जमशेदपुर : जेम्को बस्ती विकास समिति के संरक्षक के.एन झा का निधन आज हो गया। उनके देहांत की खबर से बस्ती भर में शोक की लहर है। श्री झा काफी दिनों से बीमार चल रहे थे और 67 वर्ष की उम्र में उनके घर पर ही उनका निधन हो गया। उनका आज स्वर्ण रेखा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। बस्ती विकास समिति के सचिव करनदीप सिंह ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है।
जमशेदपुर : आज जिला परिषद की सामान्य बैठक में जिला परिषद सदस्यों का आक्रोश फूट पड़ा। 21 सदस्यों का हस्ताक्षर सहित ज्ञापन उप विकास आयुक्त सह जिला परिषद सचिव सौंप कर विरोध दर्ज किया। सदस्यों ने 15 दिन का समय देकर अपने विभिन्न मांगो को गंभीरतापूर्वक समझते हुए पूरा करने का बात रखा। विभिन्न मांगो में जिला परिषद सदस्यों के अनुशंसित योजनाओं पर संवेदकों की मनमानी, वर्षों से मानदेय और TA/DA का भुगतान, जिला परिषद के रजिस्टर्ड संवेदकों और मिलने वाले काम को सदस्यों के बीच सार्वजनिक करना, बैठक को समय पर रखना सहित 10 सूत्री मांग को रखा गया। 15 दिन में समाधान नहीं होने पर सामूहिक रूप से जिला परिषद कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
उप विकास आयुक्त नागेंद्र पासवान ने गंभीरतापूर्वक बात को समझते हुए ससमय समाधान का भरोसा दिया। जैसा कि विदित है कि पिछले सप्ताह जिला पार्षद डॉ कविता परमार ने शिकायत दर्ज कराई थी और आश्चर्य की बात है कि 14 महीने से जो संवेदक मामले को आनाकानी कर रहा था उसने 14 घंटा के अंदर काम में सुधार किया।
जमशेदपुर : टाउन हॉल, सिदगोड़ा में बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के सशक्तिकरण को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह- सचिव सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज जिला सहकारी संघ लि. कार्यालय के तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला में अपर उपायुक्त श्री भगीरथ प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए । कार्यशाला में विषय प्रवेश कराते हुए जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह- सचिव सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज जिला सहकारी संघ लिमिटेड श्रीमती आशा टोप्पो ने सिडकोफेड की गतिविधियों, संभावनाएं एवं गठन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि अपर उपायुक्त ने सहकारिता के माध्यम से सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के लक्ष्य को प्राप्ति करने हेतु प्रेरित किया गया, साथ ही कृषि एवं वनोपज के माध्यम से सशक्तिकरण हेतु सिडकोफेड के कार्याकलापों की सराहना की। सहकारी समिति के सदस्यों को संघ के माध्यम से अपने उपज का अधिकतम मूल्य प्राप्त करने और सहकारिता के माध्यम से बिचौलियों के शोषण से मुक्त होने से संबंधित जानकारियों को विस्तार से साझा किया गया। इस दौरान जिले के सभी एमपीसीएस, एफपीओ एवं समितियों के सदस्यों को कृषि एवं वनोपज जिला सहकारी संघ द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों से परिचित कराया गया। इसके अलावे जिले के किसानों तथा सहकारिता के समग्र विकास के लिए हमेशा तत्पर रहने का संकल्प भी लिया गया। इस कार्यशाला में लैम्पस के कम्प्युटरीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर और झारसेवा, पीएमकेएसके, बैंक गारंटी, केसीसी जैसी विषयों पर। इस कार्याशाला में सभी सम्बद्ध लैम्पसों के सर्टिफिकेट का वितरण किया गया।
कार्यशाला में जिला प्रबंधक-नाबार्ड, जिला कृषि पदाधिकारी, महाप्रबंधक उद्योग केन्द्र, ईफको, झारखंड राज्य सहकारी बैंक, एलडीएम के प्रतिनिधि, सीएससी मैनेजर, आईटी साल्यूशन के प्रतिनिधि, जिला प्रबंधक एचडीएफसी ईआरजीओ, तकनीकी पदाधिकारी व अन्य संबंधित उपस्थित रहे।
