एक नई सोच, एक नई धारा

झारखंड: खुद ‘बीमार’ हुई 108 एम्बुलेंस, बीच रास्ते में डीजल खत्म होने से अटकी डायरिया मरीज की जान

1002368851

जमशेदपुर/पटमदा: झारखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा ‘108 एम्बुलेंस’ की बदहाली थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला गुरुवार को पटमदा क्षेत्र में सामने आया, जहाँ एक गंभीर मरीज को अस्पताल ले जा रही एम्बुलेंस का बीच सड़क पर डीजल खत्म हो गया। इस लापरवाही के कारण डायरिया पीड़ित महिला करीब एक घंटे तक सड़क पर तड़पती रही।

1002368851

धूसरा गांव के पास थमे एम्बुलेंस के पहिए

​आगुईडांगरा गांव की 45 वर्षीय सावित्री सिंह को बुधवार से लगातार उल्टी और दस्त (डायरिया) की शिकायत थी। हालत गंभीर होने पर परिजनों ने 108 पर कॉल किया। बोड़ाम के लावजोड़ा पीएचसी से एम्बुलेंस (JH01CJ-8238) मरीज को लेकर एमजीएम अस्पताल के लिए निकली, लेकिन महज 8 किमी दूर धूसरा गांव के पास गाड़ी का इंजन अचानक बंद हो गया।

खराब रखरखाव और तकनीकी खामियां

​एम्बुलेंस चालक कामदेव महतो और टेक्नीशियन गणेश कौशल महतो ने जो खुलासे किए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

  • डीजल की कमी: टंकी खाली होने के कारण गाड़ी बंद हुई और इंजन ने ‘एयर’ ले लिया, जिससे वाहन पूरी तरह ठप हो गया।
  • कबाड़ में तब्दील वाहन: यह एम्बुलेंस पहले जुगसलाई में थी और वहां भी अक्सर खराब रहती थी। 10-15 दिन पहले ही इसे लावजोड़ा भेजा गया है।
  • बैटरी और मरम्मत का अभाव: चालक के अनुसार, वाहन की बैटरी खराब है और नियमित मरम्मत न होने से यह कभी भी बंद हो जाती है।

दूसरी एम्बुलेंस के भरोसे तय हुआ सफर

​मरीज की जान जोखिम में देख आनन-फानन में एमजीएम अस्पताल से दूसरी एम्बुलेंस मंगवाई गई। लगभग एक घंटे की देरी के बाद सावित्री सिंह को एमजीएम अस्पताल पहुंचाया जा सका। परिजनों में इस देरी को लेकर गहरा आक्रोश है।

पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक

​यह पहली बार नहीं है जब बोड़ाम-पटमदा क्षेत्र में 108 सेवा फेल हुई है:

  • 25 दिसंबर की घटना: डांगरडीह गांव में समय पर एम्बुलेंस न पहुंचने के कारण सांस की बीमारी से जूझ रही एक महिला की मौत हो गई थी।
  • ​उसी घटना के बाद लावजोड़ा पीएचसी को यह एम्बुलेंस आवंटित की गई थी, जो अब खुद तकनीकी खराबी और ईंधन की कमी का शिकार है।

उठते सवाल: जिम्मेदार कौन?

​सरकार और विभाग के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा गरीब मरीज भुगत रहे हैं। एम्बुलेंस में तेल न होना और खराब बैटरी के साथ उसे फील्ड में भेजना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।

परिजनों का पक्ष: “हमने समय पर कॉल किया, एम्बुलेंस भी आई, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने हमारी मरीज की जान खतरे में डाल दी। अगर कुछ अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता?” — रविन्द्र सिंह (रिश्तेदार)