कोलंबो : गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने एशिया कप में श्रीलंका को मंगलवार को यहां 41 रन से हराकर सुपर फोर चरण में लगातार दूसरी जीत के साथ फाइनल का टिकट कटा लिया. कुलदीप ने 9.3 ओवर में 43 रन देकर चार विकेट लिए, जबकि रवींद्र जडेजा ने 10 ओवर में 33 रन पर दो विकेट चटकाए. जसप्रीत बुमराह ने दो तो वहीं मोहम्मद सिराज और हार्दिक पंड्या को एक-एक सफलता मिली. (जारी…)
भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 49.1 ओवर में 213 रन बनाने के बाद श्रीलंका की पारी को 41.3 ओवर में 172 रन पर समेट दी. इसके साथ ही एकदिवसीय में श्रीलंका को लगातार 13 जीत के बाद हार का स्वाद चखना पड़ा. श्रीलंका के लिए दुनिथ वेलालगे का हरफनमौला खेल काफी साबित नहीं हुआ. मैन ऑफ द मैच वेलालगे ने पांच विकेट चटकाने के बाद नाबद 42 रन की पारी खेली. वहीं श्रीलंका ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 99 रन तक छह विकेट गंवा दिए थे लेकिन वेलालगे और धनंजय डिसिल्वा ने 75 गेंद में 63 रन की साझेदारी कर टीम के लिए उम्मीदें बनाए रखी लेकिन इस साझेदारी के टूटने के बाद भारत को ज्यादा परेशानी नहीं हुई. (जारी…)
बाएं हाथ के स्पिनर वेलालगे ने 10 ओवर में 40 रन देते हुए करियर में पहली बार पांच विकेट चटकाए तो वहीं इस मुकाबले से पहले अपने 38 मैच के वनडे करियर में महज एक विकेट लेने वाले दाएं हाथ के कामचलाऊ गेंदबाज असलंका ने अपने नौ ओवर में महज 18 रन खर्च कर चार विकेट लिए. महीश तीक्षणा को एक सफलता मिली. भारतीय टीम के खिलाफ एकदिवसीय में पहली बार स्पिनरों ने सभी 10 विकेट झटके. (जारी…)
भारतीय टीम ने एक दिन पहले इसी मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ दो विकेट पर 356 रन बनाकर रिकॉर्ड 228 रन से जीत दर्ज की थी. भारत के लिए कप्तान रोहित शर्मा ने 48 गेंद में 53 रन की तेज तर्रार पारी खेलने के साथ शुभमन गिल (13) के साथ पहले विकेट के लिए 80 रन की साझेदारी की. वेलालगे ने अपने शुरुआती तीन ओवर में गिल, विराट कोहली (तीन रन) और रोहित को आउट कर भारतीय टीम को बैकफुट पर धकेल दिया. पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद शतकीय पारी खेलने वाले लोकेश राहुल (39) और ईशान किशन (33) ने चौथे विकेट के लिए 89 गेंद में 63 रन की साझेदारी कर मैच में वापसी की कोशिश की लेकिन वेलालगे ने राहुल को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा. इसके बाद असलंका ने किशन को चलता किया और फिर निचले क्रम के बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखायी.
