पटना: बिहार के बिजली उपभोक्ताओं, विशेषकर प्रीपेड मीटर वाले ग्राहकों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार ने बिजली खपत के समय (Time of Usage) के आधार पर दरों में बदलाव करने की पूरी तैयारी कर ली है। अब उपभोक्ताओं को इस बात का ध्यान रखना होगा कि वे किस समय कितनी बिजली खर्च कर रहे हैं, क्योंकि शाम के वक्त बिजली का उपयोग आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।
1 अप्रैल से बदलेगा नियम: ‘टाइम ऑफ डे’ टैरिफ को मंजूरी
बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने बिजली कंपनियों के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसमें ‘टाइम ऑफ डे टैरिफ’ (ToD) लागू करने की बात कही गई थी। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएगी। इसके तहत दिन के अलग-अलग घंटों के लिए बिजली की दरें अलग-अलग निर्धारित की गई हैं।
पीक आवर्स में लगेगा ज्यादा शुल्क
नई व्यवस्था के पीछे मुख्य गणित ‘डिमांड और सप्लाई’ का है।
- पीक आवर्स (शाम का समय): जब शाम के वक्त राज्य में बिजली की मांग सबसे अधिक होती है, उस दौरान खपत करने पर उपभोक्ताओं को सामान्य से अधिक दर पर भुगतान करना होगा।
- ऑफ-पीक आवर्स: दिन के अन्य समय या देर रात, जब बिजली की मांग कम रहती है, तब दरें अपेक्षाकृत कम या सामान्य रहेंगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य बिजली की खपत को संतुलित करना है।
- लोड प्रबंधन: शाम के समय पावर ग्रिड पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को कम करना।
- संसाधन प्रबंधन: ऊर्जा संसाधनों का बेहतर और किफायती प्रबंधन सुनिश्चित करना।
- जागरूकता: उपभोक्ताओं को ऊर्जा बचत और स्मार्ट उपयोग के प्रति प्रोत्साहित करना।
प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं पर सीधा असर
यह बदलाव प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उनका बैलेंस सीधे समय आधारित दरों के हिसाब से कटेगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि भारी बिजली उपकरण (जैसे मोटर, वाशिंग मशीन या एसी) का उपयोग ऑफ-पीक समय में करके उपभोक्ता अपने बिल में कटौती कर सकते हैं।
आम जनता में चिंता
हालांकि सरकार इसे ऊर्जा प्रबंधन का बड़ा कदम बता रही है, लेकिन आम उपभोक्ताओं ने इस पर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि शाम के समय ही घर के सभी सदस्य साथ होते हैं और लाइट, पंखे या खाना बनाने वाले उपकरणों की जरूरत पड़ती है, ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवारों का मासिक बजट बिगड़ सकता है।











