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झारखंड के 3 शिक्षा मंत्रियों का असामयिक निधन: एक अत्यंत दुखद और अजीब संयोग

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तीसरी धारा न्यूज | 6 सितंबर 2026 | जमशेदपुर

झारखंड की राजनीति में स्तब्ध कर देने वाला घटनाक्रम

झारखंड के राजनीतिक इतिहास में एक बेहद दुखद और अकल्पनीय संयोग दर्ज हो गया है। राज्य में पिछले साढ़े तीन वर्षों के भीतर शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग संभाल रहे तीन-तीन मंत्रियों का असामयिक निधन हो गया है। जगन्नाथ महतो और रामदास सोरेन के बाद अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार देर रात हृदयगति रुकने से हुए आकस्मिक निधन ने पूरे प्रदेश को गहरे शोक और अचरज में डाल दिया है।jagarnath mahto 1680758805

जगन्नाथ महतो का इलाज के दौरान हुआ था निधन

इस सिलसिले की शुरुआत राज्य के लोकप्रिय और जुझारू नेता जगन्नाथ महतो के निधन से हुई थी। ‘टाइगर’ के नाम से चर्चित जगन्नाथ महतो लंबे समय तक स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के मंत्री रहे। कोरोना महामारी के गंभीर प्रभावों से लंबे संघर्ष और फेफड़े के प्रत्यारोपण के बाद अप्रैल 2023 में चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। उनके चले जाने से राज्य के राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारे में बड़ा शून्य पैदा हुआ था।KeyPersonnel20241219 140859

रामदास सोरेन का भी असमय साथ छूटना

जगन्नाथ महतो के बाद राज्य सरकार में शिक्षा और उससे जुड़े विभागों के प्रशासनिक उत्तरदायित्वों में फेरबदल हुए। इसी क्रम में वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री रामदास सोरेन को भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा और इलाज के दौरान उनका भी असामयिक निधन हो गया। एक के बाद एक दो प्रमुख नेताओं और मंत्रियों के इस तरह जाने से राज्य पहले ही उबर नहीं पाया था कि अब तीसरा आघात लगा है।zqrRJlmj 400x400

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से शोक की लहर

शनिवार देर रात गिरिडीह से विधायक और राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू (56 वर्ष) को अचानक सीने में दर्द की शिकायत हुई। अस्पताल ले जाने के दौरान हृदयगति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) से उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे निजी और राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में दो दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है।

जनमानस में चर्चा और गहरा शोक

महज साढ़े तीन साल के अंतराल में शिक्षा और उच्च शिक्षा मंत्रालय से जुड़े तीन वरिष्ठ मंत्रियों का इस तरह अचानक चले जाना एक ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण संयोग बन गया है, जिसकी मिसाल राज्य के इतिहास में नहीं मिलती। आम जनता से लेकर राजनीतिक विश्लेषक तक इस दुखद संयोग से स्तब्ध हैं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

तीसरी धारा न्यूज

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