एक नई सोच, एक नई धारा

103 लोगों से लाखों की ठगी, रेलवे नौकरी के नाम पर की गई ठगी, जाने मामला

धनबाद : धनबाद, आसनसोल व हावड़ा रेल मंडल में रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 103 अभ्यर्थियों से लाखों रुपए की ठगी की गई है. मामले का भंडाफोड़ होने के बाद सरगना संगीता सिंह मोबाइल बंद कर फरार हो गई, लेकिन उसका पार्टनर अजीत सिंह पकड़ा गया. अजीत सिंह का कहना है कि वह संगीता से बात कर सभी को एक सप्ताह के भीतर पैसे दिला देगा. भूली निवासी संगीता सिंह पिछले कई वर्षों से आसनसोल के अजीत सिंह के साथ मिलकर ठगी का कारोबार कर रही थी. दोनों जालसाज चार लड़के-लड़कियों को 20-20 हजार महीने की तनख्वाह पर रखे हैं, जो युवक-युवतियों को जाल में फंसाकर जोड़ाफाटक रोड, आसनसोल, बर्नपुर और भूली में किराये के घर में बुलाकर पहले एडवांस के तौर पर 20 हजार रुपये ले लेते थे और ज्वाइनिंग लेटर देते समय एक लाख रुपये लेने की बात कहते थे.

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गैंग की सरगना संगीता सिंह युवक-युवतियों को परीक्षा दिलाने, मेडिकल कराने व ज्वाइनिंग लेटर देकर असिस्टेंट ट्रेन ड्राइवर, गार्ड व टीटीई की नौकरी दिलाने के लिए सब्जबाज दिखाती थी. रेलवे में आउटसोर्सिंग कंपनी में भी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करती थी. भूली के सतीश कुमार, मीणा कुमारी समेत कई युवक-युवतियों ने बताया कि संगीता सिंह व अजीत सिंह जालसाज हैं, जो धनबाद से लेकर बिहार-बंगाल के युवक-युवतियों से ठगी का कारोबार कर रहे हैं.

जानकारी के अनुसार, रिटायर्ड रेलकर्मी कैलाश प्रसाद के बेटे कमल प्रसाद को जब संगीता व अजीत सिंह ने अपने जाल में फंसाया तो जालसाजी का राज खुल गया. कैलाश प्रसाद का कहना है कि वे पहले संरक्षा विभाग में काम करते थे. संरक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग पर बहाली नहीं होती है. जबकि संगीता व अजीत उसके बेटे कमल को ट्रेन ड्राइवर या गार्ड के हेल्पर के पद पर नौकरी दिलाने का वादा कर रहे थे. साथ ही ट्रेनिंग में 31 हजार वेतन और बाद में 40 हजार रुपए तनख्वाह दिलाने की बात कर रहे थे. जब उन्होंने धनबाद से लेकर आसनसोल व हावड़ा रेल मंडल के पदाधिकारियों से पता किया तो संगीता व अजीत के होश उड़ गए. थाना में शिकायत करने की बात कही तो दोनों ने कहा कि वे लोग सभी को पैसा लौटा देंगे. रिटायर्ड रेलकर्मी के बेटे से भी उनलोगों ने 20 हजार की ठगी की है.

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कोर्ट से निकले तो मुस्कुरा कर हाथ उठाया, तीन दिनों तक ED की रिमांड पर रहेंगे हेमंत सोरेन

झारखंड के चर्चित जमीन घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अभी राहत नहीं मिलती दिख रही है। हेमंत सोरेन की ईडी की कस्टडी तीन दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। PMLA कोर्ट ने हेमंत सोरेन को तीन दिनों के लिए ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की रिमांड पर भेजे जाने का आदेश सुनाया है।
कोर्ट के विशेष जज राजीव रंजन ने सोरेन को रिमांड पर भेजे जाने का आदेश दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत में ED ने हेमंत सोरेन की चार दिनों की रिमांड मांगी थी।

