एक नई सोच, एक नई धारा

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तीसरी धारा न्यूज: तेज रफ्तार का कहर

जादूगोड़ा में शराब के नशे में कार ने मचाया तांडव: होटल का शटर और दीवार तोड़कर अंदर घुसी गाड़ी; बाल-बाल बची चालक की जान

जादूगोड़ा | संवाददाता

टाटा मुख्य मार्ग पर स्थित मुर्गाघुटू चौक (नरवा पहाड़) सोमवार की आधी रात को भीषण धमाके से दहल उठा। शराब के नशे में धुत एक कार चालक ने होटल का शटर और दीवार तोड़ते हुए गाड़ी सीधे दुकान के अंदर घुसा दी। इस हादसे में होटल की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है, हालांकि एयर बैग खुल जाने के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई।

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आधी रात को हुआ जोरदार धमाका

​घटना सोमवार देर रात करीब 12 बजे की है। दुकान मालिक सतीश दास के अनुसार, कार (संख्या: JH 05 DM / 5145) इतनी तेज रफ्तार में थी कि वह होटल का लोहे का शटर और कंक्रीट की दीवार चीरते हुए अंदर जा घुसी।

  • नुकसान का आकलन: होटल में रखा डीप फ्रीज, अलमारी और अन्य कीमती सामान चकनाचूर हो गए। दुकान मालिक के अनुसार करीब डेढ़ लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।

एयर बैग ने बचाई चालक की जान

​दुर्घटना के वक्त कार में तीन लोग सवार थे।

  • चालक: गोपाल बेसरा (निवासी- धोबनी) नशे की हालत में गाड़ी चला रहा था। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का एयर बैग खुल गया, जिससे उसकी जान बच गई।
  • अन्य घायल: कार में सवार दुर्गा चरण बेसरा और एक अन्य व्यक्ति को हल्की चोटें आई हैं।
  • उपचार: घायलों में से एक को बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस की कार्रवाई

​सूचना मिलते ही जादूगोड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकाला। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया मामला ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ और ‘ओवरस्पीडिंग’ का प्रतीत हो रहा है।

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तीसरी धारा न्यूज: सीधे संवाद से समाधान

जन शिकायत निवारण दिवस: जनता की चौखट पर प्रशासन; 40 से अधिक फरियादियों की सुनी गई समस्याएं, कई मामलों का मौके पर ही निपटारा

जमशेदपुर | जिला ब्यूरो आम जनता और शासन के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से आयोजित ‘जन शिकायत निवारण दिवस’ में आज शिकायतों की झड़ी लग गई। विभिन्न प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों से आए 40 से अधिक नागरिकों ने अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाई। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए न केवल लोगों की बात सुनी, बल्कि कई जटिल समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण कर राहत प्रदान की।

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ऑन द स्पॉट समाधान और समयबद्ध निर्देश

​शिकायत निवारण दिवस के दौरान राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामले प्रमुखता से छाए रहे।

  • त्वरित कार्रवाई: अधिकारी ने आवेदनों की गंभीरता को देखते हुए कई मामलों में ‘ऑन द स्पॉट’ आदेश पारित किए, जिससे वर्षों से लंबित कार्यों को गति मिली।
  • अधिकारियों को अल्टीमेटम: जिन आवेदनों का समाधान तत्काल संभव नहीं था, उनके लिए संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को कड़ी चेतावनी के साथ समयबद्ध (Time-bound) कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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इन क्षेत्रों से आए सर्वाधिक मामले

​शिकायत लेकर आने वालों में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व दिखा:

  • प्रखंड स्तर: जमीन विवाद, राशन कार्ड की त्रुटियां और वृद्धावस्था पेंशन से संबंधित शिकायतें।
  • शहरी क्षेत्र: जलजमाव, सड़क मरम्मत और स्ट्रीट लाइट जैसी नागरिक सुविधाओं का अभाव।
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पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

​सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि शिकायतों के निपटारे में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि हर आवेदन का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निराकरण हो, ताकि नागरिकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

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तीसरी धारा न्यूज: सिस्टम की नाक के नीचे लूट

गुड़ाबांधा में ‘पीला सोना’ लूट रहे बालू माफिया: रेडूवा घाट से सरेआम 150 ट्रैक्टरों की ढुलाई; प्रशासन पर ‘मंथली’ सेटिंग के गंभीर आरोप

गुड़ाबांधा/जमशेदपुर | विशेष टीम

झारखंड सरकार के कड़े निर्देशों के बावजूद गुड़ाबांधा प्रखंड में बालू माफियाओं का दुस्साहस सातवें आसमान पर है। फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत स्थित स्वर्णरेखा नदी के रेडूवा घाट से पिछले एक साल से अवैध बालू का खुला खेल चल रहा है। प्रतिदिन करीब 150 ट्रैक्टर बालू की चोरी कर सरकार के राजस्व को चूना लगा रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

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बिना नंबर, बिना चालान: ‘कानस पुलिया’ बना अवैध कॉरिडोर

​अवैध तस्करी का आलम यह है कि घाट से निकलने वाले अधिकांश ट्रैक्टरों पर न तो रजिस्ट्रेशन नंबर है और न ही ड्राइवरों के पास कोई वैध चालान। ये ट्रैक्टर बेखौफ होकर कानस पुलिया के रास्ते धालभूमगढ़ और आसपास के इलाकों में बालू खपा रहे हैं।

आरोप: ₹2000 मासिक और ₹50 प्रतिदिन की ‘सेटिंग’

​ग्रामीणों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सीधा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। सूत्रों के अनुसार:

  • ​प्रति ट्रैक्टर ₹2000 मासिक (मंथली) और ₹50 प्रतिदिन का नजराना कथित तौर पर व्यवस्था को दिया जाता है।
  • ​इसी ‘सेटिंग’ के कारण थाना प्रभारी और अंचल अधिकारी (सीओ) को सूचना दिए जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई शून्य है।

सड़कों का बुरा हाल, राजस्व का नुकसान

​ओवरलोड ट्रैक्टरों की वजह से ग्रामीण सड़कों की हालत जर्जर हो चुकी है। माफियाओं की जेबें भर रही हैं, जबकि सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोगों में इस दोहरी मार को लेकर भारी आक्रोश है।

“जन आंदोलन होगा”: सिर्मा देवगम

​समाजसेवी सह आरटीआई एक्टिविस्ट सिर्मा देवगम ने इस पूरे मामले को उपायुक्त (डीसी) के संज्ञान में लाते हुए दोषियों पर IPC की धारा 379 (चोरी) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

​”यदि प्रशासन ने जल्द ही औचक निरीक्षण कर इन माफियाओं पर नकेल नहीं कसी, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर जन आंदोलन करने को बाध्य होंगे।” — ग्रामीणों की चेतावनी

तीसरी धारा कड़ा सवाल: चुप्पी आखिर क्यों?

​जब ग्रामीणों को पता है कि बालू कहाँ जा रहा है, तो प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं? क्या ‘स्वर्णरेखा’ का सीना सिर्फ माफियाओं की तिजोरी भरने के लिए चीरा जा रहा है?

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तीसरी धारा न्यूज: चुनावी हुंकार

वार्ड संख्या 09: विजय सोय ने पेश किया ‘आदर्श वार्ड’ का ब्लूप्रिंट; नशा, अपराध और प्रदूषण के खिलाफ छेड़ेंगे जंग

जमशेदपुर | स्थानीय डेस्क

नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच वार्ड क्रमांक 09 के उम्मीदवार श्री विजय सोय ने क्षेत्र के विकास के लिए अपना विजन साझा करते हुए जनता से आशीर्वाद मांगा है। अपने समर्थकों और शुभचिंतकों के साथ जनसंपर्क करते हुए विजय सोय ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता केवल राजनीति नहीं, बल्कि समाज सेवा और मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान है।

