जमशेदपुर: आस्था के महापर्व चैती छठ को लेकर लौहनगरी जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सूर्य मंदिर समिति ने व्रतधारियों की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए व्यापक इंतजाम किए हैं।
स्वच्छता और सजावट पर विशेष ध्यान
सूर्य मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि समिति के मुख्य संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास तथा संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह के कुशल मार्गदर्शन में तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है। मंदिर परिसर के दोनों तालाबों (छठ घाटों) की गहन सफाई कराई गई है और उनमें स्वच्छ जल भरा गया है। पूरे परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है।
व्रतियों के लिए सेवा शिविर और सुविधाएं
समिति द्वारा छठ व्रतियों की सेवा के लिए विशेष शिविर लगाए गए हैं:
- संध्या अर्घ्य (मंगलवार): श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय और शरबत के वितरण की व्यवस्था।
- प्रातः अर्घ्य (बुधवार): गाय का कच्चा दूध, अगरबत्ती, चाय और शुद्ध पेयजल का निःशुल्क वितरण।
- अन्य सुविधाएं: घाटों पर मेडिकल कैंप और महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम (कपड़े बदलने के कमरे) की समुचित व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा और नियम: ‘पहले आओ-पहले पाओ’
भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मंदिर समिति के पदाधिकारी और सैकड़ों स्वयंसेवक मुस्तैदी से तैनात रहेंगे। अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालु “पहले आओ-पहले पाओ” की तर्ज पर घाटों पर स्थान ग्रहण कर भगवान भास्कर को अर्घ्य दे सकेंगे।
समय सारणी:
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर के सभी घाटों के प्रवेश द्वार दोपहर 2 बजे खोल दिए जाएंगे। समिति ने सभी शहरवासियों से सूर्य मंदिर आकर इस पावन पर्व में सम्मिलित होने और भगवान भास्कर का आशीर्वाद लेने का आग्रह किया है।
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पर्व का दिन |
तिथि |
मुख्य अनुष्ठान |
अर्घ्य का समय (अनुमानित) |
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तीसरा दिन |
24 मार्च (मंगलवार) |
संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) |
सायं 05:58 बजे |
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चौथा दिन |
25 मार्च (बुधवार) |
उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) |
प्रातः 5:46 बजे |
नोट: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार 1-2 मिनट का अंतर हो सकता है। सिदगोड़ा सूर्य मंदिर के द्वार मंगलवार दोपहर 02:00 बजे से ही श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
व्रतियों के लिए विशेष निर्देश (सूर्य मंदिर समिति द्वारा):
- नियम: घाटों पर स्थान ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर मिलेगा।
- सुविधा: अर्घ्य के समय घाट परिसर में ही गाय का कच्चा दूध और पूजन सामग्री सेवा शिविरों द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
- सुरक्षा: भीड़ को देखते हुए कीमती आभूषण पहनकर आने से बचें और मंदिर समिति के स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करें।











