देहरादून/जमशेदपुर | 15 फरवरी, 2026
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हुए हाई-प्रोफाइल गैंगस्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरे अपराध जगत को स्तब्ध कर दिया है। सगे भाई ने ही अपने भाई के कत्ल की पटकथा लिखी और करोड़ों की संपत्ति व वर्चस्व के लिए सुपारी किलर्स का सहारा लिया।

भाई का सरेंडर और साजिश का पर्दाफाश
मामले में तब सनसनी फैल गई जब मृतक के भाई अरविंद शर्मा ने देहरादून पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं हैं:
- षड्यंत्र का केंद्र: हत्या की साजिश की जड़ें जमशेदपुर के मानगो इलाके में थीं।
- महीनों की प्लानिंग: यह हत्या कोई तात्कालिक गुस्सा नहीं, बल्कि जुलाई 2025 से रची जा रही एक गहरी साजिश का नतीजा थी।
- साझेदार: अरविंद के साथ उसका सहयोगी प्रभात भी इस साजिश में मुख्य भूमिका में था।
क्यों हुई हत्या? ‘पैसा और पावर’ की जंग
शुरुआती तफ्तीश के अनुसार, विक्रम और अरविंद के बीच करोड़ों की संपत्ति और व्यापारिक वर्चस्व को लेकर पुरानी रंजिश थी।
- वित्तीय नुकसान: प्रभात नामक सहयोगी को विक्रम के कारण हर महीने करीब ₹2 लाख का नुकसान हो रहा था क्योंकि उसके ठेके और बैचिंग प्लांट के काम छीन लिए गए थे।
- वर्चस्व की लड़ाई: जमशेदपुर के अपराध जगत में विक्रम के बढ़ते कद और उसकी संपत्ति पर कब्ज़ा करने की नीयत ने इस हत्याकांड को अंजाम दिलवाया।
शूटरों की पहचान और ‘ऑपरेशन देहरादून’
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अरविंद के बयान के आधार पर तीन मुख्य शूटरों की पहचान कर ली है:
- आकाश प्रसाद
- आशुतोष कुमार
- विशाल
टाइमलाइन: शूटरों ने हरिद्वार के होटल में रुककर रेकी की, रेंटल स्कूटी ली और शुक्रवार सुबह 10:40 बजे जिम से निकल रहे विक्रम पर पॉइंट ब्लैंक रेंज से गोलियां बरसा दीं।
जमशेदपुर पुलिस का अलर्ट
चूंकि विक्रम शर्मा का नाता जमशेदपुर के अंडरवर्ल्ड (अखिलेश सिंह गैंग) से रहा है, इसलिए इस हत्या के बाद जमशेदपुर पुलिस भी हाई अलर्ट पर है। आशंका जताई जा रही है कि इस हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए गैंगवार छिड़ सकता है।
”हत्या पूरी तरह से प्रोफेशनल तरीके से की गई थी। अरविंद ने ही शूटरों के लिए हथियारों का इंतजाम किया था। हम फरार आरोपियों की तलाश में झारखंड पुलिस के साथ समन्वय कर रहे हैं।”
— देहरादून पुलिस मुख्यालय