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कोर्ट में मौजूद सोरेन के वकील ने उन्हें रिमांड पर दिए जाने का विरोध किया। हेमंत सोरेन के वकील की तरफ से अदालत में दलील दी गई थी कि हेमंत सोरेन से जितनी पूछताछ की जरूरत थी वो हो चुकी है लिहाजा अब उन्हें रिमांड पर ना भेजा जाए। लेकिन अदालत ने सोरेन को फिलहाल तीन जिनों के लिए ईडी की रिमांड पर भेज दिया है।

कोर्ट में सुनवाई के बाद हेमंत सोरेन के कोर्ट से बाहर निकलने का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में नजर आ रहा है कि अदालत से बाहर निकलने के बाद हेमंत सोरेन ने मुस्कुरा कर अपना हाथ उठाया और लोगों का अभिवादन किया। इसके बाद वो पुलिस की गाड़ी में बैठ कर निकल गए। वीडियो में वहां तैनात सुरक्षाकर्मी भी नजर आ रहे हैं।
इससे पहले सात फरवरी को ईडी ने हेमंत सोरने की हिरासत 5 दिनों के लिए बढा़ई थी। जिसके बाद अब एक बार फिर उनकी हिरासत बढ़ी है।

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झारखंड के पूर्व सीएम को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में सात घंटे की लंबी पूछताछ के बाद 31 जनवरी को गिरफ्तार किया था। हालांकि, हेमंत सोरेन ने ईडी की इस कार्रवाई को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती भी दी है।

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उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री का हुआ तबादला, जानें कौन है पूर्वी सिंहभूम के नए उपायुक्त…
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रांची : झारखंड सरकार ने बड़े पैमाने पर आइएएस का तबादला कर दिया है. इसके तहत जमशेदपुर के डीसी मंजूनाथ भजंत्री का तबादला कर दिया गया है. उनको स्वर्णरेखा परियोजना का प्रशासक बना दिया गया है. उनकी जगह जमशेदपुर के नये डीसी के तौर पर पश्चिम सिंहभूम के डीसी रहे अनन्य मित्तल को जमशेदपुर का डीसी बनाया गया है. पस्चिम सिंहबूम जिले के डीसी के तौर पर जमशेदपुर की पहले डीसी रह चुकी विजया जाधव को पदस्थापित किया गया है. वहीं, अजय कुमार सिंह को ग्रामीण कार्य विभाग के साथ स्वास्थ्य विभाग का सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है जबकि उनको प्रधान सचिव मंत्रिमंडल सचिवालय बनाया गया है. वंदना डाडेल को मंत्रिमंडल सचिवालय से हटाकर वन विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है.
रांची : झारखंड सरकार ने बड़े पैमाने पर आइएएस का तबादला कर दिया है. इसके तहत जमशेदपुर के डीसी मंजूनाथ भजंत्री का तबादला कर दिया गया है. उनको स्वर्णरेखा परियोजना का प्रशासक बना दिया गया है. उनकी जगह जमशेदपुर के नये डीसी के तौर पर पश्चिम सिंहभूम के डीसी रहे अनन्य मित्तल को जमशेदपुर का डीसी बनाया गया है. पश्चिम सिंहभूम के डीसी के तौर पर जमशेदपुर की पहले डीसी रह चुकी विजया जाधव को पदस्थापित किया गया है. वहीं, अजय कुमार सिंह को ग्रामीण कार्य विभाग के साथ स्वास्थ्य विभाग का सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है जबकि उनको प्रधान सचिव मंत्रिमंडल सचिवालय बनाया गया है. वंदना डाडेल को मंत्रिमंडल सचिवालय से हटाकर वन विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है.

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उनके पास महिला बार विकास विभाग का प्रधान सचिव का भी प्रभार होगा. मनीष रंजन को राजस्व सचिव के पद से हटाकर भवन निर्माण विभाग का सचिव और एमडी भवन निर्माण निगम लिमिटेड बनाया यगा है. अरवा राजकमल को प्रझान सचिव अनुसूचित जनजाति के पद से हटाकर अगले आदेश तक ग्रेटर रांची विकास एजेंसी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. उनके पास नगर विकास विभाग और मद्य निषेध विभाग का भी प्रधान सचिव का प्रभार होगा. उमाशंकर सिंह को प्रभारी सचिव स्कूली शिक्षा के साथ सिद्धो कान्हू कृषि व वनोपज राज्य सहकारी संघं का भी अतिरिक्त प्रभार दिया है.

