
ताजा खबर










हैदराबाद/नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को बढ़ावा देने को लेकर पाकिस्तान की कड़े शब्दों में निंदा की है। शुक्रवार को हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित ‘इंटेलेक्चुअल मीट’ को संबोधित करते हुए उन्होंने एक बड़ा एलान किया। राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग/NDA) सरकार आतंकवाद को प्रायोजित करने और बढ़ावा देने वालों तक सिंधु नदी का पानी किसी भी कीमत पर नहीं पहुंचने देगी।
रक्षा मंत्री ने कांग्रेस और विपक्षी नेताओं द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सवाल उठाने पर उनकी तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि भारत के खिलाफ आतंकी हमले नहीं रुके, तो पाकिस्तान को होने वाली अनाज और पानी की आपूर्ति पूरी तरह रोक दी जाएगी।
राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष जिक्र करते हुए कहा कि इस कार्रवाई के जरिए भारत ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया है कि जो देश शांति और सद्भाव की भाषा नहीं समझते, उन्हें उन्हीं की भाषा में कैसे माकूल जवाब दिया जाता है। उन्होंने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग/UPA) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में आए दिन नए-नए घोटालों और भ्रष्टाचार की खबरें आती थीं, जबकि मौजूदा सरकार के बजट का हर एक रुपया देश की सुरक्षा को मजबूत करने में लग रहा है और सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं है।
विदेशी मंचों पर भारत की बढ़ती साख का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया में एक ‘विश्वसनीय साझेदार’ बनकर उभरा है। कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर के देशों को वैक्सीन और मदद पहुंचाने के कारण आज भारत को पूरी दुनिया में ‘विश्व बंधु’ के रूप में देखा जाता है। इसके साथ ही उन्होंने दुश्मनों को चेतावनी देते हुए कहा:
“भारत के दुश्मनों को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि संकट में जीवन बचाने के लिए हमारे पास अगर जीवनरक्षक टीके (वैक्सीन) हैं, तो देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए हमारे पास ‘ब्रह्मोस’ जैसी अचूक मिसाइलें भी मौजूद हैं।”

चुनाव केंद्रित राजनीति पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि राजग सरकार तात्कालिक राजनीतिक फायदों के लिए काम नहीं करती। उन्होंने कहा, “हम अगला चुनाव जीतने की चिंता नहीं करते, बल्कि हमें देश की अगली पीढ़ी की चिंता है। हमारी नीयत बिल्कुल साफ है और हमारे कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है।” उन्होंने दोहराया कि सरकार का पूरा ध्यान देश के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी हितों की रक्षा को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी पुराने कर्मचारी को महज अनुशासनहीनता या आदेश न मानने (हुक्मउदूली) के आधार पर नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। अदालत के मुताबिक, नौकरी से बर्खास्त करने जैसी सख्त सजा सिर्फ भ्रष्टाचार, अनैतिक आचरण या संस्थान को भारी नुकसान पहुंचाने वाली दुर्भावनापूर्ण हरकतों के मामलों में ही दी जानी चाहिए।
यह अहम टिप्पणी जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की।
सर्वोच्च अदालत ने काम की जगह पर अनुशासन के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि वे इसे कम नहीं आंक रहे हैं। लेकिन, जब तक भ्रष्टाचार, अवैध उगाही, फंड का गलत इस्तेमाल, सार्वजनिक रूप से संस्थान की बदनामी करने या मालिक को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप न हों, तब तक किसी को सीधे नौकरी से निकाल देना पूरी तरह गलत है।
पीठ ने कानून का एक बड़ा सिद्धांत तय करते हुए कहा कि किसी भी सजा का निर्धारण कर्मचारी के पिछले सर्विस रिकॉर्ड, आसपास के हालात, किए गए गलत काम की गंभीरता और उसका संस्थान पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी से निकाले जाने के मानवीय और सामाजिक पहलू पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को बर्खास्त किया जाता है, तो मालिक और कर्मचारी का रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। इसके अलावा:
यह पूरा मामला महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड से जुड़ा है, जिसने साल 2017 में अपने एक पुराने कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
अदालत ने ध्यान दिलाया कि उक्त कर्मचारी ने संस्थान को अपनी जिंदगी के 21 साल की लंबी सेवा दी है और अब वह रिटायरमेंट की उम्र भी पार कर चुका है। ऐसे में कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे कथित अनुशासनहीनता, आदेश न मानने और सरकारी दस्तावेजों को नष्ट करने के आरोपों के बदले दी जाने वाली सजा के स्वरूप पर दोबारा विचार करें और इसे बर्खास्तगी से बदलकर कोई तर्कसंगत रूप दें।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
आईआरसीटीसी की वेबसाइट से जुड़ी दिक्कतों को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बड़ी घोषणा की है। जयपुर में मालवीय नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNIT) के विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि सरकारी कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन (IRCTC) की नई और पहले से बेहतर वेबसाइट अगले महीने 15 जुलाई तक शुरू हो जाएगी।
रेलवे अधिकारियों द्वारा साझा किए गए और न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) द्वारा ट्वीट किए गए एक वीडियो में इस बातचीत की पुष्टि हुई है।
एमएनआईटी के विद्यार्थियों से संवाद के दौरान एक छात्रा ने आईआरसीटीसी वेबसाइट पर टिकट बुकिंग के समय आने वाली ‘कैपचा’ (Captcha) की बड़ी समस्या को दूर करने की मांग की। इस पर रेल मंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया और मौके से ही एक वरिष्ठ अधिकारी को फोन मिला दिया।
रेल मंत्री ने अधिकारी से कहा, “विद्यार्थियों की डिमांड है कि आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट बने। क्या इसे एक महीने में लॉन्च कर देंगे?” इसके बाद उन्होंने छात्रा को भरोसा दिलाया कि 15 जुलाई तक नई वेबसाइट की लॉन्चिंग कर दी जाएगी।

