रांची: हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) की जमीन दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की फटकार के बाद रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ा। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब मुख्य आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी हैं, तो पुलिस अब तक हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है?
कोर्ट की सख्ती और SSP की पेशी
हाईकोर्ट ने 20 मार्च को दिए अपने आदेश में SSP रांची को सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ 23 मार्च को पेश होने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। इस पर पुलिस प्रशासन की ओर से मामले से जुड़े दस्तावेज और अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा पेश किया गया।
आरोपी प्रसेनजीत पांडा कर सकता है सरेंडर
सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि आरोपी प्रसेनजीत पांडा आज निचली अदालत में आत्मसमर्पण (Surrender) कर सकता है। बता दें कि पांडा पर आरोप है कि ठगी की एक बड़ी रकम उसके बैंक खाते में जमा कराई गई थी। पुलिस इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इस पूरे सिंडिकेट में उसकी भूमिका कितनी अहम थी।
करोड़ों की ठगी का मास्टरमाइंड: GM प्रमोद बेहरा
इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी HEC के महाप्रबंधक (General Manager) प्रमोद कुमार बेहरा को बताया जा रहा है।
- आरोप: बेहरा ने HEC क्षेत्र में जमीन दिलाने का झांसा देकर तीन लोगों से करीब सवा करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की।
- मोडस ऑपेरंडी: जांच में खुलासा हुआ है कि ठगी की रकम सीधे अपने खाते में न लेकर, प्रमोद बेहरा ने इसे अपनी दो बेटियों और प्रसेनजीत पांडा जैसे सहयोगियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करवाया था।
धुर्वा थाना में दर्ज है मामला
इस संबंध में धुर्वा थाना में कांड संख्या 38/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज है। पुलिस ने इसमें प्रमोद कुमार बेहरा, उनकी दो बेटियों और प्रसेनजीत पांडा को नामजद आरोपी बनाया है। हाईकोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि रांची पुलिस इस हाई-प्रोफाइल ठगी मामले में गिरफ्तारियों का दौर शुरू करेगी।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़