जमशेदपुर : समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने जन शिकायत निवारण दिवस में आए नागरिकों की समस्याओं को सुना। इस दौरान पेंशन, कचड़ा निस्तारण, झारखंड मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना का लाभ, भूमि विवाद, पेयजल समस्या, सरना स्थल को अतिक्रमण मुक्त कराने, पारिवारिक विवाद, दुकान आवंटन, चौकीदार के रिक्त पदों पर बहाली, चेंगजोड़ा के विस्थापितों का पुनर्वास, घर खाली कराने सहित अन्य मूलभूत समस्याओं से संबंधित आवेदन एवं ज्ञापन प्राप्त हुए। उपायुक्त ने सभी शिकायतों/ सुझावों/मांगो को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्राप्त आवेदन अग्रसारित करते हुए समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए । उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और पारदर्शी समाधान प्राथमिकता हो।
उपायुक्त ने सम्बंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पेंशन, आवास एवं राशन कार्ड एवं अन्य बुनियादी समस्याओं से संबंधित मामलों का निष्पादन एक निश्चित समयसीमा में किया जाए । सड़क मरम्मतीकरण और अन्य आधारभूत संरचना संबंधी कार्यों पर कार्ययोजना बनाते हुए प्रस्ताव बढ़ाएं। भूमि विवाद संबंधी प्रकरणों को प्राथमिकता के साथ विधिसम्मत ढंग से सुलझाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि आवेदक को कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़े और समाधान की प्रक्रिया सरल व पारदर्शी हो। उपायुक्त ने यह भी दोहराया कि नागरिकों से प्राप्त प्रत्येक आवेदन का ट्रैकिंग की जाए ताकि निगरानी एवं अनुश्रवण प्रभावी ढंग से हो सके।
जमशेदपुर : 8वां राष्ट्रीय पोषण माह के तहत समाहरणालय परिसर से उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने पोषण जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया । इस अवसर पर अपर उपायुक्त श्री भगीरथ प्रसाद, डीटीओ श्री धनंजय, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती संध्या रानी, सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिका उपस्थित रहे। जागरूकता रथ धालभूम एवं घाटशिला अनुमंडल के शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के टोला/ मोहल्ला, हाट – बाजार में भ्रमणशील रहकर लोगों को कुपोषण एवं सही पोषण के प्रति जागरूक करेगा । उपायुक्त ने प्रतिभागियों को पोषण शपथ दिलाई।
उपायुक्त ने कहा कि कुपोषण जैसी समस्या को दूर करने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा । इसके लिए लोगों के बीच जागरूकता लाने की आवश्यकता है । कुपोषण के कुचक्र को तोड़ना है । हम सभी को चाहिये कि अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहते हुए दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें । इसके लिए जरूरी है सही आहार, सही आदतें और अपने आस पास स्वच्छता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। 17 सितंबर से 16 अक्टूबर तक चलने वाले पोषण अभियान को एक जन भागीदारी – जन आंदोलन की तरह चलाने के उद्देश्य से सभी का सहयोग अपेक्षित है ताकि जिले को शत प्रतिशत कुपोषण मुक्त बनाया जा सके ।
पोषण रथ के माध्यम से विभिन्न प्रखंडों, पंचायतों में विशेष रूप से टीकाकरण, खान – पान, पौष्टिक आहार, उचित पोषण, स्वच्छता एवं साफ – सफाई, डायरिया व अनीमिया की रोकथाम प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर विशेष जानकारी दी जाएगी। साथ ही, गर्भवती महिलाएं, धातृ माताओं तथा नवजात शिशु, किशोरियों एवं बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य बनाये रखने की जानकारियों से अवगत कराएंगे ।
इस वर्ष पोषण माह 2025 का फोकस महिलाओं, बच्चों और परिवारों के सर्वांगीण स्वास्थ्य एवं पोषण पर है। इसके लिए निम्नलिखित मुख्य विषय (थीम) हैः-
– मोटापे से मुक्ति – नमक, चीनी और तेल का सीमित सेवन
– स्थानीय चीजों को बढ़ावा – आत्मनिर्भरता की ओर कदम