वर्तमान में आईआरसीटीसी की टिकटिंग वेबसाइट ([https://www.irctc.co.in/](https://www.irctc.co.in/)) पर यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से:
इन पीक ऑवर्स (ज्यादा डिमांड वाले समय) में साइट का क्रैश होना बेहद आम बात है। इसके अलावा, कैपचा और ओटीपी (OTP) की जटिल औपचारिकताओं को पूरा करने में ही इतना समय लग जाता है कि आम यात्रियों के सामने देखते ही देखते कंफर्म टिकट खत्म हो जाते हैं। नई वेबसाइट से इन सभी समस्याओं के स्थायी समाधान की उम्मीद है।
साल 2002 में जब भारतीय रेलवे ने इंटरनेट से टिकट बुकिंग सेवा की शुरुआत की थी, तब रोजाना महज कुछ सौ टिकट ही बिकते थे। लेकिन आज परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। इस समय रेलवे के करीब 88 फीसदी टिकट आईआरसीटीसी के जरिए ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। यही कारण है कि रेलवे ने अब देश भर में रिजर्वेशन काउंटरों की संख्या को भी धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है। ऐसे में नई वेबसाइट का आना करोड़ों रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
तीसरी धारा न्यूज, जमशेदपुर, 13 जून 2026:
पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले को पूरी तरह नशामुक्त बनाने और युवाओं को नशे के दलदल से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के आलोक में जिले में 10 जून से 25 जून तक एक विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को उपायुक्त (DC) श्री राजीव रंजन ने समाहरणालय परिसर से एक विशेष जागरूकता रथ और बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस खास मौके पर उप विकास आयुक्त (DDC), अपर उपायुक्त (ADC), जिला समाज कल्याण पदाधिकारी समेत जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
जिला प्रशासन द्वारा रवाना किया गया यह जागरूकता रथ पूरे जिले में घूमेगा। इसके तहत:


उपायुक्त ने दिलाई शपथ: “नशा केवल व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार को उजाड़ देता है”
समाहरणालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने वहां मौजूद सभी अधिकारियों, युवाओं और आम नागरिकों को नशापान से दूर रहने की गंभीर शपथ दिलाई।
उपायुक्त ने युवाओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि नशा न केवल एक व्यक्ति के शरीर और स्वास्थ्य को बर्बाद करता है, बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज पर इसका बहुत बुरा (प्रतिकूल) असर पड़ता है। उन्होंने युवाओं से हर प्रकार के नशे से दूरी बनाने और एक स्वस्थ, सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
जिला जनसंपर्क कार्यालय (PRD, East Singhbhum) द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस 15 दिवसीय अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी ताकत झोंक रहा है। उपायुक्त ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और अभिभावकों से भी अपील की है कि वे इस नशामुक्ति अभियान में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी निभाएं, ताकि जमशेदपुर के भविष्य (युवाओं) को सुरक्षित किया जा सके।
जमशेदपुर और आसपास की तमाम प्रशासनिक व स्थानीय खबरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए बने रहिए ‘तीसरी धारा न्यूज’ के साथ।
जमशेदपुर: शहर के कदमा थाना क्षेत्र में एक बार फिर बेखौफ अपराधियों ने कानून व्यवस्था को चुनौती दी है। कदमा के रामजनम नगर स्थित बिहारी बस्ती में बुधवार को पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। बात सिर्फ मारपीट तक ही सीमित नहीं रही, हमलावरों ने दहशत फैलाने के उद्देश्य से तीन राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग भी की। इस घटना में तीन युवक बाल-बाल बच गए, हालांकि वे मारपीट में गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
घटना के संबंध में रामजनम नगर निवासी समीर नाग ने कदमा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
दर्ज शिकायत के अनुसार, बुधवार को समीर नाग अपने दो दोस्तों—सन्नी गुप्ता और विकास तांती के साथ मरीन ड्राइव हाईवे के नीचे स्थित सार्वजनिक शौचालय के पास खड़ा था। इसी दौरान दो मोटरसािकिलों पर सवार होकर छह युवक वहां पहुंचे। पुरानी रंजिश का हवाला देते हुए आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने तीनों युवकों पर जानलेवा हमला बोल दिया।
पीड़ित समीर नाग ने बताया कि हमलावरों ने उन पर ईंट-पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे उसके सिर पर गंभीर चोट आई है। वहीं उसके दोनों साथी सन्नी गुप्ता और विकास तांती भी इस पथराव और मारपीट में लहूलुहान हो गए। मारपीट के बाद इलाके में दहशत का माहौल बनाने के लिए हमलावरों ने तीन राउंड फायरिंग की, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि गोली किसी को नहीं लगी और तीनों युवक बाल-बाल बच गए।
शिकायत में नामजद: पीड़ित पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में मारपीट और फायरिंग के पीछे आसू कर्मकार और उसके साथियों का हाथ होने का आरोप लगाया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही कदमा थाना पुलिस हरकत में आई और मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके। स्थानीय पुलिस का कहना है कि आपसी विवाद और पुरानी रंजिश के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
तीसरी धारा न्यूज
रांची/जमशेदपुर:
झारखंड राज्य सूचना आयोग को लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नए सूचना आयुक्त मिलने जा रहे हैं। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर बुधवार को अपनी सशर्त स्वीकृति प्रदान कर दी है। राज्यपाल की इस मंजूरी के बाद अब वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा समेत चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। राजभवन से फाइल स्वीकृत होने के बाद राज्य सरकार द्वारा जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद सभी मनोनीत सदस्य पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।
राज्यपाल द्वारा स्वीकृत किए गए प्रस्ताव में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े चार प्रमुख चेहरों को सूचना आयुक्त के पद पर जिम्मेदारी दी गई है:
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस बार संचिका (फाइल) को मंजूरी तो दे दी है, लेकिन इसके साथ ही राज्य सरकार के सामने कुछ कड़े निर्देश और शर्तें भी रखी हैं:

मालूम हो कि इस नियुक्ति को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से पेंच फंसा हुआ था। इससे पहले राज्यपाल ने दो बार इस नियुक्ति से संबंधित संचिका को वापस लौटा दिया था:

इसके अलावा, सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर इस नियुक्ति प्रक्रिया को रोकने की मांग भी की थी। बहरहाल, सरकार के जवाबों के बाद अब राज्यपाल ने शर्तों के साथ इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
जमशेदपुर:
आगामी 21 जून 2026 को होने वाली NEET (UG)-2026 परीक्षा को पूरी तरह कदाचारमुक्त, स्वच्छ और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। समाहरणालय सभागार में जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त श्री राजीव रंजन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ एनटीए (NTA) एवं संबंधित परीक्षा केंद्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जहां तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की गई।
बैठक में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम जिले के 6 प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में कुल 8 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर इस वर्ष 4,000 से अधिक परीक्षार्थी परीक्षा देंगे।
इन प्रमुख संस्थानों में बने हैं परीक्षा केंद्र:
परीक्षा में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने बेहद कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए हैं। गाइडलाइन के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर इनविजिलेटर (वीक्षक) के रूप में केवल और केवल सरकारी कर्मियों की ही ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके साथ ही:

परीक्षार्थियों और अभिभावकों की सहूलियत के लिए शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और परीक्षा केंद्रों के आसपास सुगम यातायात व क्राउड मैनेजमेंट हेतु मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा सभी केंद्रों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति, शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त ने साफ लफ्जों में कहा कि तैयारियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में सिटी एसपी, एसडीएम धालभूम, एएसपी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर, नजारत उप समाहर्ता, डीआईओ, डीएसपी हेडक्वार्टर, डीएसपी ट्रैफिक और विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता सहित विभिन्न कॉलेज प्रबंधन के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
जमशेदपुर: शहर के ऑटो और टेम्पो में सफर करने वाले आम यात्रियों की जेब पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। जमशेदपुर में डीजल और सीएनजी (CNG) की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद ‘शिक्षित बेरोजगार टेम्पो चालक-संचालक संघ’ ने ऑटो किराए में वृद्धि करने का फैसला किया है। इस संबंध में संघ की ओर से पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त (DC) को एक मांग पत्र सौंपा गया है, जिसमें विभिन्न रूटों पर ₹5 तक किराया बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है।

संघ के संरक्षक बन्ना गुप्ता और महासचिव श्याम किंकर झा के नेतृत्व में प्रशासन से मांग की गई है कि इस संशोधित किराया सूची को जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए ताकि ईंधन की मार झेल रहे ऑटो चालकों को राहत मिल सके।
संघ द्वारा जारी की गई नई सूची के अनुसार, साकची से बारीडीह और साकची से मानगो/पारडीह रूट का प्रस्तावित किराया इस प्रकार है:
1. साकची से बारीडीह रूट:
|
गंतव्य (साकची से) |
पुराना किराया |
नया (प्रस्तावित) किराया |
बदलाव |
|---|---|---|---|
|
बाराद्वारी |
₹10.00 |
₹10.00 |
कोई बदलाव नहीं |
|
भालूबासा, एग्रीको, सिदगोड़ा |
₹10.00 |
₹15.00 |
+ ₹5.00 |
|
एन.एम.एल., बागुनहातु |
₹15.00 |
₹20.00 |
+ ₹5.00 |
|
बारीडीह, न्यू बारीडीह |
₹15.00 |
₹20.00 |
+ ₹5.00 |
|
मर्सी हॉस्पिटल, बारीडीह बस्ती |
₹20.00 |
₹25.00 |
+ ₹5.00 |

2. साकची से मानगो, डिमना और पारडीह रूट:
|
गंतव्य (साकची से) |
पुराना किराया |
नया (प्रस्तावित) किराया |
बदलाव |
|---|---|---|---|
|
मानगो चौक |
₹10.00 |
₹15.00 |
+ ₹5.00 |
|
डिमना चौक |
₹15.00 |
₹15.00 |
कोई बदलाव नहीं |
|
आजाद बस्ती |
₹10.00 |
₹15.00 |
+ ₹5.00 |
|
गरीब कॉलोनी, चेपा पूल |
₹15.00 |
₹20.00 |
+ ₹5.00 |
|
पारडीह चौक / कपाली टीओपी |
₹20.00 |
₹25.00 |
+ ₹5.00 |
जमशेदपुर: जमीनी स्तर पर पंचायती राज व्यवस्था की कार्यप्रणाली और ग्रामीण विकास की वास्तविकताओं को समझने के लिए आज राजनीति शास्त्र की छात्राओं को एक बेहतरीन व्यावहारिक अवसर मिला। ‘नेचर संस्था’ (NATURE NGO) द्वारा अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान, बागबेड़ा में संचालित स्नातक छात्राओं के विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत एक ‘लाइव टॉक’ और परिचर्चा सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस अनूठे संवाद का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को किताबी ज्ञान से परे ग्रामीण भारत के राजनीतिक ढांचे और जमीनी शासन से रूबरू कराना था।
इस लाइव टॉक में बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत और मध्य बागबेड़ा पंचायतों के प्रमुख प्रतिनिधियों, मुखिया, पंचायत समिति सदस्यों और वार्ड सदस्यों ने हिस्सा लिया। सत्र के दौरान जनप्रतिनिधियों ने छात्राओं को अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के क्रियान्वयन, सरकारी योजनाओं के लाभ, महिला सशक्तिकरण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया।
संवाद के दौरान राजनीति शास्त्र की छात्राओं ने अपनी प्रशासनिक और राजनीतिक समझ का परिचय देते हुए पंचायत प्रतिनिधियों से कई महत्वपूर्ण सवाल किए:

इस अवसर पर नेचर संस्था की संरक्षक डॉ. कविता परमार ने संवाद की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा:
”राजनीति विज्ञान की छात्राओं के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वे सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ जमीनी स्तर की राजनीति और पंचायती राज व्यवस्था को गहराई से समझें। पंचायत प्रतिनिधियों के साथ यह सीधा संवाद छात्राओं के नेतृत्व कौशल और प्रशासनिक समझ को विकसित करने में मील का पत्थर साबित होगा।”
सत्र के समापन पर प्रतिभागी छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए माना कि इस लाइव टॉक से उन्हें ग्राम स्तर पर लोकतंत्र के वास्तविक स्वरूप, जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीण नेतृत्व की चुनौतियों का एक व्यावहारिक व गहन अनुभव प्राप्त हुआ है, जो भविष्य में उनके बेहद काम आएगा।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद राज्य की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बिखराव की स्थिति पैदा हो गई है। 60 से ज्यादा विधायकों के बाद अब टीएमसी के सांसदों ने भी ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बीच, बगावत करने वाले टीएमसी के 19 सांसदों की पहली आधिकारिक लिस्ट भी सामने आ चुकी है।
हालांकि, बागी गुट का दावा था कि उनके साथ 20 से ज्यादा सांसद हैं, लेकिन फिलहाल सामने आई सूची में 19 सांसदों के नाम दर्ज हैं।
इस पूरे राजनीतिक विद्रोह की कमान बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार संभाल रही हैं। बागी सांसदों ने उन्हें अपना नेता चुना है। खबरों के अनुसार, 10 से ज्यादा बागी सांसदों ने कुछ दिनों पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी।
इसके बाद, लगभग 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए (NDA) को समर्थन देने की बात कही है। बागियों ने संसद में एक अलग गुट बनाने का भी दावा पेश किया है।
अपनी बगावत पर बोलते हुए काकोली घोष ने कहा:
”मैं ममता बनर्जी के साथ तब भी खड़ी थी जब वह सत्ता में नहीं थीं। पहले की नीतियां बंगाल के गरीबों के भले के लिए थीं, लेकिन पिछले 3-4 सालों से उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो रहा था।”

सामने आई लिस्ट में बंगाल के कई कद्दावर और चर्चित चेहरों के नाम शामिल हैं:
इस पूरी लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम जादवपुर की सांसद सयोनी घोष का है। बंगाल चुनाव के दौरान सयोनी अपनी आक्रामक बयानबाजी और रैलियों के कारण पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बनी हुई थीं। राजनीतिक गलियारों में तो उन्हें ममता बनर्जी का भविष्य का विकल्प तक माना जाने लगा था।
साल 2021 में टीएमसी जॉइन करने वाली सयोनी भले ही अपना पहला विधानसभा चुनाव हार गई थीं, लेकिन उनके तेवर देखते हुए अभिषेक बनर्जी ने उन्हें टीएमसी यूथ विंग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। ऐसे में उनका बागी गुट में जाना ममता बनर्जी के लिए बहुत बड़ा निजी झटका माना जा रहा है।
ममता बनर्जी को झटका देने वालों में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान और ‘शॉटगन’ शत्रुघ्न सिन्हा भी शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए इस भूचाल ने अब दिल्ली तक की हलचल बढ़ा दी है। देखना होगा कि ममता बनर्जी इस सबसे बड़े संकट से अपनी पार्टी को कैसे बचा पाती हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज