एक नई सोच, एक नई धारा

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आधे देश में आई फ्लू का कहर! बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े सब परेशान, एक्सपर्ट ने बताया कैसे बचें?

दिल्ली से लेकर बिहार और गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक लोग लाल आंखें लिए घूम रहे हैं. इन सभी राज्यों में इस बार मॉनसून जल्दी आया है और मानो देर तक टिके रहने के इरादे से आया है.

जगह जगह भरा हुआ पानी और वातावरण में हर वक्त उमस और नमी वायरस और बैक्टीरिया के फैलने के लिए सबसे अच्छा मौका होते हैं. तो इस बार आई फ्लू ने लोगों की आंखों में लाल डोरे डाल दिए हैं. मेडिकल भाषा में आंखे लाल होने की इस बीमारी को कन्जक्टिवाइटिस कहते हैं कुछ लोग इसे पिंक आई या आई फ्लू भी कहते हैं.

आई फ्लू से दिल्ली बेहाल

बाढ़ के पानी से आंखों के पानी तक, इस बार मॉनसून ने ऐसी तबाही मचाई है कि लाल आंखों की बीमारी कन्जक्टिवाइटिस बुरी तरह से फैल गई है.
दिल्ली के एम्स की ओपीडी में रोजाना आई फ्लू की शिकायत वाले 100 मरीज़ आ रहे हैं. प्राइवेट आई अस्पतालों में भी 40 से 50 मरीज़ रोज कन्जक्टिवाइटिस से परेशान होकर पहुंच रहे हैं.

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दिल्ली के एक प्राइवेट आई हॉस्पिटल में पिछले साल जुलाई में कंन्जक्टिवाइटिस के 600 मामले आए थे. इस बार अभी तक जुलाई में ही 1200 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंच चुके हैं. शार्प साईट सेंटर के निदेशक डॉ समीर सूद के मुताबिक कन्जक्टिवाइटिस आंखों के सफेद हिस्से में इरिटेशन से शुरु होता है. मॉनसून, उमस, नमी और पानी वाला वातावरण इस आई फ्लू को तेज़ी से फैलने में मदद करता है. वैसे तो इस बीमारी का मरीज पांच से सात दिन में रिकवर हो जाता है लेकिन ये वक्त बहुत परेशानी भरा हो सकता है. लेकिन मरीज अपनी मर्जी से इलाज ना करें. इसकी बड़ी वजह ये है कि आई फ्लू होने की तीन बड़ी वजहे हैं और वजहों के हिसाब से ही इलाज हो सकता है.

लक्षण

आंखों में जलन हो. पानी आने लगे. आंखों में दर्द हो और वो लाल हो जाएं तो समझ लीजिए कि आपको इंफेक्शन हो चुका है. ये इंफेक्शन एक से दूसरे मरीज में बहुत तेज़ी से फैलता है – इसलिए आपको इससे बचने की बहुत ज़रुरत है. एलर्जी , वायरल इंफेक्शन या बैक्टीरियल इंफेक्शन जैसी बीमारी हो, उसी के हिसाब से आई ड्रॉप्स दी जाती हैं. जिस मरीज को एंटीबायोटिक दवाओं की जरुरत हो उन्हें दवाएं भी दी जाती हैं.

कैसे करें बचाव?

कोरोनावायरस की तरह ही इस बीमारी में भी मरीज के लिए आईसोलेशन ज़रुरी है जिससे ये दूसरों को ना फैले. नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अनुराग वाही के मुताबिक मरीज को काला चश्मा पहनना चाहिए. इससे दो फायदे हो सकते हैं. पहला फायदा ये कि मरीज बार बार अपनी आंखों को हाथ लगाने से बचेगा. दूसरा फायदा ये होगा कि ऐसे मरीज फोटो सेंसिटिव होते हैं जिसकी वजह से उन्हें तेज रोशनी से परेशानी हो सकती है. तो काला चश्मा तेज़ रोशनी से भी बचाएगा. साफ पानी से आंखों को धोते रहें और हाथों को बार-बार साबुन या सैनिटाइज़र से साफ करें. अपनी पर्सनल चीजें जैसे तौलिया, तकिया, रुमाल, चश्मा वगैरह किसी से शेयर ना करें. बार-बार चीजों को ना छुएं – जैसे दरवाजे का हैंडल, टेबल वगैरह – आपके हाथों से इंफेक्शन किसी भी सरफेस पर रह सकता है और वहां से दूसरे तक इंफेक्शन पहुंच सकता है.

जिन्हें ये बीमारी नहीं हुई उन लोगों को भी भीड़ में जाने से बचना चाहिए. पब्लिक प्लेस या भीड़ वाली जगह पर ज़ीरो पावर का साधारण चश्मा या सनग्लासिस लगा लेने चाहिए. ताकि आप खुद बार बार आंखों को हाथ ना लगाएं. बच्चों को ये बीमारी हो तो उन्हें स्कूल नहीं भेजना चाहिए. मरीज की आंखों में देखने से ये बीमारी नहीं फैलती. वैसे ये बीमारी 5-7 दिन में ठीक हो जाती है लेकिन कुछ मरीजों में आंखों के सफेद हिस्से से बढ़कर इंफेक्शन आंखों की पुतली तक पहुंच सकता है, ऐसे मामले खतरनाक हो सकते हैं.

