तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और इजरायली हमलों के बीच ईरान में सत्ता के सबसे ऊंचे शिखर पर बड़ा बदलाव हुआ है। सूत्रों के अनुसार, मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का अगला ‘सुप्रीम लीडर’ (सर्वोच्च नेता) चुन लिया गया है। ईरान की शक्तिशाली ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने मंगलवार को हुई आपातकालीन वर्चुअल मीटिंग में उनके नाम पर मुहर लगा दी।

IRGC का बढ़ा कद: 47 साल बाद नया उत्तराधिकारी
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, मोजतबा का चयन ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के भारी दबाव में किया गया है।
- इतिहास: 1989 में अली खामेनेई के चयन के बाद, यानी 47 वर्षों में यह पहली बार है जब ईरान ने अपना नया सर्वोच्च नेता चुना है।
- सत्ता का ढांचा: मोजतबा का चयन यह स्पष्ट करता है कि ईरान के आंतरिक शासन और फैसले लेने की प्रक्रिया में IRGC का प्रभाव अब पहले से कहीं अधिक गहरा हो गया है।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई अपने पिता के ‘इनर सर्कल’ के सबसे प्रभावशाली सदस्य माने जाते रहे हैं।
- धार्मिक पृष्ठभूमि: वे एक मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं।
- सैन्य संबंध: IRGC के साथ उनके संबंध बेहद मजबूत हैं, जो उन्हें युद्ध की इस घड़ी में सेना का समर्थन दिलाने में मदद करेंगे।
- विवाद: मोजतबा का चयन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ईरान का इस्लामिक गणतंत्र लंबे समय से राजशाही या खानदानी उत्तराधिकार (Dynastic Succession) का विरोध करता रहा है।
कैसे हुआ चयन? (असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की भूमिका)
ईरान के संविधान के अनुसार, 88 सदस्यों वाली मौलवियों की संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ही सर्वोच्च नेता की नियुक्ति या उसे हटाने का अधिकार रखती है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को दो गोपनीय वर्चुअल मीटिंग्स बुलाई गईं, जिसमें देश की सुरक्षा और स्थिरता को देखते हुए मोजतबा के नाम पर सहमति बनी।
ईरान के लिए क्या बदल जाएगा?
मोजतबा खामेनेई के सामने चुनौतियां पहाड़ जैसी हैं। एक तरफ उनके पिता और पूरी टॉप मिलिट्री लीडरशिप का खात्मा हो चुका है, तो दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका के हमले जारी हैं। उनके नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
तीसरी धारा न्यूज का विश्लेषण: हालांकि सरकारी मीडिया ने अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि घोषणा केवल सुरक्षा कारणों से रोकी गई है। मोजतबा का आना ईरान में ‘हार्डलाइनर्स’ (कट्टरपंथियों) की पकड़ और मजबूत होने का संकेत है।