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विजय सोय का ‘चतुष्कोणीय’ विकास मॉडल

​विजय सोय ने वार्ड की जनता से वादा किया है कि यदि उन्हें सेवा का अवसर मिलता है, तो वे निम्नलिखित चार स्तंभों पर कार्य करेंगे:

  1. सुरक्षित और स्वच्छ वार्ड: क्षेत्र को नशा मुक्त, अपराध मुक्त और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कड़े कदम उठाएंगे।
  2. बुनियादी ढांचे का कायाकल्प: सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर सक्रियता से कार्य करना।
  3. सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच: यह सुनिश्चित करना कि सरकार की हर कल्याणकारी योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचे।
  4. सशक्तीकरण और पर्यावरण: महिला सुरक्षा के लिए विशेष अभियान और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के माध्यम से वार्ड 09 को ‘ग्रीन और सेफ वार्ड’ बनाना।

“आपका विश्वास, क्षेत्र का विकास”: विजय सोय

​जनता से भावुक अपील करते हुए विजय सोय ने कहा:

“आपका साथ और आशीर्वाद ही मेरी ताकत है। मेरी सेवाभावना और आपका विश्वास मिलकर वार्ड संख्या 09 को एक आदर्श वार्ड बनाएगा। हम मिलकर क्षेत्र की हर गली और हर घर तक खुशहाली लाएंगे।”

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तीसरी धारा न्यूज: जागरूक नागरिक, सुरक्षित बैंकिंग

धालभूमगढ़ में ‘वित्तीय साक्षरता’ का महा-अभियान: कोकपरा नरसिंहगढ़ में ग्रामीणों को सिखाए गए डिजिटल बैंकिंग के गुर; धोखाधड़ी से बचने के मिले टिप्स

धालभूमगढ़ | संवाददाता

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्देशानुसार और अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) की अगुआई में मंगलवार को पूर्वी सिंहभूम के धालभूमगढ़ प्रखंड अंतर्गत कोकपरा नरसिंहगढ़ पंचायत में ‘प्रखंड स्तरीय वित्तीय साक्षरता शिविर (Block Level FLW) 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं के प्रति जागरूकता फैलाना और लोगों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ना रहा।

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बैंकिंग दिग्गजों ने दी वित्तीय सुरक्षा की जानकारी

​शिविर में बैंक ऑफ इंडिया, झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक (JRGB) और बंधन बैंक के शाखा प्रबंधकों सहित कई बैंकिंग विशेषज्ञों ने शिरकत की।

  • महत्वपूर्ण सेवाएं: शिविर के दौरान ग्रामीणों का KYC/RE-KYC मौके पर ही किया गया।
  • प्रमुख विषय: बचत के महत्व, विभिन्न ऋण योजनाओं, डिजिटल बैंकिंग के सुरक्षित उपयोग और केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
  • धोखाधड़ी से बचाव: विशेषज्ञों ने साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए ‘सावधानी ही सुरक्षा’ का मंत्र दिया।
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इन अधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति

​कार्यक्रम को सफल बनाने में निम्नलिखित अधिकारियों और प्रशिक्षकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

  • बैंक ऑफ इंडिया: शाखा प्रबंधक राजन कुमार दास एवं नंदनी।
  • झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक: शाखा प्रबंधक विवेक।
  • CFL घाटशिला (साख फाउंडेशन): सीएफएल इंचार्ज हितेश्वर पॉल और प्रशिक्षक (ट्रेनर) सपना शीट।
  • प्रशासनिक सहयोग: प्रखंड कृषि पदाधिकारी और विभिन्न बैंकों के बीसी (BC) सदस्य।

ग्रामीणों ने सराहा, और आयोजनों की मांग की

​कार्यशाला में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने बताया कि डिजिटल दौर में इस तरह की जानकारी उनके लिए अत्यंत आवश्यक है। ग्रामीणों ने विशेष रूप से केवाईसी (KYC) और ऋण प्रक्रिया को समझने में रुचि दिखाई और मांग की कि भविष्य में भी ऐसे शिविर पंचायत स्तर पर आयोजित किए जाएं।

तीसरी धारा अलर्ट: वित्तीय सुरक्षा के 3 नियम

  1. ​कभी भी अपना OTP, PIN या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
  2. ​बैंक कभी भी फोन पर आपसे व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगता।
  3. ​किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
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तीसरी धारा न्यूज: सत्ता के गलियारे से

बिहार विधानसभा में ‘अपनों’ के ही निशाने पर नीतीश सरकार: जिवेश मिश्रा ने अफसरों को घेरा, मैथिली ठाकुर ने स्वास्थ्य मंत्री के जवाब को दी चुनौती

पटना | ब्यूरो रिपोर्ट

बिहार विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष की लड़ाई के बजाय ‘अपनों’ के ही तीखे सवालों का गवाह बना। अमूमन विपक्ष के हमलों का जवाब देने वाली भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार उस वक्त असहज हो गई, जब भाजपा के ही वरिष्ठ और युवा विधायकों ने अफसरों की कार्यशैली और जमीनी हकीकत को लेकर सदन में अपनी ही सरकार को आईना दिखाया।

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“अफसरों का लारा-लप्पा खेल नहीं चलेगा”: जिवेश मिश्रा

​जाले विधानसभा से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री जिवेश कुमार मिश्रा ने गृह विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली पर जमकर भड़ास निकाली।

  • मुद्दा: दरभंगा के सिंहवाड़ा थाना भवन निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी।
  • तंज: उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विभाग में केवल ‘लारा-लप्पा’ (टाल-मटोल) का खेल चल रहा है। सालों से फाइलें सचिवालय के चक्कर काट रही हैं, लेकिन धरातल पर ईंट तक नहीं जुड़ी है।
  • जवाब: सदन में माहौल गरमाता देख डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने मोर्चा संभाला और विधायक को इस मामले में त्वरित कार्रवाई का ठोस भरोसा दिलाया।

मैथिली ठाकुर ने विभागीय रिपोर्ट को किया खारिज

​अलीनगर से भाजपा की सबसे युवा विधायक और प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने सदन में अपनी बेबाक शैली से सबका ध्यान खींचा। उन्होंने अपने क्षेत्र के अस्पताल की बदहाली का मुद्दा उठाया और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा दिए गए लिखित जवाब को गलत करार दिया।

सदन में हुई बहस के मुख्य बिंदु:

  1. जर्जर भवन: स्वास्थ्य विभाग के लिखित जवाब में कहा गया था कि अस्पताल का भवन जर्जर नहीं है, बल्कि सिर्फ मरम्मत की जरूरत है। मैथिली ने इसे सिरे से खारिज करते हुए भवन की वास्तविक स्थिति को अत्यंत दयनीय बताया।
  2. डॉक्टरों का टोटा: उन्होंने खुलासा किया कि जिस अस्पताल में पहले दो एमबीबीएस (MBBS) डॉक्टर तैनात थे, वह अब केवल एक आयुष चिकित्सक के भरोसे चल रहा है।
  3. मांग: मैथिली ठाकुर ने क्षेत्र की जनता की पीड़ा को स्वर देते हुए तत्काल एमबीबीएस डॉक्टरों की बहाली और नए भवन की मांग रखी।
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तीसरी धारा न्यूज: भ्रष्टाचार पर प्रहार

कमीशनखोरी के ‘साम्राज्य’ पर ईडी का बुलडोजर: आलमगीर आलम और वीरेंद्र राम की 86.61 करोड़ की संपत्ति स्थायी रूप से जब्त; दिल्ली में नकद खरीदे गए थे बंगले

