लखनऊ | तीसरी धारा न्यूज: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित ऐतिहासिक धरोहर ‘बड़ा इमामबाड़ा’ में एक हिंदू युवती के साथ कथित अभद्रता और जबरन हिजाब पहनाने के दबाव का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तूल पकड़ता जा रहा है। तीसरी धारा न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने इस प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की सिफारिश की है।


“किसी पर जबरन पहनावा नहीं थोपा जा सकता” – अपर्णा यादव
पीड़िता से मुलाकात के बाद अपर्णा यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यहाँ किसी भी बेटी के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा:
”आप किसी बच्ची पर हिजाब जबरन नहीं थोप सकते। वह हिंदू लड़की है और उसके धर्म में हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं है। इमामबाड़ा एक सार्वजनिक पर्यटन स्थल है, वहाँ ऐसी जबरदस्ती करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है।”
धार्मिक स्थल के नियम बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता
तीसरी धारा न्यूज के पाठकों को बता दें कि इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब पीड़िता ने आरोप लगाया कि इमामबाड़ा के कुछ कर्मचारियों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और उसे हिजाब पहनकर ही प्रवेश करने के लिए मजबूर किया।
वहीं, दूसरी ओर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने इस पर अपना तर्क देते हुए कहा कि इमामबाड़ा एक धार्मिक स्थल है और हर धार्मिक स्थान के अपने नियम होते हैं। उनके अनुसार, सिर ढक कर प्रवेश करना वहाँ की परंपरा है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
चुनावी माहौल में साजिश की आशंका
अपर्णा यादव ने इस घटना को घृणित मानसिकता का परिणाम बताते हुए अंदेशा जताया कि चुनावी माहौल में कुछ अराजक तत्व जानबूझकर धर्म के आधार पर लोगों को बांटने और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएम योगी के कड़े निर्देश हैं कि किसी भी बेटी या ‘मजलूम’ के साथ बदसलूकी होने पर सरकार धर्म के आधार पर कोई छूट नहीं देगी।
महिला आयोग उठाएगा सख्त कदम
तीसरी धारा न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, महिला आयोग जल्द ही इस मामले में औपचारिक अभियोग (FIR) दर्ज कराएगा। अपर्णा यादव ने प्रदेश की सभी बेटियों से अपील की है कि यदि उनके साथ कहीं भी दुर्व्यवहार होता है, तो वे बेझिझक महिला आयोग से संपर्क करें।
अब देखना होगा कि इस संवेदनशील मामले में लखनऊ प्रशासन और राज्य सरकार क्या ठोस कदम उठाती है, ताकि धार्मिक परंपराओं और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे।











