एक नई सोच, एक नई धारा

झारखंड का प्रतिनिधित्व काटने पर अड़ा बिहार सिख प्रतिनिधि बोर्ड

जमशेदपुर : लाख टके का सवाल है कि सिखों के दूसरे बड़े धार्मिक तख्त एवं गुरु गोबिंद सिंह जी की जन्मस्थली का प्रबंधन करने वाली तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब प्रबंधन कमेटी में झारखंड के सिखों की भागीदारी पूर्वतः रहेगी अथवा नहीं। पिछले कई सालों से बिहार के सिखों की संस्था बिहार सिख प्रतिनिधि बोर्ड झारखंड के सिखों की भागीदारी काटने के उद्देश्य में लगी हुई है और इस बार तो उसने पटना हाई कोर्ट जाने का मन भी बना लिया है।

बोर्ड की ओर से पटना उच्च न्यायालय की वकील विजेता विश्वास ने इस आशय का एक नोटिस भी तख्त के कस्टोडियन जिला एवं सत्र न्यायाधीश पटना, निर्वाचन प्रक्रिया पूरी करने वाली बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार एवं निर्वाचन पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी पटना सिटी को भेजा है और इसकी प्रति प्रबंधन कमेटी के प्रधान सरदार जगजोत सिंह सोही एवं महासचिव इंद्रजीत सिंह को भेजी गई है।
तख्त का प्रबंधन करने के लिए बिहार राज्य विधानसभा ने संविधान बनाया था और इसमें पांच निर्वाचन क्षेत्र रखे गए। तीन निर्वाचन क्षेत्र पटना एवं पटना सिटी तथा चौथा निर्वाचन क्षेत्र उत्तरी बिहार एवं पांचवा निर्वाचन क्षेत्र दक्षिणी बिहार अर्थात गंगा नदी का दक्षिणी इलाका बनाया गया। (जारी…)

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दक्षिण बिहार अर्थात सासाराम भागलपुर जमालपुर नालंदा नवादा आदि में 15 गुरुद्वारे हैं और तकरीबन 125 से ज्यादा गुरुद्वारे एवं सिख संस्थाएं धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
यहां बोकारो के जोगिंदर सिंह जोगी अध्यक्ष तो जमशेदपुर के सरदार शैलेंद्र सिंह कार्यकारी अध्यक्ष तथा वर्तमान में सरदार इंद्रजीत सिंह महासचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
इंदरजीत सिंह एवं दिल्ली के धाकड़ अकाली नेता अवतार सिंह हित और उत्तर बिहार के लखविंदर सिंह तथा पटना सिटी के खनूजा ने कमेटी चलाई है उससे पटना के स्थानीय सिख नाखुश रहे हैं। दिल्ली दरबार एवं बादल परिवार तक आसान पहुंच के कारण हित के खिलाफ कोई कुछ कर नहीं सका परंतु अब उनके निधन के बाद पटना के सिखों मैं एक तरह से ठान लिया है की बाहरी लोगों को कमेटी में किसी भी हाल में काबिज नहीं होने देना है। बोर्ड का तर्क है कि झारखंड 2000 में ही बिहार से अलग हो चुका है और हिस्सेदारी क्यों दी जाय।महासचिव इंदरजीत सिंह कहते हैं कि चुनावी प्रक्रिया चल रही है और इस बार दक्षिण बिहार सीट से झारखंड को हटाना मुमकिन नहीं है लेकिन देखना होगा कि कानून किस तरह से अपना काम करता है।
जमशेदपुर से झारखंड सिख विकास सभा के अध्यक्ष गुरदीप सिंह पप्पू और राष्ट्रीय सनातनी सिख सभा के कुलविंदर सिंह कहते हैं कि यहां तो सिखों की भागीदारी में वृद्धि की जानी चाहिए और पटना के लोगों को अपना दिल बड़ा करना चाहिए। झारखंड के सिखों की संख्या के आधार पर तीन प्रतिनिधित्व की मांग पर बोकारो के सरदार सेवा सिंह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गए और कोर्ट ने बॉल बिहार सरकार के पाले में डाल दी। (जारी…)

