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​बजट 2026: महिलाओं के लिए ‘शी मार्ट्स’ और छात्राओं के लिए हर जिले में हॉस्टल; जानें निर्मला सीतारमण की बड़ी घोषणाएं

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नई दिल्ली | 1 फरवरी, 2026

​वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में ‘नारी शक्ति’ को समर्पित बजट 2026-27 पेश किया। सरकार ने महिलाओं को सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि ‘उद्यमी’ (Entrepreneur) बनाने की दिशा में तीन सबसे बड़े कदम उठाए हैं।

​1. ‘शी मार्ट्स’ (She MARTS): महिला ब्रांड्स को मिलेगी वैश्विक पहचान

​लखपति दीदी योजना की अपार सफलता के बाद, सरकार ने ‘शी मार्ट्स’ लॉन्च करने का ऐलान किया है।

  • क्या है शी मार्ट्स? यह एक रिटेल आउटलेट चेन होगी जिसे पूरी तरह से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा संचालित किया जाएगा।
  • फायदा: इससे गाँव की महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बड़े बाजारों और शहरों तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे वे अपना खुद का ब्रांड स्थापित कर सकेंगी।

​2. लखपति दीदी योजना: आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

​केंद्र सरकार ने लखपति दीदी योजना को आगे भी जारी रखने का फैसला किया है।

  • ​इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण (Interest-free Loan) दिया जाता है।
  • ​इसके साथ ही सरकार सब्सिडी भी प्रदान करती है ताकि ग्रामीण महिलाएं छोटे उद्योग शुरू कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें।

​3. हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल: छात्राओं की पढ़ाई होगी आसान

​शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा बुनियादी ढांचागत सुधार है।

  • ​वित्त मंत्री ने देश के 700 से अधिक जिलों में सरकारी गर्ल्स हॉस्टल खोलने की घोषणा की है।
  • उद्देश्य: दूर-दराज के इलाकों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित आवास मिल सके और वे बिना किसी बाधा के अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकें।

​📊 बजट 2026: महिला सशक्तिकरण के मुख्य बिंदु

योजनामुख्य लाभलक्षित समूह
शी मार्ट्सरिटेल आउटलेट और ब्रांडिंग सपोर्टमहिला उद्यमी
लखपति दीदी₹5 लाख तक ब्याज मुक्त लोनस्वयं सहायता समूह (SHG)
गर्ल्स हॉस्टल700+ जिलों में सुरक्षित आवासछात्राएं (Students)
कौशल विकासतकनीकी और डिजिटल ट्रेनिंगयुवा महिलाएं

🎤 “विकसित भारत के केंद्र में महिलाएं”

​वित्त मंत्री ने अपने भाषण में जोर दिया कि “विकसित भारत 2047” का सपना महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना अधूरा है। ‘शी मार्ट्स’ न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे, बल्कि ग्रामीण रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगे।

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