तीसरी धारा न्यूज | 26 सितंबर 2026 | नई दिल्ली
यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर को लेकर बढ़ी चिंताएं
देश में आज डिजिटल ट्रांजैक्शन का दायरा तेजी से बढ़ा है और यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल हर वर्ग द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है। यही वजह है कि यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की घोषणा सामने आते ही आम नागरिक थोड़ा चिंतित नजर आ रहे हैं। हालांकि, राहत देने वाली बात यह है कि ₹2,000 से नीचे के किसी भी यूपीआई पेमेंट और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को ट्रांसफर की जाने वाली राशि पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।
क्या लोन और ईएमआई के भुगतान पर कटेगी अतिरिक्त फीस?
शॉपिंग और मर्चेंट पेमेंट्स के अलावा लोन रिपेमेंट और ईएमआई भुगतान भी यूपीआई एमडीआर के दायरे में आएंगे। अगर आप गूगल पे, फोनपे या पेटीएम जैसे यूपीआई ऐप्स के जरिए हर महीने कार, बाइक या होम लोन की ईएमआई चुकाते हैं और रकम ₹2,000 से अधिक है, तो उस पर एमडीआर यानी प्रोसेसिंग फीस लागू होगी।
₹2,000 से अधिक के लोन रिपेमेंट पर ₹5 का तय शुल्क
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, डेट कलेक्शन (Loan Repayment) कैटेगरी के तहत ₹2,000 से अधिक के हर यूपीआई ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट एमडीआर तय किया गया है। अगर आप किसी बैंक या एनबीएफसी (NBFC) को ₹5,000 की गाड़ी की ईएमआई या ₹25,000 का होम लोन रिपेमेंट यूपीआई से भेजते हैं, तो उस ट्रांजैक्शन पर ₹5 का यह चार्ज ट्रिगर होगा।
किसकी जेब पर पड़ेगा यह बोझ, ग्राहक या बैंक?
ईएमआई भरने वाले ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि उन्हें अपनी जेब से एक भी अतिरिक्त पैसा नहीं देना पड़ेगा। एमडीआर मूल रूप से एक मर्चेंट-साइड शुल्क है, इसलिए इसे सीधे ग्राहक से नहीं वसूला जा सकता। यह ₹5 का चार्ज लोन देने वाले बैंक, एनबीएफसी या उनकी रिकवरी व कलेक्शन एजेंसी को स्वयं ही उठाना होगा। ठीक इसी तरह क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट्स के मामले में भी शुल्क मर्चेंट बैंक की ओर से कार्ड जारीकर्ता कंपनी वहन करती है।
UPI AutoPay का उपयोग करने वालों को मिलेगी पूरी राहत
अगर आपने अपनी ईएमआई के लिए यूपीआई ऑटोपे या ई-मैनडेट सेट कर रखा है, तो आपके लिए अच्छी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) डिजिटल ऑटोमेशन को बढ़ावा देता है, इसलिए ऑटो-डेबिट होने वाली ईएमआई चाहे ₹2,000 से कितनी भी ज्यादा क्यों न हो, ऑटोपे कलेक्शन पर यह ₹5 का एमडीआर लागू नहीं होगा।
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