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बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग एवम झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एवं रामगढ़ के सरदार इंद्रजीत सिंह कालरा के अनुसार झारखंड के सिखों को समुचित कदम व्यापक भागीदारी के लिए उठाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने कोल्हान की सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार भगवान सिंह, रांची निवासी तथा झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष सरदार गुरविंदर सिंह सेठी से रांची में बैठक बुलाने का आग्रह किया है और उनके अनुसार यहां रणनीति बनाकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने की जरूरत है। जिससे संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने से झारखंड के तीन प्रतिनिधि प्रबंधन कमेटी में जाएं।

विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल ने दूध, बेलपत्र एवं फूल का किया वितरण

जमशेदपुर : आज विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल बारीडीह नगर की ओर से सावन माह के सोमवारी के शुभ उपलक्ष पर जमशेदपुर स्थित टिनप्लेट काली मंदिर प्रांगण में दूध, बेलपत्र, फूल का वितरण सभी शिव भक्तों के बीच किया गया। जिसमें मुख्य रुप से साकेत भारद्वाज ,रविकांत शर्मा,विक्की झा, विद्यासागर कुशवाहा ,बबली सोनम, सतीश कुमार, मुन्ना मिश्रा, प्रवीण सिंह मौर्य, राहुल श्रीवास्तव, विकास सिंह,मारुत पांडे, हनी परिहार ,राजा अग्रवाल, विवेक शर्मा, सुमित श्रीवास्तव, राजेश कुमार,सुमित कुमार,अमित सिंह,सावन कुमार,आकाश दास, बंटी सिंह,संतोष सिंह,जित्तू सिंह,शेखर राजू, एवं सभी बजरंगी उपस्थित थे।

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पूर्वी सिंहभूम के नये डीसी बने मंजूनाथ भजंत्री, 14 आईएएस अधिकारियों का तबादला
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रांची : झारखंड सरकार ने एक साथ 13 आइएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है. जमशेदपुर की डीसी विजया जाधव को हटा दिया गया है. उनकी जगह देवघर के डीसी रहे मंजूनाथ भजंत्री को जमशेदपुर का डीसी बनाया गया है. जमशेदपुर की डीसी विजया जाधव को कही पोस्टिंग अब तक नहीं की गयी है. इसी तरह सरायकेला-खरसावां जिले के डीसी का भी तबादला किया गया है. जमशेदपुर के डीसी रह चुके रविशंकर शुक्ला को सरायकेला-खरसावां का डीसी बनाया गया है. रविशंकर शुक्ला अभी दुमका के डीसी थे. पलामू के डीसी ए दोड्डे को दुमका डीसी बनाया गया है. गिरीडीह के डीडीसी शशिभूषण मेहरा को जामताड़ा का डीसी बनाया गया है. निबंधक सहयोग समितियां मृत्युजंय कुमार वर्णवाल को पाकुड़ डीसी बनाया गया है.(जारी…)

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क्षेत्रीय निदेशक झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास अजय कुमार सिंह को सिमडेगा का उपायुक्त, खूंटी उपायुक्त शशि रंजन को पलामू का उपायुक्त, पाकुड़ उपायुक्त वरूण रंजन को धनबाद का उपायुक्त बनाया गया है. उत्पाद आयुक्त कर्ण सत्यार्थी को गुमला जिला का उपायुक्त बनाया गया है. इसी तरह स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव मेघा भारद्वाज को कोडरमा का उपायुक्त बनाया गया है. कृषि निदेशक चंदन कुमार को रामगढ़ का उपायुक्त बनाया गया है. कला संस्कृति विभाग के संयुक्त सचिव हिमांशु मोहन को लातेहार का उपायुक्त, निदेशक आईटी विशाल सागर को देवघर का उपायुक्त बनाया गया है. आदिवासी कल्याण आयुक्त लोकेश मिश्रा को उपायुक्त खूंटी बनाये गये है.