– प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा – “पोषण भी पढ़ाई भी”
– समन्वित कार्यवाही और डिजिटलीकरण
– शिशु एवं छोटे बच्चों को खिलाने की पद्धतियां
– पुरुषों की सहभागिता – पोषण गतिविधियों में उनकी भूमिका
पोषण माह में दिनांक 17 सितंबर से 16 अक्टूबर तक प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
जमशेदपुर : धालभूम अनुमंडल दंडाधिकारी चन्द्रजीत सिंह द्वारा आज 19 सितंबर 2025 के अपराह्न से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत धामभूम क्षेत्र अंतर्गत 4 रेलवे स्टेशनों के आस पास निषेधाज्ञा पारित की है। प्राप्त सूचनानुसर कुरमी / कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में सूचीबद्ध करने एवं कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और उड़िसा के 100 रेलवे स्टेशनों पर “रेल टेका या रेल रोको” आन्दोलन के तहत दिनांक- 20.09.2025 से अनिश्चितकालीन रेल परिचालन बंद / बाधित किये जाने का अह्वान किया गया है। उपरोक्त अहवान के आलोक में धालभूम अनुमण्डल क्षेत्रान्तर्गत टाटानगर रेलवे स्टेशन, गोविन्दपुर रेलवे स्टेशन, हल्दीपोखर रेलवे स्टेशन और राखा माईन्स रेलवे स्टेशन पर रेल टेका या रेल रोको आन्दोलन के तहत रेल परिचालन बंद/बाधित किये जाने की संभावना के मद्देनजर उपरोक्त स्थल पर लोक शांति बनाये रखने हेतु धारा-163 B.N.S.S के अन्तर्गत निषेधाज्ञा पारित किया जाना नितान्त आवश्यक है। इसलिए चन्द्रजीत सिंह, झा0प्र0से0, अनुमण्डल दण्डाधिकारी, धालभूम, जमशेदपुर द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (B.N.S.S) की धारा-163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धालभूम अनुमण्डल क्षेत्रान्तर्गत टाटानगर रेलवे स्टेशन, गोविन्दपुर रेलवे स्टेशन, हल्दीपोखर रेलवे स्टेशन और राखा माईन्स रेलवे स्टेशन के 100 मीटर की परिधि के अन्दर निम्न प्रकार से निषेधाज्ञा पारित करता हूँ:-
1. किसी प्रकार का धरना या प्रदर्शन, घेराव, पुतला दहन का प्रदर्शन निषेध होगा ।
2. किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र या लाठी-डण्डे, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि लेकर जाने पर निषेध रहेगा ।
3. बिना अनुमति के ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग करना निषेध होगा ।
4. उपद्रव अथवा शांति भंग करने के उद्देश्य से पाँच या पाँच से अधिक व्यक्ति उक्त स्थल पर एक साथ जमा नहीं होंगे ।
5. उक्त स्थल पर प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, चिकित्साकर्मी तथा मीडियाकर्मीयों पर यह आदेश लागू नहीं होगा ।
यह आदेश दिनांक- 19.09.2025 के अपराह्न से रेल टेका या रेल रोको आन्दोलन के समाप्ति तक प्रभावी रहेगा ।
जमशेदपुर : झारखंड सरकार ने औपचारिक रूप से राखा खनन पट्टा विलेख (लीज डीड) का निष्पादन किया है, जो भारत के खनन उद्योग के लिए एक मील का पत्थर है। इस विलेख से पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित राखा कॉपर माइंस के बहुप्रतीक्षित पुनः उद्घाटन और विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह पट्टा विलेख पूर्वी सिंहभूम जिला के उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी द्वारा सरकार की ओर से हस्ताक्षरित किया गया । हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की ओर से इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स (ICC) के कार्यकारी निदेशक-सह-यूनिट प्रमुख ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किया। मौके पर अपर उपायुक्त श्री भगीरथ प्रसाद और जिला खनन पदाधिकारी श्री सतीश कुमार नायक उपस्थित थे। राखा खनन पट्टा को 20 वर्षों के लिए आगे बढ़ाया गया है, जो क्षेत्र में तांबे के खनन के पुनरुद्धार की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उपायुक्त ने इस अवसर पर कहा कि राखा खनन पट्टा विलेख का सफल निष्पादन झारखंड सरकार की नीति एवं खनन को बढ़ावा देने की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है और क्षेत्र की जनता के लिए नए अवसर प्रस्तुत करता है। यह परियोजना पूर्वी सिंहभूम जिले में समावेशी विकास और सतत प्रगति को गति प्रदान करेगी यह उपलब्धि झारखंड सरकार के खनन और संबद्ध क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर निरंतर ध्यान को रेखांकित करती है, जिससे भारत की खनिज अर्थव्यवस्था में राज्य की नेतृत्वकारी भूमिका और मजबूत होगी।
