एक नई सोच, एक नई धारा

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घरेलू गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव: उज्ज्वला और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए नई समय-सीमा तय

पटना/डेस्क: घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत और बुकिंग को लेकर असमंजस में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने सिलेंडर बुकिंग के प्रतिबंध नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए पूरी प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और पारदर्शी बना दिया है। नए नियमों के लागू होने से अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा।1002480797

क्या हैं बुकिंग के नए नियम?

​नए सरकारी निर्देश के अनुसार, अब गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के लिए लाभार्थियों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:

  • सामान्य उपभोक्ता (Non-PMUY): गैर-प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना वाले उपभोक्ता अब 25 दिनों के अंतराल पर दूसरा सिलेंडर बुक कर सकेंगे।
  • उज्ज्वला योजना लाभार्थी (PMUY): प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए यह समय-सीमा 45 दिन निर्धारित की गई है।

श्रेणीगत प्रतिबंध हुए समाप्त

​इस बदलाव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब वितरण प्रणाली में शहरी (Urban), ग्रामीण (Rural) और दुर्गम (Inaccessible) क्षेत्रों के आधार पर लागू अलग-अलग प्रतिबंधों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

​साईं गैस एजेंसी के संचालक नीरज कुमार लाल ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले मार्केट टाइप के आधार पर नियमों में असमानता थी, जिससे वितरण में तकनीकी समस्याएं आती थीं। अब पूरे देश में एकसमान नियम लागू होने से वितरण व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होगी।

आम जनता को क्या होगा लाभ?

  1. भ्रम की स्थिति खत्म: पहले अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग नियम होने से उपभोक्ताओं में असमंजस रहता था, जो अब दूर हो जाएगा।
  2. कृत्रिम किल्लत पर रोक: बुकिंग प्रक्रिया सरल होने से सिलेंडरों की कालाबाजारी और कृत्रिम किल्लत पर अंकुश लगेगा।
  3. बेहतर समन्वय: गैस एजेंसियों और ग्राहकों के बीच तालमेल बेहतर होगा, जिससे समय पर डिलीवरी सुनिश्चित की जा सकेगी।
  4. ग्रामीण क्षेत्रों को राहत: दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को अब शहरी उपभोक्ताओं के समान ही पारदर्शी सेवा मिलेगी।

विशेषज्ञों की राय

​स्थानीय उपभोक्ताओं और गैस एजेंसी संचालकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन नियमों का सख्ती से पालन किया गया, तो आने वाले समय में गैस आपूर्ति की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा और एजेंसियों पर भी अनावश्यक दबाव कम होगा।

रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज

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भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: शिवहर DDC बृजेश कुमार पर SVU का शिकंजा, पत्नी के नाम करोड़ों का ‘सफेद’ खेल

पटना/शिवहर: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने एक और बड़े प्रशासनिक अधिकारी का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। शिवहर के उप विकास आयुक्त (DDC) बृजेश कुमार अब जांच के घेरे में हैं। मुजफ्फरपुर में SDO रहने के दौरान पद का दुरुपयोग कर काली कमाई करने और उसे पत्नी के नाम पर निवेश करने के गंभीर साक्ष्यों ने अफसर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।n70582814817743858981227e1ac928993dde22fbe0887242a294eb3d2e29e41ee3685ccf977d339960c7a9

सगुना मोड़ की ‘आलीशान’ संपत्तियों ने खोला राज

​SVU की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा राजधानी पटना के प्राइम लोकेशन सगुना मोड़ को लेकर हुआ है। साल 2023 में जब बृजेश कुमार मुजफ्फरपुर (पश्चिमी) के SDO थे, तब उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि कुमारी के नाम पर एक के बाद एक चार कीमती संपत्तियां खरीदीं।

  • बाजार मूल्य करोड़ों में: इन संपत्तियों का सरकारी मूल्य करीब 2.26 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि बाजार भाव इससे कहीं अधिक है।
  • कमर्शियल निवेश: दानापुर के ‘ओम गंगा परिसर’ और ‘प्रगति टावर’ जैसे नामी कमर्शियल सेंटरों में कीमती दुकानें खरीदी गईं।