पवन कुमार को अपर सचिव श्रम विभाग से हटाकर झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी का परियोजना निदेशक बनाया गया है. श्रमायुक्त संजीव कुमार बेसरा को झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी के मिशन निदेशक का प्रभार दिया गया है. निदेशक हस्तकरघा आकांक्षा रंजन को एमडी झारखंड अन्वेषण एवं खनन का एमडी और एमडी झारक्राफ्ट का भी अतिरिक्त प्रभार दिाय गया है. उनको माटी कला बोर्ड का भी एमडी बनाया गया है. एमडी जियाडा शशिवंजन को मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के सीइओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है जबकि उनको एमडी जेएसएमडीसी बनाया गया है. अपर सचिव श्रम सत्येंद्र कुमार को हटा दिया गया है.

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उनको एमडी एफसीआइ बनाया गया है. एमडी झारखंड औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम माधवी मिश्रा को अगले आदेश तक कार्यपालक निदएशक झारखंड राज्य आरोग्य सोसाइटी का एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्र्क्चर का एमडी का प्रभार भी दिया गया है. साहेबगंज के डीसी रामनिवास यादव को निदेशक हायर एजुकेश़ बनाया गया है. गरिमा सिंह को निदेशक उच्च शिक्षा को हटाते हुए लातेहार का उपायुक्त बनाया गया है. लातेहार का उपायुक्त हिमांशु मोहन को निदेशक माध्यमिक शिक्षा बनाया गया है. गुमला के डीडीसी हेमंत सती को साहेबगंज का डीसी बनया गया है. विस्पुते श्रीकांत यशवंत को गिरीडीह का एसडीओ बनाया गया है.

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कनाडा का लिया टिकट, खुशी-खुशी पहुंचा एयरपोर्ट, फिर जो हुआ, पैरों तले खिसकी जमीन

हरियाणा के करनाल शहर का रहने वाले लवप्रीत सिंह अपने तमाम रिश्‍तेदारों और अजीज दोस्‍तों के साथ इंदिरा गांधी अंतर्राष्‍ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचा था. सब इस बात को लेकर बेहद खुश थे कि उनके दोस्‍त लवप्रीत का न केवल सालों पुराना सपना आज पूरा होने जा रहा था, बल्कि वह अपने सपनों की दुनिया में जीने के लिए कनाडा जा रहा था.

लवप्रीत सिंह अपने सभी अजीजों से विदा लेकर एयरपोर्ट टर्मिनल में दाखिल हो गया और बैगेज चेक-इन की प्रक्रिया पूरी कर इमीग्रेशन जांच के लिए आगे बढ़ गया.

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इमीग्रेशन अधिकारी ने जैसे ही लवप्रीत के पासपोर्ट को स्‍वैप किया, उसके चेहरे की सिकन बढ़ती चली गई. वह कभी पासपोर्ट, कभी कंप्‍यूटर स्‍क्रीन तो कभी लवप्रीत के चेहरे को देख रहा था. अब तक लवप्रीत को भी थोड़ा डर लगने लगा था. उसके अगल-बगल वाले काउंटर से अब तक न जाने कितने लोग निकल गए थे, लेकिन उसके पासपोर्ट और वीजा को अभी भी बार-बार अलट-पलट कर देखा जा रहा था. तभी उस इमीग्रेशन अधिकारी ने किसी से फोन पर बात की और कुछ ही देर में कुछ लोग वहां पहुंचे और लवप्रीत को अपने साथ चलने के लिए कहने लगे.

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लवप्रीत को इमीग्रेशन एरिया में स्थिति एक कमरे में ले जाया गया, जहां पर पहले से मौजूद कुछ अधिकारियों ने उससे कनाडा के वीजा के बारे में पूछताछ शुरू की. पूछताछ के दौरान, उसे पता चला कि उसके पास मौजूद कनाडा का वीजा फर्जी है. इसके बाद, लवप्रीत को आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस के हवाले कर दिया गया. वहीं आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस ने लवप्रीत के खिलाफ आईपीसी की धारा 420/468/471 और पासपोर्ट एक्‍ट की धारा 12 के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद लवप्रीत से एक बार फिर पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ.

