ठाकुरगंज: रेलवे नियमों की कड़ाई और यात्रियों की बेबसी का एक अनोखा मामला बुधवार को ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला। मालदा से सिलीगुड़ी जा रही डेमू ट्रेन (संख्या 75719) प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर करीब 3 घंटे तक खड़ी रही। हैरान करने वाली बात यह रही कि ट्रेन में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि लोको पायलट ने अपनी ड्यूटी की समय-सीमा खत्म होने का हवाला देकर आगे जाने से इनकार कर दिया।

दोपहर 2:52 बजे से शाम तक खड़ी रही ट्रेन
निर्धारित समय पर मालदा से रवाना हुई डेमू ट्रेन जैसे ही दोपहर 2:52 बजे ठाकुरगंज पहुँची, लोको पायलट ने स्टेशन मास्टर को अपनी ड्यूटी पूरी होने की सूचना दी। ड्राइवर का तर्क था कि उनकी 9 घंटे की ड्यूटी पूरी हो चुकी है और रेलवे के सुरक्षा नियमों (Safety Norms) के अनुसार, थकान की स्थिति में ट्रेन चलाना परिचालन सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।
क्या कहता है रेलवे का नियम?
रेलवे के परिचालन सुरक्षा नियमों के अनुसार, किसी भी लोको पायलट को अधिकतम 9 से 10 घंटे की निरंतर ड्यूटी के बाद अनिवार्य विश्राम का अधिकार है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि चालक की थकान की वजह से कोई बड़ी रेल दुर्घटना न हो जाए। चालक ने इसी नियम की दुहाई देकर इंजन छोड़ने का फैसला किया।
यात्रियों का फूटा गुस्सा, बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी
तपती दोपहर में करीब 3 घंटे तक ट्रेन खड़ी रहने के कारण यात्रियों का धैर्य जवाब दे गया। ट्रेन में सवार लोगों की स्थिति काफी दयनीय थी:
- दैनिक मजदूर और व्यापारी: सिलीगुड़ी और किशनगंज जाने वाले कामगारों का कीमती समय बर्बाद हुआ।
- परिवार और बच्चे: छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहे परिवारों को पीने के पानी और भोजन के लिए स्टेशन पर भटकना पड़ा।
- कनेक्टिंग ट्रेनें छूटीं: कई यात्रियों की आगे की महत्वपूर्ण ट्रेनें इस देरी की वजह से मिस हो गईं, जिससे उनमें रेल प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी गई।
प्रशासनिक तालमेल पर सवाल
इस घटना ने रेल प्रशासन के बीच तालमेल की कमी को उजागर किया है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि लोको पायलट की ड्यूटी खत्म होने वाली थी, तो पहले से ही वैकल्पिक चालक (Reliever) की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? शाम को वैकल्पिक व्यवस्था होने के बाद ही ट्रेन आगे रवाना हो सकी।










