एक नई सोच, एक नई धारा

21वीं सदी का सबसे बड़ा फैसला: पीएम मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में भरी हुंकार

n708266641177608101760490c354395033da96d79a66233bac84daecedf665cc2326c6eaa65c195663c2f8

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का निर्णायक मोड़ बताते हुए इसे “21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक” करार दिया।n708266641177608101760490c354395033da96d79a66233bac84daecedf665cc2326c6eaa65c195663c2f8

​प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल एक कानून नहीं, बल्कि नारी शक्ति के प्रति देश का वंदन है जो भविष्य की राजनीति और सामाजिक न्याय की दिशा तय करेगा।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

संबोधन की 10 मुख्य बातें:

  1. ऐतिहासिक निर्णय: पीएम मोदी ने कहा कि भारत एक ऐसे पड़ाव पर है जहां वह अपनी नियति बदलने वाला फैसला लेने जा रहा है, जो पूरी तरह से देश की महिलाओं को समर्पित है।
  2. बैसाखी और नववर्ष की शुभकामनाएं: अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने देशवासियों को बैसाखी और नववर्ष की बधाई दी, साथ ही जलियांवाला बाग के शहीदों को नमन किया।
  3. अतीत के संकल्प, भविष्य के लक्ष्य: उन्होंने कहा कि संसद एक ऐसा इतिहास रचने जा रही है जो दशकों पुराने संकल्पों को हकीकत में बदलेगा।
  4. सामाजिक न्याय का नया स्वरूप: पीएम मोदी के अनुसार, महिला आरक्षण से सामाजिक न्याय केवल एक नारा न रहकर शासन और कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनेगा।
  5. प्रतीक्षा का अंत: उन्होंने 16, 17 और 18 अप्रैल के दिनों को महिला आरक्षण की दशकों लंबी प्रतीक्षा के सुखद अंत के रूप में रेखांकित किया।
  6. विशेष बैठक का आयोजन: लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को समयबद्ध तरीके से मजबूत करने के लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक बुलाई गई है।
  7. आशीर्वाद की कामना: प्रधानमंत्री ने विनम्रतापूर्वक कहा, “मैं यहां उपदेश देने नहीं, बल्कि देश की माताओं-बहनों का आशीर्वाद लेने आया हूं।”
  8. चार दशक का संघर्ष: उन्होंने याद दिलाया कि इस कानून के लिए लगभग 40 वर्षों से संघर्ष और चर्चा चल रही थी, जिसमें कई पीढ़ियों का योगदान रहा है।
  9. सर्वसम्मति का समर्थन: पीएम ने बताया कि 2023 में जब यह अधिनियम लाया गया, तब विपक्ष सहित सभी दलों ने इसे 2029 तक लागू करने के लक्ष्य का समर्थन किया था।
  10. वैश्विक मंच पर बढ़ता गौरव: उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति में महिलाओं की सक्रियता देखकर दुनिया के बड़े नेता हैरान हैं। अध्ययनों से साबित हुआ है कि महिलाओं की भागीदारी से व्यवस्थाओं में संवेदनशीलता आती है।
error: Content is protected !!