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तीसरी धारा न्यूज: चुनावी पंचनामा

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मानगो-जुगसलाई में ‘वोटर लिस्ट’ ने बिगाड़ा खेल: एक ही छत के नीचे रहने वाला परिवार चार वार्डों में बंटा; प्रत्याशी बने ‘टूरिस्ट गाइड’

जमशेदपुर | विशेष संवाददाता

मानगो में पहली बार और जुगसलाई में 43 वर्षों के लंबे ‘वनवास’ के बाद जब नगर निकाय चुनाव का बिगुल बजा, तो लगा था कि लोकतंत्र का उत्सव मनेगा। लेकिन वर्तमान स्थिति उत्सव से ज्यादा किसी ‘भूलभुलैया’ जैसी नजर आ रही है। चुनाव आयोग की नई मतदाता सूची ने ऐसा गणित उलझाया है कि मतदाताओं के साथ-साथ प्रत्याशियों के भी सुर-ताल गड़बड़ा गए हैं।

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संयुक्त परिवार बना ‘संयुक्त राष्ट्र’: घर एक, वार्ड अनेक

​जुगसलाई और मानगो के इलाकों में मतदाता सूची का हाल ऐसा है मानो ताश के पत्तों की तरह वोटरों को फेंट दिया गया हो। नाश्ते की मेज पर अब विकास की नहीं, बल्कि ‘खोज अभियान’ की चर्चा हो रही है।

  • अजीबोगरीब बंटवारा: हालात ये हैं कि पति वार्ड संख्या 4 में है, तो पत्नी वार्ड 5 की वोटर बन गई है। वहीं बेटा किसी तीसरे वार्ड का मुसाफिर है।
  • भ्रम की स्थिति: एक ही घर में रहने वाले सदस्य अब अलग-अलग राजनीतिक सीमाओं में बंट गए हैं, जिससे बूथ ढूंढना किसी शोध (Research) से कम नहीं रह गया है।

प्रत्याशी कम, ‘गाइड’ ज्यादा

​चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की हालत सबसे दयनीय है। वे जनता को ‘विकास का रोडमैप’ समझाने के बजाय ‘वार्ड का नक्शा’ समझाने में जुटे हैं।

  • पसीना पोंछते प्रत्याशी: जनसंपर्क के दौरान प्रत्याशी वादों की पोटली बाद में खोलते हैं, पहले वोटर लिस्ट का पन्ना पलटकर यह कन्फर्म करते हैं कि सामने खड़ा व्यक्ति उनके वार्ड का है भी या नहीं।
  • गलतफहमी का शिकार: कई बार प्रत्याशी जिसे अपना ‘पक्का वोटर’ समझकर गले लगाने दौड़ते हैं, पता चलता है कि आयोग की कलम ने उसे पड़ोसी वार्ड में ट्रांसफर कर दिया है।

“बैटिंग करना मुश्किल”: हेमंत गुप्ता

​इसी आपाधापी के बीच जुगसलाई नगर परिषद के वार्ड 4 से प्रत्याशी हेमंत गुप्ता को चुनाव चिन्ह ‘बल्ला’ आवंटित हुआ है। उन्होंने सिस्टम पर तंज कसते हुए कहा कि इस बार वार्ड निर्धारण और बूथ व्यवस्था को इतना जटिल बना दिया गया है कि मैदान पर टिकना मुश्किल हो रहा है।

“एक ही परिवार के चार लोगों को चार अलग वार्डों में भेजना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि मतदाताओं को मानसिक तनाव देना है। प्रत्याशी को पता नहीं प्रचार कहां करें और वोटर को पता नहीं जाना कहां है। यह सिस्टम की गंभीर विफलता है।”हेमंत गुप्ता, प्रत्याशी (वार्ड-4)