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पूर्वी सिंहभूम में छह माह से आंगनबाड़ी सेविका व सहिया मानदेय के लिए लगा रही चक्कर, घर चलाना हुआ मुश्किल

बहरागोड़ा प्रखंड के लगभग 235 सहिया व 230 सेविकाओं का मानदेय बीते दिसंबर महीना से व पोषाहार की राशि बीते जनवरी महीने से नहीं मिलने काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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बताया गया कि गर्भवती महिलाओं की सेहत सुधार व बच्चों के पोषण में अहम भूमिका निभाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां खुद कुपोषण का शिकार होकर भूखमरी के कगार पर पंहुच गयी है. छह महीने से रुके मानदेय लेने के लिए प्रखंड कार्यालय तथा बैंक का चक्कर लगाने को मजबूर हैं.ये महिलाएं बहुत ही कम मानदेय पाकर सरकार द्वारा हर छोटी-मोटी विभागीय कार्य पूरे लगन के साथ करती है. कोरोना काल में भी आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिका अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए दिखी थी.रुके मानदेय के लिए बाल पोषाहार केंद्र से लेकर जिले के आला अधिकारियों तक शिकायत कर चुकी है.

घर गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया

बरसोल के आंगनबाड़ी कार्यकर्ती मीरा डे, बसंती मांडी, सुकुल मणि हंसदा, पुतुल मानी सोरेन, चंदना दास, चांदमुनी मुर्मु, लष्मी टुडू, बनलता सेनापति आदि ने बताया कि पिछले छः महीने से मानदेय न मिलने के कारण हम लोग के घर गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया. बच्चों की फीस के साथ तमाम तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही है. जबकि सरकार के एक इशारे पर हम लोग विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी कार्यों को निष्ठा पूर्वक करती चली आ रही हैं. मानदेय न मिलने से बच्चों के एडमिशन से लेकर सारी व्यवस्थाएं रुकी हुई है. अब तो दुकानदार राशन भी देना बंद कर दिया है समझ में नहीं आ रहा हम लोग घर कैसे चलाएं.

26 जुलाई से आंगनबाड़ी केंद्र में पोषाहार बंद करेंगी

जब तक पोषाहार व मानदेय राशि भुगतान नहीं होगा तब तक हम केंद्रों का संचालन करेंगे परंतु 26 जुलाई से पोषाहार बंद रखेंगे. आंगनबाड़ी सेविकाओं को बीएलओ व सीबी का कार्य भी करा जाता है. लेकिन प्रोत्साहन राशि आज तक नहीं मिली है.

छह माह से मानदेय के लिए लगा रहे हैं चक्कर

नो हजार पांच सौ मासिक मानदेय पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को छः माह से मानदेय नहीं मिला है. इसी तरह सहायिकाएं भी 4750 मासिक मानदेय के लिए छः माह से रुके मानदेय के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं. बच्चों की फीस तथा रसोई के खर्च के लिए इन आंगनबाड़ियों को उधारी का सहारा लेना पड़ रहा है.

क्यों रुका हुआ है कहना मुश्किल

बहरागोड़ा के प्रभारी सीडीपीओ समेत बीडीओ राजेश साहू का कहना है कि मानदेय और पोषाहार के मामले में हम लोग जिला को कई बार सूचित कर चुके हैं. लेकिन इनका मानदेय जिला से ही आएगा. क्यों रुका हुआ है कहना मुश्किल है.

