मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश:
बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। करीब 10 साल पुराने धोखाधड़ी और अनुबंध उल्लंघन के एक मामले में मुरादाबाद की एसीजेएम-5 (ACJM-5) अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए अभिनेत्री के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी किया है। यह आदेश कोर्ट की निर्धारित तिथियों पर सुनवाई में अनुपस्थित रहने के कारण दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?
यह विवाद साल 2017 का है, जब मुरादाबाद के एक इवेंट मैनेजर पवन वर्मा ने अमीषा पटेल और उनकी टीम के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी।
- आरोप: इवेंट कंपनी का दावा है कि अमीषा पटेल ने मुरादाबाद में एक शादी समारोह में परफॉर्म करने के लिए 11 लाख रुपये की फीस ली थी।
- घटनाक्रम: आरोप के मुताबिक, फीस लेने के बाद अमीषा मुंबई से दिल्ली तक आ गई थीं, लेकिन दिल्ली पहुंचकर उन्होंने 2 लाख रुपये अतिरिक्त नकद की मांग की।
- धोखाधड़ी: इवेंट कंपनी द्वारा अतिरिक्त राशि देने से इनकार करने पर अमीषा दिल्ली से ही वापस मुंबई लौट गईं और कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं। इससे न केवल कंपनी को आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि उनकी प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंची।
इन धाराओं में चल रहा है केस
अधिवक्ता पंकज शर्मा के माध्यम से दर्ज कराए गए इस मामले में अमीषा पटेल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है:
- धारा 120-B: आपराधिक साजिश।
- धारा 406: विश्वासघात (Criminal breach of trust)।
- धारा 504: शांति भंग करने के इरादे से अपमान।
- धारा 506: आपराधिक धमकी।
जमानत की शर्तों का उल्लंघन
जानकारी के अनुसार, करीब दो साल पहले अमीषा पटेल ने मुरादाबाद कोर्ट में पेश होकर अपनी जमानत (Bail) करा ली थी। हालांकि, जमानत मिलने के बाद उन्होंने अदालती कार्यवाही और जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया। लगातार सुनवाई से नदारद रहने के कारण कोर्ट ने अब उनके खिलाफ फिर से वारंट जारी कर उन्हें 27 मार्च को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
राजपाल यादव को मिली राहत
एक तरफ जहाँ अमीषा पटेल कानूनी फेरबदल में उलझी हैं, वहीं चेक बाउंस के एक पुराने मामले में तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव को बड़ी राहत मिली है। उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई है, जिससे फिल्म जगत में उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली है।
कानूनी टिप्पणी: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमीषा पटेल 27 मार्च को कोर्ट में पेश नहीं होती हैं, तो उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया जा सकता है।