आईजीआई एयरपोर्ट की डीसीपी ऊषा रंगनानी के अनुसार, आरोपी लवप्रीत ने पुलिस ने पूछताछ में बताया कि उसे यह वीजा प्रदीप वर्मा नामक एक व्‍यक्ति के जरिए मिला था. इस वीजा के एवज में 25 लाख रुपए की मांग की गई थी, जिसमें 12 लाख रुपए का भुगतान वह कर चुका था, जबकि बाकी की राशि का भुगतान कनाडा के टोरंटो शहर पहुंचने के बाद होना था. पुलिस ने लवप्रीत के कबूलनामें के आधार पर प्रदीप वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है और उसकी तलाश में संभावित इलाकों में छापेमारी की गई है.

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UPI की धूम मची दुनियाभर में, अब इन देशों में भी होगा इस्तेमाल

भारत का यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI ग्लोबल होता जा रहा है और कई देशों ने इसे अपनाने में दिलचस्पी दिखाई है. अब इसका और विस्तार होने जा रहा है और इसके तहत मॉरिशस और श्रीलंका में भी यूजर्स यूपीआई का इस्तेमाल कर सकेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 12 फरवरी को दोपहर 1 बजे दोनों देशों में इस सर्विस को लॉन्च करेंगे.

UPI के साथ RuPay कार्ड की भी सुविधा
विदेश मंत्रालय द्वारा रविवार को इस लॉन्च के बारे में एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए जानकारी शेयर की गई थी. श्रीलंका और मॉरिशस में UPI सर्विसेज लॉन्च होने के बाद दोनों देश के लोग अपने-अपने यहां इसका इस्तेमाल कर पाएंगे. इसके अलावा भारत से मॉरिशस और श्रीलंका जाने वाले पर्यटक और वहां से भारत में आने वाले टूरिस्ट भी इसके जरिए पेमेंट कर पाएंगे. मॉरिशस में सिर्फ UPI ही नहीं, बल्कि RuPay कार्ड सर्विस भी लॉन्च की जाएगी.

दोपहर 1 बजे PM Modi करेंगे लॉन्च
मॉरिशस और श्रीलंका में UPI लॉन्च इवेंट दोपहर 1 बजे होगा और पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसे लॉन्च करेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनौथ के साथ तीनों देशों के सेंट्रल बैंक के गवर्नर भी उपस्थित रहेंगे. गौरतलब है कि हाल ही फ्रांस में भी UPI सर्विस शुरू की गई है. इसके जरिए एफिल टावर के टिकट बुक कराने की सुविधा भी दी जा रही है.

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2016 में UPI की हुई थी शुरुआत
भारत के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा संचालित इस सर्विस को मोदी सरकार ने 2016 में लॉन्च किया था. इसने पैसों के लेन-देन से ऑनलाइन पेमेंट को बेहद आसान बनाने का काम किया है. यूपीआई से आसान तरीके से सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा मिलती है. ये रियल टाइम फंड ट्रांसफर करने में सक्षम है और इसे IMPS मॉडल से डेवलप किया गया है.

फ्रांस-सिंगापुर समेत कई देशों में एक्टिव
श्रीलंका और मॉरिशस में होने वाली यूपीआई लॉन्चिंग से पहले भारतीय पेमेंट सिस्टम फ्रांस, सिंगापुर, यूएई, नेपाल, भूटान एक्टिव है. बता दें कि UPI के आने के बाद से ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस में खासी तेजी देखने को मिली है. इसमें साल दर साल इजाफा हो रहा है और इसका अंदाजा NPCI के आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है. इसके मुताबिक, बीते साल दिसंबर 2023 में भी UPI से 18.23 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड का लेन-देन किया गया था, जो कि इससे पिछले साल 2022 की समान अवधि की तुलना से 54 फीसदी अधिक था.

