नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने घोषणा की है कि इसी साल अप्रैल 2026 से देश के सभी 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सहित पूरे भारत में SIR (सेवा पहचान और सुधार) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

बिहार में काम पूरा, अन्य राज्यों में तैयारी तेज
निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य मतदाता पुनरीक्षण और निर्वाचन संबंधी डेटा को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाना है।
- बिहार की स्थिति: बिहार उन राज्यों में शामिल है जहाँ यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है।
- वर्तमान स्थिति: फिलहाल देश के 12 अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया अंतिम चरणों में है।
- अगला लक्ष्य: अप्रैल महीने से उन सभी शेष राज्यों में यह काम शुरू हो जाएगा जहाँ अभी तक इसे लागू नहीं किया गया था।
क्या है SIR प्रक्रिया और क्यों है जरूरी?
SIR प्रक्रिया के तहत निर्वाचन आयोग तकनीकी और जमीनी स्तर पर डेटा का मिलान करता है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
- फर्जी वोटरों की छंटनी: एक से अधिक जगहों पर दर्ज नामों और मृत मतदाताओं के नाम हटाना।
- सटीक मतदाता सूची: सर्विस वोटरों (सेना और केंद्रीय बलों के जवान) की पहचान और उनके डेटा को अपडेट करना।
- पारदर्शिता: चुनाव के दौरान होने वाली धांधली को रोकने के लिए डिजिटल डेटा को मजबूत करना।
मतदाताओं पर क्या होगा असर?
इस प्रक्रिया के शुरू होने से मतदाता सूचियों में सुधार होगा, जिससे वास्तविक मतदाताओं को मतदान के समय किसी भी तरह की तकनीकी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। आयोग ने संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
आयोग का उद्देश्य: “हमारा लक्ष्य एक ऐसी निर्वाचन प्रणाली सुनिश्चित करना है जहाँ प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में हो और कोई भी अपात्र व्यक्ति चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके।” — ECI प्रवक्ता











