राँची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक दल के नेता चंपई सोरेन शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सीएम पद की शपथ उन्हें राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने दिलाई। मनोनीत मुख्यमंत्री चंपई सोरेन राजभवन पहुंच गये हैं. साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आलमगीर आलम, राजद के इकलौते विधायक सत्यानंद भोक्ता और सीता सोरेन भी पहुंची हैं. अब से थोड़ी देर में राजभवन के दरबार हॉल में शपथ ग्रहण शुरू होगा.
चंपई सोरेन के साथ शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों के परिवार वाले भी समारोह में पहुंचे हैं. 12 बजकर 20 मिनट में दरबार हॉल में बैठे सभी लोगों राष्ट्रगान गाया. इसके बाद 12 बजकर 21 मिनट में राष्टपति से परमिशन लेने के बाद शपथ समारोह कार्यक्रम शुरू हुआ.
#WATCH | JMM vice president Champai Soren takes oath as the Chief Minister of Jharkhand, at the Raj Bhavan in Ranchi.
This comes two days after Hemant Soren's resignation as the CM and his arrest by the ED. pic.twitter.com/WEECELBegr
राँची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने गिरफ्तारी के खिलाफ सोरेन की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे कहा- आपको पहले हाईकोर्ट जाना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि हम एक व्यक्ति को अनुमति देंगे तो सभी को देनी होगी। जांच एजेंसी ने सोरेन को 31 जनवरी की रात को गिरफ्तार किया था।
राँची : झारखंड में सरकार बनाने के लिए राजभवन ने झामुमो विधायक दल के नेता चंपई सोरेन को आमंत्रित किया है. सोरेन कल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. इसके बाद 10 दिन में बहुमत साबित करना होगा. बता दें कि चंपई सोरेन ने आज राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की थी और राज्य में भ्रम की स्थिति होने के चलते सरकार गठन के उनके अनुरोध को यथाशीघ्र स्वीकार करने का अनुरोध किया था.
झामुमो विधायक दल के नेता चंपई सोरेन को राज्यपाल की तरफ से मुख्यमंत्री नियुक्त करने में देरी को लेकर चिंताओं के बीच, गठबंधन ने अपने विधायकों को दो प्राइवेट विमानों से दूसरी जगह ले जाने के भी प्रयास किए. गठबंधन के कुछ विधायकों के अनुसार, उन्हें दो निजी विमानों से हैदराबाद ले जाने की योजना थी. हालांकि, विधायकों को हैदराबाद ले जाने की योजना रद्द करनी पड़ी, क्योंकि विमान हवाई अड्डे पर कम दृश्यता के कारण उड़ान नहीं भर सके.
जमशेदपुर : टाटा मोटर्स में स्थायी किए गए 225 कर्मचारियों का मेडिकल टेस्ट पांच फरवरी से 19 फरवरी तक होगा. इसकी सूचना जारी होते ही लेबर ब्यूरों में कर्मचारियों की भीड़ लग गई. सभी नोटिस बोर्ड में लगी सूची में अपना नाम और मेडिकल टेस्ट की तिथि खोजते रहे. अपना नाम देखने के बाद सूची की तस्वीर भी अपने मोबाइल से खींचते रहे और अन्य साथियों को भेजी. कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे हैं.
टाटा मोटर्स प्रबंधन ने टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के साथ 900 कर्मचारियों को स्थायी करने का समझौता किया है. 900 कर्मचारियों की सूची पूर्व में ही जारी कर दी गई थी. अब इनका मेडिकल टेस्ट होगा. इसके बाद इन्हें विभागों में पदस्थापित किया जाएगा. कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए श्रम विभाग, टाटा मोटर्स प्रबंधन और टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के बीच समझौता हुआ था.
समझौते पर टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आरके सिंह और महामंत्री गुरमीत सिंह तोते ने हस्ताक्षर किया था. इस समझौते के तहत 2700 कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा. प्रत्येक वर्ष 900 कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा. इस वर्ष स्थायी किए गए 900 कर्मचारियों की सूची जारी कर दी गई थी. अब इनका मेडिकल टेस्ट पांच फरवरी से शुरू होगा.
राँची : महागठबंधन के विधायक वापस सर्किट हाउस लौट सकते हैं. लो विजिविलिटी की वजह से विधायकों का चार्टर प्लेन उड़ान नहीं भर सका. आखिरकार सभी विधायक प्लेन से उतर गये और अब थोड़ी ही देर में सभी फिर से सर्किट हाउस लौट सकते हैं. बता दें कि एहतियातन महागठबंधन के विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट किया जा रहा था. विधायकों को लेकर बस सर्किट हाउस से एयरपोर्ट के लिए गई. 38 विधायक दो चार्टर प्लेन में सवार भी हो गये, मगर अंतिम समय में लो विजिविलिटी की वजह से प्लेन उड़ान नहीं भर सका.
