जमशेदपुर, झारखंड | कोल्हान प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने गुरुवार को स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर गाड़ दिया है। अस्पताल परिसर में नवनिर्मित कैंसर यूनिट का विधिवत उद्घाटन किया गया, जिससे अब क्षेत्र के हजारों गरीब मरीजों को गंभीर बीमारी के इलाज के लिए बड़े शहरों या महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

प्रमुख विशेषताएं: क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
एमजीएम की इस नई यूनिट को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया गया है ताकि मरीजों को ‘वन-स्टॉप’ समाधान मिल सके:
- 12 बेड की क्षमता: फिलहाल यूनिट में 12 बेड की व्यवस्था की गई है, जिसे भविष्य में और बढ़ाया जाएगा।
- नि:शुल्क कीमोथेरेपी: गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में ही कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
- बायोप्सी और जांच: कैंसर के सटीक निदान के लिए बायोप्सी और पैथोलॉजी जांच की सुविधा अब परिसर में ही मिलेगी।
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम: यूनिट का संचालन अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट और विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में होगा।
आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत
अस्पताल अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने बताया कि इस यूनिट का सबसे बड़ा लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिलेगा। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का संपूर्ण इलाज पूरी तरह नि:शुल्क होगा। पहले इन सुविधाओं के अभाव में मरीजों को वेल्लोर, रिम्स (राँची) या टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) जैसे संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था, जो कई बार आर्थिक बोझ के कारण संभव नहीं हो पाता था।
कोल्हान के मरीजों का केंद्र बनेगा एमजीएम
एमजीएम अस्पताल में न केवल जमशेदपुर, बल्कि सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा व पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। एक अनुमान के अनुसार, इस क्षेत्र में हर साल लगभग 3,000 नए कैंसर के मामले सामने आते हैं। अब इस सरकारी यूनिट के शुरू होने से इन सभी जिलों के मरीजों को समय पर और सस्ता इलाज मिल सकेगा।
अधीक्षक का संदेश: “हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसे की कमी के कारण किसी का इलाज न रुके। अब एमजीएम में कैंसर का संपूर्ण इलाज संभव होगा।” — डॉ. बलराम झा, अधीक्षक, एमजीएम