आय से 1.44 करोड़ अधिक की संपत्ति: बेनामी निवेश का जाल

​विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज कांड संख्या-11/26 के अनुसार, DDC बृजेश कुमार पर अपनी ज्ञात आय से 1 करोड़ 44 लाख 32 हजार 900 रुपये अधिक अर्जित करने का पुख्ता आरोप है।

​जांच का दायरा केवल अधिकारी तक सीमित नहीं रहा। SVU की टीम ने सीतामढ़ी में उनके ससुर (सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता) के आवास पर भी दबिश दी। जांच में निम्नलिखित निवेश सामने आए हैं:

  1. बैंक निवेश: विभिन्न वित्तीय संस्थानों में 21 लाख रुपये से अधिक के निवेश के सबूत।
  2. संदेहास्पद उपहार: नरकटियागंज में एक संबंधी से ‘उपहार’ के रूप में मिली 31 लाख रुपये की जमीन भी अब रडार पर है।

सरकारी रिकॉर्ड में ‘साफ-सुथरे’, हकीकत में ‘करोड़पति’

​इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू पारदर्शिता का अभाव है। बृजेश कुमार ने हर साल सरकार को सौंपे जाने वाले अपने संपत्ति विवरण (Asset Declaration) में इन चल-अचल संपत्तियों का कोई जिक्र नहीं किया था। उन्होंने अपनी और पत्नी की बेनामी संपत्तियों को पूरी तरह गोपनीय रखा, जबकि SVU ने उनकी पत्नी के नाम से पांच संपत्तियों के डीड (दस्तावेज) बरामद किए हैं।

अगला कदम: निगरानी इकाई अब उन गुप्त निवेशों और ‘बेनामी’ संपत्तियों की तलाश में है जो रिश्तेदारों के नाम पर छिपाई गई हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

 

रिपोर्ट: डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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श्रीनाथ विश्वविद्यालय में गूंजा ‘फूड–प्लैनेट–हेल्थ’ का संदेश: पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए ‘वीगन’ जीवनशैली को बताया जरूरी

जमशेदपुर: भविष्य की चुनौतियों और बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को देखते हुए श्रीनाथ विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई और वीगन आउटरीच संस्था ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शुक्रवार को आयोजित एक विशेष वेबिनार में विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि पशु आधारित भोजन न केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि धरती के अस्तित्व के लिए भी संकट पैदा कर रहा है।IMG 20260324 WA0039

पौध आधारित भोजन: वक्त की मांग

​वेबिनार के मुख्य वक्ता, वीगन आउटरीच के अभिषेक दुबे ने विस्तार से बताया कि कैसे हमारी खान-पान की आदतें वैश्विक समस्याओं से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा:

  • पर्यावरण संरक्षण: पौध आधारित (Plant-based) भोजन अपनाने से वनों की कटाई, जैव विविधता का ह्रास और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
  • मानव स्वास्थ्य: वीगन डाइट न केवल शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करती है।
  • SDG लक्ष्य: जिम्मेदार उपभोग संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे अपनाना हर नागरिक की प्राथमिकता होनी चाहिए।

विद्यार्थियों को मानवीय जीवनशैली की प्रेरणा

​कार्यक्रम का संचालन कर रहीं एनएसएस समन्वयक सुश्री शालिनी ओझा ने कहा कि इस वेबिनार का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें एक जागरूक और मानवीय जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी दैनिक आदतों में बदलाव लाकर पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा में अपना योगदान दें।

150 स्वयंसेवकों ने ली सीख

​इस डिजिटल चर्चा में विश्वविद्यालय के लगभग 150 विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वीगन विकल्पों को तलाशने और उन्हें समाज में बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

तीसरी धारा न्यूज – डिजिटल हेडलाइंस

  • बदलाव की पहल: श्रीनाथ विश्वविद्यालय में ‘फूड-प्लैनेट-हेल्थ’ पर मंथन; 150 छात्रों ने सीखा वीगन डाइट का महत्व।
  • धरती को बचाने का मंत्र: पशु आधारित भोजन छोड़, पौध आधारित विकल्प अपनाने की अपील; श्रीनाथ विवि में वेबिनार आयोजित।
  • शिक्षा और जागरूकता: वीगन आउटरीच और NSS का संयुक्त प्रयास, जमशेदपुर के युवाओं को दिया पर्यावरण सुरक्षा का संदेश।
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सेवा की मिसाल: बागबेड़ा कॉलोनी में अस्थाई छठ घाटों पर राजकुमार सिंह ने कराई निःशुल्क पानी की व्यवस्था

