अगर आप ट्रू – कॉलर या किसी अन्य कॉल-आइडेंटिटी ऐप के गलत नाम दिखाने से परेशान हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। सरकार की बहुप्रतीक्षित ‘कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP)’ सर्विस का पायलट रन शुरू हो गया है। अब जब कोई आपको कॉल करेगा, तो फोन स्क्रीन पर उसका वही नाम दिखेगा जो उसने सिम कार्ड खरीदते समय दिया था।
हरियाणा में हुई शुरुआत
वोडाफोन – आइडिया (Vi) और जिओ ने हरियाणा में सीएनएपी ट्रायल शुरू कर दिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) के सूत्रों के अनुसार, जल्द ही यह सेवा पूरे देश में रोलआउट होगी, और मार्च 2026 तक हर जगह लागू होने की उम्मीद है।

सीएनएपी क्या है और क्यों है यह ट्रू – कॉलर से बेहतर?
सीएनएपी का मतलब है कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन, जो धोखाधड़ी कॉल्स और साइबर क्राइम से बचाने के लिए बनाई गई सरकारी पहल है। ट्रू – कॉलर जैसे ऐप्स अक्सर क्राउड-सोर्स्ड डेटा का उपयोग करते हैं, जो कई बार गलत या भ्रामक हो सकता है। इसके विपरीत, सीएनएपी सीधे वेरिफाइड टेलीकॉम केवाईसी डेटा से काम करता है, जिससे यह अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित है।
अब यह फीचर ‘बाय डिफ़ॉल्ट’ ऑन होगा
ट्राई ने सीएनएपी को सभी यूजर्स के लिए डिफ़ॉल्ट रूप से सक्षम करने का समर्थन किया है। इसका मतलब है कि इसे चालू करने के लिए किसी सेटिंग में जाने की जरूरत नहीं होगी। अगर कोई चाहे तो इसे बंद कर सकता है।
बीएसएनल ने एयरटेल को भी पीछे छोड़ा
ट्राई के सितंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी कंपनी बीएसएनल ने नए मोबाइल सब्सक्राइबर जोड़ने में एयरटेल को पछाड़ते हुए 5.24 लाख नए सब्सक्राइबर जोड़े। एयरटेल ने इस दौरान केवल 4.37 लाख नए सब्सक्राइबर जोड़े।
इस नई सुविधा के लागू होने के बाद, कोई भी अब आपकी कॉल पर छुपा नाम नहीं दिखा पाएगा। साइबर धोखाधड़ी और स्पैम कॉल्स पर काबू पाने का यह बड़ा कदम, यूजर्स के लिए राहत और डर का मिश्रण लेकर आया है।











