जमशेदपुर : भाजयुमो जमशेदपुर महानगर के मीडिया प्रभारी मोंटी अग्रवाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा की मुझ जैसे एक साधारण से कार्यकर्ता पर जिला के माननीय अध्यक्ष अनुशासनहीनता के पाठ पढ़ाते हुए करवाई करते है। विगत दिनों महोदय ने अपने जिला कमिटी की घोषणा की थी, जब से कमिटी घोषणा हुई है तब से भाजपा के सभी अधिकृत ग्रुप फेसबुक सोशल मीडिया में पार्टी के संविधान का धज्जियां उड़ाया जा रहा है। इस पर महोदय ने चुप्पी साध ली है।
उन्होंने कहा की जिलाध्यक्ष एक आंख में काजल और एक आंख में सुरमा लगा लिए है। उन्होंने पार्टी में सब कार्यकर्ताओं के लिए अलग अलग मापदंड तय किया है लग रहा है। उन्होंने कहा की भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है, न की कोई व्यक्ति विशेष की। उन्होंने जिलाध्यक्ष जी को नसीहत देते हुए कहा की महोदय जी कार्यकर्ताओं को सम्मान दीजिये, अपमानित मत करिए।
जमशेदपुर : भारतीय जनता पार्टी के जमशेदपुर महानगर के जिला कमेटी की घोषणा जिला अध्यक्ष सुधांशु ओझा द्वारा किये जाने के बाद कई कार्यकर्ताओं में रोष और दुख देखने को मिल रहा है। भाजपा जमशेदपुर महानगर के पूर्व जिला मीडिया प्रभारी और मोर्चा मोंटी अग्रवाल ने भी इस कमेटी का खुलकर विरोध करते हुए कहा कि इस तरह की घोषणा संगठन के हित मे कतई नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज जिला अध्यक्ष द्वारा जो कमेटी घोषणा की गई है उसमें एक भी गरीब किसान मजदूर का बेटा नहीं है, केवल पैसे वालों को पद दिया गया है। जहां तक मेरा निलंबन का मामला है मैं खुद जिला अध्यक्ष जी से 10 बार मिलकर कहा लेकिन हर बार उन्होंने मेरे बात को टाल दिया। इनके कार्यकाल में कार्यकर्ताओं का कोई महत्व नहीं है केवल पैसों वालों बोलबाला है।
भारतीय जनता पार्टी जो कार्यकर्ताओं की पार्टी है वो इनके अध्यक्षता में पैरवीकार, चाटुकार और पैसे वालों की पार्टी बनती नज़र आ रही है। पिछले 2 से 3 बार एक ही पद पर एक ही व्यक्ति को यदि स्थान देना था तो फिर अध्यक्ष भी क्यों बदला गया। वैसा ही चलना था तो पूर्व जिलाध्यक्ष में फिर क्या बुराई थी। पुराने और पार्टी के हित में बात करने वाले कार्यकर्ताओं को न सुना जाता है और न ही कुछ समझा जा रहा है। जिला अध्यक्ष के हित में बात हो तब ही वो सही है क्योंकि पार्टी नहीं जिलाध्यक्ष यहाँ सर्वोपरि है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि अभी विधानसभा चुनाव सर पर है और पार्टी में इस तरह से जिलाध्यक्ष का कार्य करना पार्टी को नुकसान पहुंचाने का कार्य करेगी और जिला में पार्टी के दुर्गति और दलदल में जाने का सिरमौर जिला अध्यक्ष अपने सर बांधेंगे, क्योंकि ए सी रूम से बाहर आकर कार्य करना उनसे हो नहीं रहा है और काम करने वाले कार्यकर्ताओं को किनारे करने में लगे हुए है।
जमशेदपुर : भाजपा द्वारा GST लगाए जाने पर महामंत्री रहते हुए पुतला फुकने वाले अनिल मोदी को तीसरी बार महामंत्री बनाये जाने पर पुराने कार्यकर्ताओं में रोष देखने को मिल रहा है। संगठन मंत्री, महामंत्री, प्रदेश अध्यक्ष से लिखित शिकायत के बाद भी अनिल मोदी को महामंत्री बनाया गया।
