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तीसरी धारा राजनीतिक विशेष: आदित्यपुर निकाय चुनाव में बड़ा उलटफेर; तीसरा मोर्चा ने दिया भगलू सोरेन को समर्थन, समीकरणों में आया भूचाल

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आदित्यपुर | 14 फरवरी, 2026

​आदित्यपुर नगर निकाय चुनाव की रणभेरी बजते ही राजनीतिक बिसात पर शह और मात का खेल तेज हो गया है। आज शहर की राजनीति में उस वक्त एक बड़ा मोड़ आया जब सर्वदलीय आदित्यपुर विकास मंच (तीसरा मोर्चा) ने आधिकारिक तौर पर झामुमो समर्थित महापौर प्रत्याशी भगलू सोरेन को अपना समर्थन देने का एलान कर दिया।

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गणेश चौधरी की प्रेस वार्ता: “अब जीत सुनिश्चित”

​झामुमो के केंद्रीय सदस्य गणेश चौधरी ने आज आयोजित प्रेस वार्ता में इस गठबंधन की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तीसरा मोर्चा के साथ आने से भगलू सोरेन की स्थिति अब अभेद्य हो गई है। चौधरी ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में कुछ और ‘अहम राजनीतिक धमाके’ हो सकते हैं, जो विरोधियों की नींद उड़ा देंगे।

विकास के लिए राज्य सरकार के साथ समन्वय: गणेश महाली

​झामुमो के वरिष्ठ नेता और सरायकेला के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी गणेश महाली ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया कि यह केवल एक चुनावी गठबंधन नहीं, बल्कि आदित्यपुर के कायाकल्प का संकल्प है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद राज्य सरकार के साथ सीधा समन्वय स्थापित कर यहाँ के विकास को एक नई और तेज दिशा दी जाएगी।

बुनियादी समस्याओं पर प्रहार: संजीव आचार्य

​तीसरा मोर्चा के संयोजक संजीव आचार्य ने गठबंधन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए औद्योगिक क्षेत्र की उपेक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा:

​”आदित्यपुर एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है, लेकिन विडंबना देखिए कि यहाँ की जनता आज भी बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं के लिए तरस रही है। इस गठबंधन की पहली प्राथमिकता इन समस्याओं को जड़ से खत्म करना होगा।”

प्रेस वार्ता में ये रहे मौजूद

​इस महत्वपूर्ण घोषणा के दौरान मंच पर एकता की तस्वीर दिखी, जिसमें मुख्य रूप से उपस्थित थे:

  • भगलू सोरेन (महापौर प्रत्याशी)
  • बुलेट नारायण सिंह (अध्यक्ष, तीसरा मोर्चा)
  • बिरेन्द्र प्रधान (नगर अध्यक्ष, झामुमो)
  • अजीत प्रधान, बीरेंद्र तिवारी एवं अन्य कार्यकर्ता।

तीसरी धारा का नज़रिया: तीसरा मोर्चा और झामुमो का यह गठबंधन चुनावी मैदान में अन्य प्रत्याशियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। अब देखना यह होगा कि औद्योगिक क्षेत्र की जनता इस ‘महागठबंधन’ पर कितना भरोसा जताती है।