बता दें कि इससे पहले राज्यपाल की तरफ से बुलावे का महागठबंधन इंतजार कर रही थी. शाम साढ़े पांच बजे चंपई सोरेन के नेतृत्व में पांच विधायक राज्यपाल से मिले भी, मगर उन्हें सरकार बनाने का समय नहीं दिया गया. जिसके बाद सभी विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट करने की तैयारी शुरू कर दी गई थी. चंपई सोरेन ने राज्यपाल से मुलाकात कर निकलने के बाद कहा कि राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जल्द ही उन्हें बुलाया जाएगा. हालांकि अभी राजभवन की ओर से समय नहीं दिया गया है.
लोबिन हेंब्रम, सीता सोरेन, चमरा लिंडा और रामदास सोरेन सर्किट हाउस में मौजूद नहीं है, लेकिन चंपई सोरेन के मुताबिक उन चारों विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है. लोबिन हेंब्रम ने टेलीफोनिक बातचीत में कहा कि वे क्षेत्र में हैं. कल रांची आएंगे. वहीं जेएमएम ने 43 विधायकों का वीडियो जारी किया था.
राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मिलने के लिए चंपई सोरेन के साथ चार अन्य विधायक राजभवन पहुंचे थे. चंपई सोरेन के नेतृत्व में आलमगीर आलम, सत्यानंद भोक्ता, विनोद सिंह और प्रदीप यादव राजभवन गये थे. सभी विधायक राज्यपाल से सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे और समय मांगा. इसपर राज्यपाल ने विचार कर जल्द समय देने का आश्वासन दिया है.
राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मिलने के लिए चंपई सोरेन के साथ चार अन्य विधायक राजभवन पहुंचे. पीछे के गेट से दो कार से पांच लोग राजभवन के अंदर घुसे. चंपई सोरेन के नेतृत्व में आलमगीर आलम, सत्यानंद भोक्ता, विनोद सिंह और प्रदीप यादव राजभवन गये हैं. सभी विधायक राज्यपाल से सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे और समय मांगा. इसपर राज्यपाल ने विचार कर जल्द समय देने का आश्वासन दिया है.
चंपई सोरेन ने राज्यपाल से मुलाकात कर निकलने के बाद कहा कि राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जल्द ही उन्हें बुलाया जाएगा. हालांकि अभी राजभवन की ओर से समय नहीं दिया गया है. बता दें कि राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने चंपई सोरेन को मिलने के लिए आज गुरुवार शाम 5:30 बजे का समय दिया था. राज्यपाल ने सिर्फ पांच विधायकों को राजभवन बुलाया है. जानकारी के अनुसार सभी विधायक सर्किट हाउस में हैं.
लोबिन हेंब्रम, सीता सोरेन, चमरा लिंडा और रामदास सोरेन सर्किट हाउस में मौजूद नहीं है, लेकिन चंपई सोरेन के मुताबिक उन चारों विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है. लोबिन हेंब्रम ने टेलीफोनिक बातचीत में कहा कि वे क्षेत्र में हैं. कल रांची आएंगे. वहीं जेएमएम ने 43 विधायकों का वीडियो जारी किया है. महागठबंधन के सभी 43 विधायक सर्किट हाउस में मौजूद हैं. राजभवन से सूचना मिलने के बाद कभी भी इन विधायकों को राजभवन परेड कराने ले जाया जा सकता है.
इससे पहले इंडिया गठबंधन के निर्वाचित नेता चंपई सोरेन ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखा था. उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि 31 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा आपको त्यागपत्र सौंपा गया था. रात 8.45 बजे आपके द्वारा इसे स्वीकार करने के बाद मेरे नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आपसे मिला. प्रतिनिधिमंडल में जेएमएम विधायक दल के नेता के रूप में मैं तथा मेरे साथ कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, राजद विधायक सत्यानन्द भोक्ता, सीपीआई (एमएल) के विधायक विनोद कुमार सिंह तथा झाविमो(प्र०) के विधायक प्रदीप यादव शामिल थे.
धनबाद : धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर तेलमच्चो ब्रिज के पास एक तेज रफ्तार कार (टाटा हेरियर गाड़ी) अनियंत्रित होकर पलटी खाते हुए पुल से नीचे गिर गई. दुर्घटना में कार पर सवार चार छात्र घायल हो गए. इनमें एक की स्थिति गंभीर है. चारों छात्र गुरु गोविंद सिंह पब्लिक स्कूल प्लस टू चास में पढ़ाई करते हैं. कार चला रहे निखिल कुमार की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है. उसे प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर ने बोकारो रेफर कर दिया. वाहन के एयर बैग खुल जाने के कारण निखिल सहित कार पर सवार सभी छात्र खतरे से बाहर हैं.
घटना के संबंध में ग्राम रक्षा दल के सदस्य सरयू नापित ने बताया कि चारों छात्र निजी वाहन से धनबाद में किसी कार्यक्रम में भाग लेकर लौट रहे थे. तभी तेलमच्चो ब्रिज पर गाड़ी अनियंत्रित हो गयी और लुढ़कते हुए लोहे के बेरियर को तोड़ते हुए पुल से नीचे नदी के सतह पर पहुंच गई. वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. सूचना पाकर महुदा पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और घायल को बोकारो के किसी निजी अस्पताल में भेजा. क्षतिग्रस्त कार को क्रेन के माध्यम से तेलमच्चो चेकपोस्ट लाया गया.
