एक नई सोच, एक नई धारा

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शेखपुरा शर्मसार: स्कूल जा रही 8 वर्षीय मासूम से दुष्कर्म, पुलिस ने 8 घंटे के भीतर आरोपी को पहाड़ियों से दबोचा

शेखपुरा | 16 फरवरी, 2026

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​बिहार के शेखपुरा जिले के महुली थाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ स्कूल जा रही एक आठ वर्षीय नाबालिग छात्रा का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में बिजली की गति से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को महज 8 घंटे के भीतर पड़ोसी जिले की पहाड़ियों से गिरफ्तार कर लिया है।

​रास्ते से किया अपहरण, झाड़ियों में मिली मासूम

​जानकारी के मुताबिक, बच्ची रोजाना की तरह सुबह अपने घर से स्कूल के लिए निकली थी। इसी बीच रास्ते में घात लगाए बैठे आरोपी ने उसे अगवा कर लिया और एक सुनसान इलाके में ले जाकर दरिंदगी की। घटना का खुलासा तब हुआ जब पास से गुजर रही महिलाओं ने झाड़ियों से बच्ची के रोने की आवाज सुनी। महिलाओं को आता देख आरोपी मौके से फरार हो गया।

​विशेष टीम का गठन और फिल्मी स्टाइल में गिरफ्तारी

​घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई गई। तकनीकी साक्ष्यों (Mobile Tracking) के आधार पर पता चला कि आरोपी नवादा जिले की ओर भागा है। पुलिस ने पीछा करते हुए नवादा के कौआकोल क्षेत्र की पहाड़ियों में घेराबंदी की और आरोपी सन्नी उर्फ इज्मामुलहक को गिरफ्तार कर लिया।

​आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास

​पुलिस जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी सन्नी पहले भी दुष्कर्म के एक मामले में जेल जा चुका है। जेल से छूटने के बाद उसने दोबारा इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

​पुलिस और प्रशासन के बड़े कदम:

  • धाराएं: आरोपी के खिलाफ पोक्सो (POCSO) एक्ट और अपहरण की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट: पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की चार्जशीट जल्द दाखिल कर ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा ताकि पीड़िता को त्वरित न्याय मिले।
  • मेडिकल सहायता: बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और वह डॉक्टरों की निगरानी में है। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हर संभव आर्थिक और कानूनी मदद का भरोसा दिलाया है।

​’सेवा ही लक्ष्य’ और सामाजिक संगठनों की मांग

​इस घटना के बाद जमशेदपुर की तर्ज पर स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल जाने वाले रास्तों पर पुलिस पेट्रोलिंग और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाना अब अनिवार्य हो गया है।

एसडीपीओ का संदेश: “अपराधियों को शरण देने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा। हम इस मामले में स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित करेंगे ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।”

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शिमला: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल का कठोर कारावास, कोर्ट ने कहा- “नाबालिग की सहमति कानूनन शून्य”

शिमला | 16 फरवरी, 2026

​हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित फास्ट ट्रैक (पोक्सो) अदालत ने 2019 के एक संवेदनशील मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

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​शादी का झांसा देकर किया था अपहरण

​यह मामला रोहड़ू क्षेत्र का है। 17 अगस्त 2019 को आरोपी युवक एक 15 वर्षीय नाबालिग को शादी का झांसा देकर अपने ननिहाल ले गया था। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 22 अगस्त 2019 को युवती को बरामद किया। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि इस दौरान आरोपी ने उसके साथ कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए।

​फोरेंसिक साक्ष्य और स्कूल रिकॉर्ड बने आधार

​अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत पेश किए:

  • मेडिकल और DNA रिपोर्ट: फोरेंसिक जांच में आरोपी के साक्ष्य पीड़िता से मेल खाए, जिससे अपराध की पुष्टि हुई।
  • उम्र का प्रमाण: स्कूल प्रवेश रजिस्टर और पंचायत प्रमाणपत्र के आधार पर यह साबित हुआ कि पीड़िता की उम्र मात्र 15 वर्ष थी।

​अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

​फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश विवेक शर्मा ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में समाज और कानून कोई नरमी नहीं बरत सकता। कोर्ट की मुख्य बातें:

  1. सहमति का अभाव: अदालत ने कहा कि चूंकि पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए उसकी ‘सहमति’ का कानून में कोई महत्व नहीं है।
  2. शादी की दलील खारिज: आरोपी की “शादी करने के इरादे” वाली दलील को कोर्ट ने कानूनन टिकाऊ नहीं माना।
  3. कठोर संदेश: ऐसे अपराध समाज के लिए चिंता का विषय हैं और दोषियों को सख्त सजा मिलना अनिवार्य है।

​पुनर्वास के लिए 4 लाख का मुआवजा

​अदालत ने केवल सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि पीड़िता के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा है। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को सिफारिश भेजी है कि पीड़िता के पुनर्वास के लिए उसे 4 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए।

​फैसले का सारांश:

विवरणसजा/प्रावधान
मुख्य सजा20 साल का कठोर कारावास
जुर्माना₹10,000 (अदा न करने पर 6 माह अतिरिक्त जेल)
मुआवजा (सिफारिश)₹4,00,000 (पुनर्वास हेतु)
धाराएंIPC 376 और POCSO एक्ट की धारा 6

पुलिस का रुख: शिमला पुलिस ने इस फैसले का स्वागत किया है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों (DNA) और त्वरित जांच के कारण ही पीड़िता को 7 साल के भीतर न्याय मिल सका है।

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जमशेदपुर विमेंस कॉलेज की छात्राएं बनेंगी ‘रक्षक’: 71 छात्राओं के लिए सात दिवसीय सिविल डिफेंस प्रशिक्षण शुरू

जमशेदपुर | 16 फरवरी, 2026

​किसी भी आपदा के समय धैर्य और सही तकनीक से जान बचाई जा सकती है। इसी उद्देश्य के साथ जमशेदपुर के सिविल डिफेंस कार्यालय में आज से सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का भव्य आगाज़ हुआ। इस शिविर में जमशेदपुर विमेंस कॉलेज की 71 छात्राएं आपदा प्रबंधन के गुर सीख रही हैं।

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​IAS अरनव मिश्रा ने किया उद्घाटन

​कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ नागरिक सुरक्षा के उप नियंत्रक सह अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) श्री अरनव मिश्रा (IAS) ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिक सुरक्षा केवल एक विभाग नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है। ऐसी ट्रेनिंग से महिलाएं न केवल स्वयं को सुरक्षित रख सकती हैं, बल्कि संकट के समय समाज की ढाल भी बन सकती हैं।

​सात दिनों तक चलेगा गहन प्रशिक्षण

​इस शिविर के दौरान छात्राओं को थ्योरी और प्रैक्टिकल (प्रायोगिक) दोनों माध्यमों से प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:

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  • अग्निशमन (Fire Safety): आग के प्रकार, वर्गीकरण और अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) को चलाने का लाइव डेमो।
  • प्राथमिक चिकित्सा (First Aid): रक्तस्राव रोकना, पट्टियां बांधना, फ्रैक्चर मैनेजमेंट और जीवन रक्षक तकनीक CPR का व्यावहारिक ज्ञान।
  • रेस्क्यू ऑपरेशंस: भूकंप, बाढ़ या बिल्डिंग गिरने (Building Collapse) जैसी स्थितियों में ‘सर्च एंड रेस्क्यू’ के तरीके।
  • युद्धकालीन सुरक्षा: हवाई हमले की चेतावनी और आधुनिक हथियारों से बचाव के प्रति जागरूकता।
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जमशेदपुर: मानगो पुल पर जाम और अव्यवस्था के खिलाफ ‘सेवा ही लक्ष्य’ संस्था मुखर, DC से हस्तक्षेप की मांग

जमशेदपुर | 16 फरवरी, 2026

​लौहनगरी जमशेदपुर की लाइफलाइन कहे जाने वाले मानगो पुल पर जारी निर्माण कार्य और उससे उत्पन्न ट्रैफिक की समस्या अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गई है। इस गंभीर मुद्दे पर ‘सेवा ही लक्ष्य (युवाशक्ति)’ संस्था के संस्थापक पीयूष ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।

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​”कोई सुरक्षा नहीं, हादसे का कौन होगा जिम्मेदार?”

​पीयूष ठाकुर ने मीडिया के माध्यम से बताया कि मानगो में नए पुल का निर्माण महीनों से चल रहा है, लेकिन कार्यस्थल पर सुरक्षा के मानकों की भारी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि:

​”निर्माण स्थल पर न तो कोई उचित सुरक्षा घेरा है और न ही चेतावनी के संकेत। आए दिन यहाँ खाई और गड्ढे बन रहे हैं। अगर कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?”

​मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जान पर आफत

​संस्था के संस्थापक ने पुराने पुल पर लगने वाले भीषण जाम पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जाम की वजह से:

  • एम्बुलेंस समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पा रही हैं।
  • गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ रहा है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
  • ​आम जनता का कीमती वक्त और ईंधन बर्बाद हो रहा है।

​DC और ट्रैफिक पुलिस से विशेष अपील

​पीयूष ठाकुर ने जमशेदपुर के उपायुक्त (DC) श्री अनन्य मित्तल (नोट: वर्तमान DC के संदर्भ में सुधार) और ट्रैफिक विभाग से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  1. भारी वाहनों पर रोक: जाम की स्थिति को देखते हुए व्यस्त समय में बड़े वाहनों के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
  2. प्रशासनिक हस्तक्षेप: उपायुक्त स्वयं मामले का संज्ञान लें और निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ सुरक्षा सुनिश्चित करवाएं।
  3. ट्रैफिक मैनेजमेंट: जमशेदपुर ट्रैफिक पुलिस से विनती की गई है कि पुल पर जवानों की तैनाती बढ़ाई जाए ताकि यातायात सुचारू रह सके।

​जन-संवाद: सेवा ही लक्ष्य की मुहिम

​पीयूष ठाकुर ने स्पष्ट किया कि ‘सेवा ही लक्ष्य’ संस्था जनता के हक के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो जनता का आक्रोश बढ़ सकता है।

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चेक बाउंस मामला: राजपाल यादव को मिली बड़ी राहत, भतीजी की शादी के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत

नई दिल्ली | 16 फरवरी, 2026

​बॉलीवुड के दिग्गज कॉमेडियन राजपाल यादव के लिए सोमवार का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन शाम होते-होते उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता की सजा को कोर्ट ने 18 मार्च, 2026 तक के लिए निलंबित करते हुए उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है।

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​3 बजे की डेडलाइन और 1.5 करोड़ का भुगतान

​सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख बेहद कड़ा था। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने स्पष्ट किया था कि यदि राजपाल को अपनी भतीजी की शादी (जो 19 फरवरी को है) में शामिल होने के लिए जमानत चाहिए, तो उन्हें दोपहर 3 बजे तक 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (DD) प्रतिवादी के नाम पर जमा करना होगा। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, अभिनेता की टीम ने समय सीमा के भीतर यह राशि जमा कर दी, जिसके बाद कोर्ट ने उनकी रिहाई का रास्ता साफ किया।

​जमानत के लिए कोर्ट की शर्तें:

​अदालत ने राहत तो दी है, लेकिन इसके साथ कुछ कड़ी शर्तें भी जुड़ी हैं:

  • पासपोर्ट सरेंडर: राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करना होगा।
  • देश छोड़ने पर रोक: वे बिना इजाजत देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
  • मुचलका: उन्हें 1 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की ज़मानत देनी होगी।
  • अगली सुनवाई: 18 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में उन्हें व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहना अनिवार्य होगा।

​क्या है पूरा मामला?

​राजपाल यादव के इस कानूनी संकट की शुरुआत साल 2010 में हुई थी। उन्होंने अपनी बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए दिल्ली की एक कंपनी (मुरली प्रोजेक्ट्स) से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म फ्लॉप होने के बाद कर्ज की रकम ब्याज समेत करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। भुगतान के लिए दिए गए कई चेक बाउंस होने के बाद मामला कोर्ट पहुंचा।

​इस मामले में अभिनेता को पहले भी जेल की सजा काटनी पड़ी थी और हाल ही में 5 फरवरी, 2026 को उन्होंने फिर से सरेंडर किया था।

​साख पर सवाल और इंडस्ट्री का साथ

​बार-बार कोर्ट के चक्करों ने राजपाल की ‘क्रेडिबिलिटी’ पर भले ही सवाल उठाए हों, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री उनके साथ खड़ी नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सोनू सूद, सलमान खान और वरुण धवन जैसे सितारों ने इस मुश्किल घड़ी में उनका समर्थन किया है।

विशेष नोट: यह मामला वित्तीय अनुशासन की अहमियत को रेखांकित करता है कि कैसे एक गलत व्यावसायिक फैसला किसी चमकते करियर को सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है।

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विशेष रिपोर्ट: अपराध की दलदल में फंसता बचपन; दिल्ली में डरा रहे नाबालिगों के बढ़ते आपराधिक आँकड़े