जमशेदपुर : जमशेदपुर के मानगो पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान दाईगुट्टू इलाके में अवैध कारोबार पर दबिश दी गई है। इस क्षेत्र के करमू चौक में लगातार अवैध रूप से शराब की बिक्री होती थी इससे लोगों के परिवार उजड़ रहे थे। इसकी शिकायत लोगों ने मानगो पुलिस से की। उसके बाद मंगलवार की रात मानगो थाना प्रभारी विनय कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने करमू चौक पर दबिश दी। यहां के चार शराब अड्डों पर छापेमारी कर वहां जितने भी लोग मिले उन पर कार्रवाई की गयी। इससे पहले दोपहर में पुलिस की टीम ने फॉरेस्ट एरिया में छापेमारी के दौरान पूरे इलाके को घेर लिया गया था लेकिन फिर भी नशेड़ी दीवार कूद कर भागने में सफल रहे। फॉरेस्ट और दाईगुट्टू के कुछ इलाकों में लगातार ब्राउन शुगर बेचा जा रहा है। अवैध रूप से इस इलाके में नशे का कारोबार होता है। (जारी…)
कुछ शराब भट्ठियां ऐसी है जहां पैसे कम कर लौटने वालों को शराब पिलाकर ठग लिया जाता है। उनके पैसे ऐंठ लिए जाते हैं। उनके सामानों को चुरा लिया जाता है। लेकिन नशे में होने के कारण लोगों के द्वारा कोई शिकायत नहीं की जाती है। यह आमतौर पर करमू चौक में होता है। करमू चौक के इलाके को अवैध शराब के कारोबारी ने अपना अड्डा बना लिया है। मानगो थाना प्रभारी विनय कुमार ने बताया कि इस करमू चौक में अब लगातार छापेमारी की जाएगी और जो भी व्यक्ति शराब पीने के लिए आएगा उसे पर भी कार्रवाई होगी। दूसरी ओर स्थानीय लोगों ने बताया कि इस क्षेत्र में अवैध कारोबारी पर कार्रवाई करने का काम आबकारी विभाग का है लेकिन आबकारी विभाग के द्वारा यहां कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, बल्कि विभाग के कुछ लोग यहां आकर पैसे लेकर चले जाते हैं। यहां स्थानीय लोगों की भी शिकायत है। लोगों ने मांग की है कि पुलिस और आबकारी विभाग मिलकर इस क्षेत्र में विशेष रूप से करमू चौक में अवैध कारोबार शराब की भठियों को बंद करें, जिससे कि यहां के लोगों की जिंदगी सुरक्षित रह सके।
जमशेदपुर : बागबेड़ा थाना में जान से मारने और घर हड़पने का एक मामला पहुँचा। बताया जा रहा है कि बागबेड़ा थाना अंतर्गत गाराबासा निवासी अजीत सिंह चंद्रवंशी ने रास बिहारी रवानी उर्फ साधु जी के खिलाफ लिखित शिकायत देते हुए कहा है कि 9 महीने पहले उन्होंने रास बिहारी से खाली जमीन कोर्ट एग्रीमेंट के जरिये 2.5 लाख रुपये में खरीदी थी और अब उसमें घर बना कर रह रहे हैं, किन्तु अब उस जमीन और उसपर बने उनके घर को हड़पने के इरादे से रास बिहारी और उनके परिजनों द्वारा आये दिन गाली गलौज, मारपीट एवं घर छोड़कर नहीं जाने पर पूरे परिवार को जान से मार देने की धमकी दी जाती है। जिससे अजीत सिंह सहित उनका पूरा परिवार डरा हुआ है। (जारी…)
बताया जाता है कि रास बिहारी उर्फ साधु जी और उनके परिवार परिवार के ऊपर बस्ती वासियों से मारपीट, गौ हत्या एवं मर्डर जैसे मामले में केस दर्ज है और उनमें से कई लोगों ने जेल की सजा भी काट चुके हैं। जिससे डर का माहौल और बन गया है। अजीत सिंह द्वारा प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की माँग की गई है।
जमशेदपुर : आईआईटी के प्रोफेसर दिव्या द्वारा इंटरनेशनल न्यूज़ के एक साक्षात्कार में भारतीय संस्कृति और भारत के विश्व मे बढ़ते कद को मीडिया का प्रभाव बताए जाने के बाद पूरे देश मे इसकी आलोचना हो रही है और इस बाबत भाजपा कृषि मोर्चा, बारीडीह मंडल के महामंत्री कुमार विश्वजीत ने कहा कि G20 सम्मेलन की सफलता की चर्चा जहां पूरे विश्व में हो रही है और हमारा भारत अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में वैश्विक स्तर पर अपनी नई पहचान बना रहा है। (जारी…)
