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मोबाइल रिचार्ज का ’28 दिनों’ वाला खेल खत्म होगा? संसद में गूंजा 13वें महीने के एक्स्ट्रा खर्च का मुद्दा

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नई दिल्ली: क्या आपने कभी गौर किया है कि साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन आपको मोबाइल रिचार्ज 13 बार करना पड़ता है? टेलीकॉम कंपनियों की इसी ‘गणित’ को लेकर संसद में जोरदार बहस छिड़ गई है। सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त बोझ का मुद्दा उठाया, जिस पर सरकार और TRAI की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई है।IMG 20260325 025050

सालाना 13 रिचार्ज: कंपनियों का मुनाफा, जनता का नुकसान

​सांसद राघव चड्ढा ने तर्क दिया कि टेलीकॉम कंपनियां “मंथली प्लान” के नाम पर केवल 28 दिनों की वैलिडिटी देती हैं।

  • गणित का खेल: हर महीने के बचे हुए 2-3 दिन साल के अंत तक मिलकर एक पूरा महीना (28-30 दिन) बन जाते हैं।
  • अतिरिक्त बोझ: इसके कारण यूजर्स को 365 दिन की सेवा के लिए 12 के बजाय 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है।
  • डेटा की बर्बादी: उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि यदि डेली कोटा (जैसे 2GB) में से डेटा बच जाता है, तो वह आधी रात को खत्म हो जाता है, जबकि ग्राहक ने उसके लिए पूरा भुगतान किया होता है।

सरकार का रुख: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिया जवाब

​इस मुद्दे पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार टेलीकॉम कंपनियों को 30 दिन वाले प्लान अधिक प्रमोट करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  1. TRAI का निर्देश: टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने 2022 में ही नियम बनाया था कि हर ऑपरेटर को अपनी हर कैटेगरी में कम से कम एक प्लान 30 दिन की वैलिडिटी वाला रखना अनिवार्य है।
  2. विकल्प की उपलब्धता: कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राहकों को ‘सही मंथली’ विकल्प दें ताकि भ्रम की स्थिति न रहे।

क्या बदल सकते हैं नियम? सांसद के बड़े सुझाव

​संसद में चर्चा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आए जो भविष्य में मोबाइल सेवाओं का स्वरूप बदल सकते हैं:

  • 28 दिन वाले प्लान की समाप्ति: सुझाव दिया गया कि ‘मंथली’ का मतलब सीधे 30 दिन या कैलेंडर महीना होना चाहिए।
  • इनकमिंग की सुविधा: रिचार्ज खत्म होने के बाद भी कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल और मैसेज की सुविधा बंद नहीं होनी चाहिए। (वर्तमान में TRAI के अनुसार 90 दिनों तक नंबर पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता)।

कंपनियों की आजादी बनाम रेगुलेशन

​भारत में टेलीकॉम सेक्टर ‘टैरिफ फॉरबेयरेंस’ (Tariff Forbearance) सिस्टम पर चलता है। इसका मतलब है कि कंपनियां अपने प्लान की कीमतें खुद तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, TRAI यह सुनिश्चित करता है कि यह स्वतंत्रता उपभोक्ताओं के शोषण का जरिया न बने।

ब्यूरो रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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