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मिशन 2024 के लिए BJP की राष्ट्रीय टीम का ऐलान, उपाध्यक्ष और महामंत्री पद के लिए चुने गए ये नाम

बीजेपी ने मिशन 2024 के लिए राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। छत्तीसगढ़ से डॉक्टर रमन सिंह, राजस्थान से वुसुंधरा राजे, झारखंड से रघुवर दास, यूपी से लक्ष्मीकांत बाजपेई और तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।

कुल 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है।

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मिशन 2024 के लिए BJP की राष्ट्रीय टीम का ऐलान

बीएल संतोष को राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री का पद लखनऊ से शिवप्रकाश को दिया गया है। महाराष्ट्र से पंकजा मुंडे, बिहार से ऋतुराज सिन्हा, यूपी से सुरेंद्र सिंह नागर, मध्य प्रदेश से ओमप्रकाश धुर्वे को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। कुल 13 नेताओं को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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मिशन 2024 के लिए BJP की राष्ट्रीय टीम का ऐलान

संजय बंडी और राधामोहन अग्रवाल को महामंत्री बनाया गया है। संजय बंडी तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष थे और हालही में हटाए गए थे। यूपी से राधामोहन अग्रवाल, राजस्थान से सुनील बंसल, मध्य प्रदेश से कैलाश विजयवर्गीय को राष्ट्रीय महामंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुल 8 नेताओं को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है।

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मिशन 2024 के लिए BJP की राष्ट्रीय टीम का ऐलान

राजेश अग्रवाल को कोषाध्यक्ष और नरेश बंसल को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

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एक अगस्त तक कहीं-कहीं झारखंड के इन इलाकों में बारिश का अनुमान, अलर्ट जारी

एक अगस्त तक कहीं-कहीं झारखंड के इन इलाकों में बारिश का अनुमान, अलर्ट जारी. झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है. एक अगस्त तक कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान मौसम केंद्र ने लगाया है.

इसे लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है.

झारखंड मौसम पूर्वानुमान

एक अगस्त तक कहीं-कहीं झारखंड के इन इलाकों में बारिश का अनुमान, अलर्ट जारी

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झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है. एक अगस्त तक कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान मौसम केंद्र ने लगाया है. 29 जुलाई को राज्य के उत्तर-पश्चिमी इलाके (पलामू प्रमंडल) में कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश हो सकती है. 30 जुलाई को राज्य के पश्चिमी तथा मध्य हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है. 31 जुलाई को राज्य के पूर्वी तथा मध्य हिस्सों में कहीं-कहीं तेज बारिश का अनुमान है. एक अगस्त को राज्य के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है. मौसम केंद्र ने इसको लेकर येलो अलर्ट जारी किया है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऐसा होने पर बारिश की कमी कुछ हद तक हो सकती है.

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मुख्यमंत्री ने पर्यटन स्थलों के विकास और स्टेडियम निर्माण हेतु सभी जिलों के उपायुक्तों को दिया निर्देश, जाने पूरी खबर

रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों के विकास और खेल स्टेडियम के निर्माण को लेकर सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने इससे संबंधित परियोजनाओं को जल्द पूरा करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों इस निमित उपायुक्त रांची को वन क्षेत्रों में आने वाले पर्यटन स्थलों के विकास का प्रस्ताव व प्राक्कलन संबंधित वन प्रमण्डल पदाधिकारी से प्राप्त कर उपलब्ध कराने, डीपीआर तैयार करने में भवन निर्माण विभाग द्वारा सूचीबद्ध परामर्शी की सेवा लेने और इको टूरिज्म के मानकों का ध्यान रखते हुए प्राकृतिक सौंदर्य से मेल रखने वाले संरचनाओं की प्रधानता रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने गेतलसुद डैम के पास पर्यटन विकास हेतु उपयुक्त भूमि चिन्हित कर भूमि प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। रांची के गेतलसूद में चिन्हित भूमि पर रिसोर्ट बनाने हेतु डीपीआर और आगे की आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी करने का निर्देश मिला है। इसको लेकर उपायुक्त रांची द्वारा भूमि चिन्हित कर उसके हस्तांतरण की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने उपायुक्त रामगढ़ को रजरप्पा में पर्यटकों की सुविधा हेतु आवश्यक सुविधाओं एवं जरूरतों का आकलन तथा उसके लिए भूमि चिन्हित कर आवश्यक अनापत्ति प्राप्त कर विभाग को प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने रजरप्पा पर्यटन क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने हेतु विशेष तंत्र विकसित करते हुए क्षेत्र को स्वच्छ रखने को प्राथमिकता देने की बात कही है। इस कार्य हेतु आवश्यकतानुसार कंसल्टेंट की सहायता लेने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने उपायुक्त चतरा को ऐतिहासिक ईटखोरी एवं कौलेश्वरी में पर्यटकों की सुविधा हेतु आवश्यक कार्यों का आकलन तथा कार्यों हेतु भूमि चिन्हित कर आवश्यक अनापत्ति प्राप्त कर विभाग को प्रस्ताव उपलब्ध कराने कहा है। वहीं, उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम को सारंडा, थलकोबाद एवं किरीबुरू में इको टूरिज्म विकास हेतु संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी से प्रस्ताव प्राप्त कर भूमि विवरणी तथा आवश्यक अनापत्ति के साथ विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने गुमला के डुमरी स्थित सिरा -सीता धाम पर्यटन स्थल का सौंदर्यीकरण एवं विकास, आंजनधाम, नवरत्नगढ़ और टांगीनाथ पर्यटकीय विकास परियोजनाओं कार्यान्वयन जल्द करने का आदेश दिया है।

रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों के विकास और खेल स्टेडियम के निर्माण को लेकर सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने इससे संबंधित परियोजनाओं को जल्द पूरा करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों इस निमित उपायुक्त रांची को वन क्षेत्रों में आने वाले पर्यटन स्थलों के विकास का प्रस्ताव व प्राक्कलन संबंधित वन प्रमण्डल पदाधिकारी से प्राप्त कर उपलब्ध कराने, डीपीआर तैयार करने में भवन निर्माण विभाग द्वारा सूचीबद्ध परामर्शी की सेवा लेने और इको टूरिज्म के मानकों का ध्यान रखते हुए प्राकृतिक सौंदर्य से मेल रखने वाले संरचनाओं की प्रधानता रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने गेतलसुद डैम के पास पर्यटन विकास हेतु उपयुक्त भूमि चिन्हित कर भूमि प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। रांची के गेतलसूद में चिन्हित भूमि पर रिसोर्ट बनाने हेतु डीपीआर और आगे की आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी करने का निर्देश मिला है। इसको लेकर उपायुक्त रांची द्वारा भूमि चिन्हित कर उसके हस्तांतरण की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने उपायुक्त रामगढ़ को रजरप्पा में पर्यटकों की सुविधा हेतु आवश्यक सुविधाओं एवं जरूरतों का आकलन तथा उसके लिए भूमि चिन्हित कर आवश्यक अनापत्ति प्राप्त कर विभाग को प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने रजरप्पा पर्यटन क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने हेतु विशेष तंत्र विकसित करते हुए क्षेत्र को स्वच्छ रखने को प्राथमिकता देने की बात कही है। इस कार्य हेतु आवश्यकतानुसार कंसल्टेंट की सहायता लेने का निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री ने उपायुक्त चतरा को ऐतिहासिक ईटखोरी एवं कौलेश्वरी में पर्यटकों की सुविधा हेतु आवश्यक कार्यों का आकलन तथा कार्यों हेतु भूमि चिन्हित कर आवश्यक अनापत्ति प्राप्त कर विभाग को प्रस्ताव उपलब्ध कराने कहा है। वहीं, उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम को सारंडा, थलकोबाद एवं किरीबुरू में इको टूरिज्म विकास हेतु संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी से प्रस्ताव प्राप्त कर भूमि विवरणी तथा आवश्यक अनापत्ति के साथ विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने गुमला के डुमरी स्थित सिरा -सीता धाम पर्यटन स्थल का सौंदर्यीकरण एवं विकास, आंजनधाम, नवरत्नगढ़ और टांगीनाथ पर्यटकीय विकास परियोजनाओं कार्यान्वयन जल्द करने का आदेश दिया है। (जारी…)

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खेल स्टेडियम का निर्माण मानकों के अनुरूप हो

मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के उपायुक्तो को कहा है कि वैसे प्रखण्ड जहां पूर्व से स्टेडियम स्वीकृत नहीं है, वहां स्टेडियम निर्माण हेतु प्रस्ताव विभागीय निर्देशों के अनुरूप प्रेषित करें। स्थल का निरीक्षण करते हुए स्टेडियम निर्माण के सभी मानकों के अनुरूप प्राक्कलन तैयार कराया जाये। प्रेषित प्रस्ताव में स्टेडियम निर्माण के औचित्य या आवश्यकता, भूमि विवरणी, गूगल मैप आदि समाहित हो। मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थल का चयन करते समय इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाय कि चयनित स्थल महाविद्यालय या विद्यालय से निकट हो, ताकि स्टेडियम का पूर्ण रूप से उपयोग हो सके। मुख्यमंत्री ने पलामू के जीएलए कॉलेज मेदिनीनगर स्टेडियम पुनर्स्थापना, गोड्डा के पोड़ैयाहाट में इंडोर स्टेडियम निर्माण, मसलिया प्रखंड स्तरीय स्टेडियम, दुमका स्थित ए टीम ग्राउंड में स्टेडियम निर्माण, डुमरिया प्रखंड में प्रखंड स्तरीय स्टेडियम निर्माण, पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया प्रखंड के माइदाबांध, जमशेदपुर के सरजामदा और पटमदा के लावा में फुटबॉल स्टेडियम निर्माण, साहेबगंज में सिदो -कान्हू स्टेडियम के गैलरी विस्तार एवं अन्य कार्य तथा राजमहल में आउटडोर स्टेडियम निर्माण कार्य जल्द पूरा करने का निर्देश खेल विभाग को दिया है।

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जमशेदपुर : कांग्रेस नेता ज्योतिष यादव को बंगलुरु अधिवेशन में मिला सम्मान, जाने क्या कहा

जमशेदपुर : भारतीय राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के तत्वावधान में बंगलुरु में तीन दिवसीय अधिवेशन “बेहतर भारत की बुनियाद” कार्यक्रम में विशेष रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा आमंत्रित जमशेदपुर के रहने वाले पूर्व राष्ट्रीय सचिव ज्योतिष कुमार यादव को राष्ट्रीय अधिवेशन में संगठन सेवा के लिए पगड़ी, माला अंगवस्त्र तथा प्रशस्तिपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने पर अभिभूत होकर पूर्व राष्ट्रीय सचिव ज्योतिष कुमार यादव ने राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी एवं संगठन प्रभारी कृष्णा के प्रति आभार व्यक्त किया। ज्योतिष कुमार यादव ने कहा कि यह सारे बड़ों के आर्शीवाद और सबका प्यार का प्रतिफल है कि हमको यह सम्मान मिल पाया है।

