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Income Tax Rules 2026: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे आयकर के नियम, HRA और कैपिटल गेन्स पर होगा सीधा असर

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जमशेदपुर/नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ‘इनकम टैक्स रूल्स 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 (वित्त वर्ष 2026-27) से प्रभावी होंगे, जिनका असर जुलाई 2027 में भरे जाने वाले ITR पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता लाना और टैक्स चोरी पर लगाम लगाना है।

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प्रमुख बदलाव जो आपको प्रभावित करेंगे:

1. बड़े शहरों में रहने वालों को HRA में बड़ी राहत

सैलरीड क्लास के लिए अब हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के नियमों को और अधिक स्पष्ट किया गया है। अब देश के 8 प्रमुख शहरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु) में रहने वाले कर्मचारियों को उनके वेतन के 50% तक HRA छूट मिल सकेगी। अन्य शहरों के लिए यह सीमा 40% निर्धारित की गई है।

2. मकान मालिक से रिश्ता बताना हुआ अनिवार्य

टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार ने पारदर्शिता बढ़ा दी है। अब टैक्सपेयर्स को फॉर्म 124 में यह खुलासा करना होगा कि उनका मकान मालिक के साथ क्या संबंध है। हालांकि, HRA छूट की गणना अभी भी प्राप्त वास्तविक HRA, चुकाया गया किराया (सैलरी का 10%) और सैलरी के 40/50% में से जो भी कम हो, उसी आधार पर होगी।

3. स्टॉक मार्केट के लिए कड़े अनुपालन नियम

शेयर बाजार और डेरिवेटिव ट्रेडिंग (F&O) में लेनदेन करने वालों के लिए अब डेटा सुरक्षा और रिपोर्टिंग के नियम सख्त होंगे:

  • ​एक्सचेंजों के लिए ग्राहकों का PAN और यूनिक क्लाइंट आईडी कैप्चर करना अनिवार्य होगा।
  • ​सभी लेनदेन का ऑडिट ट्रेल अब 7 साल तक सुरक्षित रखना होगा।
  • ​हर महीने की 15 तारीख तक आयकर विभाग को मासिक विवरण जमा करना अनिवार्य होगा।

4. कैपिटल गेन्स और होल्डिंग पीरियड पर स्पष्टता

संपत्ति बेचने पर लगने वाले टैक्स (Capital Gains) की गणना के लिए ‘होल्डिंग पीरियड’ के नियम साफ किए गए हैं। यदि आपने बॉन्ड को शेयर में बदला है, तो समय की गणना मूल बॉन्ड खरीदने की तारीख से होगी। वहीं, IDS 2016 के तहत घोषित अचल संपत्ति के लिए होल्डिंग पीरियड रजिस्टर्ड डीड की तारीख से माना जाएगा।

विशेषज्ञ की राय: सरकार का यह कदम टैक्स सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा निवेश है। हालांकि, इससे टैक्सपेयर्स और कंपनियों के लिए कागजी कार्रवाई (कॉम्प्लायंस) का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन इससे नियमों की उलझनें कम होंगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज