएम अस्पताल पहुंचाया जा सका। परिजनों में इस देरी को लेकर गहरा आक्रोश है।

पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक

​यह पहली बार नहीं है जब बोड़ाम-पटमदा क्षेत्र में 108 सेवा फेल हुई है:

  • 25 दिसंबर की घटना: डांगरडीह गांव में समय पर एम्बुलेंस न पहुंचने के कारण सांस की बीमारी से जूझ रही एक महिला की मौत हो गई थी।
  • ​उसी घटना के बाद लावजोड़ा पीएचसी को यह एम्बुलेंस आवंटित की गई थी, जो अब खुद तकनीकी खराबी और ईंधन की कमी का शिकार है।

उठते सवाल: जिम्मेदार कौन?

​सरकार और विभाग के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा गरीब मरीज भुगत रहे हैं। एम्बुलेंस में तेल न होना और खराब बैटरी के साथ उसे फील्ड में भेजना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।

परिजनों का पक्ष: “हमने समय पर कॉल किया, एम्बुलेंस भी आई, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने हमारी मरीज की जान खतरे में डाल दी। अगर कुछ अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता?” — रविन्द्र सिंह (रिश्तेदार)

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‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’: आज देशभर में ओला, उबर और रैपिडो की हड़ताल, ठप रहेंगी कैब और बाइक-टैक्सी सेवाएं

नई दिल्ली/मुंबई: आज यानी शनिवार, 7 फरवरी को देशभर में ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं (Ola, Uber, Rapido) का पहिया थम गया है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और कई राष्ट्रीय मजदूर संगठनों ने मिलकर ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ का आह्वान किया है। इस हड़ताल के कारण यात्रियों को कार, ऑटो और बाइक-टैक्सी की बुकिंग में भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

क्यों बंद हैं ऐप-आधारित टैक्सियां?

​ड्राइवर संगठनों का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां उनका “अंतहीन शोषण” कर रही हैं। हड़ताल के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. किराया नीति में मनमानी: ड्राइवरों का कहना है कि सरकार की ओर से कोई न्यूनतम किराया (Minimum Fare) तय नहीं है। कंपनियां अपनी मर्जी से कमीशन काटती हैं, जिससे ड्राइवरों की आय अनिश्चित हो गई है।
  2. पैनिक बटन का वित्तीय बोझ: महाराष्ट्र कामगार सभा के अनुसार, ड्राइवरों को 12,000 रुपये खर्च कर नए पैनिक बटन डिवाइस लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पहले लगाए गए कई डिवाइस को सरकार ने ‘अनधिकृत’ घोषित कर दिया है, जिसका खामियाजा ड्राइवरों को भुगतना पड़ रहा है।
  3. ओपन परमिट पॉलिसी: ऑटो रिक्शा की बढ़ती संख्या और अवैध बाइक टैक्सियों के कारण पुराने ड्राइवरों की कमाई में भारी गिरावट आई है।
  4. बीमा का अभाव: यूनियन का आरोप है कि बाइक टैक्सी हादसों के पीड़ितों को उचित बीमा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

नितिन गडकरी को लिखा पत्र

​यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ‘इनकम इनसिक्योरिटी’ (आय की असुरक्षा) और खराब वर्किंग कंडीशन से जूझ रहे हैं। उनका दावा है कि कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, जबकि ड्राइवर गरीबी की ओर धकेले जा रहे हैं।

यात्रियों के लिए क्या है स्थिति?

  • मोबाइल ऐप बंद: अधिकांश ड्राइवरों ने अपने पार्टनर ऐप लॉग-ऑफ कर दिए हैं।
  • ऑफलाइन विकल्प: यात्रियों को स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड पर जाने के लिए काली-पीली टैक्सी या स्थानीय ऑटो पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जहाँ मनमाना किराया वसूले जाने की भी खबरें आ रही हैं।
  • सोशल मीडिया पर गूंज: #AllIndiaBreakdown के साथ ड्राइवर अपनी समस्याओं को साझा कर रहे हैं।

निष्कर्ष

​यह हड़ताल भारत में तेज़ी से बढ़ते ‘गिग इकोनॉमी’ (Gig Economy) के भीतर गहरे असंतोष को दर्शाती है। यदि सरकार और कंपनियों के बीच जल्द कोई सहमति नहीं बनी, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।

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जमशेदपुर में अनुभव सिन्हा: ‘अस्सी’ की दस्तक और झारखंड के नायकों को स्क्रीन पर उतारने की तैयारी

जमशेदपुर: मशहूर बॉलीवुड निर्देशक अनुभव सिन्हा शुक्रवार को ‘लौहनगरी’ जमशेदपुर पहुंचे। गोलमुरी में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने न केवल शहर की सुव्यवस्थित सुंदरता की तारीफ की, बल्कि झारखंड की ऐतिहासिक विरासत और आदिवासी संस्कृति को फिल्म जगत के लिए एक अनमोल खजाना बताया।

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बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू की वीरता से हुए प्रभावित

​सिन्हा ने स्वीकार किया कि इस यात्रा ने उन्हें झारखंड के महान क्रांतिकारियों के बारे में जानने का नया दृष्टिकोण दिया है।

  • अनसुनी गाथाएं: उन्होंने पहली बार सिद्धू-कान्हू के संघर्षों के बारे में सुना और अब वे उनके जीवन पर विस्तार से अध्ययन करने के इच्छुक हैं।
  • भगवान बिरसा मुंडा: बिरसा मुंडा के उलगुलान (आंदोलन) को गहराई से समझने की इच्छा जताते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के इन नायकों की कहानियां राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमा के जरिए सामने आनी चाहिए।

झारखंडी स्वाद: हड़िया और धुसका का अनुभव

​फिल्मी चकाचौंध से दूर अनुभव सिन्हा ने यहाँ की जमीनी जीवनशैली को करीब से महसूस किया:

  • आदिवासी खान-पान: उन्होंने स्थानीय पेय ‘हड़िया’ और लोकप्रिय व्यंजन ‘धुसका’ का आनंद लिया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि हड़िया का स्वाद शुरुआत में अलग लगा, लेकिन यही यहाँ की मौलिक पहचान है।
  • भारत दर्शन: उन्होंने कहा कि मुंबई की जिंदगी से निकलकर वे अब तक 40 शहरों का दौरा कर चुके हैं ताकि ‘असली भारत’ को समझ सकें।

फिल्म ‘अस्सी’: 20 फरवरी को कोर्टरूम में होगा फैसला

​उनकी आगामी फिल्म ‘अस्सी’ को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। सिन्हा ने फिल्म के बारे में कुछ अहम बातें साझा कीं:

  1. रिलीज डेट: यह फिल्म 20 फरवरी को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।
  2. सजीव चित्रण: यह एक कोर्टरूम ड्रामा है। इसके लिए सिन्हा ने वास्तविक अदालती कार्यवाहियों का गहन अध्ययन किया है ताकि फिल्म बनावटी न लगे।
  3. दर्शक ही जज: उन्होंने कहा, “कोर्टरूम फिल्मों में दर्शक खुद को जज की कुर्सी पर महसूस करता है, वह वकीलों की दलीलें सुनकर अपना फैसला खुद देता है।”

झारखंड में शूटिंग की संभावना

​अनुभव सिन्हा ने जमशेदपुर की लोकेशंस और यहाँ की संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि यदि उन्हें उपयुक्त कहानी मिली, तो वे भविष्य में झारखंड में शूटिंग करना जरूर पसंद करेंगे। उनके अनुसार, छोटे शहरों के दर्शक भी गंभीर विषयों वाली फिल्मों को उतनी ही ईमानदारी से देखते हैं।

निष्कर्ष: अनुभव सिन्हा की इस यात्रा ने यह संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में बॉलीवुड के बड़े पर्दे पर झारखंड की जनजातीय वीरता और यहाँ की मिट्टी की सोंधी खुशबू देखने को मिल सकती है।

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कैरव किडनैपिंग केस: मास्टरमाइंड ‘तेजा’ का खौफनाक इतिहास, जेल में बना था अंतरराज्यीय सिंडिकेट का प्लान

जमशेदपुर/लुधियाना: युवा उद्यमी कैरव के अपहरण ने एक ऐसे अपराधी के चेहरे से नकाब हटा दिया है, जो पंजाब से लेकर झारखंड तक अपनी दहशत फैलाने की फिराक में था। इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार तेजिंदरपाल सिंह उर्फ तेजा (निवासी कोटमाना, जगराव) कोई छोटा अपराधी नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल किडनैपिंग सिंडिकेट का सरगना है, जिसका नेटवर्क जेल की सलाखों के पीछे से संचालित होता था।

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पंजाब का मोस्ट वांटेड ‘प्रोफेशनल किडनैपर’

​तेजिंदरपाल का आपराधिक रिकॉर्ड पंजाब पुलिस की फाइलों में बेहद काला है। उस पर फिरौती के लिए अपहरण, हत्या के प्रयास और लूट के आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।