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जमशेदपुर : पुलिस ने किया ढाबा में हुए मुठभेड़ का खुलासा, सात लोगों को किया गिरफ्तार, जाने पूरी खबर

जमशेदपुर : जमशेदपुर पुलिस ने एमजीएम थाना क्षेत्र के बेलाजुड़ी के पास ढाबे में पार्टी मना रहे अपराधियों को पकड़ने के बाद शुक्रवार को मीडिया के सामने सबको प्रस्तुत किया। कुल सात लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से पुलिस ने चार लोडेड पिस्तौल और बड़े पैमाने पर कारतूस बरामद किया है। बरामद सामान में स्विफ्ट डिजायर और फायर किया हुआ छह खोखा, शराब, गुटखा, सिगरेट समेत अन्य सामानों को जब्त किया गया है। पकड़े गये लोगों में जमशेदपुर के उलीडीह डिमना बस्ती साधु कॉलोनी निवासी साजन मिश्रा, कपाली निवासी शाहिद खान उर्फ शहजादा, मुखियाडांगा निवासी रोहित कुमार गुप्ता उर्फ सेठबाज, मुखियाडांगा निवासी शिवरंजन यादव उर्फ शिवपूजन, डिमना बस्ती निवासी तापस दास, तुरियाबेड़ा निवासी गोरांगो पुष्टि और पारडीह निवासी दिव्यांशु ओझा शामिल है। (जारी…)

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गिरफ्तार लोगों में से साजन मिश्रा के खिलाफ कई अपराधिक मुकदमा दायर है जबकि रोहित सेठबाज के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है। जमशेदपुर के एसएसपी प्रभात कुमार ने संवाददाता ने सम्मेलन कर बताया कि यह सूचना प्राप्त हुई थी कि अपराधी एमजीएम थाना क्षेत्र के कापा गोड़ा भोलेनाथ ढाबा के पीछे एक साथ जमे हुए है। इसके बाद उलीडीह, मानगो और घाटशिला की पुलिस की टीम ने घेराबंदी की। घेराबंदी के दौरान ही अपराधियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। एसएसपी ने बताया कि अपना बचाव के लिए पुलिस की ओर से भी फायरिंग की गयी। इसके बाद पुलिस ने चारो ओर से घेराबंदी की और पुलिस को भारी देख साजन मिश्रा भागने लगा, जिसके बाद पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी। (जारी…)

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अपराधी पुलिस की कार्रवाई से कमजोर हो गये। इसके बाद सारे लोग पकड़े जा सके। इस दौरान कुछ अपराधी वहां से भागने में सफल हो गये। इस मामले में एमजीएम थाना प्रभारी राजू के बयान पर एफआइआर दायर किया गया है। छापामारी दल में एमजीएम थाना प्रभारी राजू, मानगो थाना प्रभारी विनय कुमार, घाटशिला थाना प्रभारी विमल किडो, उलीडीह थाना प्रभारी सोनू कुमार, गालूडीह थाना प्रभारी सुखसागर सिंह, एमजीएम थाना के अवर निरीक्षक अमीउल एक्का, रविकांत परासर, उलीडीह के अवर निरीक्षक मुकेश शरण, मानगो थाना के अवर निरीक्षक शशि शेखर, घाटशिला थाना के अवर निरीक्षक गोविंद शाह, एमजीएम थाना के सहायक अवर निरीक्षक हिरू मिंज और पांचों थाना के पुलिस पदाधिकारी और सशस्त्र बल मौजूद थे।

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रविंदर सिंह रिंकू ने किया भैरव सिंह को सम्मानित

जमशेदपुर : भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रविंदर सिंह रिंकू ने आज राँची से जमशेदपुर पहुँचे हिंदूवादी नेता एवं समाजसेवक भैरव सिंह को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। रविंदर सिंह रिंकू ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि उनका कार्य समाज समाज को एक नई दिशा दिलाने में अहम कार्य कर रहा है और उनकी वजह से नौजवानों में हिंदुत्व की एक नई अलख जग रही है। (जारी…)

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गौरतलब हो कि भैरव सिंह आज राँची से जमशेदपुर पहुँचे और घाघीडीह जेल में कैद भाजपा नेता अभय सिंह से मिलने गए एवं सारी स्थिति का जायजा लिया जिसके बाद उन्होंने एक प्रेस वार्ता भी की जहाँ उन्होंने अभय सिंह पर एक के बाद एक मामला दर्ज होने पर सरकार और हिन्दुविरोधी तत्वों पर निशाना साधा।

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राँची के हिन्दूवादी नेता भैरव सिंह घाघीडीह जेल में अभय सिंह से मिले, कहा – तुष्टिकरण की राजनीति के कारण फँसाया गया