रांची | विशेष संवाददाता

झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में फैले कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई पूरी कर ली है। ईडी की एडजुकेटिंग ऑथोरिटी ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके पीएस संजीव लाल और तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम की लगभग 86.61 करोड़ रुपये की संपत्ति को स्थायी रूप से जब्त करने का आदेश जारी कर दिया है।

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वीरेंद्र राम: 48.94 करोड़ की बेनामी संपत्ति का खुलासा

​जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि कुल जब्त संपत्ति का आधे से अधिक हिस्सा (48.94 करोड़) अकेले वीरेंद्र राम और उनके परिजनों के नाम पर था। भ्रष्टाचार की इस काली कमाई को सफेद करने के लिए दिल्ली के पॉश इलाकों में करोड़ों का निवेश किया गया।

काले धन का निवेश पैटर्न:

  • दिल्ली (साकेत): पिता गेंदा राम के नाम पर 22 करोड़ की जमीन खरीदी गई, जिसमें से 18.50 करोड़ रुपये नकद दिए गए।
  • लग्जरी फ्लैट्स: पत्नी राजकुमारी के नाम पर 11.30 करोड़ का फ्लैट और साकेत में एक अन्य 5 करोड़ का फ्लैट खरीदा गया, जिनमें आधे से अधिक भुगतान नकद (Cash) किया गया।
  • लग्जरी गाड़ियों का शौक: जांच में ऑडी, फॉर्च्यूनर और सास को गिफ्ट की गई 27 लाख की स्कोडा जैसी महंगी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं।

कमीशन की ‘चेन’ पर शिकंजा: दर्जनभर इंजीनियर रडार पर

​ईडी की कार्रवाई केवल जब्ती तक सीमित नहीं है। अब विभाग के भीतर कमीशन की पूरी चेन को ध्वस्त करने की तैयारी है।

  1. समन जारी: ईडी ने 11 फरवरी के बाद दर्जनभर इंजीनियरों को पूछताछ के लिए बुलाया है।
  2. इन पर गाज: समन पाने वालों में कार्यपालक अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE) और कनीय अभियंता (JE) शामिल हैं।
  3. जांच का उद्देश्य: टेंडर आवंटन में ऊपर से नीचे तक पैसे के बंदरबांट के नेटवर्क का खुलासा करना।

अस्थायी से स्थायी जब्ती: अब वापसी नामुमकिन

​ईडी की एडजुकेटिंग ऑथोरिटी ने माना है कि यह पूरी संपत्ति अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) से अर्जित की गई है। इस आदेश के बाद अब आरोपी इन संपत्तियों का उपयोग या बिक्री नहीं कर पाएंगे और यह पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में रहेगी।

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तीसरी धारा न्यूज: सिस्टम पर सर्जिकल स्ट्राइक

झारखंड स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खुलासा: नए साल के पहले महीने गायब रहे 4468 डॉक्टर-कर्मी; अब ‘जितनी हाजिरी, उतना वेतन’ का फॉर्मूला होगा लागू

रांची | विशेष संवाददाता

झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के उपस्थिति पोर्टल (ACVMS) के विश्लेषण में यह चौंकाने वाला तथ्य मिला है कि जनवरी 2026 के पूरे 31 दिनों में राज्य के 4468 डॉक्टर और कर्मचारी एक भी दिन ड्यूटी पर नहीं आए। इनकी उपस्थिति ‘शून्य’ दर्ज की गई है। इस लापरवाही को देखते हुए सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है।

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आंकड़ों की जुबानी: ड्यूटी से ‘हॉलिडे’ का खेल

​उपस्थिति पोर्टल पर कुल 28,781 कर्मी रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा पूरे महीने नदारद रहा:

  • डॉक्टरों की स्थिति: मेडिकल कॉलेजों को छोड़कर राज्य के 18% डॉक्टर (405) पूरे जनवरी गायब रहे।
  • कर्मचारियों का हाल: लगभग 15% कर्मचारी (3656) एक भी दिन अस्पताल नहीं पहुंचे।
  • मेडिकल कॉलेज: राज्य के छह प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में भी 405 डॉक्टर और कर्मचारी पूरे महीने अनुपस्थित पाए गए।
  • हजारीबाग की स्थिति सबसे बदतर: विश्लेषण में पाया गया कि हजारीबाग के SBMCCH मेडिकल कॉलेज की स्थिति पूरे राज्य में सबसे खराब रही।

पकड़े जाने के डर से नहीं करा रहे ‘निबंधन’

​विभाग को यह भी जानकारी मिली है कि कई डॉक्टर और कर्मी जानबूझकर उपस्थिति पोर्टल पर अपना निबंधन (Registration) नहीं करा रहे हैं। उनका मानना है कि बिना रजिस्ट्रेशन के उनकी मॉनीटरिंग नहीं हो पाएगी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने साफ कर दिया है कि:

  1. वेतन से लिंक होगा पोर्टल: अब अटेंडेंस पोर्टल को सीधे ट्रेजरी से जोड़ा जाएगा। ‘नो वर्क, नो पे’ के आधार पर केवल उतने ही दिनों का वेतन मिलेगा जितने दिन की हाजिरी पोर्टल पर दर्ज होगी।
  2. अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: सभी कर्मियों को पोर्टल पर आना होगा, ताकि एक क्लिक पर उनकी लोकेशन और टाइमिंग का पता चल सके।

आयुष्मान योजना: 30 दिन में दोबारा भर्ती पर जसास (JSAS) सख्त

​इधर, मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को लेकर भी सख्ती बढ़ गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य वित्तीय पदाधिकारी गयासुद्दीन अहमद ने समीक्षा बैठक में पाया कि कई अस्पतालों में मरीज 30 दिनों के भीतर ही दोबारा भर्ती (Re-admission) हो रहे हैं।

  • जांच के घेरे में अस्पताल: ऐसे अस्पतालों की पहचान की जा रही है जहाँ री-एडमिशन के मामले असामान्य रूप से अधिक हैं।
  • इलाज की गुणवत्ता: अस्पतालों को मानक उपचार प्रोटोकॉल (Standard Treatment Protocol) का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। लापरवाही मिलने पर अस्पतालों को योजना से बाहर (De-panel) किया जा सकता है।
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तीसरी धारा न्यूज: बजट 2026-27 का विशेष रोडमैप

झारखंड की ‘विभूतियों’ को अब आर्थिक सुरक्षा: पद्म पुरस्कार विजेताओं को मिलेगी सम्मान राशि; खिलाड़ियों के लिए पेंशन और इको-टूरिज्म पर हेमंत सरकार का बड़ा दांव

रांची | विशेष संवाददाता

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार राज्य के मान-सम्मान को बढ़ाने वाले विशिष्ट नागरिकों और खिलाड़ियों को बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। आगामी बजट में पद्म पुरस्कार विजेताओं के लिए सम्मान राशि का प्रावधान किया जा रहा है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाली हस्तियों को आर्थिक चुनौतियों का सामना न करना पड़े।

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सम्मान राशि: कला, खेल और समाज सेवा का कद्रदान

​पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुदिव्य कुमार ने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानव संसाधन को सशक्त बनाने के लिए बजटीय उपबंध किए जाएं। इस पहल का सीधा लाभ झारखंड के उन रत्नों को मिलेगा जिन्होंने सीमित संसाधनों में शिखर तक का सफर तय किया है।

राज्य की प्रमुख हस्तियां जो इस दायरे में आएंगी:

  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन (पद्म भूषण)
  • महेंद्र सिंह धोनी और दीपिका कुमारी (खेल जगत)
  • प्रेमलता अग्रवाल (पर्वतारोहण)
  • छुटनी महतो, जमुना टुडू और साइमन उरांव (समाज सेवा एवं पर्यावरण)
  • शशधर आचार्य और डॉ. रामदयाल मुंडा (कला एवं संस्कृति)

