काबुल/इस्लामाबाद: दक्षिण एशिया में युद्ध के बादल गहरा गए हैं। अफगानिस्तान के तालिबान शासन (इस्लामिक अमीरात) ने पाकिस्तान के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान करते हुए उसके कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर भीषण हमला करने का दावा किया है। इन हमलों में रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान वायुसेना का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘नूर खान एयरबेस’ भी शामिल है।

प्रमुख सैन्य ठिकानों पर स्ट्राइक
तालिबान के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, रविवार को पाकिस्तानी सेना की घेराबंदी करते हुए कई मिलिट्री साइट्स को निशाना बनाया गया। हमले के मुख्य केंद्र रहे:
- नूर खान एयरबेस: रावलपिंडी स्थित पीएएफ (PAF) का मुख्य आधार।
- 12वीं कोर: बलूचिस्तान के क्वेटा में स्थित सैन्य मुख्यालय।
- ख्वीजो मिलिट्री कैंप: खैबर पख्तूनख्वा की मोहमंद एजेंसी में स्थित कैंप।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की यादें हुईं ताजा
गौरतलब है कि पिछले साल मई में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया गया था। अब तालिबान के इस हमले ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और एयर डिफेंस सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों भड़का तालिबान?
अफगान मीडिया आउटलेट ‘टोलो न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई शनिवार और रविवार की रात पाकिस्तान द्वारा काबुल, बगराम और अन्य इलाकों में की गई बमबारी का करारा जवाब है।
- आम नागरिकों की मौत: तालिबान के आंकड़ों के अनुसार, 22 फरवरी से अब तक पाकिस्तानी हमलों में 52 अफगान नागरिकों की जान जा चुकी है और 66 घायल हुए हैं।
- ताजा हमला: शनिवार रात पाकिस्तान ने नंगरहार प्रांत के गनी खैल जिले में रिहायशी इलाकों पर ड्रोन हमले किए थे।
32 पाकिस्तानी सैनिक ढेर, 2 ड्रोन मार गिराए
रक्षा मंत्रालय के डिप्टी प्रवक्ता सेदुकुल्लाह नसरत ने दावा किया है कि अफगान सेना के जवाबी हमलों में पाकिस्तान के 32 सैनिक मारे गए हैं। इसके साथ ही तालिबान ने पाकिस्तानी सेना के दो आधुनिक ड्रोन भी मार गिराने का दावा किया है। रविवार सुबह 11 बजे क्वेटा में की गई एयर स्ट्राइक को इस ऑपरेशन का सबसे घातक हिस्सा बताया जा रहा है।
भारी नुकसान का दावा
तालिबान ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि इन हमलों से पाकिस्तान के सैन्य शासन को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंची है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से अभी तक जान-माल के नुकसान पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सीमा पर तनाव चरम पर है।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क











