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श्रीनाथ विश्वविद्यालय में गूंजा ‘फूड–प्लैनेट–हेल्थ’ का संदेश: पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए ‘वीगन’ जीवनशैली को बताया जरूरी

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जमशेदपुर: भविष्य की चुनौतियों और बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को देखते हुए श्रीनाथ विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई और वीगन आउटरीच संस्था ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शुक्रवार को आयोजित एक विशेष वेबिनार में विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि पशु आधारित भोजन न केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि धरती के अस्तित्व के लिए भी संकट पैदा कर रहा है।IMG 20260324 WA0039

पौध आधारित भोजन: वक्त की मांग

​वेबिनार के मुख्य वक्ता, वीगन आउटरीच के अभिषेक दुबे ने विस्तार से बताया कि कैसे हमारी खान-पान की आदतें वैश्विक समस्याओं से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा:

  • पर्यावरण संरक्षण: पौध आधारित (Plant-based) भोजन अपनाने से वनों की कटाई, जैव विविधता का ह्रास और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
  • मानव स्वास्थ्य: वीगन डाइट न केवल शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करती है।
  • SDG लक्ष्य: जिम्मेदार उपभोग संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे अपनाना हर नागरिक की प्राथमिकता होनी चाहिए।

विद्यार्थियों को मानवीय जीवनशैली की प्रेरणा

​कार्यक्रम का संचालन कर रहीं एनएसएस समन्वयक सुश्री शालिनी ओझा ने कहा कि इस वेबिनार का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें एक जागरूक और मानवीय जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी दैनिक आदतों में बदलाव लाकर पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा में अपना योगदान दें।

150 स्वयंसेवकों ने ली सीख

​इस डिजिटल चर्चा में विश्वविद्यालय के लगभग 150 विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वीगन विकल्पों को तलाशने और उन्हें समाज में बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

तीसरी धारा न्यूज – डिजिटल हेडलाइंस

  • बदलाव की पहल: श्रीनाथ विश्वविद्यालय में ‘फूड-प्लैनेट-हेल्थ’ पर मंथन; 150 छात्रों ने सीखा वीगन डाइट का महत्व।
  • धरती को बचाने का मंत्र: पशु आधारित भोजन छोड़, पौध आधारित विकल्प अपनाने की अपील; श्रीनाथ विवि में वेबिनार आयोजित।
  • शिक्षा और जागरूकता: वीगन आउटरीच और NSS का संयुक्त प्रयास, जमशेदपुर के युवाओं को दिया पर्यावरण सुरक्षा का संदेश।
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