इस मुद्दे को लेकर भाजयुमो, जमशेदपुर महानगर के पूर्व मीडिया प्रभारी अमर सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जमशेदपुर महानगर के सभी मनोनीत पदाधिकारियों को बहुत बहुत बधाई एवम शुभकामनायें। राष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा का महानगर पदाधिकारियों की नियुक्ति संगठन का एक हिस्सा है परन्तु पहले जो चुनाव से पदाधिकारियों का निर्वाचन होता था उसके जगह अब करीबियों और पैरवीकार का मनोनयन की प्रथा से पार्टी कमजोर होते जा रही है और कर्मठ कार्यकर्ताओ का मनोबल गिरता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के लोकप्रिय प्रधानमंत्री द्वारा एक देश एक टैक्स के तहत कपड़ो पर भी GST लगाई गई थी तब पार्टी में महामंत्री के पद पर रहते हुए अनिल मोदी ने पार्टी के संविधान से इतर जाकर पुतला फूंका और सार्वजानिक रूप से विरोध जताया था परन्तु भाजपा उससे काबिल आदमी अपने कार्यकर्ताओ में खोज नहीं पाती है या कोई आंतरिक समझौता है या कोई बड़ा पैरवी है जिस कारण पार्टी बार बार उसी को महामंत्री बनाती है। हम पार्टी से मांग करते है की उसको जेड प्लस की सुरक्षा दी जाये क्यूंकि अनिल मोदी को कुछ हो गया तो पार्टी को महामंत्री नहीं मिलेगा।
अमर सिंह ने कहा कि बचपन से सुनता आया हूं की भाजपा एक राष्ट्रवादी और एक विचारधारा की पार्टी है परन्तु कुछ ज्ञानी अहंकारी पदाधिकारी कार्यकर्त्ता से संवाद नहीं कर के भाजपा की दुर्गति कर रहे है और मनमानी करके सर्वनाश कर रहे है। अगर जीत का अमृत निकालना है तो 2019 के हार का मंथन करना पड़ेगा वरना परिणाम आशा अनुरूप नहीं आएगा। संगठन के कार्यकर्त्ता से संवाद टूट चूका है कोई बात कार्यकर्त्ता की सुनने या समझने को कोई तैयार ही नहीं है।
पार्टी के लिए लाठी खाने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा
भाजपा जमशेदपुर महानगर जिला कमेटी की घोषणा के बाद बगावती बिगुल पुराने कार्यकर्ताओं ने बजा दिया है। भाजपा के पुराने कार्यकर्ता और सिख भाजपा नेता सतबीर सिंह सोमू ने कहा कि यह बेहद दुःखद बात है कि पार्टी के लिए सालों से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को जिला कमेटी तक में जगह नहीं मिलती है और नए आये लोग पद प्राप्त कर लेते हैं। हम लोगों ने राजभवन घेराव में लाठी खाकर हाथ तुड़वाने से लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को काला झंडा दिखाने तक हमेशा आगे रहे और पार्टी के लिए सदा समर्पित रहें लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि आज पार्टी में इतने सालों के बाद भी हमें नज़र अंदाज़ करते हुए दरकिनार किया जा रहा है।