देवघर : ‘इंडिया’ नाम के साथ विपक्ष की लामबंदी से घबरा रही है भाजपा : संजय भारद्वाज
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देवघर:-सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी नीत गठबंधन एनडीए के समानांतर विपक्षी दलों की ओर से बनाए गए महागठबंधन को ‘इंडिया’ नाम दिए जाने पर देवघर जिले में भी राजनीति गरमा गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्षी गठबंधन को इंडिया नाम दिए जाने की आलोचना किए जाने के बाद गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इंडिया नाम जोड़ने को एक फैशन बताते हुए कहा कि जो भी अर्बन नक्सलवाद से संबंधित हैं, वे खुद को वैध करने के लिए अपने साथ इंडिया नाम जोड़ देते हैं.

सांसद के इस बयान के बाद मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी रहे राजद के वरिष्ठ नेता संजय भारद्वाज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. भारद्वाज ने कहा कि इंडिया ही भारत है और भारत ही इंडिया है, यह बात हर कोई जानता है. भाजपा नेताओं की बौखलाहट यह जताने के लिए काफी है कि विपक्षी महागठबंधन को इंडिया नाम दिए जाने के प्रभाव से भाजपा के लोग घबरा गए हैं. सड़कों और भवनों का नाम बदलकर असल मुद्दों से भटकाने की राजनीति करने की कलई धीरे-धीरे खुल रही है. इसलिए अनाप-शनाप बयान दिए जा रहे हैं. भाजपा को डर है कि विपक्ष के लामबंद होने पर सत्ता उनके हाथ से जानी तय है. वास्तव में सत्ता खोने का डर भाजपा नेताओं को सता रहा है इसीलिए उन्हें इंडिया और भारत में भी फर्क नजर आ रहा है.

मानगो डिमना चौक से एमजीएम मेडिकल कॉलेज तक होगा सड़क चौड़ीकरण, बनेगा पार्क

जमशेदपुर : मानगो में डिमना चौक से एमजीएम मेडिकल कॉलेज तक सड़क का चौड़ीकरण होगा। यहां सड़क के किनारे पैवर्स ब्लॉक लगाया जाएगा। पार्क का निर्माण होगा। साथ ही ओपन जिम खोला जाएगा। इस संबंध में मंगलवार को मानगो नगर निगम में कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव ने टाटा स्टील यूआईएसएल के महाप्रबंधक कैप्टन धनंजय मिश्रा के साथ बैठक की। (जारी..)

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इस बैठक में मानगो चौक से डिमना चौक के बीच सेंट्रल वर्ज यानी डिवाइडर में चल रहे निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। सड़क के दोनों तरफ नाली निर्माण और पैवर्स ब्लॉक लगाने पर भी मंथन किया गया।

कपाली पुलिस ने मोबाइल चोरी के दो आरोपियों को भेजा जेल, दोनों के पास से चोरी के चार मोबाइल बरामद

चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली ओपी पुलिस ने मगंलवार को मोबाइल चोरी के दो आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस मामले की जानकारी देते हुए कपाली ओपी प्रभारी ने बताया कि बीते 21 जुलाई को इस्लाम नगर निवासी शाहिद अब्बास के घर से दो मोबाइल चोरी होने की शिकायत थाने में दर्ज कराई गई थी। (जारी…)

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शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चोरी गए मोबाइल के साथ आरोपी अबू बकर नामक अपराधी को पकड़ा। जो जमशेदपुर के मानगो आजाद नगर का रहने वाला है। वहीं पुलिस ने कपाली के इस्लामनगर से दूसरे आरोपी शेख शोएब इमाम को मंगलवार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से चोरी के चार मोबाइल फोन भी बरामद किये हैं। पुलिस ने दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

31 जुलाई तक करें आइटीआर फाइल, करदाताओं को नहीं मिलेगा अतिरिक्त समय, जाने क्या होगा आगे

नई दिल्ली : वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए आइटीआर फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित है। इसके बाद करदाताओं को विलंब शुल्क देना होगा। 18 जुलाई तक 3 करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स ने आइटीआर फाइल कर दिया है। अगर आप भी टैक्सपेयर्स की कैटेगरी में आते हैं तो 31 जुलाई से पहले आइटीआर फाइल कर लें। बताते चलें कि हर साल सरकार आइटीआर फाइल करने की अंतिम तिथि में बदलाव करते हुए करदाताओं को अतिरिक्त समय देती है, पर विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से रिआयत नहीं दी जाएगी। नए असेसमेंट ईयर की शुरुआत 1 अप्रैल से हो गई है। (जारी…)

