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एक नई सोच, एक नई धारा

तीसरी धारा विशेष: कोल्हान को मिलेगी बड़ी सौगात; जमशेदपुर के डिमना में बनेगा ‘एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर’, अब घायल हाथियों को मिलेगा नया जीवन

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​जमशेदपुर | 15 फरवरी, 2026

​झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष और घायल हाथियों के उपचार की गंभीर चुनौतियों के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। जमशेदपुर के डिमना में हाथियों के लिए एक अत्याधुनिक रेस्क्यू सेंटर (Rescue Center) बनाया जाएगा। वन विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे कोल्हान के वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।

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​₹1 करोड़ की लागत और हाई-टेक सुविधाएं

​लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह कोल्हान का पहला हाथी रेस्क्यू सेंटर होगा। इसका निर्माण अप्रैल 2026 से शुरू होने की संभावना है। डिमना लेक के पास 7 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस केंद्र में निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:

  • ​अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (OT): घायल हाथियों के तत्काल ऑपरेशन के लिए।
  • ​फीडिंग सेंटर और किचन: हाथियों के लिए पौष्टिक आहार की व्यवस्था।
  • ​क्वारेंटाइन और सुरक्षित बाड़े: बीमार हाथियों को अलग रखकर निगरानी करने के लिए।
  • ​प्राकृतिक जलस्रोत: हाथियों के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता।

​क्यों जरूरी था यह रेस्क्यू सेंटर?

​वर्तमान में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में घायल हाथियों के इलाज के लिए उन्हें टाटा स्टील जू भेजना पड़ता है। दूरी और परिवहन के कारण इलाज में देरी होती है, जिससे हाथियों की मृत्यु दर बढ़ जाती है।

​”रेस्क्यू सेंटर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे हाथियों को सही समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और उनकी जान बचाई जा सकेगी।”

— सबा आलम अंसारी, DFO, दलमा वन्यजीव अभयारण्य

​हाथियों के हमले से 27 मौतें: सीएम हेमंत सोरेन का कड़ा निर्देश

​राज्य में बढ़ते हाथी हमलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ महीनों में हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर और अन्य जिलों को मिलाकर लगभग 27 लोगों की मृत्यु हुई है। इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए हैं:

  1. ​एलीफेंट रेस्क्यू टीम: प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रेस्क्यू टीम तैयार की जाए।
  2. ​सुरक्षा किट का वितरण: ग्रामीणों को हाथी भगाने के लिए डीजल, टॉर्च, सोलर सायरन और टायर जैसे जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
  3. ​जागरूकता अभियान: वन विभाग ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित करे।

​तीसरी धारा का नज़रिया: डिमना में रेस्क्यू सेंटर का निर्माण न केवल वन्यजीवों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि यह मानव और हाथियों के बीच बढ़ती रंजिश को कम करने में भी एक सेतु का काम करेगा। यह विकास और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

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