नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने की तैयारी में है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को जल्द से जल्द लागू करने के लिए इसमें बड़ा संशोधन करने जा रही है। अब महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए नई जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की शर्तों को हटाया जा सकता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने संभाला मोर्चा
इस ऐतिहासिक संशोधन बिल को इसी सत्र में पेश करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह खुद एक्टिव हो गए हैं। सोमवार को संसद भवन में ही गृह मंत्री ने विपक्षी दलों के साथ बैठकों का दौर शुरू किया।
- बैठक में शामिल दल: NCP (शरद पवार), शिवसेना (UBT), BJD और YSRCP के नेताओं के साथ प्रारंभिक चर्चा हुई है।
- अगली रणनीति: जल्द ही कांग्रेस और TMC जैसे बड़े विपक्षी दलों के साथ भी अलग-अलग समूहों में बैठकें की जाएंगी ताकि बिल पर आम सहमति बनाई जा सके।
2011 की जनगणना बन सकती है आधार
सूत्रों का कहना है कि सरकार नई जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना को आधार बनाकर आरक्षण प्रक्रिया शुरू कर सकती है। 2023 में पास हुए मूल अधिनियम में इसे ‘नई जनगणना’ के बाद लागू करने का प्रावधान था, लेकिन अब सरकार इसे पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले ही जमीन पर उतारना चाहती है।
बदल जाएगा संसद का स्वरूप: 816 होगी सदस्यों की संख्या
यदि यह संशोधन बिल पास होता है, तो भारतीय संसद का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा:
- सीटों में बढ़ोतरी: लोकसभा और विधानसभा सीटों में करीब 50% का आनुपातिक इजाफा किया जाएगा।
- लोकसभा की नई शक्ति: लोकसभा सदस्यों की संख्या वर्तमान से बढ़कर 816 हो जाएगी।
- महिलाओं का हिस्सा: कुल सीटों में से 33% यानी 273 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
विपक्ष का रुख और चुनावी गणित
विपक्ष के नेताओं का मानना है कि यदि सरकार आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले यह मास्टरस्ट्रोक खेलती है, तो इसका विरोध करना किसी भी दल के लिए मुश्किल होगा। यह कदम चुनाव में एक निर्णायक मुद्दा बन सकता है। सरकार की कोशिश है कि महिलाओं को आरक्षण देने का श्रेय किसी भी कीमत पर देरी के कारण हाथ से न जाने पाए।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़