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अगर आप वेतनभोगी टैक्सपेयर हैं तो फॉर्म 16 आपके लिए सबसे अहम दस्तावेज है। इसके माध्यम से कंपनी या कर्मचारी की ओर से जारी की गई टीडीएस कटौती की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। अगर आपने टीडीएस कटवाया हो तो इसमें आपके टैक्स संबंधी सारी जानकारी होती है। आइटीआर फाइल करते समय ‍वार्षिक सूचना विवरण, टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट और खर्च प्रमाणपत्र, संपत्ति और म्युचुअल फंड से संबंधित कैपिटल गेन, बिटकॉइन, आधार नंबर, नॉन लिस्टेड शेयर्स में निवेश के डिटेल्स और बैंक के खाते की जानकारी देना अनिवार्य है। बताते चलें कि आइटीआर फॉर्म में इस वित्तीय वर्ष में एक बदलाव किया गया है। नए फॉर्म में टैक्सपेयर्स के लिए क्रिप्टो और वर्चुअल डिजिटल संपत्ति की जानकारी देना अनिवार्य किया गया है। आयकर कानूनों में 1 अप्रैल 2022 को संशोधन कर क्रिप्टो और वर्चुअल संपत्ति को टैक्सेबल बनाया गया है। 5 करोड़ से अधिक के टर्नओवर वाले करदाताओं को जीएसटी भरते समय ई इन्वॉयस संलग्न करना होगा। यह प्रक्रिया चालू और पिछले वित्तीय वर्ष पर लागू होगी।

पूर्व विधायक ने कोर्ट से मांगी इच्छा मृत्यु, कहा मरना मेरा मौलिक अधिकार है

धनबाद : झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह अब जीना नहीं चाहते हैं। नीरज सिंह हत्याकांड में जेल में बंद झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने अदालत से इच्छा मृत्यु की अपील की है। संजीव सिंह ने अदालत को बताया है कि सरकार हमें चैन से जीने नहीं दे सकती है, मरना मेरा मौलिक अधिकार है। इसलिए मुझे इच्छामृत्यु की इजाजत दी जाए। इसके साथ ही पूर्व विधायक ने इच्छा मृत्यु के बाद अपने अंगों को दान करने की भी अपील की है। मृत्यु के बाद शरीर के अंगों को दान करने की कागजी प्रक्रिया पूरी करने को लेकर भी संजीव सिंह ने अदालत में फरियाद लगाई है।

पूर्व विधायक संजीव सिंह के अधिवक्ता मोहम्मद जावेद ने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश 16 अखिलेश कुमार की अदालत में उनकी तरफ से एक अपील की गई है। जिसमें उन्होंने इच्छा मृत्यु के लिए अदालत से मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मृत शरीर के अंगों को दान करने की स्वीकृति अदालत से मांगी है। उनका तर्क है कि सरकार उन्हें जीने नहीं दे रही है। इसलिए वह मरना चाहते हैं। (जारी…)

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दरअसल, झारिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह अप्रैल 2017 से धनबाद जेल में बंद हैं। 11 जुलाई 2023 को उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें धनबाद मंडल कारा से एसएनएमएमसीएच में भर्ती कराया गया था। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने भी उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर राहत देने से इंकार कर दिया था। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद संजीव सिंह की याचिका खारिज कर दी थी। अस्पताल में दाखिला कराते वक्त बताया गया था कि संजीव जेल में कुर्सी से गिर कर घायल हो गये हैं।

