एक नई सोच, एक नई धारा

तीसरी धारा विशेष: रिश्तों की गरमाहट और युवाओं का संकल्प; धातकीडीह की ‘बरखा’ के आँगन में खुशियों की नई बयार

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जमशेदपुर | 14 फरवरी, 2026 संवाददाता

​आज जब दुनिया की चकाचौंध में संवेदनाएं दम तोड़ रही हैं, तब जमशेदपुर के धातकीडीह से एक ऐसी खबर आई है जो समाज के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को पुनर्जीवित करती है। धातकीडीह हरिजन बस्ती की एक बेटी, बरखा मुखी, के विवाह की बेला में स्थानीय युवाओं ने जिस आत्मीयता और तत्परता से हाथ बढ़ाया, वह महज आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि एक डूबते परिवार को दिया गया भरोसे का ‘कंधा’ है।

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अध्यक्ष रवि सिंह के नेतृत्व में ‘सेवा ही संकल्प’

​युवा संगठन के अध्यक्ष रवि सिंह के नेतृत्व में युवाओं की एक टोली ने आज बरखा के घर पहुँचकर खुशियों की रस्मों में अपना योगदान दिया। संगठन ने न केवल ₹2100 की नकद राशि भेंट की, बल्कि विवाह के भोज और घर की जरूरतों के लिए पर्याप्त सूखा राशन भी उपलब्ध कराया।

​यह पहल उस समय हुई है जब शादी-ब्याह के बढ़ते खर्च गरीब परिवारों के लिए किसी मानसिक और आर्थिक बोझ से कम नहीं होते। ऐसे में इन युवाओं का आगे आना समाज में ‘बदलाव की बयार’ का संकेत है।

इन ‘कर्मयोगियों’ ने पेश की मिसाल

​इस नेक कार्य में केवल धन का योगदान नहीं था, बल्कि उन युवाओं का समय और श्रम भी शामिल था जो समाज को बेहतर बनाने का सपना देखते हैं। इस अवसर पर सक्रिय भूमिका निभाने वालों में प्रमुख थे:

  • वेद प्रकाश तिवारी
  • शिव जी सिंह
  • पारस नाथ मिश्रा
  • ओमकार झा
  • लाल बाबू जी
  • मोहित दास जी
  • राहुल लोहार
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तीसरी धारा का नज़रिया: संवेदनशीलता ही समाज की शक्ति

​संगठन के सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि— “समाज में जरूरतमंदों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है।” उन्होंने यह संदेश दिया कि यदि हर मोहल्ले और बस्ती के युवा इसी तरह एकजुट होकर अपने पड़ोस की समस्याओं और जरूरतों पर ध्यान दें, तो कोई भी परिवार खुद को असहाय महसूस नहीं करेगा।

निष्कर्ष: बरखा मुखी का विवाह अब केवल एक परिवार का आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह जमशेदपुर के युवाओं की एकजुटता और संवेदनशीलता का प्रतीक बन गया है। ‘तीसरी धारा’ इन युवाओं के जज्बे को सलाम करता है, जो ईंट-गारे के शहर में ‘इंसानियत’ की दीवारें ऊंची कर रहे हैं।

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