इस बाबत सवाल उठाने पर किसान आंदोलन को लेकर सिख नेताओं पर आरोप प्रत्यारोप का खेल खेला जाता है, लेकिन यह आरोप लगाने वाले यह भूल जाते हैं कि लोकसभा चुनाव 2024 में माननीय सांसद विद्युत वरण महतो जी के जीत के लिए मैं सतबीर सिंह सोमू, रविंदर सिंह रिंकू, चंचल भाटिया, जोगिंदर सिंह जोग्गी, मंजीत गिल, रॉकी सिंह, इंदरजीत सिंह, नवजोत सिंह जैसे कर्मठ कार्यकर्ताओं ने सैंकड़ों की संख्या में सिखों को एकत्रित करके घर घर जाकर वोट माँगने का कार्य किया था और साथ ही साथ सीजीपीसी के सामने भी हमलोग डट कर खड़े रहें। आज की जिला कमेटी की घोषणा न सिर्फ पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी है बल्कि पार्टी के लिए निःस्वार्थ कार्य करने वालों को दिया गया एक धोखा है, जो पार्टी के हित में सही नहीं है।
जमशेदपुर : भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के निर्देशानुसार सुधांशु ओझा के नेतृत्व में जमशेदपुर महानगर की नई जिला कमेटी बनाई गई। जिसमें सोनारी मंडल के अखिलेश कुमार सिंह को सह मीडिया प्रभारी बनाया गया। नई कमेटी की घोषणा के बाद अखिलेश कुमार सिंह को सोशल मीडिया एवं फोन के माध्यम से लोगों द्वारा बधाई और शुभकामनाएं मिलने लगी।
अखिलेश कुमार सिंह ने इस बाबत कहा कि मैं प्रदेश अध्यक्ष श्री बाबूलाल मरांडी जी, संगठन मंत्री श्री कर्मवीर सिंह जी और जिला अध्यक्ष श्री सुधांशु ओझा जी का धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने मुझे यह पद दिया। मैं पार्टी एवं वरीय नेताओं के निर्देशानुसार कार्य करते हुए दी गयी जिम्मेदारियों को पूरा करूँगा। राष्ट्र हित एवं जनहित भारतीय जनता पार्टी के लिए सर्वोपरि है और इसी सिद्धांत के साथ मैं कार्य करता रहूंगा।
जमशेदपुर : बांग्लादेश में हो रहे दंगे में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले किए जाने के विरोध में भाजपा नेता एवम केंद्रीय रामनवमी अखाड़ा समिति के संरक्षक अभय सिंह के नेतृत्व में साकची गोलचक्कर में बांग्लादेश के सेना चीफ एवम जमायते इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठन का पुतला जलाया गया।
पुतला जलाने के बाद उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए अभय सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद वहां के चरमपंथी एवं कट्टरवादी लोगों के द्वारा भोले भाले हिंदुओं के घर पर हमले किए जा रहे हैं। मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है साथ ही उनके व्यापार को लूटा जा रहा है। सारे लोग अपनी-अपनी जान बचाकर के भाग रहे हैं।
इस प्रकार की सूचना से हिंदुस्तान में रहने वाले सभी हिंदुओं में रोष है। अविलंब दुनिया के लोगों से अपील है की ढाका में दबाव बनाएं वहां के चरमपंथी ताकतों को नेस्तनाबूत करें। हमेशा से हिंदुओं को चाहे वह ढाका हो और चाहे इस्लामाबाद या कराची हो वहां की जनता द्वारा हमेशा इस प्रकार की क्रूर मजाक किया जाता रहा है।
इतिहास गवाह है कि जिस स्थान पर उन पर हमला किया जा रहा है वह कभी भारत का अभिन्न अंग था और भारत के कारण ही 1971 में बांग्लादेश का जन्म हुआ। अगर भारत की सरकार उस समय ढाका के समर्थन में या बांग्लादेश के समर्थन पर नहीं खड़ी होती तो शायद आज वहां की जनता त्राहिमाम होती, क्योंकि पाकिस्तान कभी भी यह नहीं चाहता था कि बांग्लादेश में रहने वाले लोग हमारे बराबरी में खड़े हो जाएं।