जमशेदपुर : भाजपा नेता अभय सिंह पिछले 3 महीने से ज्यादा समय से घाघीडीह कारावास में है, उनसे मिलने आज राँची के हिंदूवादी नेता और समाजसेवक भैरव सिंह पहुँचे और अभय सिंह से मुलाकात कर सारी स्थिति को जाना। जिसके बाद उन्होंने एक प्रेस वार्ता रखा और अभय सिंह को जमानत मिलने के बाद भी लगातार लग रहे प्रोडक्शन को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह एक तुष्टिकरण की राजनीति के तहत अभय सिंह को फँसाया गया है। विगत 9 अप्रैल को कदमा के शास्त्रीनगर में हुए हिंसा में अभय सिंह का कहीं नामो निशान नहीं था। जटाधारी मंदिर में माँस का टुकड़ा लटकाने वाले के विरोध करने पर इफ़्तार पार्टी से उठ कर आये लोगों ने प्रशासन और हिंदुओं पर हमला करते हैं लेकिन एक षड्यंत्र के तहत इसमें अभय सिंह जी को फंसाया गया। जबकि अभय सिंह की उपस्थिति कदमा के आस पास कहीं थी भी नही, न मोबाइल लोकेशन से, न किसी कैमरे के माध्यम से प्रशासन यह साबित कर पाई की अभय सिंह इसमें संलिप्त हैं। फिर भी उन्हें जेल में रखा गया, परन्तु प्रशासन ने वो मांस के टुकड़े लगाने वाले कि जांच नहीं की।(जारी…)

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भैरव सिंह ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद अभय सिंह पर कदमा मामले से पूर्व घटित जुगसलाई मामले में अज्ञात के तौर पर नाम डाल कर केस किया गया और प्रोडक्शन लगा दिया गया और जब उसमें भी जमानत मिल गयी तो उन्होंने बरसों पुराने किसी मामले में झूठा केस बना कर फिर से प्रोडक्शन लगा दिया गया। जिसमें धारा 307 का भी उल्लेख किया गया है लेकिन यह पूरी तरह से फर्जी केस है क्योंकि 307 की धारा लगाने के लिए सबसे अहम जो दस्तावेज होते है वही प्रशासन ने नहीं दिया, क्योंकि प्रशासन के पास वह दस्तावेज है ही नहीं। (जारी…)

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अभय सिंह को फंसाने में किसका हाथ है इस मामले में पूछे जाने पर भैरव सिंह ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली यह सरकार समझ चुकी है कि अभय सिंह इनकी हक़ीक़त जनता के सामने खोल कर रख देंगे जिससे इस सरकार को डर लगने लगा और उन्होंने हिन्दू विरोधी तत्वों के साथ मिलकर प्रशासनिक अधिकारों का गलत तरीकें से उपयोग करते हुए अभय सिंह को फंसाने के कार्य कर रही है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से सरकार से कहा है कि अभय सिंह आज न केवल जमशेदपुर अपितु पूरे झारखण्ड में हिंदुओं की आवाज़ बन चुके हैं और हिन्दू विरोधी तत्वों को यह गंवारा नहीं है और हमें डर है कि जनता की आवाज बनने वाले नेताओं पर जिस तरह से हमले हो रहें हैं कहीं अभय सिंह पर भी न हो जाये इसलिए उनके बाहर आने के बाद सरकार उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करें।


नए प्रोडक्शन पर अभय सिंह की जमानत याचिका खारिज होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह न्याययिक प्रक्रिया है और हमें न्यायालय पर भरोसा है कि न्यायालय सारे तत्वों को देखते हुए उन्हें जल्द से जल्द जमानत देगी। जब उनसे पूछा गया कि अभय सिंह पर फिर कोई केस बनाकर प्रोडक्शन लगा दिया गया तो आगे की रणनीति क्या होगी तो उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन हिन्दू विरोधी तत्वों के इशारे पर यदि फिर से इस तरह का कोई घृणित कार्य करती है तो हम चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य के हर जिले में एक विशाल आंदोलन खड़ा करेंगे।
अभय सिंह की रिहाई के बाद किस तरह से उनका स्वागत होगा इस बात पर उन्होंने बताया कि हम सभी जानते है कि अभय सिंह आज न सिर्फ जमशेदपुर के नेता है अपितु पूरे झारखण्ड में उनका नाम है तो उनके रिहाई के बाद एक विशाल आयोजन के माध्यम से उनका स्वागत किया जाएगा जिसे पूरा देश देखेगा।

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भाजपा का मायाजाल, लटक गया विधायक दल के नेता का चयन! फीडबैक के बाद घोषणा की राह ताकते रह गये रेस में शामिल नेता

गुरुवार को हुई बैठक में झारखंड बीजेपी विधायक दल के नेता पर फैसला नहीं हो पाया. पार्टी के ऑबजर्वर सह केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने सभी विधायकों से वन-टू-वन बातचीत की और अपनी रिपोर्ट लेकर दिल्ली दरबार चले गए. ऐसे में एक बार फिर झारखंड को नेता प्रतिपक्ष नहीं मिल पाया. नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर बाबूलाल मरांडी ने क्या कहा, इस रिपोर्ट में…

रांची: इस बात पर फिर मुहर लग गयी है कि भाजपा किसी मैटर पर कब और क्या फैसला लेगी, इसकी जानकारी भाजपा के अच्छे-अच्छे नेताओं तक को नहीं होती. इसकी झलक 27 जुलाई की शाम देखने को मिली. विधानसभा के मानसून सत्र से पहले इस बात की जोरशोर से चर्चा थी कि प्रदेश भाजपा अपने किसी नये नेता का नाम विधायक दल के नेता के रूप में घोषित कर देगी. इस रेस में सीपी सिंह, अनंत ओझा और बिरंची नारायण के नाम की चर्चा जोर शोर से चल रही थी. सभी की अलग-अलग वजहों से दावेदारी भी दिख रही थी. कोई अनुभव में आगे था तो कोई कास्ट सिस्टम के लिहाज से फिट बैठ रहा था.