जमशेदपुर (बागबेड़ा): लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर जहाँ एक ओर अव्यवस्थाओं की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत क्षेत्र में मानवता और सेवा की एक सुखद तस्वीर देखने को मिली। श्रद्धालुओं और छठ व्रतियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने अपने निजी संसाधनों से अस्थाई छठ घाटों पर पानी उपलब्ध कराकर सराहनीय पहल की है।IMG 20260324 WA0025

इन प्रमुख स्थानों पर पहुँचा टैंकर

​पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता के विशेष आग्रह पर राजकुमार सिंह ने अपने निजी पानी टैंकरों के माध्यम से तीन प्रमुख अस्थाई घाटों को जलमग्न कराया:

  1. रोड नंबर 1: श्री कृष्णा पब्लिक स्कूल के समीप त्रिपाठी जी के बागान परिसर।
  2. रोड नंबर 1: रंजन श्रीवास्तव के घर के पास बना अस्थाई घाट।
  3. रोड नंबर 5: काली मंदिर परिसर स्थित छठ घाट।

“सच्ची मानव सेवा ही धर्म” – राजकुमार सिंह

​इस अवसर पर राजकुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि पर्व-त्योहारों के समय जरूरतमंदों की सेवा करना ही सबसे बड़ा पुण्य है। उन्होंने स्थानीय निवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि केवल छठ ही नहीं, बल्कि आने वाले भीषण गर्मी के मौसम में भी पिछले वर्षों की भांति जरूरतमंद क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की निःशुल्क आपूर्ति निरंतर जारी रखी जाएगी।IMG 20260324 WA0026

जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की रही मौजूदगी

​पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता और उप मुखिया संतोष ठाकुर ने बताया कि इस व्यवस्था से क्षेत्र के सैकड़ों छठ व्रतियों को अर्घ्य देने में बड़ी सहूलियत होगी। इस नेक कार्य के लिए स्थानीय निवासियों ने राजकुमार सिंह का आभार व्यक्त किया है।

​इस दौरान समाजसेवी पिंटू त्रिपाठी, रंजन, देवलोचन, टुनटुन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिन्होंने इस सामूहिक प्रयास की सराहना की।

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प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ा दोमुंहानी छठ घाट: बदहाली के बीच अर्घ्य देने को मजबूर हुए श्रद्धालु

जमशेदपुर: लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर जहाँ शहर के अन्य क्षेत्रों में उत्सव का माहौल है, वहीं सोनारी स्थित दोमुंहानी घाट पर प्रशासन की भारी लापरवाही और नाकामी का एक अजब नजारा देखने को मिला। ‘तीसरी धारा न्यूज’ की पड़ताल में यह साफ हुआ कि महापर्व को लेकर जिला प्रशासन द्वारा किए गए बड़े-बड़े दावे धरातल पर पूरी तरह खोखले साबित हुए।IMG 20260324 174039

गंदगी के अंबार और अव्यवस्था के बीच छठ

​हैरानी की बात यह है कि छठ जैसे पवित्र त्योहार पर भी दोमुंहानी घाट की साफ-सफाई की सुध लेने वाला कोई नहीं था। घाट पर चारों ओर गंदगी और कचरे का अंबार लगा रहा, जिसके बीच से होकर छठ व्रतियों को नदी तक पहुंचना पड़ा। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भारी रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बावजूद यहाँ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी।1002518072

सुरक्षा के नाम पर ‘शून्य’: न रेस्क्यू टीम, न पार्किंग

​सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की लापरवाही डराने वाली रही। घाट पर किसी भी प्रकार की रेस्क्यू टीम या गोताखोरों की तैनाती नहीं देखी गई। गहरे पानी वाले इस संगम स्थल पर अगर कोई अप्रिय घटना घट जाती, तो उसका जिम्मेदार कौन होता? प्रशासन की यह चुप्पी किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसी है।IMG 20260324 172437

