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ईरान की टॉप लीडरशिप तबाह: 48 घंटे के भीतर दूसरे रक्षा मंत्री की भी मौत; इजरायली हमले में सैयद माजिद अब अल-रेज़ा ढेर

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तेहरान/तेल अवीव: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान को एक और बड़ा झटका लगा है। इजरायली मीडिया के दावों के अनुसार, ईरान के नव-नियुक्त कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद अब अल-रेज़ा (Sayyed Majid Ebn Al-Reza) एक हवाई हमले में मारे गए हैं। यह घटना तब सामने आई है जब ईरान अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और पूरी सैन्य कमान के खात्मे के बाद अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।

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48 घंटे भी नहीं टिक सके नए रक्षा मंत्री

​गौरतलब है कि 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के साझा हमले (ऑपरेशन रोरिंग लायन) में ईरान के पूर्व रक्षा मंत्री जनरल अजीज नासिरजादेह और सेना प्रमुख अब्दुल रहीम मौसवी मारे गए थे। नासिरजादेह की मौत के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने तत्काल प्रभाव से ब्रिगेडियर जनरल सैयद माजिद अब अल-रेज़ा को रक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी थी। लेकिन कार्यभार संभालने के महज 48 घंटों के भीतर ही वे भी हमले का शिकार हो गए।

कौन थे सैयद माजिद अब अल-रेज़ा?

​सैयद माजिद ईरान के बेहद प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में गिने जाते थे:

  • सैन्य विशेषज्ञ: उन्हें सैन्य प्रशासन और रसद (Logistics) का विशेषज्ञ माना जाता था।
  • SATA के अध्यक्ष: वे सशस्त्र बल सामाजिक सुरक्षा संगठन (SATA) के प्रमुख रह चुके थे, जो सेना के आर्थिक और पारिवारिक हितों की देखरेख करता है।
  • भरोसेमंद रणनीतिकार: खामेनेई की मौत के बाद उपजी अस्थिरता में उन्हें इसलिए चुना गया था क्योंकि उनकी सेना के भीतर गहरी पैठ थी और वे अधिकारियों की वफादारी सुनिश्चित करने में माहिर थे।

नेतन्याहू और ट्रंप का रुख: ‘खत्म हो रहा है शासन’

​इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “अस्तित्व के खतरों को खत्म करने का अभियान” बताया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरान में शासन परिवर्तन (Regime Change) का एक बड़ा अवसर करार दिया है।

युद्ध का चौथा दिन: हाहाकार और तबाही

​मंगलवार (3 मार्च) को युद्ध के चौथे दिन भी तेहरान और आसपास के इलाकों में बमबारी जारी है। ईरानी रेड क्रेसेंट के मुताबिक, अब तक 787 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं, जिससे पूरा विश्व एक बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट की कगार पर खड़ा है।

तीसरी धारा न्यूज की विशेष रिपोर्ट।

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