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तीसरी धारा न्यूज एक्सक्लूसिव: जमशेदपुर में आज दिखेगी प्रकृति पर्व ‘सरहुल’ की भव्यता; शाम 3:30 बजे से निकलेगी ऐतिहासिक शोभायात्रा

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जमशेदपुर | तीसरी धारा न्यूज: लौहनगरी जमशेदपुर आज प्रकृति के महापर्व ‘सरहुल’ के रंग में सराबोर होने के लिए तैयार है। चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के अवसर पर केन्द्रीय सरहुल पूजा समिति, पूर्वी सिंहभूम के तत्वावधान में शनिवार (21 मार्च) को शहर में एक विशाल और भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। तीसरी धारा न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस आयोजन को लेकर आदिवासी समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

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शोभायात्रा का मार्ग (रूट मैप): कहाँ से कहाँ तक?

​समिति द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शोभायात्रा दोपहर बाद 3:30 बजे पुराना सीतारामडेरा से प्रारंभ होगी।

निश्चित मार्ग:

पुराना सीतारामडेरा ➡️ लाको बोदरा चौक ➡️ एग्रिको लाइट सिग्नल ➡️ भालूबासा चौक ➡️ रामलीला मैदान ➡️ साकची गोलचक्कर ➡️ बसंत टॉकीज ➡️ टूइलाडूंगरी ➡️ गोलमुरी ➡️ वापस सीतारामडेरा।

पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों की गूँज

​इस शोभायात्रा में उरांव, हो, मुंडा, भूमिज, भुइयां, लोहरा और तुरी सहित विभिन्न आदिवासी समुदायों के महिला, पुरुष और बच्चे शामिल होंगे। तीसरी धारा न्यूज को मिली जानकारी के मुताबिक, लोग पारंपरिक परिधानों में मांदर, नगाड़ा और ढोल की थाप पर थिरकते हुए अपनी सांस्कृतिक एकता का प्रदर्शन करेंगे। इस वर्ष विशेष रूप से अनुशासन और पारंपरिक वेशभूषा के लिए पुरस्कार भी रखे गए हैं।

सजे महापुरुषों के चौक और प्रतिमाएं

​शोभायात्रा के स्वागत के लिए पूरे शहर को सरना झंडों और तोरण द्वारों से सजाया गया है। साकची स्थित भगवान बिरसा मुंडा, सीतारामडेरा स्थित ओत गुरु कोल लाको बोदरा और बाबा कार्तिक उरांव की प्रतिमाओं को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है। झांकियों के माध्यम से ‘प्रकृति संरक्षण’ का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया जाएगा।

पांरपरिक विधि-विधान से हुई पूजा

​शोभायात्रा से पूर्व सुबह के समय पाहन (पुजारी) द्वारा सरना स्थलों पर विधि-विधान से पूजा संपन्न की गई। तीसरी धारा न्यूज के अनुसार, परंपरा के मुताबिक घड़े में जल भरकर भविष्य की वर्षा और फसल का अनुमान लगाया गया। पूजा के बाद सखुआ (साल) के फूलों को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया, जिसे श्रद्धालु अपने कानों और घरों के दरवाजों पर लगाते हैं।

​यह महापर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत और प्रकृति के प्रति उनके गहरे प्रेम का भव्य प्रदर्शन भी है।