चुनाव में जीतने के बाद भी 1970 में शेख मुजीब रहमान को बंदी बना लिया गया था। यह तो भारत की सरकार थी कि जिन्होंने एन मौके पर मदद किया और जिसका नतीजा निकला कि बांग्लादेश का नया जन्म हुआ। 1971 में बांग्लादेश के जन्म होने के बाद पूरे बंगलादेश के स्कूलों में भारत की मदद की कहानी एवम पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता था पर चरमपंथी ताकतों के कारण बाद में उसे हटा लिया गया। 8 अप्रैल 1950 में नेहरू लियाकत समझौता हो या 1971 में मुजीर्रहमान इंदिरा गांधी का समझौता हो सभी समझौता में बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं की रक्षा का संकल्प था, पर समय समय में पाकिस्तान हो या बांग्लादेश हमेशा इसे नजर अंदाज किया और प्राय: हमला होता रहा।
पूर्व में पूर्वी पाकिस्तान हो या बांग्लादेश हमेशा वहां रहनेवाले हिंदुओ को निशाना बनाया जाता रहा। राजनीति लड़ाई में बलि का बकरा बनाया गया, हमेशा हिंदुओं के घर लूट पाट करके नुकसान बनाया जाता रहा है। बांग्लादेश प्रकरण में जमशेदपुर भी अछूता नहीं रहा, 1971 हो या 1964 हमेशा हिंदुओं को निशाना बनाया गया। आज हिंदूवादी संगठन अपने देश के माननीय भारत सरकार तथा नाटो से संबंधित देश बांग्लादेश में रहनेवाले सभी हिंदुओं की रक्षा करें। जुलूस में शामिल लोग बांग्लादेश मुर्दाबाद, हिंदुओ के साथ अत्याचार बंद करो का नारा भारी संख्या में लगा रहे थे।
आज के कार्यक्रम में श्री पप्पू सिंह, शेखर राव, घनश्याम पांडे, बबलू नायक, ललन चौहान, विकास जायसवाल, रविंदर सिंह रिंकू, भूषण दीक्षित, सुमित श्रीवास्तव, गंगा साहू, मंटू शर्मा, अंकित शुक्ला, मनीष पांडे, राहुल सिंह, कन्हैया पुष्टि, ताराचंद कालिंदी, बबलू श्रीवास्तव, जया कुमारी, विजय गुप्ता, निलेश सिंह, सत्येन घोष, संजय सिंह, ताराचंद्र कालिंदी, उमेश सिंह, अजीत चंद्रवंशी, मनोज राव, संतोष तिवारी, राजेश त्रिपाठी, नकुल पासवान, आमोद रंजन, टिक्की साहू, बमलेश्वरी सिंह, डब्बू साहू, गिरधारी सिंह, राजकुमार सिंह, बंटी सिंह, सचितानंद शर्मा सहित सैकड़ो लोगों ने पुतला जलाया।
जमशेदपुर : झारखंड विधानसभा में इंदर सिंह नामधारी के बाद कोई सिख चेहरा नहीं बना, इसको लेकर झारखंड के सिख समाज में अब खुलकर विरोध सामने आ गया है. बीते 24 साल में झारखंड में सिखों को न लोकसभा न राज्यसभा और न विधानसभा में भाजपा या कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा उम्मीदवार बनाया गया है. झारखंड के विभिन्न जिलों में सिखों की आबादी लगभग 5 से 5.50 लाख के बीच है. देश में सिखों ने 1984 कांड के बाद से भाजपा प्रत्याशियों को ही जीताने का काम किया और सिख भी भाजपा का ही वोट बैंक मानें जाते रहे हैं. 1984 के बाद कालांतर में धीरे-धीरे समीकरण बदलता रहा है और सिखों का रूझान भाजपा के अलावा क्षेत्रीय दलों की तरफ भी हुआ है. ठीक वैसे ही जैसे दोस्ती और दुश्मनी कभी स्थायी नहीं होती.