खिलाड़ियों के लिए ‘पेंशन कवच’ का विस्तार

​सरकार ने केवल पद्म विजेताओं ही नहीं, बल्कि ओलंपियन और राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेताओं के लिए भी पेंशन योजना के विस्तार का फैसला लिया है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों में भविष्य के प्रति सुरक्षा का भाव पैदा करना है ताकि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के केवल अपने प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

इको-टूरिज्म: प्रकृति की गोद में बसेंगे ‘बैम्बू हाउस’

​बजट 2026-27 में पर्यटन को उद्योग की तरह विकसित करने पर फोकस रहेगा। झारखंड की प्राकृतिक संपदा को विश्व पटल पर लाने के लिए इको-टूरिज्म की तर्ज पर विकास होगा:

  • प्रमुख स्थल: दलमा, पलामू टाइगर रिजर्व और नेतरहाट में सुविधाओं का विस्तार।
  • बैम्बू हाउस: पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने के लिए दलमा की तर्ज पर अन्य स्थलों पर भी बांस के घरों (Bamboo Houses) का निर्माण होगा।
  • वाटरफॉल टूरिज्म: राज्य के प्रपातों (Falls) के पास बुनियादी ढांचा सुधारा जाएगा।
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तीसरी धारा न्यूज: स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

RIMS की बदहाली: अल्ट्रासाउंड की फिल्म खत्म, जूनियर डॉक्टर हाथ से लिख रहे रिपोर्ट; मरीजों की जान और जेब दोनों पर संकट

रांची | विशेष संवाददाता

झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान रिम्स (RIMS) में इन दिनों मरीजों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीनें तो चल रही हैं, लेकिन जांच फिल्म (प्रिंट शीट) खत्म होने के कारण मरीजों को रिपोर्ट का प्रिंट नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि जूनियर डॉक्टर सादे कागज पर हाथ से लिखकर रिपोर्ट दे रहे हैं, जिसकी विश्वसनीयता और स्पष्टता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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हाथ से लिखी रिपोर्ट: न डॉक्टर समझ पा रहे, न मरीज

​अस्पताल सूत्रों के अनुसार, फिल्म की अनुपलब्धता के कारण रिम्स और सदर अस्पताल में प्रतिदिन होने वाली 200 से अधिक जांचों का कोई विजुअल रिकॉर्ड मरीजों को नहीं मिल रहा है।

  • सेकेंड ओपिनियन में बाधा: जब मरीज किसी विशेषज्ञ डॉक्टर के पास हाथ से लिखी रिपोर्ट लेकर जाते हैं, तो तस्वीर (फिल्म) न होने के कारण डॉक्टर बीमारी की गंभीरता को सही से समझ नहीं पाते।
  • गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को कष्ट: पेट, किडनी और आंत की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को भी इस अव्यवस्था के कारण बार-बार दौड़ना पड़ रहा है।

गरीबों की जेब पर भारी पड़ रही सरकारी ‘मुफ्त’ जांच

​रिम्स में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले गरीब मरीजों को अब मजबूरी में निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।

  • निजी केंद्रों की चांदी: निजी केंद्रों में अल्ट्रासाउंड के लिए 800 से 1500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
  • आर्थिक बोझ: जो मरीज रिम्स इसलिए आए थे कि पैसे बचेंगे, उन्हें अब अपनी जमा-पूंजी बाहर खर्च करनी पड़ रही है।

अव्यवस्था पर फूटा मरीजों का गुस्सा

​मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यह समस्या काफी दिनों से बनी हुई है। जांच सेंटर पर रोज बहस और हंगामा होता है, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द फिल्म की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि गरीबों का इलाज सुलभ हो सके।

तीसरी धारा कड़ा सवाल: क्या यही है हाई-टेक रिम्स?

​एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और हाई-टेक बनाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में एक अदद ‘प्रिंट शीट’ न होना प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है। क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं?

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