बता दें कि 1 जुलाई से पूर्व मेडिकल बोर्ड ने जांच में संजीव सिंह की स्थिति सामान्य पायी थी। रिपोर्ट में उन्हें किसी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं होने की बात बतायी गयी थी। वहीं, जेल प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि प्रार्थी संजीव सिंह को मेडिकली फिट हैं। जिसके बाद अदालत ने जेल प्रशासन की रिपोर्ट को देखते हुए संजीव सिंह को जमानत देने से इनकार कर दिया।

एकतरफा बात से सच का पता नहीं चलता, प्रशासन मंत्री के इशारे पर राजनीति का हिस्सा बन रही है- निर्भय सिंह

जमशेदपुर : भाजपा नेता अभय सिंह को जमानत मिलने के बाद भी जेल से बाहर नहीं आने देने के लिए प्रशासन और सरकार लगी हुई है। जिसके कारण कदमा मामले में जमानत मिलने बाद जुगसलाई थाना में केस दर्ज करा दिया गया और जब जुगसलाई मामले में जमानत मिली तो मानगो थाना में केस दर्ज करके उन्हें जेल से बाहर आने से रोका जा रहा है। इस मामले में कुछ चुनिंदा अखबारों में बिल्डर मो सागिर की जुबानी में समाचार छापा गया जिसमें अभय सिंह एवं उनके भाई निर्भय सिंह और दिलीप सिंह पर रंगदारी और दबंगई दिखाने की बात कही गयी है। जिसका विरोध करते हुए निर्भय सिंह ने आज मीडिया वार्ता में कहा कि एक अखबार का कार्य होता है सच को उजागर करना और सच कभी भी एकतरफा बात से सामने नहीं आता। जिन अखबारों और उनके सम्पादकों ने मो सागिर की झूठी और मनगढ़त कहानी सुनी और छापी उन्हें सच्चाई का पता लगाने के लिए हमारे पास भी आना चाहिए था और तब खबर को चलाना चाहिए था। मेरा उनसे आग्रह है कि एक पक्ष को जान कर समाचार न छापें, हमें भी अपनी बात रखने की आज़ादी और हमारा मानवाधिकार भी है। (जारी..)