वहीं इस उल्लेखनीय उपलब्धि के चलते कईयों को मरोड़ उठ रहा है। दिल्ली आईआईटी में सोशल साइंस की एसोसिएट प्रोफेसर दिव्या ने “फ्रांस24” नामक न्यूज नेटवर्क को अपने साक्षात्कार के दौरान भारतीय सनातन संस्कृति के बारे में बहुत ही अशोभनीय बातें कहीं हैं। उन्होंने अपने “घृणित” वक्तव्य में कहा कि भविष्य में भारत से हिंदुत्व ही खत्म हो जाएगा। साथ ही भारत की टेक्नोलॉजी समेत अनेक क्षेत्रों में बढ़ती धाक और लोकप्रियता को उन्होंने मीडिया द्वारा गढ़ी गई कहानी बताया तथा भारत में कुछेक लोगों (10प्रतिशत) द्वारा आमजन को (90प्रतिशत) को दबाए, कुचले जाने की बात कही। उनके इस देश विरोधी बयान की मीडिया द्वारा कड़ी आलोचना तो हो रही है पर चिंतन की जरूरत है। (जारी…)
उन्होंने कहा कि आज जहां पूरा विश्व भारत के सामर्थ्य का लोहा मान रहा है वहीं देश के ही कुछेक घृणित मानसिकता वाले लोगों के चलते देश की इज्जत को बट्टा लगता है और मैं प्रोफेसर दिव्या के बयान की कड़ी भर्त्सना करता हूं और उन्हें सूचित करना चाहूंगा कि हमारा देश पुरातन सनातन संस्कृति के चलते जिंदाबाद था, है और रहेगा।
जमशेदपुर : जमशेदपुर स्थित काशीडीह हाई स्कूल के 70 विद्यार्थियों ने शैक्षणिक भ्रमण के तहत आईआईटी खड़गपुर का दौरा किया। कक्षा 11वीं और 12वीं के 70 छात्रों ने इस दौरा में शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न विभागों का दौरा किया और बहुत सारे कौशल सीखें। उन्होंने नेहरू संग्रहालय का भी दौरा किया और शोध देखा। यह यात्रा अटल प्रभारी कमलेश ओझा एवं लक्ष्मी सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।
जमशेदपुर : विगत दिनों मानगो नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव ने भाजपा नेता विकास सिंह के ऊपर सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए उलीडीह थाना में मुकदमा दर्ज कराया था। सप्ताह भर पहले भाजपा नेता विकास सिंह ने मानगो नगर निगम के कार्यालय में जाकर कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव को रिवाइटल की शक्ति वर्धक गोली देते हुए कानून एवं संविधान को जीवित रखने की बात कहते हुए ज्ञापन दिया था। (जारी…)
भाजपा नेता विकास सिंह ने कार्यपालक पदाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में अपनी बात रखते हुए कहा था कि सैकड़ो पत्राचार करने के बावजूद भी स्वास्थ मंत्री बन्ना गुप्ता के द्वारा मानगो एन एच 33 आनंद विहार कॉलोनी के मुहाने में अपने आप्त सचिव को आगे करके अपना निजी छः मंजिला कार्यालय का अवैध निर्माण करवा रहे हैं। मंत्री के डर से कार्यपालक पदाधिकारी कानून को हाशिए में रखकर अवैध निर्माण को बंद करने का हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ठीक दूसरी ओर आम लोगों के ऊपर कानून का डंडा चलाते हुए निर्माणाधीन मकान को नोटिस देकर मोटी रकम वसूलने का कार्य करते हैं। (जारी…)
कार्यपालक पदाधिकारी के डरने के कारण ही कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव के आवास के महज 50 मीटर की दूरी पर छः मंजिला भवन का निर्माण हो रहा है। सच का आईना दिखलाने पर कार्यपालक पदाधिकारी भड़क गए और विकास सिंह के ऊपर मुकदमा दर्ज करवा दिया। भाजपा नेता विकास सिंह के अधिवक्ता कृष्ण मुरारी सिंह ने ए डी जे 1 के सामने विकास सिंह का पक्ष रखते हुए कहा कि विकास सिंह ने किसी प्रकार का सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का कार्य नहीं किया था, ना ही विकास सिंह ने किसी प्रकार का बल का प्रयोग किया था। (जारी…)
अधिवक्ता कृष्ण मुरारी सिंह ने जिला सत्र न्यायालय के सामने विकास सिंह के द्वारा अवैध निर्माण संबंधित जितनी भी लिखित शिकायतें की थी उसकी छायाप्रति देते हुए कहा कि कार्यपालक पदाधिकारी ने जनप्रतिनिधि के भय से विकास सिंह के आवेदन को रद्दी कागज समझ कर कूड़ेदान में फेंक दिया था, जिसके चलते अवैध निर्माण का कार्य पहली मंजिल से छठी मंजिल तक हो गया। बार-बार शिकायत करने पर भी कार्रवाई नहीं होने पर मजबूर होकर विकास सिंह ने कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव को कानून और संविधान की रक्षा हेतु ज्ञापन देते हुए रिवाइटल की गोली दिया था जिससे आक्रोशित हो गए और झूठा मुकदमा विकास सिंह के ऊपर उलीडीह थाना में किया। आज न्यायालय ने विकास सिंह गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया है।