देश में सबसे बड़े किसान आंदोलन के बाद नयी दिल्ली में तीसरी बार और पंजाब में पहली बार आम आदमी पार्टी की सरकार बनना यह दर्शाता है कि जिस राज्य की जनता सत्ता और विपक्ष से परहेज़ कर लें, वहां तीसरे विकल्प पर भरोसा कर ले, वहां नयी सरकार बनना तय है. ऐसे कुछ राज्यों में देखा भी गया है कि सत्ता और विपक्ष का पलटना और नये विकल्प का सत्ता में आना तय होता है. जहां की जनता नेताओं की अतिमहत्वाकांक्षा से तंग आ चुकी है.
झारखंड में भी समीकरण कुछ ऐसा ही हो सकता है, हालांकि अभी बहुत कुछ कहना मुश्किल है क्योंकि विधानसभा चुनाव में दो महीने बाकी हैं और झारखंड को भारत में राजनीति की सबसे बड़ी प्रयोगशाला कहा जाता है. 24 सालों में झारखंड निर्माण के बाद से ही 13 सीएम शायद ही किसी राज्य ने देखा होगा. इस अति महत्वाकांक्षा ने राज्य को 24 सालों में केवल इस्तेमाल की वस्तु बना कर रख दिया है. यहां जमीनी मुद्दों और राज्य के विकास को छोड़ हर जाति और वर्ग के लोग विधानसभा में अपनी ही जाति का प्रतिनिधित्व चाहते रहे हैं क्या विधायक, क्या मंत्री और क्या मुख्यमंत्री सबको अपनी जाति और धर्म का प्रतिनिधित्व चाहिए.
कभी हिंदू-मुसलमान तो कभी आदिवासी-गैर आदिवासी फैक्टर वोट बैंक को टर्न अप करने में खूब इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसी बीच झारखंड में सिखों की भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा अनदेखी का मुद्दा भी बीते 10 वर्षों में जन्म ले चुका है और झारखंड के तमाम सिख नेता राजनीतिक दलों में रहते हुए खुद की अनदेखी से बेचैन हो रहे हैं. झारखंड में जिसकी भी सरकार बनी, वहां सिखों को बस अल्पसंख्यक आयोग तक ही सीमित रखा गया.
विशेषकर भाजपा में उस समय सिख अंदर ही अंदर नाराज हुए जब भाजपा में अल्पसंख्यक बताकर बाहर से एक चेहरा लाकर राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया. वह भी ऐसा वर्ग जो कभी भाजपा का न हुआ और न होगा. ये हम नहीं ये पार्टी के बड़े-बड़े नेता और अब पड़ोसी राज्य बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने भी खुले मंच से कह दिया है.
बीते सप्ताह बंगाल में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की पार्टी के एक बड़े कार्यक्रम के दौरान मांग थी कि अल्पसंख्यक मोर्चा को बंद कर दिया जाना चाहिए ताकि जो हमारे साथ हैं. हम उसके साथ पर आधारित पार्टी की नीतियों पर काम कर सकें. उन्होने पार्टी की सबका साथ सबका विकास वाले स्लोगन पर भी बोलने में हिचक महसूस नहीं की. वे बोले हम उसी के साथ जो हमारे साथ. झारखंड में पत्रकारों के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रीतम सिंह भाटिया भी बीते 10 वर्षों से यही बात खुले मंच से अपने समाज को समझाते आ रहे हैं कि सिखों को अल्पसंख्यक आयोग नहीं बल्कि विधानसभा, लोकसभा या राज्यसभा भेजा जाना चाहिए.
