मानगो पुल पर ‘महाजाम’: घंटों रेंगती रही लौहनगरी की लाइफलाइन, फ्लाईओवर के काम और अतिक्रमण ने बिगाड़ी चाल
जमशेदपुर | सिटी रिपोर्टर
लौहनगरी की धड़कन कहे जाने वाले मानगो पुल और आसपास के इलाकों में आज एक बार फिर ‘ब्लैक मंडे’ जैसी स्थिति रही। सोमवार की सुबह जैसे ही पीक आवर शुरू हुआ, मानगो की सड़कें वाहनों के समंदर में तब्दील हो गईं। सुबह से शुरू हुआ यह गतिरोध दोपहर तक जारी रहा, जिसने हजारों शहरवासियों के पसीने छुड़ा दिए।

पुराने और नए पुल पर वाहनों का ‘रेला’
मानगो चौक से लेकर जयप्रकाश नारायण सेतु (पुराना पुल) और नए पुल तक जिधर नजर गई, सिर्फ वाहनों की लंबी कतारें ही दिखाई दीं।
- फंसे रहे मासूम: जाम का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों पर पड़ा। तपती धूप और उमस के बीच स्कूल बसें घंटों फंसी रहीं, जिससे छोटे बच्चे बेहाल नजर आए।
- ड्यूटी वाले परेशान: दफ्तर और फैक्ट्री जाने वाले कर्मचारी समय पर नहीं पहुंच सके, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखी गई।
जाम के तीन प्रमुख विलेन
तीसरी धारा न्यूज की टीम ने जब मौके का मुआयना किया, तो जाम के पीछे तीन मुख्य कारण उभर कर आए:
- अतिक्रमण की मार: सड़क किनारे अवैध रूप से सजी दुकानों और ठेलों ने पहले से ही संकरी सड़क को और छोटा कर दिया है।
- फ्लाईओवर निर्माण: मानगो फ्लाईओवर का काम चल रहा है, लेकिन वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान (Traffic Plan) का सही क्रियान्वयन जमीन पर नहीं दिख रहा।
- भारी वाहनों का दबाव: नो-एंट्री खुलने के बाद भारी वाहनों के अचानक दबाव ने स्थिति को नियंत्रण से बाहर कर दिया।
प्रशासन के दावे बनाम हकीकत
पुलिस प्रशासन का दावा है कि मानगो चौक और डिमना रोड में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। हालांकि, बढ़ती गाड़ियों की संख्या और बेतरतीब पार्किंग के आगे ये इंतजाम ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है, जबकि आम जनता हर दिन ‘नर्क’ जैसे हालात झेल रही है।