जमशेदपुर : मानगो के ज्वाहर नगर रोड नंबर 15 गैस गोदाम के समीप जल जमाव के कारण पूरे मोहल्ले को डेंगू ने अपने गिरफ्त में ले लिया है। मोहल्ले का कोई ऐसा घर नहीं जहां दो से तीन लोग डेंगू के मरीज नहीं है। बगल में खाली पड़े जमीन में कई दिनों से जल जमाव के कारण डेंगू का लारवा होने की आशंका स्थानीय लोगों ने जताई हैं। डेंगू से हो रहे मौत के डर से स्थानीय लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। (जारी…)
स्थानीय लोगों ने भाजपा नेता विकास सिंह को बुलाकर इस जानलेवा समस्या से अवगत कराते हुए कहा की कोई ऐसा घर नहीं जहां दो से तीन लोग डेंगू के मरीज नहीं है। शाम होते ही मच्छर का प्रकोप इतना बढ़ जाता है कि लोग अपने घर में ही कैद हो जाते हैं बाहर निकलने की हिम्मत लोग नहीं जुटा पाते हैं। मानगो नगर निगम के द्वारा किसी प्रकार की व्यवस्था डेंगू के रोकथाम के लिए नहीं की गई है। जमीन जहां जल जमाव है उसके मालिक को नोटिस नहीं दिया गया, ना ही एंटी लारवा, ब्लीचिंग का छिड़काव नगर निगम के द्वारा किया गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि अब हमलोगो के पास यहां से पलायन करने के सिवा कोई दुसरा उपाय नहीं सुझ रहा है। (जारी…)
मौके में पहुंचे भाजपा नेता विकास सिंह ने नगर निगम उदासीन रवैया पर क्षोभ प्रकट करते हुए मामले की जानकारी नगर निगम के अधिकारियों के साथ-साथ उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम को देने का कार्य किया। विकास सिंह ने कहा कि पूरे झारखंड प्रदेश में सबसे अधिक डेंगू के मरीज मानगो के निवासी है मानगो नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी साफ सफाई में बिल्कुल ध्यान नहीं देते, केवल भवन निर्माताओं के ऊपर गिद्ध दृष्टि रखने का कार्य करते हैं। जिसका दुष्परिणाम यह है कि पूरा मानगो डेंगू की आग में जल रहा है। विकास सिंह ने कहा उनकी जानकारी में तीन से चार लोगों का देहांत डेंगू के कारण हो गया है जो मानगो के रहने वाले थे, इसलिए मानगो नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव के ऊपर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। (जारी…)
मौके में मुख्य रूप से संदीप शर्मा, रेणु देवी, जगत यादव, खुशबू देवी, फातिमा बेगम, ऋषि सिंह, कुंदन कुमार, सोनू यादव, दीपक गोप, उपस्थित थे जिनके परिवार डेंगू से पीड़ित है।
सरायकेला: झारखंड के सरायकेला से एक शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ एक सौतेले पिता ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार किया। पीड़िता का कहना है कि उसने इस घटना का जिक्र मां से भी किया पर वो हर बार मुंह बंद करवा देती थी।
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तहकीकात आरम्भ कर दी है। कहा जा रहा है कि अपराधी पिता 4 वर्षों से बेटी को अपनी हवस का शिकार बना रहा था।
पीड़ित बच्ची की शिकायत पर पुलिस ने पॉस्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर अपराधी पिता को गिरफ्तार कर लिया है। कहा जा रहा है कि बहन की स्थिति खराब देख भाई को कुछ संदेह हुआ तो उसने बहन से पूछाताछ की। पीड़िता ने आपबीती भाई को बताई। तत्पश्चात, भाई अपनी बहन को लेकर स्थानीय थाने पहुंचा तथा अपराधी पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया।
शिकायत प्राप्त होते ही पुलिस एक्शन में आई तथा अपराधी पिता दिनेश गिरी को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही पीड़िता की मां को गिरफ्त में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि अपराधी के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। इस मामले पर पुलिस ने बताया कि धाना 376 और पॉस्को एक्ट में मुकदमा दर्ज कर अपराधी को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत में पेश करने के बाद अपराधी को जेल दिया। पीड़िता की पुलिस द्वारा काउंसलिंग भी कराई जा रही है।
इन दिनों देश में ‘एक देश एक चुनाव’ का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, 31 अगस्त को संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 18 से 22 सितंबर को संसद के विशेष सत्र बुलाये जाने की जानकारी साझा की.