इस बात को झारखंड में सिखों की सबसे बड़ी संस्था सीजीपीसी ने भी खुलकर गत लोस चुनाव में एक क्षेत्रीय पार्टी को खुला समर्थन देकर कहने की कोशिश की, लेकिन समाज में उनके आगओं का इतना विरोध हो गया कि उनकी गुरुद्वारा की राजनीति भी खतरे में पड़ी हुई है. लोस चुनाव के बाद कई बड़े चेहरे उनसे टूट कर अलग हो गए हैं, जिसका खामियाजा आने वाले समय में भुगतना पड़ेगा. पूर्व सीएम का पुतला जलाने पर भी उक्त नेताओं को अपनी असली हैसियत पता चल गई थी.
बहरहाल, कहे भी क्यों नहीं आखिर 24 सालों में सिख हैं कहां? सिख समाज के बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने केवल गैर सिखों और राजनीतिक दलों को कॉरपोरेट स्टाईल में मोटा चंदा देकर मजबूती ही प्रदान की लेकिन अपना एक भी प्रतिनिधित्वकर्ता नहीं चुन पाए.
राँची : भारतीय जानता पार्टी प्रदेश नेतृत्व एवं भारतीय जानता युवा मोर्चा की ओर से अश्मित सिंह सेठी को हज़ारीबाग़ ज़िला का संगठन प्रभारी नियुक्त किया गया ।
श्री सेठी ने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो भी ज़िम्मेदारी दी है, वह पूरी लगन और निष्ठा से उसे पूरा करेंगे। पूर्व में भी वह भाजयुमो राँची ज़िला कार्यसमिति सदस्य, प्रदेश सह कार्यालय मंत्री एवं अन्य दायित्वों का निर्वहन कर चुके है।
वही घोषणा के पश्चात भा ज पा प्रदेश अध्यक्ष श्री बाबूलाल मरांडी जी, राज्य सभा संसद श्री दीपक प्रकाश जी, भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष श्री शशांक राज जी एवं पार्टी के अन्य नेताओं ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दी।
सरायकेला : जिला मुख्यालय सरायकेला स्थित उत्कल मणि गोप बन्धु दास आर्दश टाऊन हाल में यूनाइटेड टेरेक सिंगर्स सीनी द्वारा मशहूर गायक स्वर्गीय किशोर कुमार की 95 वीं जयंती में “द मुड आफ” किशोर कुमार नाइट आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सरायकेला खरसावां जिला के उप विकास आयुक्त प्रभात कुमार एवं विशिष्ट अतिथियों ने संयुक्त रूप से केक काट कर जयंती को यादगार बनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत ओड़िया भजन के साथ हुई। किशोर कुमार के गीतों को बहुत ही बेहतरीन तरीके से पंचू कुमार मुखी ने प्रस्तुत किए। “अगर तुम ना होते” गीत से संगीत प्रेमियों के दिल को छूने का प्रयास किये, जबकि अनिल सुरिन ने “मेरे नैना सावन भादो” गीत से किशोर कुमार के गायकी को ताजा किया। रोशन लाल ने स्वाथी के साथ संयुक्त गीत “तेरे मेरे मिलन की रैना” के गीत से लोगों को मोह लिया।
संस्था के कलाकारों ने एक से एक गीत प्रस्तुत कर समा बांधे रखा। एंकर मयंक सेकसेरिया अपनी बेहतरीन एंकरिंग से संगीत प्रेमियों के महफ़िल को उत्साहित करने में सक्रिय रहे। उन्होंने बताया कि किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को खंडवा में हुई थी और देहांत 13 अगस्त 1987 को बंबई में हुई। इस दौरान अधिवक्ता जलेश कवि ने कहा कार्यक्रम में यूनाइटेड टेरेक सिंगर्स गायकों की प्रस्तुति काफी सराहनीय रही। कार्यक्रम में अनिल सुरिन, पंचू कुमार मुखी, रोशन लाल, मलिक, तुलसी कुंभकार, प्रिया, महाश्वेता, स्वाति, रूबी जेना, दीपा कुमारी, प्रिति ने संगीत की महफ़िल को तरोताजा कर दी। भीम सिंह कुदादा, राजकुमार, राजेश सुरिन, कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभायें। संगीत प्रेमियों ने देर रात तक मनमोहक गीत का आनन्द उठाते रहे।
जमशेदपुर : झारखंड भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज ने सारे जिलों के अध्यक्षों की घोषणा कर दी है. इसके तहत जमशेदपुर महानगर भाजयुमो अध्यक्ष नितिश कुशवाहा को बनाया गया है. जमशेदपुर ग्रामीण (पूर्वी सिंहभूम) का जिला अध्यक्ष एक बार फिर से रंगलाल महतो को बनाया गया है.