एचसीएल के कार्यकारी निदेशक-सह-यूनिट प्रमुख ने झारखंड सरकार और जिला प्रशासन का आभार जताया। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड भारत सरकार का एक उपक्रम है और देश का एकमात्र ऊर्ध्वाधर रूप से एकीकृत कॉपर उत्पादक है। इसकी गतिविधियों में खनन, परिशोधन, स्मेल्टिंग, रिफाइनिंग और कास्टिंग शामिल हैं। घाटशिला स्थित इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स (ICC), जिसमें राखा खदान भी शामिल है।
24 वर्षों बाद पुनः खनन कार्य शुरू होगा – 2001 से बंद पड़े राखा खदान का संचालन फिर से शुरू होगा। HCL से प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख टन अयस्क के उत्पादन की उम्मीद है, जबकि एक नया कंसंट्रेटर संयंत्र विकसित किया जाएगा, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष 30 लाख टन तक होगी। इस परियोजना से लगभग 10,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है, जिससे स्थानीय रोज़गार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह देश की तांबे के उत्पादन में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करेगा।
जमशेदपुर : समाहरणालय सभागार में उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) संबंधी समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जिले में संचालित एवं प्रस्तावित सीएसआर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य रूप से आजीविका संवर्धन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास से संबंधित प्रोजेक्ट्स पर विशेष बल दिया गया। बैठक में जिले में कार्यरत विभिन्न कंपनियों एवं संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी परियोजनाओं का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि CSR के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्य जन-हितकारी, दीर्घकालिक एवं स्थायी विकास की दिशा में परिणामदायी हों, इस दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है।
उपायुक्त ने कहा कि सीएसआर केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह समाज के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आजीविका संवर्धन की योजनाओं से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को प्रत्यक्ष लाभ मिले। कंपनियां अपने प्रोजेक्ट को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करें और उसका लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
उपायुक्त ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि शिक्षा क्षेत्र में सरकारी स्कूल के बच्चों का शैक्षणिक भ्रमण, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग व छात्रवृत्ति योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए। स्वास्थ्य क्षेत्र में मिर्गी मरीजों की जांच एवं उपचार, मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए प्रशासन द्वारा कार्य किया जा रहा है, इसमें कंपनियों से सहयोग अपेक्षित है। पोषण कार्यक्रम एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बल दिया जाए। आजीविका संवर्धन के तहत महिला समूहों, स्वरोजगार, कृषि आधारित गतिविधियों एवं कौशल प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया जाए । सभी कंपनियां अपने प्रोजेक्ट्स को जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट साझा करें।