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हेमंत सोरेन की याचिका पर आज हुई सुनवाई, 27 फरवरी को आएगा फैसला

राँची : झारखंड हाई कोर्ट में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
मामले में अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। बता दें कि इससे पहले हेमंत सोरेन की याचिका पर 5 फरवरी को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी। उस दौरान कोर्ट की ओर से हेमंत सोरेन को कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने ईडी को मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए सुनवाई की अगली तारीख 12 फरवरी तय की थी।

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गौरतलब है कि कस्टडी में लिए जाने से पहले ही हेमंत सोरेन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गिरफ्तारी की आशंका जता दी थी। उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि पूछताछ के दौरान उनके खिलाफ कोई भी पीड़क कार्रवाई ना हो, लेकिन 1 फरवरी को यह कहते हुए हाई कोर्ट से समय मांगा गया कि उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है और उन्होंने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। हेमंत सोरेन की ओर से हाई कोर्ट को बताया गया है कि उनके खिलाफ ईडी के अधिकारी वैसी शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो पीएमएलए में है ही नहीं। उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से उन्हें टारगेट किया गया है।

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कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, पूर्व सीएम अशोक चव्हाण ने दिया इस्तीफा
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मुम्बई : लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को महाराष्ट्र में बड़ा झटका लगा है. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. चव्हाण पिछले काफी दिनों से पार्टी से नाराज बताए जा रहे थे और खबर है कि वह बीजेपी का दामन थाम सकते हैं.

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सत्तालोलुप नीतीश ने बिहार एवं लोकतंत्र को कलंकित किया : सुधीर पप्पू

जमशेदपुर : शहर के वरीय अधिवक्ता एवं राष्ट्रीय जनता दल नेता सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि बिहार के सत्ता लोलुप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार, लोकतंत्र एवं समाजवाद को कलंकित किया है। उनकी कथनी-करनी सबसे अविश्वसनीय है और सत्ता में बने रहने की उनकी लालसा ने पूरे भारत और दुनिया में बिहार को मजाक बना दिया है। अब किसी को झूठा या मुकरने वाला कहना होता है तो उसके लिए नीतीश संज्ञा दी जाती है।

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नीतीश कुमार ने बीती रात लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश की। विधायक चेतन आनंद राष्ट्रीय जनता दल से संबंधित है और पार्टी के नेता तेजस्वी यादव के यहां बैठक में शामिल होना स्वाभाविक है। दिन भर टीवी में चल भी रहा था कि विधायक दल नेता तेजस्वी यादव के आवास पर चेतन आनंद बैठकर गिटार बजा रहे हैं और गाना गा रहे हैं। लेकिन भाई द्वारा यह कहना कि सात के बाद से मोबाइल स्विच ऑफ है और उसे ढूंढा जाए। पटना के एसपी एसडीएम पहले रात नौ बजे नेता विधायक दल नेता तेजस्वी यादव के आवास जाते हैं। वहां तसल्ली से जवाब मिलता है और लौट जाते हैं। फिर रात के अंधेरे में पुलिस बल के साथ जाकर वहां से विधायक चेतन आनंद को निकाल रहे हैं।

असल में विधानसभा में बहुमत साबित करने में नीतीश कुमार असफल है और इसलिए उन्होंने धमकाने की राजनीति की है। इस स्तर पर तो कोई गैर लोकतांत्रिक मुख्यमंत्री भी नहीं उतरा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दुहाई देते हैं कि वे समाजवादी हैं लोकतंत्र के समर्थक हैं और लोकनायक जयप्रकाश के शिष्य हैं। उनके इन शब्दों में ढोंग है। लोकनायक जयप्रकाश ने तो लोकशाही की स्थापना के लिए देश की सबसे शक्तिशाली और अपनी प्रिय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के खिलाफ भी जाने से परहेज नहीं किया। यह जेपी की देन है कि देश तानाशाही से बच गया और लोकशाही दोबारा कायम हुई। लेकिन नीतीश कुमार देश के तानाशाह के कदमों में बैठे नहीं है बल्कि लोटानिया मार रहे हैं। शायद उन्हें इनकम टैक्स, सीबीआई और ईडी का भय है। तभी तो इस बार बिना कारण भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े हो गए।