विशेष सत्र बुलाये जाने के केंद्र सरकार के निर्णय के अगले ही दिन ‘एक देश एक चुनाव’ के लिए समिति बनाये जाने की जानकारी सामने आयी. तभी से लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जाने को लेकर चिंतन-मनन का दौर जारी है.
कयास लगाये जा रहे हैं कि विशेष सत्र में सरकार यह विधेयक पेश कर सकती है. भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से एक देश एक चुनाव चाहती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के पक्षधर रहे हैं. वे इसका जिक्र भी कर चुके हैं और इसे भारत की जरूरत भी बता चुके हैं.
सरकार ने किया उच्च स्तरीय समिति का गठन
देशभर में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ संपन्न हो सकते हैं या नहीं, इस बात का पता लगाने के लिए हाल ही में केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. यह समिति भारत की चुनावी प्रक्रिया का अध्ययन करेगी और उसी के आधार पर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. उसी िरपोर्ट के आधार पर सरकार अपन रुख तय करेगी.
रामनाथ कोविंद बने अध्यक्ष
केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे. गृह मंत्री अमित शाह, राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह, पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष सी कश्यप, वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे, पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी समिति के सदस्य होंगे. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को भी समिति में शािमल किया गया है, पर उन्होंने इस समिति का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है.
चुनाव आयोग ने भी दिया था सुझाव
वर्ष 1967 के बाद से एक साथ चुनाव का जो सिलसिला टूटा, उस कड़ी को फिर से जोड़ने की कवायद लगभग 16 वर्षों तक ठंडी पड़ी रही. वर्ष 1983 में चुनाव आयोग ने पहली बार अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सुझाव दिया कि लोकसभा के साथ-साथ राज्यों के भी विधानसभा चुनाव कराये जाने चाहिए. पर तत्कालीन सरकार ने आयोग के सुझाव को तवज्जो नहीं दी. हालांकि, 1999 में यह मुद्दा एक बार फिर उभरा जब विधि आयोग ने एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया.
विधि आयोग की सिफारिश
न्यायमूर्ति बीपी जीवन रेड्डी की अध्यक्षता वाले विधि आयोग ने 1999 में चुनावी कानूनों में सुधार पर अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराये जाने की सिफारिश की थी. कहा था कि शासन में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही होने चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार, ‘हर वर्ष और बेमौसम चुनाव का सिलसिला समाप्त किया जाना चाहिए. हमें वापस उस स्थिति में लौट जाना चाहिए जहां लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे. आयोग ने यह भी कहा था कि वर्तमान परिस्थिति में प्रत्येक पांच वर्ष में एक साथ चुनाव कराने का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से प्राप्त करना होगा.
संसदीय स्थायी समिति ने क्या कहा
कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय पर संसदीय स्थायी समिति ने एम सुदर्शना नचियप्पन की अगुवाई में एक साथ चुनाव कराये जाने की संभावना को लेकर 17 दिसंबर, 2015 को सदन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि बार-बार चुनाव होने से बहुत अधिक पैसा खर्च होता है. सामान्य जीवन पर असर पड़ता है और जरूरी सेवाएं प्रभावित होती हैं. चुनाव आयोग की ओर से आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि चुनाव के लिए लंबे समय तक सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ती है, जिससे उन पर बोझ पड़ता है.
विधि आयोग की मसौदा रिपोर्ट
न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता में विधि आयोग ने 30 अगस्त, 2018 को अपनी मसौदा रिपोर्ट में कहा था कि संविधान के मौजूदा ढांचे के तहत एक साथ चुनाव नहीं कराये जा सकते. इसके लिए संविधान के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और लोकसभा और विधानसभाओं की प्रक्रिया के नियमों में संशोधन करना होगा. साथ ही कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों को संशोधनों को स्वीकार करना होगा.
एक साथ चुनाव के लाभ
अगस्त, 2018 को सौंपी गयी मसौदा रिपोर्ट में विधि आयोग ने लोकसभा व सभी राज्य विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराने का लाभ भी बताया है. रिपोर्ट के अनुसार,
एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन की बचत होगी.
प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा बलों पर पड़ने वाला बोझ कम होगा.
सरकारी नीतियों का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा.
