जगन्नाथपुर CHC की बदहाली: 48 घंटे से न डॉक्टर, न स्टाफ; ‘फोर्थ ग्रेड’ कर्मियों के भरोसे मरीजों की जान!
जगन्नाथपुर | ब्यूरो रिपोर्ट
झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक डरावनी तस्वीर जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से सामने आ रही है। पिछले 48 घंटों से यह अस्पताल ‘भगवान भरोसे’ चल रहा है। आलम यह है कि अस्पताल में न तो कोई डॉक्टर मौजूद है और न ही कोई नियमित स्वास्थ्यकर्मी। पूरी व्यवस्था चतुर्थ श्रेणी (फोर्थ ग्रेड) कर्मचारियों के कंधों पर टिकी है।

मासूम की जान पर बनी, तड़पती रही सहिया
सोमवार की सुबह अस्पताल की इस लापरवाही ने दो परिवारों की सांसें अटका दीं:
- घायल बच्चा: छत से गिरकर एक मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया। खून से लथपथ हालत में परिजन उसे लेकर अस्पताल भागे, लेकिन वहां कोई डॉक्टर नहीं मिला। हद तो तब हो गई जब बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे हायर सेंटर रेफर करने के लिए साइन करने वाला भी कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
- घायल सहिया: कोचड़ा गांव की एक सहिया मोटरसाइकिल दुर्घटना का शिकार होकर अस्पताल पहुँची। डॉक्टर के अभाव में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने जैसे-तैसे पट्टी तो बांधी, लेकिन गंभीर चोट के कारण उसे रेफर करने वाला कोई नहीं था और वह घंटों अस्पताल परिसर में ही तड़पती रही।
क्या कागजों पर चल रहा है अस्पताल?
स्थानीय ग्रामीणों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है; जगन्नाथपुर CHC में डॉक्टरों की अनुपस्थिति एक ‘नियमित बीमारी’ बन चुकी है।
- सवाल: आखिर बिना डॉक्टर के अस्पताल के संचालन की अनुमति किसने दी?
- खतरा: आपातकालीन स्थिति में अगर किसी मरीज की जान जाती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा—स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन?
क्षेत्र की जनता की मांग: अविलंब हो कार्रवाई
क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि:
- तत्काल अस्पताल में नियमित डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
- पिछले 48 घंटों से ड्यूटी से गायब कर्मियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई हो।
- रेफरल सिस्टम को दुरुस्त किया जाए ताकि मरीजों को दर-दर न भटकना पड़े।