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निर्भय सिंह ने कहा कि बिल्डर मो सागिर को इस्तेमाल करके प्रशासन झूठा केस दर्ज करके अभय सिंह को जेल से न निकलने देने और परेशान करने की कोशिश कर रही है। हमारे पास पुख्ता साक्ष्य है कि यह केस फ़र्ज़ी है। एक अनैतिक बिल्डर जो मानगो का रहने वाला है वो 2012 से यहाँ बिल्डिंग का कार्य कर रहा है। 2019 में उन्होंने कहा कि उनका कार्य पूरा हुआ। लेकिन समझ से यह परे है कि इतने सालों तक उनका उदय नहीं हुआ किन्तु जब शास्त्री नगर दंगा हो जाता है उसके उपरांत बहुत ही नाटकीय ढंग से साकची के थाना में न होकर मानगो थाना में मामला दर्ज किया गया ताकि हम वहाँ विरोध दर्ज न कर सके।
निर्भय सिंह ने बताया कि मकान संख्या 256 जो बन रहा था वह हमारे घर से 2-3 घर छोड़कर बन रहा था, वाजिब है जब हमारे आसपास कोई बिल्डिंग बनता है तो बढ़ते हुए परिवार को देखकर आप उस बिल्डिंग का भागीदार बनना चाहते हैं। उसी के तहत मैनें ट्रांजेक्शन और सप्लाई के माध्यम से एक फ्लैट लिया। जिसका उल्लेख कभी भी स्थानीय पुलिस ने नहीं किया। सन 2020 में जब यहाँ के एसएसपी तमिल साहब थे और सिटी एसपी ने इस मामले की तहकीकात करके दोनों तरफ से एफआईआर किया था। जिसमें चंद्रशेखर की माँ का विरोध था कि आप रेलिंग नहीं लगाने दे रहे और मेरा कहना था कि मामला जब लंबित है और मेरा पैसा फंसा हुआ है तो मेरा अधिकार है कि मैं बिल्डिंग में कोई कार्य न होने दूँ। मो. सागिर चंद्रशेखर का पार्टनर है और मीडिया के माध्यम से यह जानकारी देना चाहता हूं कि पार्वती सिंह द्वारा मुझपर और मेरे भाई दिलीप सिंह पर 10 लाख रंगदारी मांगने का केस दर्ज हुआ था जिसका पटाक्षेप होने के ठीक एक साल बाद कदमा प्रकरण के उपरांत एसएसपी द्वारा सुनियोजित ढंग से सजाकर अभय सिंह को जेल से न निकलने देने और समाज में उनकी प्रतिष्ठा को खत्म करने की कोशिश कर रही है। जिसके पीछे स्थानीय मंत्री बन्ना गुप्ता हैं और अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के साथ उनका साथ दे रहें हैं और यह भी एक जाँच का विषय है।
निर्भय सिंह ने बताया कि मो.सागिर और मेरे भाई दिलीप सिंह के बीच एक पार्टनरशिप डीड भी बनी थी जिसमें मो. सागिर का रिलीजन इस्लाम लिखा हुआ है तो क्या हमें उस समय ज्ञात नहीं था जो उन्होंने बयान दर्ज कराया कि उनके कर्मचारियों के कपड़े उतार कर हमने धर्म जांच की। उनकी नियत में खोट है तब ही तो ऐसा हुआ और जब पार्टनरशिप डीड बनी तब ही आप शिकायत लेकर जाते। चूंकि गवाह के तौर पर मेरा हस्ताक्षर है और एक हस्ताक्षर हमारे पड़ोसी बद्रीलाल का हैं। यह जानकारी आप आस पड़ोस से ले सकते हैं और यदि आप पूरे लाइन से भी पूछेंगे तो आपको हमारे विरुद्ध गवाह नहीं मिलेगा, क्योंकि हम गलत नहीं है। (जारी..)

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हमने क्या बनने का विरोध किया उसका उल्लेख स्थानीय पुलिस को दिया है और विशेष पदाधिकारी को भी दिया कि काशीडीह में आपके विभाग द्वारा और सरकार द्वारा निर्देशित 1.8 पास करना है लेकिन इन दोनों ने मिलकर 9.8 अफेयर बना दिया और जिसे भी बेचा गया उसका एक रजिस्ट्री दिखा दें। बिल्डर मो. सागिर द्वारा निर्मित बिल्डिंग खुद एक जाँच का विषय है। जिसकी जांच होने पर सच्चाई खुद ब खुद बाहर आ जायेगी।
उन्होंने कहा कि मैं विगत 1 साल से सब को मैसेज भेज रहा हूं कि मोहम्मद सागिर नहीं मिल रहा है, इसके आईओ रोहित बाबू से 7 मई से पहले से मेरी व्हाट्सएप में बात हो रही थी, लेकिन एसएससी ने उन्हें आईओ से हटाकर मुसाबनी का थाना इंचार्ज बना दिया। मेरे द्वारा लगातार शिकायत करने पर भी यह लोग मेरी रिसीविंग नहीं लेते हैं। बिल्डर मोहम्मद सागिर के ऊपर एसएसपी तमिल के समय में 420/506/ 504 /406 /201 /120B का केस लगा था, लेकिन यह फाइल आज तक जमशेदपुर न्यायालय में पहुंची नहीं है। इस एसएसपी के आने बाद यह फ़ाइल संदूक में चली गयी। एक आईपीएस अधिकारी को इस तरह का कार्य शोभित नहीं करता है और उन्हें यह समझना चाहिए कि आने वाले दिनों में यह सरकार रहेगी या नहीं इसका पता नहीं है लेकिन द्वेष पूर्ण तरीके से किया गया उनके इस कार्य को जहाँ तक हो पायेगा मैं लेकर जाऊंगा।

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