​इसके अलावा, यातायात और पार्किंग व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई रही। सही पार्किंग स्लॉट न होने के कारण सड़कों पर घंटों जाम लगा रहा, जिससे श्रद्धालुओं और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

तीसरी धारा न्यूज का सवाल

​सफाई, सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करना नगर निकाय और जिला प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए थी। क्या प्रशासन केवल कागजों पर ही तैयारी करता है? आज की इस बदहाली ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आस्था के इस महापर्व पर आम जनता की सुरक्षा और सुविधा की कोई अहमियत नहीं है?

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ऐतिहासिक फैसला: महिला सैन्य अफसरों को स्थायी कमीशन पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, CJI ने कहा- भेदभाव बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली: भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में आज एक नया इतिहास रचा गया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने एक युगांतकारी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि महिला सैन्य अधिकारी सेना में स्थायी कमीशन (Permanent Commission) की पूर्ण हकदार हैं। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए महिलाओं के मूल्यांकन में होने वाले ‘संस्थागत भेदभाव’ को खत्म करने का आदेश दिया है।n7057424601774343728328e4a6e6e2fe588edecbbf71028823a4fb5d112c9a9aecf92d30db902f617cefdc

मूल्यांकन ढांचे में छिपा था भेदभाव: CJI

​सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने सेना की मूल्यांकन प्रक्रिया (ACR) की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने माना कि महिला अधिकारियों के करियर रिकॉर्ड (ACR) इस धारणा के साथ तैयार किए गए थे कि उन्हें कभी स्थायी कमीशन मिलेगा ही नहीं।1002518072

कोर्ट की तीन बड़ी टिप्पणियां:

  1. मनमानी सीमा: हर साल केवल 250 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की सीमा को कोर्ट ने ‘मनमाना’ करार दिया है।
  2. असमान मापदंड: तय किए गए मापदंडों ने महिला अधिकारियों को पुरुष अधिकारियों की तुलना में नुकसान की स्थिति में रखा।
  3. अप्रत्यक्ष भेदभाव: स्थायी कमीशन न मिलना मूल्यांकन के उस ढांचे का परिणाम था जिसमें भेदभाव की जड़ें बहुत गहरी थीं।

पेंशन में राहत, लेकिन रैंक प्रमोशन पर रोक

​सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों की कार्यप्रणाली और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए संतुलित फैसला सुनाया है:

  • बढ़ी हुई पेंशन: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि महिला अधिकारियों को सेवा से रिहाई के समय उनके ‘नेशनल रैंक’ के आधार पर हाइक्ड पेंशन (Hiked Pension) का लाभ मिलेगा। यह उनके लिए एक बड़ी आर्थिक राहत है।
  • रैंक प्रमोशन: कोर्ट ने साफ किया कि ‘नेशनल टाइम स्केल प्रमोशन’ या ‘रैंक प्रमोशन’ देना संभव नहीं है, क्योंकि इससे सेना के कामकाज और संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

अनुच्छेद 142 का ‘ब्रह्मास्त्र’

​सुप्रीम कोर्ट ने ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग किया। यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले में न्याय के हित में आवश्यक आदेश देने की विशेष शक्ति प्रदान करता है। कोर्ट ने साफ कहा कि पुरुष शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि स्थायी कमीशन केवल उन्हीं का अधिकार है।

देरी से हुआ नुकसान

​अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों को लागू करने में हुई देरी के कारण कई योग्य महिला अधिकारियों को करियर में नुकसान उठाना पड़ा है। अब इस फैसले के बाद सेना को अपने मूल्यांकन ढांचे में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे।

तीसरी धारा न्यूज विशेष: क्या होता है स्थायी कमीशन (PC)?