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिला प्रशासन सीएसआर प्रोजेक्ट्स के प्रभाव का मूल्यांकन कर उनकी गुणवत्ता व पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। उपायुक्त ने कंपनियों से यह भी अपील की कि वे केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहें, बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी परियोजनाओं का विस्तार करें ताकि विकास की किरण हर व्यक्ति तक पहुंच सके।
जमशेदपुर : क़ौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने धर्म प्रचार अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखदेव सिंह खालसा से अपील किया है कि वह सीजीपीसी के तथाकथित प्रधान सरदार भगवान सिंह के झूठे प्रभाव से अपने आप को बचाए रखें। यह उनसे हमेशा अपने मन का काम करवाने की कोशिश करते हैं किंतु अकाली दल की अनुशंसा राय पर कायम नहीं रहते हैं। अकाली दल के प्रधान बारीडीह के मामले को याद रखें, जब उन्होंने सरदार अवतार सिंह सोखी और जत्थेदार कुलदीप सिंह को अयोग्य ठहराने की रिपोर्ट सीजीपीसी को दी थी। अकाली दल के प्रधान उस दिन को याद रखें, क्या उनकी रिपोर्ट को माना गया? उल्टे तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के जत्थेदार सिंह साहेब ज्ञानी बलदेव सिंह से उनकी संस्था के खिलाफ झूठी रिपोर्ट की गई और उन्हें वहां तलब किया गया था। प्रधान सरदार सुखदेव सिंह खालसा अच्छी तरह जानते हैं कि वह झूठी रिपोर्ट सिंह साहेब ज्ञानी बलदेव सिंह को किसने भेजी थी। अकाली दल उस दिन को भी याद रखे जब साकची गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान पद के उम्मीदवारों की धार्मिक स्क्रुटनी करनी थी। और वहां अराजक तत्वों ने उम्मीदवारों को उनके मुख्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया था। अकाली दल ने किस मजबूरी के तहत उन अराजक तत्वों के खिलाफ पुलिस में शिकायत नहीं की थी। जब सोनारी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के उपाध्यक्ष सरदार गुरप्रीत सिंह के याचिका पर स्थानीय अदालत ने स्थगन आदेश जारी कर दिया है और 31 मार्च 2026 तक किसी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। तब क्या यह सीजीपीसी का तथाकथित प्रधान देश के संविधान और न्यायालय से ऊपर है? धर्म प्रचार अकाली दल अपने आप को धार्मिक प्रचार तक सीमित रखें और किसी व्यक्ति के हाथ का खिलौना नहीं बने। शनिवार को उम्मीदवारों की स्क्रुटनी से बचें अथवा न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई का सामना उन्हें करना पड़ेगा? अकाली दल एवं इसके प्रधान सुखदेव सिंह खालसा न्यायालय के आदेश का सम्मान करें। क्योंकि वैसे भी यदि उनका कोई फैसला इस प्रधान भगवान सिंह के मर्जी के उम्मीदवार के मुताबिक नहीं आता है तो वह अमान्य कर दिया जाएगा, जैसे बारीडीह के मामले में हुआ था।
सरायकेला खरसावां : मानवाधिकार सहायता संघ अंतरराष्ट्रीय के सरायकेला खरसावां जिला महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्रीमती सुमन कारूवा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि संयुक्त श्रमिक संगठनों के ओर से ठेका एवं असंगठित मजदूरों के ज्वलंत मुद्दों पर सौंपे गए ज्ञापन पर कोल्हान के उपश्रमायुक्त अरविंद कुमार से आग्रह किया कि इस ज्वलंत मुद्दों पर संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। जिससे ठेका एवं असंगठित मजदूरों को उचित न्याय मिले। जिससे कंपनी एवं औद्योगिक संस्थानों में कार्यरत मजदूरो को त्यौहार से पहले प्रत्येक ठेका श्रमिकों को बोनस का भुगतान , स्थायी प्रकृति के कार्य ठेका श्रमिकों से कार्य नहीं कराने समेत छह सूत्री मांग यूनियन संगठनों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए अविलंब निदान की मांग की है।