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इसी बीच इस रेस में झामुमो से भाजपा में आए जेपी पटेल के नाम की भी चर्चा शुरू होने से एक अलग माहौल बन चुका था. ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ दिन पहले ही जेपी पटेल की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से दिल्ली में मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात के बाद रांची पहुंचे जेपी पटेल का चेहरा खिला-खिला दिख रहा था.इधर, 27 जुलाई की शाम हुई बैठक के दौरान मानसून सत्र को लेकर सदन के भीतर पार्टी के रूख पर रणनीति भी बनी. इसके बाद विधायक दल के नेता को लेकर बात शुरू हुई. बैठक में पार्टी के ऑबजर्वर सह केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के अलावा झारखंड संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, झारखंड प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी मौजूद थे. कुछ देर तक मंथन के बाद सभी नेता कमरे से बाहर निकल आए. इसके बाद ऑबजर्वर अश्विनी चौबे ने अकेले में एक-एक करके विधायकों को बुलाना शुरू किया.

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उन्होंने सभी विधायकों से प्रायोरिटी के आधार पर तीन नाम मांगे. खास बात है कि वह मुंहजबानी तीन नाम पूछ रहे थे और उसे नोट डाउन कर रहे थे. किसी से भी लिखित में नाम नहीं मांगे गये. इधर बंद कमरे के बाहर हलचल बढ़ी हुई थी. रेस में शामिल भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी सिंह, अनंत ओझा, बिरंची नारायण के अलावा अचानक चर्चा में आए जेपी पटेल घोषणा की राह ताक रहे थे. जाहिर है वक्त के साथ नेताओं की धड़कन भी तेज हो रही होगी. लेकिन देर रात तक कोई नतीजा नहीं निकला. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ऑबजर्वर अश्विनी चौबे बस यही कहकर निकल गये कि वह अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को देंगे. इसपर केंद्रीय नेतृत्व ही आगे कोई फैसला लेगा.

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इस बीच जेपी पटेल के नाम की चर्चा शुरू होने पर पार्टी के पुराने नेताओं में नाराजगी भी देखने को मिली. लेकिन कोई खुलकर जाहिर नहीं कर पा रहा था. अब फिर वही सवाल आ खड़ा हुआ है कि आखिर झारखंड भाजपा विधायक दल का नेता कौन होगा. इस सवाल पर एक तरह से बाबूलाल मरांडी ने विराम लगा दिया है. विधानसभा के मानसूत्र सत्र के पहले दिन प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह फैसला तो स्पीकर को लेना है. पार्टी तो नेता के नाम का चयन कर स्पीकर को जानकारी दे चुकी है. उनके इस कथन का मतलब समझा जा सकता है. भाजपा के सूत्रों का कहना है कि अगर एक-दो दिन के भीतर नाम की घोषणा नहीं हुई तो संभव है कि पूरा सत्र भी बगैर नेता प्रतिपक्ष के ही न निकल जाए. यह भी चर्चा है कि बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में कमेटी के गठन पर फाइनल मुहर लगने के दौरान ही नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा हो सकती है.

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दरअसल, बाबूलाल मरांडी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान मिलने के साथ ही यह साफ हो गया था कि किसी दूसरे को विधायक दल का नेता बनाया जाएगा. क्योंकि सदन के भीतर बाबूलाल मरांडी को विधायक दल की मान्यता नहीं मिली हुई. पहली बार झारखंड विधानसभा के इतिहास में सदन की कार्यवाही पिछले साढ़े तीन वर्षों से बगैर नेता प्रतिपक्ष के ही चल रही है. बाबूलाल मरांडी दलबदल का मामला फेस कर रहे हैं. उनके खिलाफ स्पीकर ट्रिब्यूनल का फैसला लंबित है. यह मामला हाईकोर्ट में भी पीआईएल के जरिए आ चुका है. लेकिन नतीजा नहीं निकल पाया है. फिलहाल कागजी तौर पर बाबूलाल मरांडी ही भाजपा विधायक दल के नेता हैं. अब देखना है कि पार्टी इस सस्पेंस को कब और कैसे खत्म करती है.

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सावन में उफान पर रहती थीं झारखंड की ये नदियां, आज क्यों पड़ी है सूखी, जानें वजह

गर्मी में नदियों का सूखना तो आम बात है, लेकिन आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि झारखंड में कई ऐसी नदियां हैं, जो बरसात में भी सूखी पड़ी हैं. सावन में जो नदियां उफान पर रहती थीं, वह आज पक्षियों के प्यास बुझाने के लायक भी नहीं बची है.

