रांची: झारखंड में रात 10 बजे के बाद डीजे (DJ) बजाने पर रोक के आदेश को लेकर सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर भाजपा नेत्री निशा भगत ने राज्य के कद्दावर मंत्री इरफान अंसारी को आड़े हाथों लिया है। भगत ने मंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण करार दिया।

क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में मंत्री इरफान अंसारी ने ध्वनि प्रदूषण और छात्रों की पढ़ाई का हवाला देते हुए रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाने की वकालत की थी। उन्होंने प्रशासन को इस संबंध में कड़े निर्देश देने की बात कही थी, जिसके बाद से ही विपक्षी खेमे में नाराजगी देखी जा रही है।
निशा भगत का कड़ा रुख
निशा भगत ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर नियमों का पालन करना है, तो वे सभी के लिए समान होने चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा:
“अगर मंत्री जी को ध्वनि प्रदूषण की इतनी ही चिंता है और वे रात 10 बजे के बाद डीजे बंद करवाना चाहते हैं, तो उन्हें पहले लाउडस्पीकर पर होने वाली अज़ान को बंद करवाना चाहिए। नियम केवल एक समुदाय या विशेष कार्यक्रमों के लिए नहीं, बल्कि सबके लिए बराबर होने चाहिए।”
तुष्टिकरण का लगाया आरोप
भगत ने आरोप लगाया कि सरकार विकास और शांति के नाम पर केवल बहुसंख्यक समाज के त्योहारों और आयोजनों को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि शादी-विवाह और धार्मिक उत्सवों में डीजे पर रोक लगाना सांस्कृतिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप है, जबकि अन्य जगहों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर मंत्री मौन रहते हैं।
सियासी सरगर्मी तेज
विधानसभा परिसर से लेकर सोशल मीडिया तक इस बयान ने खलबली मचा दी है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश बताया है, जबकि हिंदूवादी संगठनों ने निशा भगत के स्टैंड का समर्थन किया है। आने वाले दिनों में ध्वनि प्रदूषण के इस नियम पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।
तीसरी धारा न्यूज के लिए ब्यूरो रिपोर्ट।











