जमशेदपुर: झारखंड राज्य बार काउंसिल के आगामी चुनाव (12 मार्च) को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच जमशेदपुर बार एसोसिएशन के सदस्य और समाजवादी चिंतक अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने काउंसिल की संरचना और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए ‘वंचित समूहों’ की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है।

आरक्षण और प्रतिनिधित्व पर सवाल
अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने तर्क दिया कि जब बार काउंसिल में महिला अधिवक्ताओं के लिए 5% हिस्सेदारी सुरक्षित की गई है, तो वंचित समूहों (SC/ST) की अनदेखी क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा, “झारखंड की पहचान यहाँ की आदिवासी संस्कृति और विरासत से है। राज्य निर्माण के बाद से कितने आदिवासियों और भूमि पुत्रों को काउंसिल में सही प्रतिनिधित्व मिला, यह एक बड़ा सवाल है।”
उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से भी आग्रह किया है कि काउंसिल द्वारा मनोनीत किए जाने वाले दो अधिवक्ता अनिवार्य रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग से होने चाहिए।
“8 सालों में अधिवक्ताओं को क्या मिला?”
पिछले 8 वर्षों के कार्यकाल का विश्लेषण करते हुए उन्होंने वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि 25 सदस्यों और चेयरमैन वाली कमेटी के होने के बावजूद झारखंड के 30 हजार वकीलों की समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ी हैं।
- पुलिस और प्रशासन से टकराव: जिला और निचली अदालतों में वकीलों को अक्सर थाना-पुलिस और कर्मचारियों के साथ टकराव झेलना पड़ता है, लेकिन स्टेट बार काउंसिल उनकी मजबूत आवाज बनने में विफल रही है।
- चुनावी वादे बनाम हकीकत: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आते ही ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ और बड़े-बड़े पोस्टरों की बाढ़ आ जाती है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही ये वादे हवा हो जाते हैं।
अधिवक्ताओं से खास अपील
सुधीर कुमार पप्पू ने राज्य के तमाम अधिवक्ताओं से पूर्वाग्रह त्याग कर ‘भूमिपुत्र’ और स्पष्ट नीति वाले उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की अपील की है। उन्होंने अपनी मांगों में प्रमुखता से रखा:
- एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट: लंबे समय से लंबित इस कानून को तत्काल लागू कराया जाए।
- कौशल प्रशिक्षण: प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के लिए नियमित तकनीकी और कौशल विकास शिविर आयोजित हों।
- बार-बेंच सौहार्द: न्यायिक पदाधिकारियों और वकीलों के बीच बेहतर तालमेल ताकि पक्षकारों को समय पर न्याय मिल सके।
निर्णायक होगा 12 मार्च का चुनाव
बता दें कि आगामी 12 मार्च को होने वाले इस चुनाव में लगभग 100 प्रत्याशी मैदान में हैं। सुधीर कुमार पप्पू ने वकीलों से आह्वान किया है कि वे केवल पोस्टर और नारों को न देखें, बल्कि प्रत्याशी की नीयत और उनके संघर्ष की पृष्ठभूमि को देखकर वोट करें।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़