सावन और मानसून के दौरान भी लोगों को पानी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

पहले कभी नहीं हुआ ऐसा

गर्मी के वक्त नदियों का पानी घटने के कारण उनमें प्रवाह कम होने की प्रवृत्ति देखी जाती थी, लेकिन बरसात के दिनों में ऐसा कभी नहीं देखा गया था. वह भी खासतौर पर तब, जब सावन का महीना हो और नदियां सूखी पड़ी हो, ऐसा कभी नहीं हुआ. झारखंड की नदियों का इस कदर सूख जाना, आने वाले वर्षों में खतरे का संकेत है. झारखंड की प्रमुख नदियां भी अब नाले में तब्दील हो रही है. प्रकृति प्रेमी की ओर से भी नदियों का बचाने का आवाहन किया जा रहा है.

क्यों बरसात में भी सूखी पड़ी हैं झारखंड की नदियां

मानसून की बेरूखी और नदियों की स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मानसून के दौरान भी अच्छी बारिश नहीं होने और सावन के महीने में बारिश की वजाय तीखी धूप रहने से नदियों की स्थिति भयावह है. इसके अलावा भी कई कारक हैं, जो नदियों के सूखने की वजह बड़ी है. आइए जानते हैं कि आखिर क्या कारण है कि बरसात में भी नदियों में पानी नहीं है-

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खेती के तरीके में बदलाव

बताया जाता है कि पिछले कुछ सालों में खेती के तरीके में काफी बदलाव आया है. जिसके कारण राज्य में पहले भू-जल लगभग 60 से 70 फीट पर था, लेकिन अब उन इलाकों में 200 फीट से भी अधिक गहरा बोरिंग करना पड़ रहा है. भू-जल स्तर कम होने की वजह से नदियों का जलचक्र भी प्रभावित हुआ है. यहां जितनी बारिश हो रही है वह भूमिगत जल को रिचार्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं है.

नदियों से बालू का अंधाधुंध खनन

नदियों से अंधाधुंध बालू निकाला जा रहा है. इस वजह से नदी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हो गया. इसके अलावा भूमिगत जलस्तर कम हो रहा है. पर्यावरणविद् प्रोफेसर विमल किशोर सिंह ने बताया है कि भू-जल का दोहन बढ़ता ही जा रहा है और इसे रिचार्ज करने की व्यवस्था नहीं हो रही है. प्रशासन को इस तरफ भी प्रयास करना चाहिए. पौधरोपण और स्टॉपडेम बनाकर नदी को जीवित रखने के प्रयास करने की आवश्यकता है.

बालू ने नदी की वाटर कैपेसिटी को किया कम

विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में नदियों से अवैज्ञानिक तरीके से बालू का खनन किया गया है. नदियों से बेहिसाब बालू के उठाव को कारण नदी में वाटर कैपेसिटी को कम हौो गई है. बालू के उठाव से नदियों के अधिकांश भागों में मिट्टी निकल आयी है और बालू नहीं रहने से वाटर रीचार्ज की क्षमता घट गयी. पानी की कमी से नदी के जलीय जीव-जंतु भी नष्ट हो गये हैं. साथ नदी का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ा है.झमरिया नदी ठाकुर गंगटी

नदी की क्षमता घटने से नष्ट होंगे अन्य जलस्रोत

जल संसाधन विभाग के शोध के अनुसार, साल भर में होने वाली कुल बारिश का कम से कम 31 प्रतिशत पानी धरती के भीतर जमा होना चाहिए, तभी संबंधित क्षेत्र की नदियों, जल स्रोतों आदि में पर्याप्त पानी रहेगा. वहीं बारिश नहीं होने के कारण नदी के नीचे भी पानी सूख रहे हैं. मानसून में भी अगर नदियों में निरंतर पानी का बहाव नहीं रहा, तो आसपास के तालाब, कुआं सहित अन्य जलस्रोत धीरे-धीरे नष्ट हो जायेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों में बालू की वजह से बारिश के बाद जलस्तर लंबे समय तक बना रहता है, जिससे आसपास के जलस्रोत को भी पानी मिलता है. नदियों के सूखने से सिंचाई, पेयजल व अन्य जलापूर्ति का भी काम प्रभावित होने लगा है.अजय नदी

झारखंड की प्रमुख नदियों में पतली धार

झारखंड की प्रमुख नदियां जैसे- स्वर्णरेखा, दामोदर, मयुराक्षी, कोयल नदी, अजय नदी, डढ़वा नदी, पतरो नदी, चांदन नदी, मोतिहारा, सिद्धेश्वरी, पुसारो सहित आदि जो पानी के मामले में समृद्ध माना जाता है, लेकिन अब यह नदियां भी सूख रही है. बड़ी-बड़ी नदियों में भी केवल पतली धार दिख रही है. वह भी बारिश होने के चंद घंटे बाद या दूसरे दिन तक दिखती है, नहीं तो रेत ही रेत या मिट्टी ही नजर आती है. जलस्तर कम रहने की वजह से पेयजलापूर्ति की योजनाओं में भी कई बार दिक्कतें आ चुकी हैं. अजय नदी के नवाडीह घाट से इस मानसून में भी चैनल काटकर जलापूर्ति हो रही है. बरसात के मौसम में नदी का जलश्रोत कम रहने से किसानों के साथ साथ ग्रामीणों को भी चिंता सताने लगी है.बड़ी बड़ी नदियों में भी पानी की पतली धार

  • देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और अन्य जिलों की जिन नदियों का ऊपरी सतह का जलस्तर हमेशा दो से तीन फीट पूरे नदी में रहता था और पानी का बहाव भी रहता था. चांदन नदी में एक बूंद पानी तक नहीं है. अजय नदी में तो इस बरसात में पानी के अभाव में बड़े-बड़े घास उग आये हैं.
  • गोड्डा जिले में छोटी-बड़ी 12 नदियां हैं. प्राय: सभी नदियां बरसाती है. सावन के मौसम में जुलाई महीने में गोड्डा की नदियां उफान पर रहा करती थी लेकिन इस साल मानसून के बेरूखी के कारण नदियों में पक्षियों के प्यास बुझाने लायक ही पानी है.
  • गेरुआ नदी बसंतराय से होकर महागमा होते हुए कहलगांव में गंगा की सहायक नदी के रूप में मिलती है. इस नदी से झारखंड और बिहार के किसानों को खेती में सिंचाई की सुविधा मिलती थी, आज इस नदी में भी नाम मात्र का ही पानी है.
  • सुंदर नदी की बात करें तो पथरगामा व बसंतराय से बहकर गेरुआ नदी में मिलती है. यह नदी भी पानी के लिए तरस रहा है.
  • मेहरमा प्रखंड की ढोलिया नदी राजमहल पहाड़ियों से निकलकर ठाकुर गंगटी व मेहरमा होते हुए गेरुआ नदी में जाकर मिलती है. यह नदी जिले की सबसे गहरी नदी के रूप में जाना जाता है. इस नदी में भी नाम मात्र का ही पानी है.

नदियों में उग आए घास

  • ठाकुर गंगटी की झमरिया नदी भी बरसात में आक्रामक स्थिति में रहने वाली नदी की तरह है, मगर अभी नदी में पानी का बहाव गर्मी के मौसम की तरह ही दिख रहा है.
  • वहीं बसंतराय प्रखंड के अलावा महागामा में बहने वाली ऐंचा नदी आज मैदानी भूभाग में तब्दील है. कुल मिलाकर देखा जाये तो गोड्डा जिले की 12 नदियों में एकाध को छोड़ दें तो शेष सभी नदियां सूख गयी हैं.
  • अमूमन दुमका जिले में जुलाई महीने में सभी छोटी बड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ रहता है. इधर एक पखवारे से भी ज्यादा समय तक भारी बारिश नहीं होने से नदियों का जलस्तर घट गया है.
  • रानीश्वर के इलाके में पटवन का एक बड़ा साधन नदी है. उससे संबंधित नहर है. नदी का जलश्रोत कम रहने से नदी से पंप लगाकर भी किसान खेती नहीं कर पा रहे है.
  • सिद्धेश्वरी नदी के भरोसे नदी किनारे दर्जनों गांवों के लोग निर्भर है. सिंचाई के लिए पानी का उपयोग करने के साथ साथ मवेशियों को पानी पिलाने, स्नान करने तथा कपड़ा साफ करने का काम आता है. ग्रामीणों को यह चिंता सता रही है कि बरसात के मौसम में नदी की यही स्थिति है तो ठंड व गर्मी के दिनों पानी के लिए हाहाकार मच जायेगा.
  • देवघर में महेशपुर प्रखंड के प्रमुख नदी बांसलोई नदी और पगला नदी सूख गयी है. प्रखंड की दो प्रमुख नदियां बांसलोई नदी और पगला नदी है. इन दिनों बांसलोई नदी नाले का रूप ले चुकी है. नदी में घना घास और पौधा उग चुका है. बांसलोई और पगला नदी में जगह-जगह जलजमाव भी हो गया है.

बांसलोई नदी

मानसून की बेरूखी के कारण नदियां जलविहीन

बरसात में भी नदियों के सूखे रहने का सबसे बड़ा कारण है झारखंड में मानसून का कमजोर होना. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में अब भी 49 प्रतिशत कम बारिश हुई है. जबकि, झारखंड में मानसून आये करीब एक माह हो गया है. इसके बावजूद अब सामान्य से आधा के करीब ही बारिश हो पायी है. एक जून से 28 जुलाई तक 245.8 मिमी बारिश हुई है. जबकि, इस समय सामान्य बारिश रिकॉर्ड 478.3 मिमी है.

अब तक चतरा में सबसे कम और साहिबगंज में सबसे अधिक बारिश

झारखंड के 24 जिलों में चतरा जिला में सबसे कम बारिश हुई है. यहां अब भी 79 प्रतिशत बारिश कम हुई है. उसके बाद जामताड़ा है, जहां 70 फीसदी कम बारिश हुई है. फिर गिडिडीह और धनबाद जहां 68 फीसदी कम बारिश हुई है. फिर लोहरदगा, जहां 64 प्रतिशत और लातेहार जहां अब तक 62 प्रतिशत कम बारिश हुई. इसी तरह राज्य के लगभग सभी जिलों में बारिश का प्रतिशत काफी कम है. जबकि, सबसे अधिक बारिश साहिबगंज में हुई है. हालांकि, वह भी सामान्य से कम ही है. साहिबगंज में सामान्य से 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है. आज को भी कई जगहों पर रुक-रुक कर बारिश हुई है. उम्मीद की जा रही है कि झारखंड में मानसून के दोबारा सक्रिय होने के बाद बारिश की कमी दूर हो जाएगी और राज्य की नदियों में भी पानी जमा हो पाएगा. हालांकि, नदियों के सूखने के पीछे जो मानवीय कारक हैं, जैसे अंधाधुध खनन, बालू का अवैज्ञानिक तरीके से उठाव, खेती की तकनीक में बदलाव उसे हम मानव को ही सुधारना होगा.

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