एक नई सोच, एक नई धारा

भारत की विरासत को सहेजने की बड़ी पहल: 1 करोड़ पांडुलिपियों के लिए शुरू हुआ देशव्यापी डिजिटल सर्वे

1002518315

नई दिल्ली/जमशेदपुर: भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना को सुरक्षित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। संस्कृति मंत्रालय ने सोमवार को भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत की मैपिंग के लिए एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (Nationwide Survey) का शंखनाद किया। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत शुरू हुआ यह अभियान अपनी तरह का पहला और सबसे बड़ा प्रयास है।

1002518315

तीन महीने में तैयार होगा ‘डिजिटल खजाना’

​यह अभियान जिला स्तर से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ेगा। इसका मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने में बिखरी पांडुलिपियों का पता लगाकर उनका एक एकीकृत डेटाबेस तैयार करना है।

  • जियोटैगिंग और सुरक्षा: सर्वे के दौरान मिलने वाली पांडुलिपियों को जियोटैग किया जाएगा, ताकि उनके संरक्षण और डिजिटलीकरण की सटीक योजना बनाई जा सके।
  • ज्ञान भारतम पोर्टल: सभी रिकॉर्ड ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के केंद्रीय पोर्टल पर बनी एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में जमा किए जाएंगे।

निजी संरक्षकों का भी मिलेगा साथ

​अधिकारियों के अनुसार, यह सर्वे केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें विभिन्न मठों, मंदिरों और निजी संरक्षकों के पास सुरक्षित पांडुलिपियों को भी रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट किया जाएगा। संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल ऐप की मदद से टीमें मौके पर ही जानकारी अपलोड कर सकेंगी, जिससे शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए ये ऐतिहासिक दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो पाएंगे।

‘बौद्धिक चोरी’ पर लगेगी लगाम

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन को “भारत की संस्कृति, साहित्य और चेतना की घोषणा” बताया है।

  • दुनिया का सबसे बड़ा संग्रह: अनुमान है कि भारत के पास लगभग 1 करोड़ पांडुलिपियां हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक हैं।
  • बजट 2025-26: इस मिशन के लिए बजट 2025-26 में विशेष घोषणा की गई थी। पीएम मोदी के अनुसार, डिजिटलीकरण से भारतीय ज्ञान की “बौद्धिक चोरी” (Intellectual Theft) को रोकने में मदद मिलेगी।

प्रशासनिक स्तर पर तैयारी

​सर्वेक्षण को पारदर्शी और सफल बनाने के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिवों और जिला स्तर पर जिलाधिकारियों (DC/DM) की अध्यक्षता में विशेष समितियां गठित की गई हैं। मंत्रालय पहले से डिजिटाइज़ हो चुकी लगभग 10 लाख पांडुलिपियों को भी इस नए पोर्टल के साथ एकीकृत करने पर काम कर रहा है।

तीसरी धारा न्यूज की बात: यह मिशन न केवल हमारी प्राचीन लिपियों को बचाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारत के गौरवशाली वैज्ञानिक और साहित्यिक इतिहास से भी रूबरू कराएगा।

error: Content is protected !!