​आसान शब्दों में कहें तो स्थायी कमीशन का मतलब है कि एक सैन्य अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) की आयु तक सेना में सेवा दे सकता है। इससे पहले, महिला अधिकारियों को केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत 10 से 14 साल तक सेवा करने की अनुमति थी, जिससे वे पेंशन और उच्च पदों से वंचित रह जाती थीं।

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IPL 2026: BCCI ने लागू किए 7 नए और सख्त नियम, खिलाड़ियों के परिवार के साथ सफर करने पर भी लगी रोक

मुंबई: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन का बिगुल 28 मार्च से बजने जा रहा है। इस बार का आईपीएल केवल मैदान पर रनों की बारिश के लिए ही नहीं, बल्कि BCCI द्वारा लागू किए गए 7 नए और कड़े नियमों के लिए भी चर्चा में है। बोर्ड ने सभी 10 टीमों के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।n705732811177434352028067c30541641f229330dc7ff95cba4626d4b14d18569ea73d0370b77eed881526

​ये नियम खेल की तकनीक से ज्यादा टीमों के अनुशासन, प्रैक्टिस और मैनेजमेंट से जुड़े हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वे 7 प्रमुख नियम:

1. मैच के दिन ‘नो प्रैक्टिस’ रूल

​BCCI के पहले नियम के मुताबिक, अब किसी भी टीम को उसके मैच वाले दिन मैदान पर प्रैक्टिस या ट्रेनिंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। खिलाड़ियों को मैच के लिए पूरी तरह फ्रेश रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

2. प्रैक्टिस मैचों पर लगा पहरा

​अब टीमें अपनी मर्जी से अनगिनत प्रैक्टिस मैच नहीं खेल सकेंगी। नए नियम के तहत:

  • ​कोई भी टीम 2 से ज्यादा प्रैक्टिस मैच नहीं खेल सकती।
  • ​इसके लिए BCCI से लिखित अनुमति लेनी होगी।
  • ​प्रैक्टिस मैच की अवधि साढ़े 3 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए।

3. ‘अपना नेट, अपना अभ्यास’

​नेट प्रैक्टिस को लेकर भी बोर्ड सख्त हो गया है। कोई भी टीम दूसरी टीम के साथ प्रैक्टिस नेट्स शेयर नहीं करेगी। हर टीम को अभ्यास के लिए नया नेट दिया जाएगा। अगर किसी दूसरी टीम का नेट खाली भी है, तो भी दूसरी टीम उसका उपयोग नहीं कर सकेगी।

4. पिच की सुरक्षा के लिए ‘4 दिन’ का बैन

​जिस पिच पर होम टीम का पहला मैच होना है, उस पर मैच से 4 दिन पहले किसी भी तरह की ट्रेनिंग या प्रैक्टिस वर्जित होगी। खिलाड़ियों को रेंज हिटिंग, थ्रो डाउन और अन्य ड्रिल्स के लिए अलग से विकेट उपलब्ध कराए जाएंगे।

5. होम टीम को प्राथमिकता

​प्रैक्टिस शेड्यूल में हमेशा होम टीम को पहले अभ्यास करने की प्राथमिकता मिलेगी। यदि दो टीमें एक-दूसरे के ठीक बाद अभ्यास करती हैं, तो बोर्ड हर बार नई और तैयार पिच मुहैया कराएगा।

6. परिवार और दोस्तों के साथ सफर पर रोक

​BCCI ने खिलाड़ियों के निजी जीवन और पेशेवर अनुशासन के बीच एक लकीर खींच दी है। अब खिलाड़ियों के परिवार और दोस्तों को उनके साथ टीम बस में ट्रेवल करने की इजाजत नहीं होगी।

7. टीम बस अनिवार्य

​खिलाड़ी जब भी होटल से प्रैक्टिस या मैच के लिए निकलेंगे, उन्हें व्यक्तिगत वाहनों के बजाय अनिवार्य रूप से टीम बस का ही उपयोग करना होगा। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की सुरक्षा और समय की पाबंदी को सुनिश्चित करना है।

क्यों लिए गए ये फैसले?

