एक नई सोच, एक नई धारा

तीसरी धारा एक्सक्लूसिव: धोनी ने खुद नहीं छोड़ी थी कप्तानी? पूर्व चयनकर्ता जतिन परांजपे का सनसनीखेज खुलासा— ‘हमने माही से कहा था, अब आगे बढ़ने का समय है’

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खेल डेस्क | 14 फरवरी, 2026

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​भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के कप्तानी छोड़ने के फैसले को लेकर एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने क्रिकेट गलियारों में हलचल मचा दी है। पूर्व चयनकर्ता जतिन परांजपे ने सालों बाद उस ‘सीक्रेट मीटिंग’ का सच उजागर किया है, जिसके बाद माही ने सीमित ओवरों (ODI और T20) की कप्तानी को अलविदा कहा था।

जनवरी 2017: वह एक घंटा और ‘सम्मानजनक’ विदाई की रणनीति

​जतिन परांजपे ने ‘द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो’ में बताया कि जनवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज से ठीक पहले चयनकर्ताओं ने एक कड़ा फैसला लेने का मन बना लिया था।

​परांजपे ने उस पल को याद करते हुए कहा:

​”माही मैदान पर एक घंटे से बल्लेबाजी कर रहे थे। मैं और तत्कालीन मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद एक-दूसरे को देख रहे थे। हमारे मन में बस एक ही बात थी— माही को सबसे सम्मानजनक तरीके से यह कैसे बताया जाए कि अब बदलाव का वक्त आ गया है।”

धोनी का रिएक्शन: “अन्ना, यह एकदम सही फैसला है”

​जब चयनकर्ता धोनी के पास पहुंचे और उनसे आगे बढ़ने की बात कही, तो धोनी का जवाब उनकी महानता को दर्शाने वाला था। परांजपे के अनुसार:

  • ​धोनी ने बिना किसी झिझक के कहा, “अन्ना, यह एकदम सही फैसला है। मुझे बताओ आपको मुझसे क्या चाहिए।”
  • ​चयनकर्ताओं ने उनसे औपचारिक रूप से लिखकर देने को कहा कि वे कप्तानी छोड़ने को तैयार हैं।
  • ​उसी रात धोनी का ईमेल आया: “मैं कप्तानी छोड़ना चाहता हूं।”

विराट युग की शुरुआत और धोनी का ‘बड़प्पन’

​इस खुलासे से यह साफ हो गया है कि 2019 वर्ल्ड कप की तैयारियों को देखते हुए चयनकर्ता विराट कोहली को पूरी कमान सौंपना चाहते थे। धोनी ने न केवल इस फैसले को स्वीकार किया, बल्कि एक सीनियर खिलाड़ी के तौर पर टीम में बने रहकर कोहली का मार्गदर्शन भी किया।

आलोचना झेली, पर फैसला जरूरी था

​परांजपे ने स्वीकार किया कि उस समय इस फैसले के लिए चयन समिति को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। प्रशंसक हैरान थे कि आईसीसी की तीनों ट्रॉफियां जीतने वाला कप्तान अचानक पद क्यों छोड़ रहा है। परांजपे ने कहा, “हमे आलोचना मिली, लेकिन भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए ऐसे कड़े फैसले लेने ही पड़ते हैं।”

तीसरी धारा का नज़रिया: धोनी का बिना किसी विवाद के पद छोड़ना यह साबित करता है कि उनके लिए ‘प्रोसेस’ और ‘देश’ हमेशा उनके व्यक्तिगत कद से बड़े रहे। चयनकर्ताओं का यह खुलासा क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक नई बहस छेड़ सकता है।