प्रशासनिक मशीनरी चुनावी कार्यों में लगे रहने की बजाय विकास कार्यों में संलग्न रहेंगी
पहले भी हो चुके हैं एक साथ चुनाव
देश के स्वतंत्र होने के बाद पहली बार 1952 में चुनाव हुए. तब आम चुनाव (लोकसभा) के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के लिए भी चुनाव हुए. इसके पांच वर्षों बाद, 1957 में भी ऐसा ही हुआ. हालांकि, तब राज्यों के पुनर्गठन, यानी नये राज्यों के बनने के कारण 76 प्रतिशत राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ ही हुए. परंतु एक साथ चुनाव का यह सिलसिला पहली बार तब टूटा जब 1959 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 356 का उपयोग करते हुए केरल की ईएमएस नंबूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त कर दिया.
इसके बाद फरवरी 1960 में केरल में फिर से विधानसभा चुनाव हुआ. इस प्रकार, देश के किसी भी राज्य में मध्यावधि चुनाव का यह पहला मामला था. हालांकि, इसके बाद 1962 और 1967 में भी लोकसभा के साथ 67 प्रतिशत राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही हुए.
देश के स्वतंत्र होने के बाद पहली बार 1952 में चुनाव हुए. तब आम चुनाव (लोकसभा) के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के लिए भी चुनाव हुए. इसके पांच वर्षों बाद, 1957 में भी ऐसा ही हुआ. हालांकि, तब राज्यों के पुनर्गठन, यानी नये राज्यों के बनने के कारण 76 प्रतिशत राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ ही हुए. परंतु एक साथ चुनाव का यह सिलसिला पहली बार तब टूटा जब 1959 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 356 का उपयोग करते हुए केरल की ईएमएस नंबूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त कर दिया. इसके बाद फरवरी 1960 में केरल में फिर से विधानसभा चुनाव हुआ. इस प्रकार, देश के किसी भी राज्य में मध्यावधि चुनाव का यह पहला मामला था. हालांकि, इसके बाद 1962 और 1967 में भी लोकसभा के साथ 67 प्रतिशत राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही हुए.
ऐसे टूटा सिलसिला
वर्ष 1968 और 1969 में कुछ राज्य विधानसभा अपने निर्धारित कार्यकाल को पूरा नहीं कर सकीं और विधानसभा समय पूर्व ही भंग हो गयी. इसके चलते एक देश एक चुनाव का सिलसिला पूरी तरह टूट गया. वास्तव में, 1967 के चुनाव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मद्रास आदि राज्यों में झटका लगा. कई जगह तो कांग्रेस के बागियों ने अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार बनायी. पर ऐसी अनेक गठबंधन सरकारें अपने पांच वर्ष का निर्धारित कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं और गिर गयीं. वर्ष 1970 में तो लोकसभा भी समय से पहले भंग हो गयी और 1971 में फिर से आम चुनाव हुए. इसके बाद पांचवी लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाकर 1977 तक कर दिया गया. छठी, सातवीं, नौवीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा भी समय पूर्व भंग हो गयी. इस प्रकार, 1967 के बाद से लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ संपन्न नहीं हो सके.
ये हैं कुछ प्रमुख चुनौतियां
यदि देश में एक देश एक चुनाव लागू होता है तो इसके लिए संविधान के पांच अनुच्छेदों- 83, 85, 172, 174 और 356 में संशोधन करना होगा. अनुच्छेद 83 संसद के दोनों सदनों के कार्यकाल, 85 राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा को भंग करने, 172 राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल, 174 राज्य विधानसभाओं को भंग करने और अनुच्छेद 356 राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने से संबंधित है.
एक देश एक चुनाव को लागू करने के लिए सभी राजनीतिक दलों और सभी राज्य सरकारों की सहमति होना आवश्यक है.
इस कार्य के लिए अतिरिक्त ईवीएम/ वीवीपैट की आवश्यकता होगी. इस समय देश में दस लाख मतदान केंद्र हैं. यदि पूरे देश में वीवीपैट सिस्टम प्रयोग किया जाता है तो एक साथ चुनाव कराने के लिए दोगुने वीवीपैट की आवश्यकता होगी. इस प्रकार, एक साथ चुनाव कराने के लिए ईवीएम और वीवीपैट की खरीद पर नौ हजार दो सौ चौरासी करोड़ से अधिक रुपया खर्च करना पड़ेगा.