​क्रिकेट जानकारों का मानना है कि BCCI इन नियमों के जरिए टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों की ‘वर्कलोड मैनेजमेंट’ और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करना चाहता है। साथ ही, नेट्स और पिच शेयरिंग पर रोक लगाकर टीमों के बीच किसी भी तरह के विवाद या जासूसी की संभावना को खत्म करने की कोशिश की गई है।

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UP में सियासी उबाल: AIMIM प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली का विवादित बयान– “सिर्फ 11 विधायक दे दो, एनकाउंटर करने वालों का भी होगा एनकाउंटर”

मेरठ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष हाजी शौकत अली ने मेरठ में आयोजित एक ‘ईद मिलन’ कार्यक्रम के दौरान बेहद विवादित बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिसिया कार्रवाई को चुनौती देते हुए ‘एनकाउंटर के बदले एनकाउंटर’ की बात कही है।1002518072

“111 नहीं, सिर्फ 11 विधायक ही काफी हैं”

​शौकत अली ने जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) पर तंज कसा और मुस्लिम मतदाताओं से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा:

“आपने जिसके 111 विधायक जिताए (सपा), वे आज कह रहे हैं कि हमारी सरकार नहीं है तो हम क्या कर सकते हैं? मैं आपसे वादा करता हूँ कि आप हमें 111 नहीं, सिर्फ 11 विधायक दे दें, हम अपनी ताकत दिखा देंगे।”

 

एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई पर निशाना

​सबसे विवादित बयान देते हुए शौकत अली ने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में किसी मुसलमान का एनकाउंटर होता है, तो एनकाउंटर करने वालों का भी एनकाउंटर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में मदरसों पर ताले लटकाए जा रहे हैं और बिना किसी ठोस सबूत के केवल आरोपों के आधार पर लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। उन्होंने देश की आजादी में मुसलमानों की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि आज उन्हीं के साथ सबसे ज्यादा ज्यादती हो रही है।IMG 20260324 143846

‘एक डंडा, एक झंडा’ का नारा

​मस्जिदों और मदरसों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए AIMIM नेता ने समर्थकों से अपील की कि वे ‘एक डंडा, एक झंडा और एक नेता’ के सिद्धांत पर एकजुट हों। उन्होंने मेरठ के पुलिस कप्तान के उस बयान पर भी सवाल उठाए जिसमें सड़क पर नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। शौकत अली ने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए और रामनवमी के जुलूसों के दौरान भी वैसी ही सख्ती दिखनी चाहिए।

विकास के मुद्दे पर घेरा

​विकास कार्यों को लेकर सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश का विकास केवल गोरखपुर और सैफई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मेरठ जैसे बड़े शहरों को भी उनका हक मिलना चाहिए।

सियासी हलचल तेज

​शौकत अली के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने इस बयान की तीखी निंदा की है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से आने वाले समय में ध्रुवीकरण की राजनीति और तेज हो सकती है। प्रशासन भी इस भड़काऊ भाषण को लेकर वीडियो फुटेज की जांच कर सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: धर्म परिवर्तन करते ही खत्म हो जाएगा SC का दर्जा, मुस्लिम-ईसाई बनने पर नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने आरक्षण और धर्म परिवर्तन को लेकर एक बड़ा और युगांतकारी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अनुसूचित जाति (SC) से संबंधित कोई व्यक्ति मुस्लिम या ईसाई धर्म अपनाता है, तो उसका अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।n705749004177434284726332648dd3b50db2b3acb653d75466a21d8c42f7ba5c4a3fa04145104471ee86a7

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?

​सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के 1950 के आदेश की धारा 3 का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति का लाभ केवल उन्हीं व्यक्तियों को मिल सकता है जो उन धर्मों का पालन करते हैं जिन्हें संविधान के तहत अधिसूचित किया गया है। कोर्ट के अनुसार:

  • हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म को मानने वाले दलितों को ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा जाएगा।
  • ​इन तीन धर्मों के अलावा किसी भी अन्य धर्म (जैसे इस्लाम या ईसाइयत) में परिवर्तन करने पर, व्यक्ति चाहे किसी भी परिवार में जन्मा हो, उसका SC दर्जा तुरंत खत्म हो जाएगा।1002518072

वापसी पर क्या हैं शर्तें?

​अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति दूसरे धर्म में जाने के बाद पुनः हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में वापस लौटता है और दोबारा SC दर्जे का दावा करता है, तो उसे तीन अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी, जिससे यह साबित हो सके कि वह पुनः अपने मूल समुदाय और परंपराओं का हिस्सा बन गया है।

1950 का राष्ट्रपति आदेश और अनुच्छेद 341

​संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जातियों की सूची तैयार की गई है। साल 1950 में जारी राष्ट्रपति के आदेश में स्पष्ट किया गया था कि केवल हिंदू धर्म के दलितों को ही एससी माना जाएगा। बाद में संशोधनों के जरिए इसमें सिख (1956) और बौद्ध (1990) धर्म को भी शामिल किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अब इसी संवैधानिक व्यवस्था को पुनः पुख्ता किया है।

क्यों अहम है यह फैसला?

​केंद्र सरकार ने 2022 में पूर्व सीजेआई केजी बालाकृष्णन के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया था, जिसे धर्मांतरित दलितों को आरक्षण देने के मुद्दे पर जांच करनी थी। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना के अनुसार:

“आरक्षण का आधार जाति है, धर्म नहीं। धर्म बदलने के बाद व्यक्ति की सामाजिक और धार्मिक पहचान बदल जाती है। यदि धर्मांतरण करने वालों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाता है, तो यह मूल एससी समुदाय के अधिकारों का हनन और संविधान की मूल भावना के खिलाफ होगा।”

 

निष्कर्ष

​इस फैसले से यह साफ हो गया है कि आरक्षण की सुविधा केवल उन्हीं समुदायों तक सीमित रहेगी जो भारतीय मूल के उन धर्मों से जुड़े हैं जिन्हें ऐतिहासिक रूप से जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा और जिन्हें संविधान में मान्यता दी गई है।

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जमशेदपुर: सोनारी में घर के अंदर फटा फ्रिज, मची चीख-पुकार; जान बचाने के लिए खिड़की से कूदे लोग

जमशेदपुर: शहर के सोनारी थाना क्षेत्र अंतर्गत सी-रोड (C-Road) में मंगलवार की सुबह एक भयानक हादसा होते-होते बचा। एक रिहायशी मकान में रखे फ्रिज में अचानक हुए जोरदार धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि कुछ ही सेकंडों में आग की लपटों ने पूरे कमरे को अपनी आगोश में ले लिया।Screenshot 2026 0324 142635

खिड़की से कूदकर बचाई जान

​प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाका इतना अचानक हुआ कि घर के अंदर मौजूद लोगों को मुख्य दरवाजे से निकलने का मौका तक नहीं मिला। चारों तरफ धुआं और आग फैलती देख, अपनी जान बचाने के लिए घर के सदस्यों को मजबूरी में खिड़की से कूदना पड़ा। इस दौरान इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।

आधे घंटे बाद पहुँची दमकल की टीम

​स्थानीय निवासियों ने अपनी ओर से बाल्टियों और उपलब्ध संसाधनों से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि उन पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। घटना की सूचना मिलने के करीब आधे घंटे बाद दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया, जिससे इसे पड़ोस के घरों में फैलने से रोका जा सका।1002518072

लाखों का नुकसान, जांच में जुटी पुलिस

​राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है और सभी सुरक्षित हैं। हालांकि, घर में रखा कीमती सामान, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जलकर खाक हो गए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। सोनारी थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है कि आखिर फ्रिज में इतना शक्तिशाली विस्फोट कैसे हुआ।

विशेषज्ञों की सलाह: फ्रिज का इस्तेमाल करते समय बरतें ये सावधानियां

​इस तरह के हादसों से बचने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें आप अपने पाठकों के साथ साझा कर सकते हैं:

  • पुराने मॉडल: यदि फ्रिज बहुत पुराना है और उसकी सर्विसिंग नहीं हुई है, तो उसे चेक करवाएं।
  • गैस लीकेज: यदि फ्रिज के पास से किसी तरह की गंध आए, तो तुरंत टेक्नीशियन को बुलाएं।
  • वेंटिलेशन: फ्रिज के पीछे की दीवार और फ्रिज के बीच कम से कम 6-10 इंच की जगह रखें ताकि कंप्रेसर को हवा मिलती रहे।
  • स्टेबलाइजर: वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से कंप्रेसर फटने का डर रहता है, इसलिए अच्छी गुणवत्ता वाला स्टेबलाइजर इस्तेमाल करें।
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