जिला अध्यक्षों की निकाली गयी सूची के मुताबिक, रांची महानगर का रोमित नारायण सिंह, रांची ग्रामीण का विवेकानंद जायसवाल, खूंटी का रोहित कुमार साहू, गुमला का संदीप प्रसाद, सिमडेगा का अनिरुद्ध सिंह दांगी, लोहरदगा का वाल्मिकी कुमार, गढ़वा का रामाशीष तिवारी मुन्ना, पलामू का बिपुल गुप्ता, चतरा का सुमन सौरभ तिवारी, लातेहार का छोटू राजा, हजारीबाग का राजकरण पांडेय, रामगढ़ का कुश श्रीवास्तव, कोडरमा का राजेश सिंह, गिरीडीह का मिथुन कुमार राम, धनबाद महानगर का नित्यानंद मंडल, धनबाद ग्रामीण का मनीष साव, बोकारो का बिनोद प्रजापति, जामताड़ा का कुणाल सिंह, दुमका का रुपेश मंडल, पाकुड़ का दीपक साहा, साहेबगंज का धर्मेंद्र मंडल, देवघर का आशीष दुबे, गोड्डा का सौरभ सुमन, पश्चिम सिंहभूम जिले का चंद्रमोहन तियू, सरायकेला खरसावां का जिला अध्यक्ष अनुराग जायसवाल को बनाया गया है.
इसी तरह जिला प्रभारी के नामों की भी घोषणा की गयी है. इसके तहत रांची महानगर का मृगांक शेखर, रांची ग्रामीण का विनय कृष्ण राजू, खूंटी का रजनी आनंद, गुमला का सुरेश शर्मा, सिमडेगा का प्रियांक भगत, लोहरदगा का श्रेयांश भारद्वाज, पलामू का रघुवर यादव, गढ़वा का विकास तिवारी, चतरा का श्वेतांक गर्ग, लातेहार का देवराज सिंह, हजारीबाग का अस्मित सिंह सेठी, रामगढ़ का तन्मय झा, रामगढ़ का पंकज गुप्ता, गिरीडीह का बीरू आनंद सिंह, धनबाद महानगर का अधीराज नारायण सिंह, धनबाद ग्रामीण का विकास सिनहा, बोकारो का उमेश महतो, जामताड़ा का रिंकू सिंह पटेल, दुमका का सजल दास, पाकुड़ का नीतेश सिंह, साहेबगंज का अनिकेत गोस्वामी, देवघर का भानु प्रताप सिंह, गोड्डा का साहिल दास, जमशेदपुर महानगर का अभिषेक आचार्या, जमशेदपुर ग्रामीण पूर्वी सिंहभूम का विकास शर्मा, पश्चिम सिंहभूम का शैलेश गुप्ता, सरायकेला खरसावां का मिलन सिन्हा को प्रभारी बनाया गया है.
प्रमंडल प्रभारी के तौर पर कोल्हान का अमिताभ सेनापति, दक्षिणी छोटानागपुर धनबाद ग्रामीण और महानगर के अलावा बोकारो, गिरीडीह का पंकज मेहता, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, चतरा उत्तरी छोटानागपुर का ऋर्ष राय, पलामू का दीपक सिंह, संथालपरगना का रवींद्र तिवारी को प्रभारी बनाया गया है. विधि विभाग का चंदन चौबे को जमशेदपुर महानगर, गढ़वा का दिवाकांत दुबे, अंचित चक्रवर्ती को बाकोरा और प्रकाश झा को रांची महानगर का विधि विभाग का प्रभार दिया गया है.
