जमशेदपुर। कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, एमजीएम (MGM) की बदहाली एक बार फिर चर्चा में है। मानगो शंकोसाई निवासी द्वारा साझा किए गए एक विचलित करने वाले वीडियो ने अस्पताल प्रबंधन और मैनपावर सप्लाई करने वाले संवेदक के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अस्पताल में मैनपावर की भारी कमी के कारण मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
वीडियो में दिखा दर्द: एक्स-रे के लिए तड़प रहे मरीज
विकास साव द्वारा बुधवार शाम करीब 4:30 बजे साझा किए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बेबस मरीज एक्स-रे करवाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं और तड़प रहे हैं। वीडियो साझा करने वाले युवक का कहना है कि यह स्थिति केवल एक विभाग की नहीं, बल्कि पूरे अस्पताल की है।
क्या मैनपावर सप्लाई में हो रहा है खेल?
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के साथ ही जिला प्रशासन (DC) का ध्यान एक गंभीर मुद्दे की ओर खींचा गया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि एमजीएम अस्पताल में मैनपावर सप्लाई के नाम पर झारखंड का सबसे बड़ा ‘महाघोटाला’ चल रहा है।
- मुख्य आरोप: संवेदक (ठेकेदार) और अस्पताल प्रशासन के बीच हुए इकरारनामे (Agreement) के अनुसार जितने कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए, धरातल पर उसकी आधी संख्या भी नजर नहीं आती।
- इकरारनामे का उल्लंघन: अगर संवेदक द्वारा 100% मैनपावर की सप्लाई ईमानदारी से की जाए, तो एमजीएम अस्पताल की व्यवस्था देश के बेहतरीन अस्पतालों जैसी हो सकती है। लेकिन फिलहाल, कागजों पर मैनपावर दिखाकर भुगतान उठाने का खेल जारी है।
अस्पताल की साख पर सवाल
मरीजों का कहना है कि भारी-भरकम बजट और नई बिल्डिंग बनने के बावजूद अगर बुनियादी सुविधाएं और स्टॉफ की कमी बनी हुई है, तो इसके लिए सीधे तौर पर मैनपावर सप्लाई करने वाली एजेंसी जिम्मेदार है।
युवक ने इस मामले में उपायुक्त (DC) से हस्तक्षेप की मांग करते हुए पूछा है कि क्या गरीब मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले इन संवेदकों पर कभी कड़ी कार्रवाई होगी?
रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज़











