जमशेदपुर: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ आज लौहनगरी जमशेदपुर की सड़कों पर किन्नर समुदाय का जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला। समुदाय के सैकड़ों सदस्यों ने साकची स्थित डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (DC) कार्यालय तक विशाल मार्च निकाला और उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
विरोध की मुख्य वजह: ‘पहचान’ पर संकट
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 2026 का यह नया संशोधन उनके मौलिक अधिकारों और गरिमा पर सीधा हमला है। मार्च का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं और किन्नर समुदाय के प्रतिनिधियों ने निम्नलिखित मुख्य आपत्तियां दर्ज कराईं:
- मेडिकल बोर्ड की अनिवार्यता: विधेयक के नए प्रावधानों के अनुसार, अब किसी व्यक्ति को ट्रांसजेंडर के रूप में पहचान पाने के लिए मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना होगा। प्रदर्शनकारियों ने इसे अपमानजनक बताया और कहा कि यह उनकी निजता (Privacy) का उल्लंघन है।
- स्व-पहचान का अधिकार खत्म: 2019 के कानून में ‘स्व-पहचान’ (Self-Identification) का अधिकार था, जिसे इस संशोधन के जरिए खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
- अपराधीकरण का डर: विधेयक की कुछ धाराओं को लेकर समुदाय में डर है कि इससे उनके पारंपरिक रहन-सहन और सामुदायिक समर्थन तंत्र को निशाना बनाया जा सकता है।
डीसी ऑफिस पर प्रदर्शन और ज्ञापन
मार्च के दौरान ‘हमें हमारा अधिकार दो’ और ‘काला कानून वापस लो’ जैसे नारों से पूरा प्रशासनिक परिसर गूंज उठा। उपायुक्त कार्यालय पहुंचे प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस “प्रतिगामी” (Regressive) बिल को वापस नहीं लेती है या इसमें सुधार नहीं करती है, तो यह आंदोलन राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक और तेज किया जाएगा।
“यह कानून हमारी पहचान को कागजों और डॉक्टरों की रिपोर्ट तक सीमित कर रहा है। हम अपनी गरिमा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।” — प्रदर्शन में शामिल एक प्रतिनिधि
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क, जमशेदपुर