सरायकेला खरसावां के बिनोद राय, रांची महानगर के सुमित सिंह, जामताड़ा के प्रिया दत्त सिंह, दुमका के अविनाश सोरेन, रांची महानगर के सतीश सिंह, पलामू का बबन बैठा, हजारीबाग की पूनम साहू को प्रदेश प्रवक्ता बनाया गया है. रोहित सिंह परमार को आइटी संयोजक बनाया गया है, जो जमशेदपुर ग्रामीण से है.
नई दिल्ली। अगस्त 6, 2024 । आज एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने कहा कि हमारा पड़ोसी बांग्लादेश एक विचित्र अनिश्चितता, हिंसा और अराजकता में फंसा हुआ है। हसीना सरकार के त्यागपत्र और उनके देश छोड़ने के बाद अन्तरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है। संकट की इस घड़ी मे भारत बांग्लादेश के समस्त समाज के साथ एक मित्र के नाते मजबूती से खड़ा है।
श्री आलोक कुमार ने कहा कि बांग्लादेश में पिछले कुछ समय में हिन्दू, सिख व अन्य अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों को भी नुकसान पहुंचाया गया है। कल रात तक अकेले पंचगढ़ जिले में 22 घर, झीनैदाह में 20 घर व जैसोर में 22 दुकानें कट्टरपंथियों के निशाने बने तथा अनेक जिलों में तो शमशान तक तोड़ दिए गए। मंदिर और गुरुद्वारों को भी क्षति पहुंचाई गयी है। बांग्लादेश में शायद ही कोई जिला बचा हो जो इनकी हिंसा व आतंक का निशाना न बना हो। यह ध्यान दिलाना उचित होगा कि बांग्लादेश में हिंदू जो कभी 32% थे, अब 8% से भी कम बचे हैं और वे भी लगातार जिहादी उत्पीड़न के शिकार हैं।
विहिप अध्यक्ष ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के घर, मकान, दुकान, ऑफिस, व्यवसायिक प्रतिष्ठान व महिलाएं, बच्चे व उनकी आस्था व विश्वास के केंद्र मन्दिर व गुरुद्वारे तक सुरक्षित नहीं हैं। कहा जा सकता है कि वहां पीड़ित अल्पसंख्यकों की हालत बद से भी बदतर होती जा रही है।
यह स्थिति चिंतनीय है
उन्होने कहा कि ऐसे में विश्व समुदाय की यह जिम्मेवारी है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कार्यवाही करें।
श्री आलोक कुमार ने कहा कि निश्चय ही भारत इस परिस्थिति में आंखे मूँद कर नहीं रह सकता। भारत ने परंपरा से ही विश्वभर के उत्पीड़ित समाजों की सहायता की है। विश्व हिन्दू परिषद भारत सरकार से यह आग्रह करती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए।
यह संभव है कि इस परिस्थिति का लाभ उठा कर सीमा पार से घुसपैठ का एक बड़ा प्रयत्न किया जाए। इससे सतर्क रहना होगा। इसलिए हमारे सुरक्षाबलों के लिए यह आवश्यक है कि सीमा पर कड़ी चौकसी बरतें और किसी भी तरह के अतिक्रमण को न होने दें।
विहिप अध्यक्ष ने कहा कि हमारी कामना है कि बांग्लादेश में जल्दी से जल्दी लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्ष सरकार पुनः स्थापित हों। वहाँ के समाज को मानवाधिकार मिलें और बांग्लादेश की निरंतर हो रही आर्थिक प्रगति में कोई बाधा न आये। भारत का समाज और सरकार इस विषय में निरंतर बांग्लादेश के सहयोगी बने रहेंगे।