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जिस भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं प्रधानमंत्री ने उनके डीएनए पर सवाल खड़े किए, गृह मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा कि दरवाजे बंद हो गए हैं, बीजेपी के एक नेता ने तो मुख्यमंत्री की कुर्सी से उन्हें उतारने के लिए अपने शीश पर मुरैठा बांध लिया, वे उन्हें पलटू राम की संज्ञा दे रहे थे। अब आलम यह है कि नीतीश कुमार उन्हीं की कदमबोशी कर रहे हैं। समाजवादी डरते नहीं है और कुर्सी का लालच नहीं करते हैं। ऐसे में साफ है कि नीतीश कुमार समाजवादी हो ही नहीं सकते हैं हां कुर्सी प्रेमी है और अब बिहार की जनता को आने वाले चुनाव में नीतीश कुमार और उनकी पार्टी को सबक सिखाना चाहिए।

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कतर से पूर्व नौसैनिकों की रिहाई पीएम मोदी की अगुवाई में मिली बड़ी कूटनीतिक जीत

नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत सरकार ने एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की है. कतर ने आठ भारतीय पूर्व नौसैनिकों को रिहा कर दिया है, जो कथित रूप से जासूसी के आरोप में सजा का सामना कर रहे थे.

कतर का फैसला भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा सकता है. अपने नागरिकों के लिए इस तरह से उनके साथ खड़ा रहना ये बताता है कि केंद्र सरकार के लिए अपने जवानों और अपने नागरिकों के हित की किस कदर चिंता करती है.

भारत लौटे पूर्व नौसैनिक अधिकारियों में से एक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बगैर उनकी रिहाई संभव नहीं थी. उन्होंने दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए. सभी पूर्व अधिकारियों ने पीएम मोदी और कतर के अमीर का भी धन्यवाद दिया. एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि उनकी रिहाई बिना भारत सरकार की कोशिशों के मुमकिन नहीं था.

8 भारतीय नागरिक अगस्त 2022 से कतर में कैद थे और उनपर पनडुब्बी कार्यक्रम पर कथित रूप से जासूसी करने का आरोप लगाया गया था. सेवानिवृत्त नौसैनिकों को कतर की एक अदालत ने उन आरोपों में मौत की सजा सुनाई थी जिन्हें अभी तक आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है.

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मामले के सामने आने के बाद से ही मोदी सरकार अपने नागरिकों को कतर से लाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे. नौसेना के पूर्व कर्मियों के परिजनों ने केंद्र सरकार से उनकी रिहाई और उनकी मातृभूमि में सुरक्षित वापसी की गुहार लगायी थी, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विदेश मंत्रालय (एमईए) ने देश को आश्वस्त किया था कि वह सभी राजनयिक चैनलों के जरिए उन्हें वापस लाने के लिए कानूनी सहायता की व्यवस्था करेगा.

शुरुआत में नई दिल्ली के राजनयिक हस्तक्षेप के बाद दोहा ने भारतीय नागरिकों की मौत की सजा को कम करके उम्र कैद में बदल दिया गया था. विदेश मंत्रालय ने नवंबर 2023 में 8 पूर्व भारतीय नौसेना कर्मियों को मौत की सजा पर कतर के साथ अपील दायर की थी, जिन्हें 2022 अगस्त में गिरफ्तार किया गया था और पिछले साल अक्टूबर महीने में मौत की सजा सुनाई गई थी.

पीएम मोदी-कतर अमीर की मुलाकात के बाद मिली थी राहत
बीते साल 1 दिसंबर को दुबई में COP28 शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल-थानी के बीच बैठक के बाद पूर्व नौसैनिकों की सजा को कम किया गया था. कतर अमीर के साथ अपनी मुलाकात में पीएम मोदी ने पूर्व अधिकारियों का मुद्दा उठाया था.

अगस्त 2022 में गिरफ्तार किए गए थे पूर्व नौसैनिक
अलदहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज और कंसल्टेंसी सर्विसेज के साथ काम करने वाले पूर्व भारतीय नौसैनिकों को भ्रष्टाचार और जासूसी के एक मामले में कथित रूप से शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था.

