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झारखंड: 23 फरवरी को ‘महा-टकराव’, एक ही दिन निकाय चुनाव और बोर्ड परीक्षा; असमंजस में लाखों छात्र

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रांची: झारखंड में आगामी 23 फरवरी 2026 की तारीख को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग और झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) के बीच ठन गई है। इस दिन राज्य के 48 नगर निकायों में मतदान होना है, जबकि इसी दिन मैट्रिक और इंटरमीडिएट की महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी निर्धारित हैं। दोनों संस्थाओं के बीच छिड़े इस “लेटर वार” ने लाखों छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों की नींद उड़ा दी है।

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संस्थाओं के बीच ‘लेटर वार’: कौन किस पर भारी?

​विवाद की जड़ चुनाव और परीक्षा की तारीखों का एक साथ होना है।

  • राज्य निर्वाचन आयोग का पक्ष: आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अब तिथियों में बदलाव संभव नहीं है। आयोग का तर्क है कि चुनाव घोषणा से पहले जैक को कई बार पत्र लिखकर राय मांगी गई थी, लेकिन उनकी ओर से समय रहते कोई जवाब नहीं मिला।
  • जैक (JAC) का पक्ष: जैक सचिव जयंत कुमार मिश्र का कहना है कि छात्रों के भविष्य और व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए आयोग को मतदान की तारीख बदलनी चाहिए। जैक का मानना है कि परीक्षा केंद्रों पर ही मतदान केंद्र होने से कानून-व्यवस्था और परीक्षा की शुचिता बनाए रखना असंभव होगा।

23 फरवरी का गणित: क्यों बढ़ी है चिंता?

​23 फरवरी को जैक बोर्ड परीक्षा का अंतिम दिन है। इस दिन हिंदी (एक्स्ट्रा), उर्दू, बांग्ला और उड़िया जैसे विषयों की परीक्षा होनी है।

प्रमुख चुनौतियां:

  1. परीक्षा केंद्र बनाम मतदान केंद्र: राज्य के अधिकांश स्कूल ही परीक्षा केंद्र हैं और उन्हें ही मतदान केंद्र बनाया गया है। एक ही भवन में परीक्षा और वोटिंग एक साथ कराना व्यावहारिक नहीं है।
  2. कर्मियों की कमी: शिक्षक और कर्मचारी परीक्षा ड्यूटी में होंगे या चुनाव ड्यूटी में? यह एक बड़ा सवाल है।
  3. छात्रों की परेशानी: मतदान के कारण लगने वाली भीड़, ट्रैफिक जाम और सुरक्षा घेरे के बीच परीक्षार्थियों का समय पर केंद्र पहुंचना एक बड़ी चुनौती होगी।

अभिभावकों में आक्रोश: “छात्रों के भविष्य से खिलवाड़”

​अभिभावक मंच ने इस स्थिति को जैक की लापरवाही और आयोग की जिद का नतीजा बताया है। मंच के अध्यक्ष अजय राय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए पूछा है कि क्या एक ही कमरे में एक तरफ वोट डाले जाएंगे और दूसरी तरफ छात्र परीक्षा देंगे?

आगे क्या?

​फिलहाल गेंद राज्य सरकार के पाले में है। यदि दोनों संस्थाएं अपनी जिद पर अड़ी रहीं, तो मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है। लाखों छात्र इस उम्मीद में हैं कि उनकी परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में हो और उन्हें इस प्रशासनिक खींचतान का खामियाजा न भुगतना पड़े।

मौजूदा स्थिति: > * चुनाव तिथि: 23 फरवरी 2026 (अटल)

  • बोर्ड परीक्षा: 23 फरवरी 2026 (अंतिम दिन)
  • असमंजस: परीक्षा केंद्रों के आवंटन और सुरक्षा को लेकर।