  • डॉक्टर के बेटे का अपहरण: लुधियाना के एक नामचीन डॉक्टर के बेटे का अपहरण कर करोड़ों की फिरौती मांगना उसका अब तक का सबसे चर्चित जुर्म रहा है।
  • उद्योगपतियों पर निशाना: वह जगराव और मोगा के कई बड़े औद्योगिक घरानों के सदस्यों के अपहरण की साजिश रचने का मुख्य आरोपी रहा है।

लुधियाना जेल: जहाँ बुना गया अपराध का नया ताना-बाना

​पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि तेजिंदरपाल ने लुधियाना सेंट्रल जेल को ही अपना ‘कमांड सेंटर’ बना लिया था।

  • नेटवर्क बिल्डिंग: जेल के भीतर उसने दूसरे राज्यों के अपराधियों और तकनीकी विशेषज्ञों से हाथ मिलाया।
  • जमशेदपुर कनेक्शन: जेल से छूटने के बाद उसने झारखंड का रुख किया और कैरव के अपहरण के लिए स्थानीय अपराधियों का एक ‘स्लीपर सेल’ तैयार किया।

हाई-टेक अपराधी: तकनीक और हथियारों का घातक मेल

​तेजा केवल ताकत के दम पर नहीं, बल्कि दिमाग और तकनीक के सहारे वार करता है। पुलिस को चकमा देने में वह माहिर है:

  • डिजिटल फुटप्रिंट: पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए वह वर्चुअल नंबर और एन्क्रिप्टेड एप्स का इस्तेमाल करता है।
  • विदेशी हथियार: उसके पास से पहले भी प्रतिबंधित विदेशी हथियार बरामद हो चुके हैं, जो उसके अंतरराष्ट्रीय आर्म्स स्मगलिंग लिंक की ओर इशारा करते हैं।
  • रेकी की कला: कैरव कांड में भी यह बात सामने आई है कि तेजा का गिरोह महीनों तक ‘रेकी’ (जासूसी) करता था और शिकार की पूरी पारिवारिक और वित्तीय जानकारी जुटाने के बाद ही हमला बोलता था।

एक नज़र में तेजिंदरपाल उर्फ तेजा का प्रोफाइल

विवरणजानकारी
निवासकोटमाना, जगराव (लुधियाना)
मुख्य अपराधफिरौती के लिए अपहरण, डकैती (2018-19), आर्म्स एक्ट
विशेषतावर्चुअल नंबरों का उपयोग और महीनों लंबी रेकी
ताजा कांडजमशेदपुर का चर्चित कैरव अपहरण कांड

मौजूदा स्थिति: झारखंड पुलिस अब पंजाब पुलिस के साथ तालमेल बिठाकर तेजा के पूरे स्लीपर सेल को ध्वस्त करने में जुटी है। आशंका है कि अगर उसे जल्द काबू नहीं किया गया, तो वह राज्य में कुछ और बड़े व्यापारिक घरानों को निशाना बना सकता था।

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मानगो निकाय चुनाव: करोड़पति ‘महारानियों’ के सामने 16 हजार वाली चुनौती, शिक्षा और संपत्ति का दिलचस्प मुकाबला

जमशेदपुर/मानगो: मानगो की ‘सरकार’ चुनने की घड़ी नजदीक आ रही है। 23 फरवरी को होने वाले मतदान के लिए प्रत्याशियों ने अपनी संपत्ति और शिक्षा का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है। हलफनामों के अनुसार, चुनावी मैदान में एक ओर जहाँ 3.65 करोड़ की मालकिन हैं, वहीं दूसरी ओर अशिक्षित लेकिन सेवा के जज्बे से भरी महिलाएं भी ताल ठोक रही हैं।

संपत्ति का गणित: सुधा सबसे अमीर, सुशीला की पूंजी सबसे कम

​मानगो मेयर पद की दौड़ में धनबल का पलड़ा सुधा गुप्ता की ओर झुकता दिख रहा है, जबकि सुशीला सिंह सादगी की मिसाल बनी हुई हैं।

  • करोड़पति क्लब: सुधा गुप्ता 3.65 करोड़ की संपत्ति के साथ सूची में शीर्ष पर हैं। उनके बाद संध्या सिंह (2.30 करोड़) और डॉ. वनीता सहाय (1.24 करोड़) का स्थान है।
  • सादगी का चेहरा: सुशीला सिंह ने अपनी कुल पूंजी महज 16,000 रुपये घोषित की है। पार्वती देवी (20 हजार) और इंदिरा मुंडा (70 हजार) भी इसी कतार में हैं, जो दिखाती हैं कि लोकतंत्र में हौसला धन से बड़ा होता है।