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26 अक्टूबर को कतर की एक अदालत ने उन आठ भारतीय नागरिकों को मौत की सजा सुनाई, जिन्हें अगस्त 2022 में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, ना तो कतर एडमिनिस्ट्रेशन और ना ही भारत सरकार ने ही उन अधिकारियों के खिलाफ आरोपों को सार्वजनिक किया. जब मौत की सजा की खबर ने वैश्विक सुर्खियां बटोरीं तो भारत ने फैसले को “चौंकाने वाला” बताया और मामले में सभी कानूनी विकल्प के साथ जाने का फैसला किया था.

कतर से कौन हुए हैं रिहा
कतर में जो 8 पूर्व नौ सेना कर्मी जेल में थे, वे है – कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश शामिल हैं – जो कतर में अलदाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी में काम कर रहे थे, जो कि एक सर्विसेज और रक्षा सेवा प्रदान करने वाली कंपनी है.

कई जमानत याचिकाएं की गईं खारिज
पूर्व नौसैनिक अधिकारियों ने अक्टूबर 2022 में दोहा में भारत के राजदूत से मुलाकात की थी और फिर वे अपने रिश्तेदारों से बात कर सके थे. मार्च 2023 में पूर्व नौसैनिकों द्वारा दायर कई जमानत याचिकाओं में से आखिरी याचिका खारिज कर दी गई थी. उसी महीने उन पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कतर कोर्ट ट्रायल शुरू की थी और फिर 26 अक्टूबर को मौत की सजा सुनाई थी.

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बिहार में नीतीश कुमार सरकार का फ्लोर टेस्ट आज, जानें- क्या है सीटों का समीकरण?

बिहार में आज (12 फरवरी) एनडीए सरकार का फ्लोर टेस्ट होगा. इसमें सभी पार्टियों के अपने अपने दावे हैं. सबसे बड़ी चुनौती नीतीश कुमार के सामने हैं. 9वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद बड़ा सवाल है कि क्या वो बहुमत साबित कर पाएंगे.

समझिए फ्लोर टेस्ट का पूरा गणित

बिहार विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 243 है. इसमें से पक्ष में कुल 128 विधायक हैं. बीजेपी के 78 विधायक, जेडीयू के 45, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के चार विधायक और एक विधायक निर्दलीय हैं. वहीं, विपक्ष में कुल 115 विधायक हैं, जिसमें से आरजेडी के 79, कांग्रेस के 19, लेफ्ट के 16 और AIMIM के एक विधायक शामिल हैं.

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जेडीयू ने किया ये बड़ा दावा

जेडीयू ने विश्वास जताया है कि बीजेपी के साथ मिलकर नई सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार फ्लोर टेस्ट में पास हो गाएंगे. रविवार को जेडीयू विधायक दल की बैठक में दो-तीन विधायक शामिल नहीं हुए.

सूत्रों ने बताया कि जेडीयू की बैठकों में तीन विधायक सुदर्शन कुमार सिंह, बीमा भारती और दिलीप रॉय नहीं पहुंचे. इन्हीं विधायकों ने जेडीयू की टेंशन बढ़ा दी है.

अगर ये विधायक विधानसभा में दूर रहते हैं और जीतन राम मांझी की पार्टी हम के विधायक यू टर्न लेते हैं तो बीजेपी-जेडीयू गठबंधन सरकार पर संकट की स्थिति बन जाएगी.

हालांकि, राज्य के संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि फ्लोर टेस्ट के दौरान पार्टी के सभी विधायक विधानसभा में मौजूद रहेंगे.

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क्यों मची हलचल?

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि ‘अभी खेला होना बाकी है.’ इसके बाद से ही बीजेपी और जेडीयू ने हर विधायक पर नजर रखना शुरू कर दिया.

शनिवार को लेफ्ट के विधायक महबूब आलम ने भी जीतन राम मांझी से उनके घर पर मुलाकात की थी. उन्होंने कहा था कि फ्लोर टेस्ट में ‘खेला’ हो सकता है.

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