इवीएम को रखने के लिए भंडार गृह की जरूरत दोगुनी हो जायेगी, जो समस्या का कारण बन सकती है.
अतिरिक्त मतदान कर्मियों और सुरक्षा बलों की जरूरत होगी, जिससे राज्यों पर दबाव पड़ेगा.
एक साथ चुनाव कराने के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता भी होगी
आगे की राह
देश में कुछ-कुछ महीनों के अंतराल पर अलग-अलग राज्यों में चुनाव होते हैं और आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्य बाधित होता है. विकास कार्यों के निर्बाध चलते रहने के लिए एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श और अध्ययन आवश्यक है. केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सभी दलों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस बात पर सर्वसहमति बनानी चाहिए कि राष्ट्र को एक देश एक चुनाव की आवश्यकता है या नहीं. यहां दल से ऊपर उठकर देशहित में विचार करने की जरूरत है.
आलोचकों की राय
लोकसभा ओर विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने को लेकर जहां कई दल समर्थन में हैं, वहीं कई इसके विरोध में. आलोचकों का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने का विचार राजनीति से प्रेरित है. एक साथ चुनाव कराने से मतदाताओं का व्यवहार इस रूप में प्रभावित हो सकता है कि वे विधानसभा चुनाव के लिए भी राष्ट्रीय मुद्दों पर मतदान करने लगेंगे. इससे संभावना है कि बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में जीत हासिल करें. इस कारण क्षेत्रीय पार्टियों के हाशिये पर चले जाने की आशंका है. वहीं कुछ आलोचकों का मानना है कि प्रत्येक पांच वर्ष में एक से ज्यादा बार मतदाताओं का सामना करने से नेताओं की जवाबदेही बढ़ती है और वे सतर्क रहते हैं. विरोध करने वाले दलों में कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस, तेलुगू देशम, एआईएमआईएम आदि शामिल हैं.
ये दल हैं समर्थन में
एआइएडीएमके, असम गण परिषद, आईयूएमएल, बीजू जनता दल समेत अनेक दल एक देश एक चुनाव के समर्थन में हैं.
क्या कहना है चुनाव आयोग का
एक देश एक चुनाव को लेकर प्रश्न पूछे जाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा है कि भारत का चुनाव संवैधानिक प्रावधानों और जनप्रतिनिधि अधिनियम (आरपी एक्ट) के अनुसार काम करने को तैयार है.
झारखण्ड : बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो की मां रुकवा महताइन 87 वर्षीय का आज यानी मंगलवार की सुबह करीब सात बजे असर्फी हॉस्पिटल धनबाद में निधन हो गया है। पूरे कोयलांचल क्षेत्र में शोक की लहर है। निधन की खबर सुनकर काफी संख्या में कार्यकर्ता और उनके परिवार के लोग अस्पताल पहुंच गये हैं और कहा भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। बताया जा रहा है कि ढुल्लू महतो की मां दो दिन पहले ही असर्फी हॉस्पिटल धनबाद में भर्ती किया गया था। लंबे समय से बीमार चल रही थी। पूर्व में भी इलाज के लिए दिल्ली एम्स ले जाया गया था। इलाज के दौरान उन्होंने असर्फी हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली। (जारी…)
जानकारी के अनुसार लिलोरी स्थान घाट पर अंतिम संस्कार किया जायेगा। ढुल्लू महतो की माता रुकवा महताईन, महिला धर्म परायण थी। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गयी हैं। बताया जा रहा है कि पार्थीव शरीर विधायक आवास पहुंच गया है। अंतिम दर्शन को भारी संख्या में समर्थक और नेता पहुंच रहे हैं। विधायक के आलवे उनके चार भाई ओर है। सभी अपनी माता के निधन पर दुःखी है। विधायक ढुल्लू महतो को ढांढस बंधाने के लिए कई बड़े राज नेताओं एवं बीसीसीएल के बड़े अधिकारी उनके आवास पहुंच रहे हैं। उनका दाह संस्कार दामोदर नदी के तेलमोच्चो शमशान घाट में किया जाएगा।
यह हम सभी के लिए दुःखद खबर है – कुमार विश्वजीत
भाजपा किसान मोर्चा बारीडीह मंडल के महामंत्री कुमार विश्वजीत ने शोक प्रकट करते हुए कहा कि यह हम सभी के लिए एक दुःखद खबर है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवगंत आत्मा को शांति प्रदान करें और सभी परिजनों को संबल दें।