देहरादून/हरिद्वार: उत्तराखंड की राजधानी में हुए हाई-प्रोफाइल विक्रम शर्मा हत्याकांड ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे किसी फिल्मी साजिश से कम नहीं हैं। यह साफ हो गया है कि यह हत्या महज आपसी रंजिश नहीं, बल्कि एक ‘इंटर-स्टेट कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ थी।

वारदात की ‘क्रोनोलॉजी’: कैसे बुना गया मौत का जाल?
शूटरों ने पुलिस को चकमा देने के लिए हर कदम फूंक-फूंक कर रखा था। जांच में सामने आई टाइमलाइन कुछ इस प्रकार है:
| समय/दिन | गतिविधि |
|---|---|
| गुरुवार | शूटरों ने हरिद्वार में एक बाइक किराए पर ली। |
| शुक्रवार (4:00 AM) | तड़के एक और स्कूटी रेंट पर ली गई ताकि बैकअप रहे। |
| शुक्रवार (9:00 AM) | शूटर स्कूटी से देहरादून के राजपुर रोड पहुंचे और वारदात को अंजाम दिया। |
झारखंड कनेक्शन और फर्जी पहचान
जांच का सबसे अहम मोड़ हरिद्वार से शुरू होता है। पुलिस को एक रेंटल व्हीकल स्टोर से संदिग्ध ‘आकाश शर्मा’ का सुराग मिला है।
- हत्यारों ने पहचान के तौर पर झारखंड का आधार कार्ड इस्तेमाल किया।
- पुलिस को शक है कि यह आईडी किसी बड़े सिंडिकेट द्वारा तैयार की गई फर्जी पहचान हो सकती है।
- हवाई जहाज (Flight) से देहरादून पहुंचना इस बात की पुष्टि करता है कि हमलावरों के पास भारी फंडिंग और प्रोफेशनल बैकअप था।
पुलिस की कार्रवाई और चुनौती
एसएसपी सिटी अभय प्रताप सिंह के अनुसार, शूटरों ने रेंटल वाहनों का इस्तेमाल जानबूझकर किया ताकि पुलिस रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए उन तक न पहुंच सके।
”हत्या पूरी तरह सुनियोजित थी। हमलावरों ने पहले रेकी की और पहचान छिपाने के लिए रेंटल वाहनों का सहारा लिया। हमारी टीमें सीसीटीवी फुटेज और आईडी के जरिए शूटरों के बेहद करीब हैं।”
— अभय प्रताप सिंह, एसएसपी सिटी
अगले कदम: क्या होगा पुलिस का एक्शन?
- SIT का गठन: देहरादून पुलिस की एक विशेष टीम हरिद्वार में सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रही है।
- अंतरराज्यीय समन्वय: झारखंड पुलिस से संपर्क किया गया है ताकि संदिग्ध ‘आकाश शर्मा’ का आपराधिक रिकॉर्ड निकाला जा सके।
- सिंडिकेट की पहचान: पुलिस अब उस ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में है जिसने इन शूटरों को फ्लाइट टिकट और रेंटल गाड़ियां मुहैया कराईं।