आजसू पार्टी के केन्द्रीय नेताओं ने सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को जायज बताते हुए इस पर सत्ता पक्ष के लोगों द्वारा हाय तौबा मचाने को गलत बताया है. आजसू पार्टी के केन्द्रीय सचिव सह गढवा जिला प्रभारी सतीश कुमार ने कहा कि एक कहावत है जैसी करनी वैसी भरनी और यह सीएम की यह गिरफ्तारी झारखण्डी जनता के सपनो से खिलवाड करनेवाले और लोकतंत्र का मजाक उड़ाने की परिणाम है.
उन्होंने कहा कि इन लोगों ने जल जंगल जमीन पर से जनता का अधिकार लूटा व महिलाओं के सशक्तिकरण के मान सम्मान से खिलवाड़ किया है. उन्होंने कहा कि हद तो अब और हो गई जब राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर उंगली उठाया जा रहा है. झारखंड के सिर पर लगे कलंक को मिटाने के लिए राज्य में राष्ट्रपति शासन जरूरी है. मौके पर केंद्रीय सचिव विकेश शुक्ला व तुलसी शुक्ला मौजूद थे.
जमशेदपुर : आज वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 का अंतरिम बजट पेश किया गया। जिसके बाद भाजपा नेता सह हजारीबाग प्रभारी अभय सिंह ने कहा कि यह बजट किसानों के लिए, महिलाओं के लिए, साथ ही नई रोजगार की सृजन को पैदा करने वाला बजट है। जहां पर रेल कॉरीडोर को बढ़ावा मिला है, जिससे आवागमन के साधन को मजबूत और सहज उपलब्ध किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने अपने लक्ष्य को तीन करोड़ नए घर की योजना लाने से गरीबों के बीच में एक बहुत बड़ी राहत प्रस्तुत किया गया है।
श्री सिंह ने कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान है, किसान हमारे अन्नदाता है, किसान सम्मान योजना के तहत किसानों के राहत के लिए एवम सहायता भी लाने कि लिए भारी बजट प्रस्तुत किया गया। किसानों को ‘किसान सम्मान निधि योजना’ मिला। चार करोड़ से अधिक किसानों को ‘फसल बीमा योजना’ का लाभ देने से किसानों में बहुत बड़ी राहत मिली है। यह 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारण करेगा।
वहीं हेल्थ के मामले में कैंसर की रोकथाम के लिए 2 से 14 साल की बच्चियों का टीकाकरण एक बहुत बड़ा राहत योजनाएं साबित होगा।आयुष्मान भारत का फायदा अब सभी आशा वर्कर,आंगनबाड़ी वर्कर्स को भी मिलेगा। यह अपने आप में ही एक अतुलनीय योजना है।
इस बजट के तहत दो करोड़ घर अभी 5 साल में और बनाए जाएंगे, भारत की अर्थव्यवस्था को एक नई ताकत मिलेगी। युवाओं को सशक्त करने के उद्देश्य को लेकर शिक्षा नीति में बदलाव लाया जा रहा, बच्चों के विकास के लिए भी यह सरकार ने अच्छी शिक्षा देने का संकल्प लिया गया है।
अब बजट से उम्मीद है मोदी सरकार इस बार कुछ बड़े एलान करके भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की बचट को मंजूरी दी। यह बजट गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओ एवम देश को विकसित राष्ट्र बनाने वाला बजट है।
जमशेदपुर : झारखंड की सियासी खेल हर मिनट बदलती हुई नजर आ रही है। हेमन्त सोरेन की गिरफ्तारी से लेकर चम्पई सोरेन के विधायक दल के नेता बनाये जाने के बीच कई अटकलें लगी। 43 विधायकों के हस्ताक्षर किए हुए लेटर देने के बाद भी यह कयास लगाया जा रहा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार अब नहीं बनने वाली।
इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भाजपा सूत्रों का कहना है कि गठबंधन के 18 विधायकों का उनको समर्थन प्राप्त है और वे भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बी एल संतोष भी शाम 4 बजे बैठक करने वाले हैं। जिसके बारे में भाजपा सूत्रों का यह कहना है कि इस बैठक के बाद झारखंड में कमल खिलेगा।
दूसरी ओर राज्यपाल से 3 बजे का समय मांग कर अपनी बहुमत पेश करने की चाह रखे चम्पई सोरेन को राज्यपाल ने 5:30 बजे का समय दिया है। झामुमो के अंदर मुख्यमंत्री पद के लिए आपसी सहमति भी नहीं दिखाई दे रही है और इसका सबसे बड़ा कारण है शिबू सोरेन के परिवार के बाहर किसी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुनना। तो क्या यह बढ़ते समय के साथ घटते समर्थन का डर चम्पई सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के सफर में रुकावट पैदा करेगी ? अब देखना यह है कि राज्यपाल के दिये गए समय पर असल खेला क्या होगा।