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था के सामने एक नई और भयावह चुनौती खड़ी हो गई है। दिल्ली पुलिस और सामाजिक विशेषज्ञों की हालिया रिपोर्ट्स एक चिंताजनक सच उजागर कर रही हैं—दिल्ली के किशोर (12 से 17 वर्ष) तेजी से गंभीर अपराधों की राह पकड़ रहे हैं। विशेषकर झुग्गी-बस्तियों और पुनर्वास कॉलोनियों में स्थिति विस्फोटक होती जा रही है।

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आंकड़ों की जुबानी: बढ़ता ग्राफ

​दिल्ली पुलिस के तुलनात्मक आंकड़े बताते हैं कि नाबालिग अब केवल छोटी-मोटी चोरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हत्या और लूट जैसे जघन्य अपराधों में उनकी संलिप्तता बढ़ी है:

अपराध की श्रेणी2024 (पकड़े गए नाबालिग)2025 (पकड़े गए नाबालिग)
कुल आपराधिक मामले32703833
हत्या के मामले+17 (पिछले वर्ष से अधिक)
जानलेवा हमले+123 (पिछले वर्ष से अधिक)
लूटपाट+109 (पिछले वर्ष से अधिक)

हालिया वारदातों ने दहलाया दिल्ली का दिल

​फरवरी 2026 के शुरुआती पखवाड़े में हुई घटनाओं ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है:

  • 12 फरवरी: नरेला (बवाना) में एक 17 वर्षीय किशोर की चाकू गोदकर हत्या, जिसमें 4 नाबालिग शामिल थे।
  • 11 फरवरी: रोहिणी में मामूली विवाद में एक किशोर की हत्या।
  • 9 फरवरी: मंगोलपुरी में स्कूल के सामने 15 वर्षीय छात्र की हत्या, जिसे चार नाबालिगों ने अंजाम दिया।

क्यों बदल रहा है गलियों का माहौल?

​विशेषज्ञों के अनुसार, अपराध के इस बढ़ते ग्राफ के पीछे सामाजिक और आर्थिक कारण गहराई से जुड़े हैं:

  1. संवाद की कमी: झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पाते, जिससे बच्चे मार्गदर्शन के अभाव में गलत संगति का शिकार हो जाते हैं।
  2. आर्थिक असमानता: रिपोर्ट के अनुसार, 75% मामले पुनर्वास बस्तियों से आते हैं, जहाँ अभाव और उपेक्षा बच्चों को अपराध की ओर धकेलती है।
  3. मानसिक स्वास्थ्य: मनोचिकित्सकों का मानना है कि कई किशोर ‘कंडक्ट डिसऑर्डर’ से जूझ रहे हैं, जहाँ वे हिंसक व्यवहार को बहादुरी समझने लगते हैं।

विशेषज्ञों की राय और समाधान

​पुलिस अधिकारियों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि केवल ‘सख्ती’ इस समस्या का हल नहीं है। समाधान के लिए त्रिस्तरीय रणनीति की आवश्यकता है:

  • पारिवारिक स्तर पर: माता-पिता बच्चों की दैनिक गतिविधियों और सोशल मीडिया व्यवहार पर नजर रखें।
  • प्रशासनिक स्तर पर: स्कूलों में नियमित काउंसलिंग और खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए।
  • सामुदायिक स्तर पर: झुग्गी-बस्तियों में ‘स्किल डेवलपमेंट’ और रोजगार के अवसर पैदा करना ताकि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा मिले।
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अलवर: भिवाड़ी की गत्ता फैक्ट्री में भीषण अग्निकांड, 7 श्रमिकों की मौत; धमाकों से दहला खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र

भिवाड़ी (अलवर): राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक केंद्र भिवाड़ी के खुशखेड़ा क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ। यहाँ एक बंद पड़ी गत्ता फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 7 श्रमिकों के झुलसे हुए शव बरामद किए जा चुके हैं।

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धमाकों से गूंजा परिसर, गैस सिलेंडरों में विस्फोट की आशंका

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी भयानक थी कि फैक्ट्री परिसर के भीतर से लगातार धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है कि फैक्ट्री के अंदर रखे गैस सिलेंडर या अन्य ज्वलनशील रसायनों में विस्फोट होने के कारण आग ने तेजी से विस्तार किया। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि कई किलोमीटर दूर से काला धुआं देखा जा सकता था।

बंद फैक्ट्री में श्रमिकों की मौजूदगी ने खड़े किए सवाल

​हादसे ने प्रशासन और औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारी के अनुसार, यह प्लांट पिछले दो महीने से बंद पड़ा था। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि अगर फैक्ट्री बंद थी, तो अंदर श्रमिक किस हैसियत से मौजूद थे? क्या वहाँ अवैध रूप से काम चल रहा था या रखरखाव के नाम पर श्रमिकों की जान जोखिम में डाली गई थी?

रेस्क्यू ऑपरेशन में आईं मुश्किलें

​घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दर्जनों गाड़ियां मौके पर पहुँचीं। भारी धुएं और रुक-रुक कर हो रहे धमाकों के कारण बचाव दल (SDRF/Fire Brigade) को अंदर प्रवेश करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर:

  • ​आसपास के इलाके को खाली करा दिया है।
  • ​पूरे औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा घेरा (Cordoned off) बना दिया गया है।
  • ​राहत कार्य अभी भी जारी है, क्योंकि कुछ और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।

जांच के घेरे में सुरक्षा मानक

​स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है। जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. अग्नि सुरक्षा: क्या फैक्ट्री में फायर एनओसी (NOC) और सुरक्षा उपकरण मौजूद थे?
  2. अवैध संचालन: बंद फैक्ट्री के भीतर श्रमिकों की उपस्थिति का कानूनी आधार क्या था?
  3. विस्फोट का कारण: धमाके किस सामग्री की वजह से हुए?

प्रशासनिक आश्वासन

​घटना के बाद इलाके में शोक की लहर है और औद्योगिक संघों में आक्रोश देखा जा रहा है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहायता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: बुजुर्गों को प्रताड़ित करने वाले बेटा-बहू को घर में रहने का अधिकार नहीं

राँची: झारखंड हाई कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया है कि यदि बेटा और बहू अपने बुजुर्ग माता-पिता को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं, तो उन्हें माता-पिता की अर्जित संपत्ति में जबरन रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

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उत्तराधिकार का मतलब तत्काल मालिकाना हक नहीं

​न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत ने सुनवाई के दौरान कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि कानून का प्राथमिक उद्देश्य बुजुर्गों को उनके जीवन के अंतिम पड़ाव में एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करना है। अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की:

​”बेटा-बहू का अधिकार केवल ‘उत्तराधिकार’ पर आधारित होता है, उसे ‘तत्काल स्वामित्व’ (Immediate Ownership) नहीं माना जा सकता। यदि विवाद की स्थिति बनी रहती है, तो मकान का कब्जा वरिष्ठ नागरिकों को ही सौंपा जाना चाहिए।”

​कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि सम्मान और सुरक्षा के साथ जीना बुजुर्गों का मौलिक अधिकार है।

क्या था पूरा मामला?

​यह मामला रामगढ़ जिले के निवासी लखन लाल पोद्दार (75 वर्ष) और उनकी पत्नी उमा रानी पोद्दार (72 वर्ष) से जुड़ा है।

  • पीड़ित माता-पिता का आरोप: उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उनका बेटा जितेंद्र पोद्दार और बहू रितु पोद्दार उन्हें लगातार परेशान करते हैं और घर में शांति से रहने नहीं देते।
  • कानूनी लड़ाई: बुजुर्ग दंपत्ति ने 2022 में ‘मेंटेनेंस एक्ट’ के तहत एसडीएम के पास गुहार लगाई थी। 23 नवंबर 2022 को एसडीएम ने बेटे-बहू को मकान खाली करने का आदेश दिया था।
  • ट्विस्ट: इस आदेश के खिलाफ बेटा-बहू उपायुक्त (DC) के पास गए, जहाँ 23 फरवरी 2024 को डीसी ने एसडीएम के आदेश को बदलते हुए बेटा-बहू के पक्ष में फैसला सुनाया।

हाई कोर्ट ने रद्द किया उपायुक्त का आदेश

​बुजुर्ग माता-पिता ने उपायुक्त के उस संशोधित आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और बुजुर्गों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए रामगढ़ उपायुक्त के आदेश को निरस्त कर दिया और बुजुर्ग दंपत्ति की याचिका को स्वीकार कर लिया।

निष्कर्ष: वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी जीत

​यह फैसला समाज के उन हजारों वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो अपने ही बच्चों द्वारा अपनी संपत्ति से बेदखल या प्रताड़ित किए जा रहे हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि शांतिपूर्ण जीवन जीने का हक संपत्ति के वारिस होने के दावे से कहीं ऊपर है।

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सीनी: महाशिवरात्रि पर शिव मंदिर पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, भव्य शिव बारात में हुए शामिल

सीनी/जमशेदपुर: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा अपनी धर्मपत्नी मीरा मुंडा के साथ सीनी पहुँचे। उन्होंने सीनी बाजार स्थित पौराणिक शिव मंदिर में माथा टेका और विधि-विधान से बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

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शिव बारात में उत्साह के साथ हुए शामिल

​मंदिर में पूजन के पश्चात अर्जुन मुंडा सीनी में भव्य रूप से निकाली गई शिव बारात में शामिल हुए। बारात में उमड़े जनसैलाब के बीच उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना। शिव भक्तों के उत्साह और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ने श्रद्धापूर्वक शोभायात्रा का हिस्सा बनकर खुशियाँ साझा कीं।

जनसमस्याओं को सुना और दिया आश्वासन

​भ्रमण के दौरान स्थानीय नागरिकों ने अर्जुन मुंडा को क्षेत्र की विभिन्न मूलभूत समस्याओं से अवगत कराया। लोगों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि वे अपने स्तर से इन समस्याओं के त्वरित और हरसंभव निदान के लिए प्रयास करेंगे।

इनकी रही मुख्य उपस्थिति

​इस धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित गणमान्य उपस्थित रहे:

  • ​मंटू शर्मा, मुरली प्रधान, किशनदेव चौधरी, मनोज कुमार सिंहदेव।
  • ​निरंजन सिंह, पंचू मुखी, नितेश चौधरी, बबलू दास, श्री मंडल एवं अन्य कार्यकर्ता व स्थानीय नागरिक।

प्रमुख अंश:

  • पौराणिक मंदिर: सीनी बाजार शिव मंदिर में माथा टेका।
  • भक्तिमय माहौल: शिव बारात में शामिल होकर कार्यकर्ताओं का बढ़ाया उत्साह।
  • जनसंवाद: क्षेत्र की समस्याओं के समाधान का दिया भरोसा।
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स्वर्णरेखा और खरकई के संगम पर उतरी ‘काशी’, बन्ना गुप्ता और सुधा गुप्ता ने किया भव्य नदी पूजन

जमशेदपुर: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सोमवार, 16 फरवरी 2026 को सोनारी दोमुहानी संगम तट पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की अगुवाई में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में हजारों शिव भक्तों का जुटान हुआ, जिससे पूरा लौहनगरी शिवमय हो गया।

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बनारस की तर्ज पर स्वर्णरेखा आरती

​कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बनारस के अस्सी घाट की तर्ज पर हुई भव्य स्वर्णरेखा आरती रही। काशी से आए प्रसिद्ध आशुतोष महाराज और उनके पंडितों के समूह ने मंत्रोच्चारण और शंखनाद के साथ नदी की आरती उतारी। दीपों की रोशनी और धूप की सुगंध ने संगम तट पर एक अलौकिक और दिव्य वातावरण निर्मित कर दिया।

नदी पूजन और भगवान शिव की स्तुति

​आरती से पूर्व पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने अपनी धर्मपत्नी और मानगो नगर निगम की मेयर प्रत्याशी श्रीमती सुधा गुप्ता के साथ मां स्वर्णरेखा का विधिवत नदी पूजन किया।

  • पुष्प वर्षा और आतिशबाजी: पूजन के दौरान आकाश अलौकिक पुष्प वर्षा और भव्य आतिशबाजी से सराबोर हो उठा।
  • भजनों की अमृत वर्षा: स्थानीय कलाकार कृष्ण मूर्ति के भजनों ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।

दोमुहानी संगम: बन्ना गुप्ता का ड्रीम प्रोजेक्ट

​गौरलतब है कि सोनारी दोमुहानी संगम क्षेत्र को बन्ना गुप्ता ने अपने मंत्री काल के दौरान एक पर्यटन और धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया है। यहाँ स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा और कलाकृतियाँ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

बन्ना गुप्ता ने कहा: “नदी हमारी जीवनदायिनी है और महादेव इस सृष्टि के आधार। संगम तट पर श्रद्धालुओं का यह प्रेम और भक्ति जमशेदपुर की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।”

प्रमुख आकर्षण:

  • आशुतोष महाराज (बनारस) के नेतृत्व में भव्य आरती।
  • शिव की कलाकृतियाँ और संगम तट की सजावट।
  • ​हजारों की संख्या में उमड़ी शिव भक्तों की भीड़
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