शिक्षा का स्तर: डिग्री बनाम जमीनी अनुभव

​उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता में भी भारी अंतर देखने को मिल रहा है:

  1. उच्च शिक्षित: सायस्ता परवीन (MA, B.Ed) और सोनामुनी सोरेन (LLB) जैसी प्रत्याशी अपनी प्रशासनिक और कानूनी समझ के साथ जनता के बीच हैं।
  2. साक्षर और अनुभवी: मैदान में वैसी महिलाएं भी हैं जिन्होंने स्कूल का मुंह नहीं देखा (जैसे इंदिरा मुंडी और सुशीला सिंह), लेकिन वे अपने सामाजिक जुड़ाव और जमीनी संघर्ष को अपनी ताकत मान रही हैं।

मानगो मेयर प्रत्याशी: एक नज़र में (तुलनात्मक चार्ट)

प्रत्याशी का नामशैक्षणिक योग्यताघोषित संपत्ति (₹ में)
सुधा गुप्तामैट्रिक3.65 करोड़
संध्या सिंहइंटर2.30 करोड़
वनीता सहायएमबीए1.24 करोड़
सायस्ता परवीनएमए, बीएड46.46 लाख
कुमकुम श्रीवास्तवस्नातकोत्तर38.48 लाख
सोनामुनी सोरेनएलएलबी6.73 लाख
सुशीला सिंहअनपढ़16 हजार

मतदाताओं के सामने बड़ी चुनौती

​मानगो की जनता अब इस कशमकश में है कि वे डिग्री (सरस्वती) को वोट दें, आर्थिक मजबूती (लक्ष्मी) को चुनें या सादगी और संघर्ष को। चुनावी गलियारों में बहस छिड़ गई है कि क्या भारी-भरकम संपत्ति विकास की गारंटी बनेगी या उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाएगी।

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चाईबासा ब्लड बैंक कांड: मासूमों को HIV+ खून चढ़ाने के मामले में FIR दर्ज, हाईकोर्ट के आदेश पर बड़ी कार्रवाई

चाईबासा: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक रूह कंपा देने वाली लापरवाही के खिलाफ आखिरकार कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद, चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक टेक्नीशियन मनोज कुमार और अन्य के खिलाफ सदर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।

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क्या है पूरा मामला?

​अक्टूबर 2025 में यह मामला तब उजागर हुआ जब चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया (Thalassemia) से पीड़ित पांच मासूम बच्चों को इलाज के दौरान HIV पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया। नियमित रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान हुई इस भारी चूक ने इन बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल दिया।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख और आदेश

​मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम कुमार की अदालत ने बुधवार को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था:

  • ​अदालत ने पीड़ित परिवारों को सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने और थाना प्रभारी को इसे तुरंत स्वीकार करने का आदेश दिया।
  • ​न्यायालय ने इस घटना को स्वास्थ्य प्रणाली की चरम विफलता माना।

सरकारी आश्वासन और धरातल की हकीकत

​घटना के प्रकाश में आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने चाईबासा का दौरा कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और परिवारों को आजीवन सहयोग का वादा किया था।

  • मुआवजा: अब तक परिवारों को केवल 2 लाख रुपये की सहायता राशि मिली है।
  • असंतोष: पीड़ित परिवारों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इतने महीनों बाद भी दोषी कर्मचारियों पर कोई ठोस कानूनी कदम नहीं उठाया गया था, जिसके कारण उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

जनसंघर्ष मोर्चा की भूमिका

​झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष माधव चंद्र कुंकल ने इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई।

  1. धरना प्रदर्शन: पीड़ित परिवारों ने पहले विधानसभा के समक्ष धरना दिया।
  2. याचिका: न्याय न मिलने पर मोर्चा द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
  3. मांग: कुंकल ने कहा, “यह स्वास्थ्य प्रणाली में व्याप्त लापरवाही का उदाहरण है। हमारी मांग है कि दोषियों को कठोरतम दंड मिले ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।”

आगे क्या?

​FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस इस मामले में आरोपी टेक्नीशियन और अन्य संबंधित अधिकारियों से पूछताछ करेगी। जांच का मुख्य केंद्र यह होगा कि ब्लड बैंक में रक्त की स्क्रीनिंग (Screening) के प्रोटोकॉल का उल्लंघन कैसे हुआ।

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